Friday, December 18, 2009

श्रीक्षेत्र मालेगावं यात्रा ,चित्रों की जुबानी















Wednesday, December 16, 2009

तेलंगाना विरोधी समाचार

चेनलों का प्रसारण बंद

निज़ामाबाद ,पृथक तेलंगाना कों लेकर आंध्र प्रदेश का आन्ध्र एवम रायल सीमा क्षेत्र जल रहा है,वहीँ कुछ निजी टी वी चेनलों ने तेरास प्रमुख के।सी.आर की छवि ख़राब करने सम्बंधित खबरे प्रसारित कर रहे हैं ,जिसे तेलंगानावासी कदापि बर्दास्त नहीं करें गे. यह बात बताते हुवे निज़ामाबाद केबल आपरेटर यूनियन के अध्यक्ष एवम तेलगु साप्ताहिक निज़ामाबाद मिरर के संपादक कुलदीप सहनी ने कही .उन्होंने आगे कहा की इसी कों देखते हुवे बीती रात बारह बजे से तेलगु के कुछ चेनलों का प्रसारण बंद कर दिया गया है.श्री सहनी ने आगे कहा की सभी चेनलो के संचालको कों कह दिया गया है कि वे यदि इसे बंद नहीं करते हैं तो आज रात से तेलंगाना के सभी दस जिलों में प्रसारण बंद कर दिए जायेंगे.उन्होने आगे कहा कि काल कडप्पा के सांसद एवम साक्षी तेलगु अखबार व टी वी चेनल के मालिक जगन मोहन रेड्डी ने सांसद भवन में जो एकीकृत आन्ध्र प्रदेश कि बात कि है वह बिलकुल गलत है. हम सब तेलंगानावासी उसका पुरजोर विरोध करते हैं .श्री सहनी का कहना था कि जगन इस लिए बोखलाए हैं कि उनका काफी पैसा तेलंगन क्षेत्र में लगा हुवा है. विजयवाड़ा के सांसद लगड़पाटी राजगोपाल के अनसन पर बैठने के बारे में बोलते हुवे उनका कहना था कि वे नाटक कर रहे हैं, चेनल वाले उनके बारे में क्यों नहीं बताते ,उनके चरित्र के बारे में तो चेनल वाले कुछ नहीं बता रहे हैं.कितना धवल चरित्र है उनका,यह सभी जानते हैं.श्री सहनी का कहना था कि अब लोग साक्षी अखबार का भी विरोध करने का मन बना रहे हैं,जिसके लिए उन्हें बता भी दिया गया है.इस बीच आज दिनभर निज़ामाबाद शहर में प्रजा राज्यम पार्टी प्रमुख सिने अभिनेता चिरंजीव के फिल्मों का बहिष्कार करते हुवे उनके पोस्टरों कों फाड़ते हुवे तोड़ फोड़ की.जिन तेलगु चेनलों कों बंद किया गया है उनमें मुख्य हैं साक्षी टी.वी.,टी वी -9 ,एन टी.वी ,,स्टूडियो एन,महा टी.वी.एवम आई न्यूज आदि.
प्रदीप श्रीवास्तव
(मित्रों आप भी समाचार भेज सकते हैं -संपादक)
mail :apkinews@gmail.com

Wednesday, December 9, 2009

पृथक तेलंगाना राज्य के गठन

की प्रक्रिया शुरु होगी:चिदंबरम


अलग तेलंगाना राज्य को लेकर आंध्र प्रदेश में चल रहे आंदोलन पर दिल्ली में हुई कई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु की जाएगी.
केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने देर रात पत्रकारों को बताया कि इसके लिए राज्य विधानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा.हालांकि उन्होंने इसकी कोई तारीख़ नहीं बताई है.
इस घोषणा के बाद से हैदराबाद में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेताओं ने इसे अपनी जीत बताया है.उधर हैदराबाद में पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन कर रहे टीआरएस के चंद्रशेखर राव को इंजेक्शन के ज़रिए कुछ तरल पदार्थ दिया गया है जिसके बाद उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ है.चंद्रशेखर राव के बेटे के तारक रामाराव ने कहा है कि अब चंद्रशेखर राव अपना अनशन समाप्त कर देंगे.राज्य विघानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश कियाजाएगा। पी चिदंबरमप्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने रात कोई साढ़े ग्यारह बजे पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने कहा, "इसके लिए राज्य विघानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा."
गृहमंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैया से कहा गया है कि 29 नवंबर, 2009 के बाद तेंलंगाना राज्य के आंदोलनकरियों और छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज सभी मुक़दमे वापस ले लिए जाएं.
उन्होंने कहा, "हम चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित हैं और हम सभी आंदोलनकारियों विशेषकर छात्रों से अनुरोध करते हैं कि वे अपना आंदोलन वापस ले लें."
इस सवाल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया कि यह प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा.
उनका कहना था कि प्रधानमंत्री देश में नहीं थे और उनके लौटने के बाद बैठकें हुईं और उसमें यह निर्णय लिया गया.
ख़ुशी की लहर
गृहमंत्री पी चिदंबरम की घोषणा के बाद हैदराबाद में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.इस घोषणा को टीआरएस के नेताओं ने अपनी जीत बताया है.हालांकि अभी राज्य के लोगों को मुख्यमंत्री की ओर से किसी तरह की औपचारिक घोषणा का भी इंतज़ार है.
राज्य के मुख्यमंत्री के रोसैया दिल्ली से विशेष विमान से हैदराबाद के लिए रवाना हुए हैं.
संभावना है कि वे ख़ुद निज़ाम अस्पताल पहुँचकर टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव से मिलेंगे और उनका अनशन ख़त्म करवाएँगे.अभी यह घोषणा नहीं की गई है कि राज्य विधानसभा में तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया कब शुरु की जाएगी. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इसकी भी घोषणा कर सकते हैं.
केंद्र सरकार ने यह प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा ऐसे समय में की है जब टीआएएस की ओर से गुरुवार को छात्रों की बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की जा रही थी.
टीआरएस की ओर से कहा गया था कि सभी विश्वविद्यालयों से एक लाख छात्र विधानसभा की ओर मार्च करेंगे.लेकिन इस घोषणा के बाद इस रैली को विजय रैली में तब्दील करने की घोषणा की गई है.
बैठकों का दौरप्रधानमंत्री के दिल्ली लौटने के साथ ही बैठकों को लंबा सिलसिला चला.
मुख्यमंत्री के रोसैया को पहले ही दिल्ली बुलवा लिया गया था.तेलंगाना के मसले पर कांग्रेस कोर ग्रुप की दो बैठकें हुई जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की.इस बीच मुख्यमंत्री के रोसैया ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर ली थी.कांग्रेस कोर ग्रुप की दूसरी बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम, रक्षामंत्री एके एंटनी, विधि मंत्री वीरप्पा मोइली भी सोनिया गांधी से मिलने उनके निवास पहुँचे.बैठकों के इन दौर के बाद गृहमंत्री ने अलग राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की

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बारूद के ढेर पर बैठा तेलंगाना

के.सी.आर.की हालत बिगड़ी, आन्दोलन जारी
लगभग ४६ साल बाद एक बार फिर से आंध्र प्रदेश में पृथक राज्य तेलंगन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस बार के इस आन्दोलन में अब तक ४० से अधिक लोंगों ने अपनी जाने तक दे दी है. इसके अलावा यह आन्दोलन जंगल में लगे आग की तरह पूरे तेलंगन में फैल चुकी है. जिसकी लपट में केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं अपितु केंद्र सरकार की भी चूल्हें हिलने लगी है. पिछले १३ दिनों से तेलंगाना राष्ट्र समिति के मुखिया के चन्द्र शेखर राव आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनकी बिगड़ती हालत कों देखते हुए उन्हें हेदराबाद के निम्स (निजाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस ) भारती कराया गया है. जहाँ पर उनकी हालत गंभीर (इन पंक्तियों के लिखने तक )बनी हुई है.उधर उनकी बिगडती हालत कों देखते हुए उनकी पुत्री कविता ने बुधवार (९ दिसंबर ०९ )की सुबह निम्स जाकर अपने पिता से उनकी तबियत कों देखते अनसन ख़त्म करने की अपील की है. कविता ने यहाँ तक कह दिया है की यदि वे अनसन नहीं तोड़ते हैं तो वह भी भूख हड़ताल पर बैठ जाएँगी .इस बीच खबर मिली है की श्री राव धरम पत्नी की भी भूख से हालत बिगड़ती जा रही है उन्होंने भी पिछले कई दिनों से अपने मुंह में अन्न का एक भी दाना नहीं डाला है राजधानी हेदराबाद से मिली खबर के मुताबिक .मुख्य मंत्री के.रोशय्या यू पी ए अध्यक्ष सोनिया से मिलाने आज दिल्ली पहुँच गए हैं. जहाँ पर श्रीमती गाँधी कों उनके ६३ वें जनम दिन पर उन्हें मुबारक वाद दें गए ,वहीँ इस बात के भी कयास लगाये जारहे है की उनसे तेलंगाना मुद्दे पर भी बात-चीत कर कोई ठोस निर्णय लेने का भी आग्रह करेंगे. इधर पूरे तेलंगन क्षेत्र ,जिसमे आंध्र प्रदेश के दस जिलों (निज़ामाबाद,आदिलाबाद ,करीमनगर,वारंगल,मेदंक ,नलगोंडा,महबूबनगर ,रंगारेड्डी खम्मम एवम प्रदेश की राजधानी हेदराबाद शामिल है.) में पृथक तेलंगाना राज्य की मांग जोर पकड़ती जा रही है. अब तक चालीस से अधिक तेलंगाना समर्थको ने अपनी जानें १३ दिनों के भीतर दे चुके हैं,जिनमें छात्र ,पुलिसकर्मी,किसानों के साथ-साथ लड़कियां भी शामिल हैं इसके अलावा आगजनी,तोड़ फोड़ ,बंद रास्ता रोको का सिलसिला जारी ही है.तेलंगाना के जिलों में पिछले पंद्रह दिनों से स्कुल व कालेज तो बंद ही चल रहे हैं. जिससे पढाई का कफी नुकसान बच्चों कों उठाना पढ़ रहा है. क्या है तेलंगाना मुद्दा?बात सन १९४६ की है ,आन्ध्र प्रदेश के संसथापक पोट्टी श्रीरामलू ने तेलगु बोली बोलने वालों के लिए अपना बलिदान दे दिया था,तब भाषावार प्रान्त की रचना के लिए फज़ल अली कमीशन कों बनाया गया था.उनदिनों तेलगु भाषी प्रान्त मद्रास (अब चेन्नई) प्रान्त और निजाम हैदराबाद की रियासत में रहते थे ,मराठवाडा एवम तेलंगाना उस सियासत के हिस्सा थे. तब मद्रास प्रान्त के मुख्यमंत्री तेलगु भाषी टी.प्रकाशम् हुआ करते थे .उन्होंने जिस आंध्र प्रदेश की बुनियाद डाली थी ,आज वही प्रदेश टूट की कगार पर तीसरी बार खड़ा है.उसका सबसे बड़ा कारण है भाषा ,जो एक जज्बाती मामला है.पर प्रश्न है कि आज तक तेलंगाना के विकास के लिए किसी ने कुछ नहीं किया चाहे वह टी.प्रकाशम् रहे हों या फिर नीलम संजीव रेड्डी ,पी.वी.नर्सिमाराव ,एन, टी रमाराव, नाराचंद्र बाबु रहे हों या फिर वाई एस राजशेखर रेड्डी ,या अब के रोश्या . तेलंगाना के अंतर्गत २९४ विधान सभा क्षेत्र आते हैं.जिनकी भाषा उर्दू कही जाती है.१९४६ में कामरेड वासुपुन्येया कि अगुवाई में कमुनिस्ट ने प्रथक तेलंगन कि मुहीम शुरू कि थी.उस समय इस आन्दोलन का उद्देश्य था भूमिहीनों कों भूपति बनाना.६ सालों तक यह आन्दोलन चला,लेकिन बाद में इसकी कमर टूट गई.जो बाद में नक्सलवाद में तब्दील हो गई. जिसकी कमान आज भी नक्सलियों के ही हाथ में है.उसके बाद भी पृथक तेलंगाना कों लेकर कई बार आन्दोलन चले,लेकी कोई सफलता नहीं मिली .बात केवल जनता कों रिझाने व राजनितिक रोटियां सकने तक ही रहा.सभी पार्टियों ने पृथक तेलंगाना मुद्दे कों केवल मोहरा ही बनाया है.कभी किसी पार्टी ने तेलंगाना वासियों कि भावनावों कों समझाने की कोशिश ही नहीं की, जो पार्टियाँ पहले विरोध करती थी अब वे ही समर्थन में खड़ी हैं,जो समर्थन की बात करती थी वे ही अब उसका खिलाफत कर रही हैं. एक समय तेलंगाना का समर्थन पी वी नर्सिघा राव करते थे ,लेकिन अपने कार्यकाल में उन्होंने कभी भी पृथक तेलंगाना के लिए कुछ नहीं किया.उन्होंने भी तेलंगाना कें पर तेलंगानावाशियों कों बरगलाया ही. यहाँ पर यह भी बताना जरुरी है कि भाषाई अधर पर बनने वाला आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य है, जबकि पंडित नेहरू भासी अधर पर राज्य बनने के पक्क्ष में थे ही नहीं.तब पोट्टी श्रीरामलू कि अगुवाई में आंध्र के लोग मरने मरने पर उतारू हो गए थे,जिसके लिए श्री रामलू कों अनसन के दौरान अपनी जान देनी पड़ी थी .जिससे मजबूर होकर पंडित नेहरू जी कों मज़बूरी में भासी अधर पर आन्ध्र परदेश राज्य कि मंजूरी देनी पड़ी थी.शायद आज एक बार फिर से उसी की पुनरावृति हो रही है कि चन्द्र शेखर राव कों भूख हड़ताल पर बैठन पड़ा है.उच्च ही लोगों कों याद होगा कि १९६८ में एक बार फिर तेलंगाना राज्य के लिए आन्दोलन चला था, बताते हैं कि उस समय लगभग चार सो से अधिक लोगों कों अपनी जान गवानी पड़ी थी.तब से अब तक तेलंगाना का मुद्दा अधर में ही पड़ा है. क्योंकि उस समय वरिस्थ कांग्रेसी नेता डॉ चेन्ना रेड्डी और ब्रह्मा नन्द रेड्डी कि अन्दुरुनी लड़ाई के कारण यह मामला एक बार फिर से लटक गया तो आज तक लटका ही है.यह भी जानना जरुरी है कि १९८८ के चुनाव में भारतीय जनता पारी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पृथक तेलंगाना राज्य का वादा किया था,लेकिन बाबु के सियासी मजबूरियों या फिर उनके खोफ के चलते तेलंगाना रूपि बारूद कों तीली नहीं दिखा सके . आज तेलंगन बारूद के ढेर पर बैठा है .जिसे तीली दिखाई जाती है तो भी विस्फोट होगा,नहीं दिखाई गई तो भी विस्फोट होना ही है. जरुरत है सयंम व विवेक से निर्णय लेने की. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पूरे तेलंगन में आन्दोलन जारी है, दस दिसंबर कों चलो हेदराबाद का आह्वान किया गया है,जिसे विफल करने की कोशिश राज्य सरकार कर रही है.प्रसन यह है की यदि कों निर्णय शीघ्र नहीं लिया जाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है.

Tuesday, December 1, 2009

पोशेट्टी समेत पचास नेता गिरफ्तार
निज़ामाबाद । बुधवार की सुबह जिलाधीश कार्यालय के बाहर प्रथक तेलंगाना की मांग कर रहे तेरास के प्रदेश महा सचिव ऐ एस पोशेट्टी समेत पचास से अधिक नेताओं व् कार्यकर्ताओं को गिरिफ्तर कर पुलिस स्टेसन भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए नेताओं में श्री पोशेट्टी समेत वि .प्रभाकर ,रवि चन्द,डॉ सत्य नारायण , लक्ष्मण राव,अनिल सिगल आदि। जिन्हें सहर से बीस किलोमीटर दूर माकलुर पुलिस स्टेसन में रखा गया है। पुलिस स्टेसन से ही आप की न्यूज से बात करते हुवे श्री पोशेट्टी ने कहा कि तेलंगन राज्य कि मांग करने वालों के साथ राज्य सरकार ग़लत व्यव्हार कर रही है। अब हम लोग इसी पुलिस स्टेसन मे ही भूख हड़ताल सुरु कर रहे हैं। इसबीच सहर के थ्री टाउन पुलिस स्टेसन में रखे गए तेरस शहर महा सचिव साईं कुमार ने बताया कि उन्हें पोतंगल राम कुमार ,निरंजन सिंह ,भास्कर,एवं प्रकाश गौड़ के साथ जिलाधीश कार्यालय से गिरफ्तार किया गया है.जो पुलिस जय्दाती का नमूना है.उन्हों ने आगे कहा कि अब हम लोग यहीं पर भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं। ख़बर लिखे जाने तक पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां जारी थीं।

क्या सोचती हैं औरतें!
चण्डीदत्त शुक्ल
कौन-सा पुरुष होगा, जो ना जानना चाहे—स्त्रियां उसके बारे में क्या सोचती हैं? ये पता करने का मौक़ा जयपुर में मिला, तो मैं भी छह घंटे सफ़र कर दिल्ली से वहां पहुंच ही गया। मौक़ा था—टूम-10 संस्था की ओर से सात महिला कलाकारों की संयुक्त प्रदर्शनी के आयोजन का. और विषय—द मेल!
मर्द, मरदूद, साथी, प्रेमी, पति, पिता, भाई और शोषक...पुरुष के कितने ही चेहरे देखे हैं स्त्रियों ने. कौन-सी कलाकार के मन में पुरुष की कौन-सी शक्ल बसी है, ये देखने की (परखने की नहीं...क्योंकि उतनी अक्ल मुझमें नहीं है!) लालसा ही वहां तक खींच ले गई.
जयपुरवालों का बड़ा कल्चरल सेंटर है जवाहर कला केंद्र. हमेशा की तरह अंदर जाते ही नज़र आए कॉफी हाउस में बैठे कुछ कहते-कुछ सुनते-कुछ खाते-पीते लोग.
सुकृति आर्ट गैलरी में कलाकारों की कृतियां डिस्प्ले की गई थीं. उद्घाटन की रस्म भंवरी देवी ने अदा की. पर ये रस्म अदायगी नहीं थी. पुरुष को समझने की कोशिश करते चित्रों की मुंहदिखाई की रस्म भंवरी से बेहतर कौन निभाता. वैसे भी, उन्होंने पुरुष की सत्ता को जिस क़दर महसूस किया है, शायद ही किसी और ने किया हो पर अफ़सोस...अगले दिन मीडिया ने उनका परिचय कुछ यूं दिया—फ़िल्म बवंडर से चर्चा में आईं भंवरी…!
इस मौक़े पर चर्चित संस्कृतिकर्मी हरीश करमचंदानी ने 15 साल पुरानी कविता सुनाई—मशाल उसके हाथ में. भंवरी देवी के संघर्ष की शब्द-यात्रा.
एक्जिबिशन में शामिल कलाकारों में से सरन दिल्ली की हैं. वनस्थली से उन्होंने फाइन आटर्स की पढ़ाई की है. उनका पुरुष फूल और कैक्टस के बीच नज़र आता है. कांटे और खुशबू के साथ आदमी का चेहरा. वैसे, लगता है—सरन के लिए पुरुष साथी ही है. रोमन शैली का ये मर्द शरीर से तो मज़बूत है पर उसका चेहरा कमनीय है, जैसे—चित्रकार बता रही हों...वो बाहर से कठोर है और अंदर से कोमल।
सुनीता एक्टिविस्ट हैं...स्त्री विमर्श के व्यावहारिक और ज़रूरी पक्ष की लड़ाई लड़ती रही हैं. वो राजस्थान की ही हैं. सुनीता ने स्केचेज़ बनाए हैं. उनकी कृतियों में पुरुष की तस्वीर अर्धनारीश्वर जैसी है...शायद आदमी के अंदर एक औरत तलाशने की कोशिश. लगता है—वो पुरुष को सहयोगी और हिस्सेदार समझती हैं.
संतोष मित्तल के चित्र ख़ूबसूरत हैं, फ़िगरेटिव हैं, इसलिए जल्दी ही समझ में आ जाते हैं. कलरफुल हैं पर चौंकाते हैं. उनके ड्रीम मैन हैं—अमिताभ बच्चन. इस बात पर बहस हो सकती है कि किसी स्त्री के लिए अमिताभ पसंदीदा या प्रभावित करने वाले पुरुष क्यों नहीं हो सकते! पर सवाल थोड़ा अलग है—संतोष के चित्रों में तो फ़िल्मी अमिताभ की देह भाषा प्रमुख है, उनका अंदाज़ चित्रित किया गया है. जवानी से अधेड़ और फिर बूढ़े होते अमिताभ. ख़ैर, पसंद अपनी-अपनी!
एक और कलाकार हैं सीता. वो राजस्थान के ही सीमांत ज़िले श्री गंगानगर की हैं. कलाकारी की कोई फॉर्मल एजुकेशन नहीं ली. पति भी कलाकार हैं, तो घर में रंगों से दोस्ती का मौक़ा अच्छा मिला होगा. उनकी एक पेंटिंग में साधारण कपड़े पहने पुरुष दिखता है. पर बात यहीं खत्म नहीं होती. वो दस सिर वाला पुरुष है...क्या रावण! एक और कृति में सीता ने उलटे मटके पर पुरुष की ऐसी शक्ल उकेरी है, जैसे—किसान खेतों में पक्षियों को डराने के लिए बज़ूका बनाते हैं. तो क्या इसे विद्रोह और नाराज़गी की अभिव्यक्ति मानें सीता?
मंजू हनुमानगढ़ की हैं. पिछले 20 साल से बच्चों को पढ़ाती-लिखाती रही हैं, यानी पेशे से शिक्षिका हैं. उनकी कृतियों में प्रतीकात्मकता असरदार तरीक़े से मौजूद है. तरह-तरह की मूंछों के बीच नाचता घाघरा और दहलीज़ पर रखे स्त्री के क़दम...ऐसी पेंटिंग्स बताती हैं...अब और क़ैद मंज़ूर नहीं.
ज्योति व्यास शिलॉन्ग में पढ़ी-लिखी हैं पर रहने वाली जोधपुर की हैं. प्रदर्शनी में उनके छायाचित्र डिस्प्ले किए गए हैं. चूड़ियां, गाढ़े अंधेरे के बीच जलता दीया और बंद दरवाज़े के सामने इकट्ठे तोते. ये एक बैलेंसिग एप्रोच है पर थोड़ी खीझ के साथ.
निधि इन सबमें सबसे कम उम्र कलाकार हैं. फ़िल्में बनाती हैं, स्कल्पचर और पेंटिंग्स भी. ख़ूबसूरत कविताएं लिखती हैं और ब्लॉगर भी हैं.
निधि पुरुष के उलझाव बयां करती हैं और इस दौरान उसके हिंसक होते जाने की प्रक्रिया भी. समाज के डर से सच स्वीकार करने की ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकार करने वाले पुरुष का चेहरा अब सबके सामने है. जहां चेहरा नहीं, वहां उसके तेवर बताती देह.
एक चित्र में अख़बार को रजाई की तरह इस्तेमाल कर उसमें छिपे हुए पुरुष के पैर बाहर हैं...जैसे कह रहे हों, मैंने बनावट की बुनावट में खुद को छिपा रखा है, फिर भी चाहता हूं—मेरे पैर छुओ, मेरी बंदिनी बनो!
एक्रिलिक में बनाए गए नीले बैकग्राउंड वाले चित्र में एक आवरण-हीन पुरुष की पीठ है. उसमें तमाम आंखें हैं और लाल रंग से उकेरी गई कुछ मछलियां. ये अपनी ज़िम्मेदारियों से भागते पुरुष की चित्त-वृत्ति का पुनःपाठ ही तो है!
उनके एक चित्र में देह का आकार है...उसकी ही भाषा है. कटि से दिल तक जाती हुई रेखा...मध्य में एक मछली...और हर तरफ़ गाढ़ा काला रंग. ये एकल स्वामित्व की व्याख्या है. स्त्री-देह पर काबिज़ होने, उसे हाई-वे की तरह इस्तेमाल करने की मंशा का पर्दाफ़ाश. निधि के पांच चित्र यहां डिस्प्ले किए गए हैं।
( चण्डीदत्त शुक्‍ल। यूपी के गोंडा ज़िले में जन्म। दिल्ली में निवास। लखनऊ और जालंधर में पंच परमेश्वर और अमर उजाला जैसे अखबारों व मैगजीन में नौकरी-चाकरी, दूरदर्शन-रेडियो और मंच पर तरह-तरह का काम करने के बाद दैनिक जागरण, नोएडा में चीफ सब एडिटर रहे। अब फोकस टीवी के प्रोग्रामिंग सेक्शन में स्क्रिप्टिंग की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं। दूरदर्शन-नेशनल के साप्ताहिक कार्यक्रम कला परिक्रमा के लिए लंबे अरसे तक लिखा। आप इनसे chandiduttshukla@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं। इनका ब्लॉग है… chauraha।)

पृथक तेलंगाना की मांग को लेकर

कांस्टेबल ने स्वयं को गोली मारी
निज़ामाबाद । जिला मुख्यालय से लगभग ६० किलो मीटर दूर कमारेड्डी तहसील में राष्ट्रीय राज मार्ग नम्बर आठ पर स्थित एक मोबाईल टावर पर चढ़ कर देर रत स्वयं को गोली मर कर आत्म हत्या कर ली। कामारेड्डी से तेलगु दैनिक वार्ता के सवंदाता मोईन ने आपकी न्यूज़ को बताया की सोमवार की रात ९ बजे माचा रेड्डी पुलिस स्टेशन में तैनात क्रिस्टाया नामक कांस्टेबल एन एच ७ पर स्थित एक मोबाईल टावर पर चढ़ गया ,और ऊपर से जय तेलंगाना के नारे लगाने लगा ,यह ख़बर लगते ही कामारेड्डी के सी आई एवम एस ई ने घटना स्थल पर पहुँच कर उसे समझाने के साथ ही निचे उतर आने की बात करने लगे ,लेकिन क्रिस्टाया ने उनकी बात न मन कर ऊपर से ही जय तेलंगाना के नारे ही लगता ही रहा । इस बीच रात के ३ बज गए ,लेकिन वह नीचे नहीं उतरा ,यह घटना देख कर राज मार्ग पर लोंगो का ताँता लग गया । लेकिन आधी रात के बाद क्रिस्टाया ने ऊपर से ही कहा की बिना उसकी मौत क तेलंगाना राज्य की स्थापना नहीं हो सकती ,इतना कहने के बाद उसने अपने सरकारी बन्दुक से अपने कनपटी पर गोली मार ली,जिससे उसकी वहीं पर मौत हो गई। मंगलवार की सुबह लगभग ६ बजे टावर से उसका शव नीचे उतारा गया । जिसकी सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक जगमोहन रेड्डी सहित वरिष्ठ अधिकारी घटना स्थल पर पहुँच गए। एक अधिकारी क मुताबिक आत्महत्या से पहले क्रिस्टाया ने लोक गायक ग़दर से बात करने की बात कही थी ,जिस पर पुलिस ने बात भी करवाई .उस समय क्रिस्टाया ने ग़दर से भी इस बात का उल्लेख किया था की बिना उसकी मौत क तेलंगाना की स्थापना नही हो सकती है । ख़बर लिखे जाने तक तेरस क किसी बड़े नेता का बयां नहीं आया था ।

Monday, November 30, 2009

" कोर्णाक पत्रकारिता पुरुस्कार"

2009-10 का" कोर्णाक पत्रकारिता
पुरुस्कार"प्रदीप श्रीवास्तव कों
निज़ामाबाद। कला ,संस्कृति एवम पत्रकारिता के लिए दिया जाने वाला " कोर्णाक पुरुस्कार "इस बार निज़माबाद (आन्ध्र प्रदेश ) के हिंदी भाषी पत्रकार प्रदीप श्रीवास्तव कों दिया जा रहा है।यह पुरुस्कार अगले वर्ष 26 जनवरी2010 कों उड़ीसा के कटक में आयोजित 15 से 28 जनवरी तक होने वाले थियेटर ओलंपियाड के दौरान दिया जायेगा। पुरष्कार थियेटर मूवमेंट द्वारा हर साल" कला - संस्कृति एवम पत्रकारिता" के लिए किये गए उल्लेखनीय कार्य हेतु दिया जाता है । जिसे इस बार निज़ामाबाद से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक "स्वतंत्र वार्ता " के स्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव कों दिया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए मूमेंट थियेटर के महा सचिव श्री जी ।बी दास महापात्र ने बताया कि पुरुस्कार के रूप में शाल ,श्रीफल एवम स्मृति चिन्ह दे कर सम्मानित किया जायेगा.मूल रूप से अयोध्या(फैजाबाद )के रहने वाले प्रदीप श्रीवास्तव पिछले 28 वर्षं से हिंदी पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्वतंत्र पत्रकारिता के बाद वाराणसी से प्रकाशित हिंदी दैनिक "आज " के वाराणसी एवम आगरा संसकरण के सम्पादकीय विभाग में काम करने के बाद हरियाणा ,आसम,दिल्ली ,महाराष्ट्र के बाद इन दिनों निज़ामाबाद से प्रकाशित हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता में स्थानीय सम्पादक हैं.इससे पहलेश्री श्रीवास्तव कों अनेको पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.जिसमे प्रमुख हैं 1986 में रोट्रेक्ट क्लब वाराणसी द्वारा "यूवा प्रतिभा ",1993 में लघु समाचार पत्र सम्मेलन द्वारा अहिन्दी भाषी क्षेत्र में हिंदी पत्रकारिता के लिए ,कला साहित्य एवम संस्कृति परिषद् मथुरा द्वार हास्य वयंग्य कि रचना पर" साहित्य सरस्वती " कि उपाधि,2006 में इन्डियन एसोसिएसन आफ जर्नलिस्ट ,वाराणसी द्वारा "काशी रत्न अलंकरण " ,2006 में निज़ामाबाद शताब्दी के अवसर जिला प्रशासन द्वार "निज़ामाबाद गौरव "पुरस्कार के साथ निज़ामाबाद रोटरी क्लब ,लायंस कलब आफ डायमंड आदि संस्थाओं द्वारा समय-समय पर पुरुस्कार व सम्मान शामिल हैं. श्री प्रदीप श्रीवास्तव निज़ामाबाद पर्यटन विकास समिति (पर्यटन विभाग) के कार्यकारी सदस्य ,संस्कार भारती इन्दुर हिंदी समिति व निज़ामाबाद साइक्लिंग एसोसिएसन के सलाहकार ,आन्ध्र प्रदेश रोल बाल एसोसिएसन के प्रदेश उपाध्यक्ष , के साथ-साथ निज़ामाबाद उत्तसव समिति एवम स्मारिका उपसमिति के सदस्य के अलावा वे आन्ध्र प्रदेश रेड क्रास सोसायटी के आजीवन सदस्य भी हैं।

cell ०९८४८९९७३२७




Sunday, November 29, 2009

तेरस प्रमुख के सी आर गिरफ्तार,

चौदह दिन के लिए जेल


आज तेलंगाना बंद,

स्कुल कालेज भी रहेंगे बंद
निज़ामाबाद . पृथक तेलंगाना कि मांग कों लेकर भूख हड़ताल पर बैठने से पहले ही करीम नगर पुलिस तेरास प्रमुख के.सी.आर कों रविवार कों गिरफतार १४ दिन के लिए जेल भेज दिया है.इस घटना कों लेकर तेलंगाना के सभी दस जिलों में तनाव पैदा हो गया है.उधर हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविधालय में आन्दोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठियां भांजने से दर्जन भर छात्रों के घायल होने कि खबर है. जिसे देखते हुए तेरास ने सोमवार कों तेलंगाना बंद का आह्वान किया है.इस बीच निज़ामाबाद के तेरास जिला अध्यक्ष ए एस पोशेत्ति ने आप कि न्यूज से बात करते हुवे बताया कि काल सोमवार कों पुरे तेलंगाना कों बंद रखने का आह्वान किया गया है.जिसके तहत सभी दस जिलों में स्कुल, कालेज के साथ-साथ सड़क परिवहन ,दुकाने एवं बाजार तक बंद रखे जायंगे.उन्होंने आगे कहा कि इसका उलंघन करने वालों कों तेरास सबक सिखाएगी .श्री पोसेत्ति ने बताया कि तेरास प्रमुख के साथ पुलिस ने जो कुछ किया है,हम उसकी कड़े सबदों में निंदा करते हैं.अब हम तेलंगाना ले कर रहेंगे.बंद में निज़ामाबाद ,आदिलाबाद,करीमनगर,वारंगल ,हैदराबाद,मेदक सहित सभी दसों जिले शामिलहैं.
















Sunday, November 22, 2009

कैनवास पर" करो या मरो "



26 नवम्बर नरेन्द्र की तूलिका से कैनवास पर
नांदेड के रहने वाले युवा चित्रकार व् फोटो ग्राफर नरेन्द्र बोरली पवार ने जब गत वर्ष मुंबई में 26 को हुवे आतंकी हमले के बाद एक-एक कर अस्पतालों में आते शवों को देखा तो उनका मन विचलित हो उठा ,उस दृश्य को देख कर वे बीमार पढ़ गए तभी से उनके मन में उन दृश्यों को कैनवास पर उतारने का मन बना लिया.जे.जे स्कुल ऑफ़ आर्ट्स से मास्टर आफ फाइन आर्ट्स की शिक्षा पूरी करने वाले नरेन्द्र के शब्दों में "उनके इन चित्रों में मानव वेदना एवम दुःख की भावना उभरती है.20-20घंटे कैनवास पर उन दर्दों कों उकेरने वाले नरेंद्र कहतें हैं की उनकी इच्छा है कि वे अपनी इस प्रदर्शनी को पूरे देश में लगायें,जिसके लिए वे कुछ भी नहीं लेंगे। श्री नरेन्द्र ने 8x8एवम 5x5फुट के 26कैनवास बनाये हैं। वे कहते हैं कि उनका प्रयास रहा है कि हर भारतवासी कि भावना को अपनी तूलिका के मध्यम से कैनवास पर उकेरें ,उन्होंने कैनवास पर गाढे लाल रंग का ही अधिक उपयोग किया है.उन्हो ने अपने छत्रों में हिन्दी कि कवितायें भी डालीं हैं ,जिनके एक-एक शब्द चोट करतें हैं.वे अपने चित्रों को बेचने के पक्ष में नही हैं.वे कहते हैं कि आज देश में धरम,जाति,भाषा व् वंश के नाम पर भेद भाव पैदा किया जा रहा है। हमें इन सब को भूल कर एक भारतीय के रूप में होना चाहिए.श्री नरेन्द्र कि एक प्रदशनी 26नवंबर से 28नवम्बर तक मुंबई में लग रही है।जिसे उन्होंने शीर्षक दिया है "डू या डाई (करो या मरो)अर्थात " आतंकवाद के खिलाफ कला" जिसका अवलोकन आप भी कर सकते हैं।
स्थान:रविद्र नाट्य मन्दिर, कला वीथिका
सिध्विनायक मन्दिर के निकट
प्रभा देवी ,मुंबई-25
समय : सुबह 11से सायं 7बजे तक

Monday, November 16, 2009

कनाडा के प्रधान मंत्री ने देखा आर.के स्टूडियोमुंबई ,भारत यात्रा के दौरान कनाडा के प्रधान मंत्री स्टीफन हार्पर ने मंगलवार कों १७ नवंबर ०९ कों मुंबई के आर .के. स्टूडियो का अवलोकन किया .इस मौके पर स्थानीय कलाकारों के साथ हार्पर दंपत्ति .
विवरण व चित्र सूचना विभाग ,मुंबई
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Saturday, November 14, 2009

हर्षोल्लास के साथ मनाया गया पत्रकारिता दिन





राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर 16 नवंबर को निज़ामाबाद, नांदेड एवम आदिलाबाद में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. आंध्र प्रदेश के निज़ामाबाद में आंध्र प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के तत्वधान में निज़ामाबाद प्रेस क्लब के परिसर में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमे एक स्थानीय हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता के अस्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारिता को दुरुपयोग शुरू कर दिया गया है, जिस पर अब नियंत्रण आवश्यक है.

द हिन्दू के जिला सवांददाता पी राम मोहन का कहना था कि आज पत्रकारिता के मापदंडों के मायने बदल रहे हैं. इसे रोकने की जरूरत है. पत्रकार संघ के अध्यक्ष बोबिली नर्सर्या का कहना था कि वे अपने स्तर पर प्रयास करेंगे कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही पत्रकारों को मिले. संघ के सचिव ऐ सायलू ने पत्रकारों के उत्थान के लिए हर संभव प्रयास करने का अश्वासन दिया. पत्रकारिता दिन के अवसर पर केक भी काटा गया. इस दौरान काफी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे.

नांदेड में इस दिन को वहां के जिलाधीश कार्यालय में मनाया गया. जिलाधीश डॉ श्रीकर परदेशी एवम वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर दोइफोडे ने सबसे पहले बालगंगाधर के चित्र पर माल्यार्पण किया. इस अवसर पर डॉ परदेशी ने कहा कि समाचार पत्रों को निष्पक्षता के साथ पारदर्शिता बरतते हुए समाचार प्रकाशित करना चाहिए. वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर दोइफोडे का कहना था कि आज समाचार पत्र व्यावसायिक हो गए हैं. इससे लगता है कि पत्रकारिता अपना मार्ग बदल रही है. बभालीबांध को लेकर जिस तरह से आंध्र पदेश के अख़बारों ने लिखा, उस तरह से महाराष्ट्र के अख़बारों ने नहीं लिखा. कार्यक्रम का संचालन जिला सूचनाधिकारी डॉ. किरण मोघे ने किया.

इसी दिन आदिलाबाद में आंध्र प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ, आदिलाबाद के तत्वधान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद् के अध्यक्ष एस. गणपति ने कहा कि समाज एवं राष्ट्र के विकास में मीडिया का योगदान महत्वपूर्ण है. सयुंक्त जिलाधीश आर. विजी कुमार का कहना था कि देश की तक़दीर लिखने का दम कलम में ही है. आसिफाबाद के विधायक आत्रम सक्कु ने कहा कि वास्तविकता को सामने रखते हुए मीडिया अपने दायित्व को निभाए. इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया गया.

Friday, November 13, 2009


विज्ञानं रेल प्रदर्शनी नांदेड में
निजामाबाद. शुक्रवार कों नांदेड के माता टेकडी रेलवे स्टेशन पर भारत सरकार द्वारा चलाई गई विज्ञानं रेल प्रदर्शनी जब पहुंची तो उसे देखने वालों का ताता लग गया ,जिनमें बच्चों कि संख्या सबसे अधिक थी .तमाम स्कुल के बच्चे इसे देखने पहुँच रहें हैं.यह प्रदशनी १९ नवम्बर तक चलेगी.

Sunday, November 8, 2009





महाराष्ट्र मंत्री मंडल का गठन

शनिवार को मुंबई में सूचना एवम प्रसारण राज्य मंत्री डॉ.एस जगत रसिकन ने दीप जला कर "मुंबई अन्तर राष्ट्रिय फ़िल्म महोत्सव "का सुभारम्भ किया ,उस अवसर पर सिने प्रेमियों को सम्भोदित करते हुवे मंत्री महोदय.

Monday, November 2, 2009





नांदेड व बासर में
कार्तिक पूर्णिमा
पर भक्तों ने
लगाई डूबकी
श्री गुरु नानक जी कि जयंती एवम कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नांदेड एवम माँ सरस्वती कि नगरी बासर में भक्तों ने हर्षोलास के साथ मनाया .बासर में जहाँ हजारों भक्तो ने गोदावरी में सोमवार कि सुबह डूबकी लगाई वहीँ नांदेड स्थित गुरुद्वारा अबिचल सहेब सचखंड के पीछे गोदावरी के तट पर हजारों महिलाओं ने दीप जलाकर समां बांध दिया .जिसे अपने कैमरे में कैद किया है नांदेड से कारण सिंह बैंस एवं बासर से डी शंकर ने .


Saturday, October 31, 2009

गंगाराम कांग्रेस से निकले गए

निजामाबाद ,निजामाबाद के जुक्कल विधान सभा क्षेत्र से दो बार कांग्रेस से विधायक रहे सौदागर गंगाराम को आन्ध्र प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष धरमपुरी श्रीनिवास ने शनिवार को पार्टी के खिलाफ बोलने के आरोप में पार्टी से निकल दिया है.पता हो की मुख्यमंत्री डॉ.राज शेखर रेड्डी के निधन के बाद निजामाबाद की एक सभा में बोले हुवे श्री गंगा राम ने कहा था की पार्टी है कमान यदि डी.श्रीनिवास को मुख्या मंत्री बनती है तो में आत्महत्या करलूँगा.उनके इस बयां की प्रदेश में काफी चर्चा भी हुई थी ,जिसके चलते प्रदेश कांग्रेस के मुखिया डी.श्रीनिवास ने शनिवार को उन्हें पार्टी से ही बहार कर दिया .उल्लेखनीय है की डी.श्रीनिवास तिन पहले ही दिल्ली में पार्टी प्रमुख श्रीमती सोनिया गाँधी से मिल कर लौटे हैं.उधर राज शेखर के बेटे जगन मोहन भी सोनिया गाँधी से मिलकर वापस आयें हैं.गंगाराम जगन को मुख्या मंत्री के पद पर देखना चाहते थे. जिस पर पार्टी है कमान ने अपनी मुहर नहीं लगे.बटन उचित होगा की गंगा राम निजामाबाद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं. इन लाइनों के लिखे जाने तक गंगाराम से सेल पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन लिफ्ट नहीं किया.

Friday, October 30, 2009


अब नांदेड के रेलवे स्टेसन पर लगी आग





अब नांदेड के रेलवे स्टेसन पर लगी आग
नांदेड ! जयपुर के आग की लों अभी ठंडी भी नहीं पड़ी की अब नांदेड के रेलवे गोदाम मे आग लगाने की खबर आ रही है .खबरों के मुताबिक शुक्रवार की दोपहर बाद रेलवे के गोदाम में रखे यूरिया के गोदाम में अचानक आग लग गई ,जिसमें लाखों का यूरिया जल कर खाक हो गया है. नादेड रेलवे के डी.आर .एम् के मुताबिक चार सदस्यों की एक जाच कमिटी बना दी गई है,जिसकी रिपोर्ट आते ही करवाई सुरु की जाएगी.खबर लिखने तक आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा था.दो दमकल की गाडियां आग बुझाने का प्रयास कर रही थी.साथ में स्थानीय लोग भी अपना सहयोग दे रहे थे.विस्तृत जानकारी मिलते ही समाचार को अपडेट किया जायेगा ,यह प्रारम्भिक जानकारी के लिए दिया जा रहा है.
संपादक,
आप की न्यूज


Sunday, October 25, 2009

हिंसा नहीं, विकास मुद्दा है:

माओवादी कवि वरवर राव


वरवर राव को भारतीय माओवादियों के संघर्ष का प्रवक्ता कहा जाता है, सरकारी दावा है कि वे सशस्त्र माओवादियों के नीतिकार हैं। लेकिन वरवर राव इन सब विशेषणों से अलग अपने को क्रांतिकारी कवि कहलाना पसंद करते हैं. 1940 में आंध्र-प्रदेश के वारंगल में जन्मे वरवर राव ने कोई 40 सालों तक कॉलेजों में तेलुगू साहित्य पढ़ाया है और लगभग इतने ही सालों से वे भारत के सशस्त्र माओवादी आंदोलन से भी जुड़े हुए हैं. सत्ता के खिलाफ लिखने-पढ़ने, संगठन बनाने और पत्र-पत्रिकायें प्रकाशित करने वाले वरवर राव टाडा समेत देशद्रोह के आरोप में लगभग 8 साल तक जेल में रहे हैं. 2001-02 में तेलुगू देशम और 2004 में कांग्रेस पार्टी ने जब माओवादियों से शांति वार्ता की पेशकश की तो वरवर राव को मध्यस्थ बनाया गया था. इस लंबी बातचीत में वरवर राव ने बस्तर और विनायक सेन से लेकर आंध्र के माओवादी विद्रोह तक के अपने रिश्तों पर विस्तार से चर्चा की है, जिसे यहां हम अविकल रुप से प्रस्तुत कर रहे हैं.
• छत्तीसगढ़ का बस्तर आज युद्द क्षेत्र में बदल गया है. लाखों आदिवासी बंदूक के निशाने पर हैं. बस्तर और छत्तीसगढ़ से आपका कैसा रिश्ता रहा है ? बहुत सारी यादें हैं. एक बार की यात्रा मुझे अभी याद आ रही है. हम लोग बस्तर और रायपुर की यात्रा पर थे एक बस में सांस्कृतिक दल के साथ. हमारे साथ बहुत सारे साथी थे. हमें किसी ने बुलाया नहीं था, हम खुद आये थे. कार्यक्रम करते-करते हम कांकेर पहुंचे और वहां प्रोग्राम करने के बाद रात को एक स्कूल में सो गये. तो रात शायद दो बजे पुलिस आके उठा के मुझे और गदर को फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में ले गई. तो फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में एसपी और कलेक्टर दोनों ही बैठे थे. तो पूछते हैं कि आप यहां क्यों आए हैं ? कहा- कल्चरल टीम है, ऐसे ही प्रोग्राम देते हुए आए हैं. आदिवासी इलाका है, आदिवासी के बारे में तो हमको दिलचस्पी है. उनके बारे में ही हम लिखते हैं, भाषण देते हैं. तो हम, क्योंकि हमारी समझ है कि जल, जंगल, ज़मीन उनको ही होना चाहिए. तो एक बहुत लंबा discussion, तीन घंटे लंबा discussion किया है. बार-बार उनका कहना एक ही है कि आपका जो लीडर है कोंडापल्ली सीतारमैय्या है. वो आंध्रा के कृष्णा जिले का है. वहां वो बहुत ज़मीन है उसके पास. वो तो बहुत हिफाज़त किया है और यहां आके आपके आंध्रा लोग, यहां आकर आदिवासी लोगों की ज़मीन छीनना चाहते हैं. वो आदिवासी का बहाना लेकर लोगों की ज़मीन छीनना चाहते हैं. और ये मध्य प्रदेश को आप बांटना चाहते हैं. मध्य प्रदेश और दंडकारण्य में बांटना चाहते हैं. ये जो है, हम यह नहीं कह रहे है. हम ये कह रहे हैं कि जो आदिवासी, वैसे तो संविधान ही sixth schedule में रखा है उनको. आदिवासी की independent councils बना सकते हैं. और चाहें तो अलग राज्य दे सकते हैं. बाद में जो हुआ है छत्तीसगढ़ में, देखा जाए तो. ये कहा हमने, ये कह कर फिर... खैर वो तो जेएनयू बैकग्राउंड वाले थे लोग. इसीलिए बहुत सी बातें करके भेज दिए. वहां से निकले और आए हैं भिलाई में ठहरे. भिलाई में, भिलाई स्टील प्लांट में हो या कहीं बाहर भी हो, आंध्रा से आए हुए लोग बहुत होते हैं. खासकर ये नार्थ कांगरा से सीतापुरम में लोग आकर काम करने वाले मज़दूरी करने वाले होते हैं. तो उनके क्वाटर्स में रहे हैं और प्रोग्राम दे रहे थे. तो भिलाई के स्टील प्लांट के सामने प्रोग्राम देने के लिए ऐसे ही एक समय में निकले थे कुछ लोग. मैं press conference करने के लिए दुर्ग गया था. जब press conference कर रहे थे तो मुझे फौरन दुर्ग में information आई कि हमारे टीम के सदस्यों को arrest किए हैं. मैं वहीं press conference करके मैं वापस आया हूं, तब तक एक बस तैयार किए हैं पुलिस वाले, अपना एक वैन. दो बसें, हम जो बस लेकर आए वो बस बीच में रखे. पीछे एक पुलिस वैन, सामने एक पुलिस वैन रखे. हमको extermination orders दे कर कोंटा के रास्ते से लाकर वहीं भद्राचलम में छोड़ दिए. ये 1990 का experience है आपके रायपुर का. • ये यात्रा किस तरह की रही ?बहुत अच्छा रास्ता जंगल का. और लौटते समय में हम घने जंगल में. तब तो घने जंगल थे (1990 की बात बोल रहा हूं. 19 साल पहले.) तो वहां एक Red Flag रख कर हमने लिखा कि हम इस जंगल से गुज़रे हैं और इस जंगल से आ रहे हैं, कोई यहां फिरने वाले लोग ये देखें तो हमारी ये इच्छा है कि लाल झंडा जंगल में नहीं लाल किले पर भी लहराएगा एक दिन. ये लिखकर वहां, पत्थर पर लिख के वो झंडा रखकर चले गए. वो पहली, पहली नहीं वो एक बहुत खास याद है जो रायपुर आने की. वैसे तो रायपुर में intellectual level पर और लेखक होने के कारण से और भी लोग हमारे पास भी आए थे. Seminars में आए थे विनायक सेन हो या इलीना सेन हो. इलीना सेन Feminist Movement में रह कर हैदराबाद आती थीं, वारंगल में आती थीं. और जो किशोर भारती ग्रुप था पहले आपका, अनिल सदगोपाल, ये सब लोगों से हमारा बहुत संबंध था. हम “सृजना” बोल कर एक literary magazine निकालते थे 1966 से लेकर 1992 तक. 26 साल हमने ये मैगज़ीन निकाली. उसमें सीवी सुब्बाराव नाम के हमारे मैगज़ीन में काम करने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक लेक्चरर थे और पीयूडीआर में काम कर रहे थे. उन्होंने हमको दिल्ली में हो, रायपुर में हो, कलकत्ता में हो, बहुत से literary interests रखने वाले बुद्धिजीवियों के नंबर दिए थे. तो ये किशोर भारती ग्रुप के वजह से भी हमारे कई संबंध आए थे. तो उससे परिचय था. और वैसे ही सुरेंद्र परिहार, Anthropology के professor जो retire हुआ शायद. वो बहुत ही debate करता था, उनसे भी मिले. और झा, जो अभी arrest हो गए प्रफुल्ल झा, उनसे भी परिचय था. तो वो लोग मिलते थे. वो लोग Press Conference करते थे. तो वो एक हुआ. दूसरी बार हुआ कि हमारा All India League for Revolutionary Culture (AILRC) बोलकर एक Association है. जैसा कि आंध्रा में Viplava Rachayitala Sangham (VIRASAM – Revolutionary Writers’ Association) है, उसको हम 1983 में बनाया, 1981 से कोशिश कर रहे थे, 1983 में बना है. तो यहां का जो सांस्कृतिक मंच था, हमारा उसमें एक constant unit था. तो उसमें एक समय क्या नाम क्या है लक्ष्मण देशमुख था, कोई आदिवासी गायक और सुशांत कुमार साहा था. नहीं रहा शायद वो. भिलाई का रहने वाले था. वैसी एक टीम थी यहां हमारी. वैसे ही वो सुशांत कुमार साहा को arrest किया था और एक पुलिस स्टेशन के उपर हमला होकर हथियार ले गए थे. मानपुर पुलिस स्टेशन के हमले में उसको रखा था, accused किया था. तो वो तो इतना भी नहीं था. तो मैंने आकर उसको लिए bail डलवाई. तो राजेंद्र सायल से भी परिचय था तो उनके पास, विनायक सेन के पास, सुरेंद्र परिहार के पास रहकर, 15 दिन रहा मैं रायपुर में. रायपुर, दुर्ग, भिलाई. वो कोर्ट जो दुर्ग कोर्ट था, वो तो रोज़ाना रायपुर में रहना, रोज़ाना दुर्ग जाना. मुझे ये बहुत याद है।
साभार:रविवार डाट कम
http://www.raviwar.com/

Wednesday, October 21, 2009

महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री


महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री कांग्रेस

का ही होगा :सांसद मधु यास्की

निजामाबाद: निजामाबाद के सांसद मधु यास्की का दावा है कि महाराष्ट्र का अगला मुख्य मंत्री कांग्रेस का ही होगा ,उन्हों ने इस बात से भी इंकार नहीं किया कि अशोक राव अगले मुख्य मंत्री नहीं होंगे।उनका कहना था कि वह युवा हैं , उन्हों ने अपने कार्यकाल में जितने भी काम किये हैं ,उसकी सभी ने सरहाना कि है. बुधवार कि देर रात "आप कि न्यूज " से बात करते हुवे उन्हों ने कहा कि सन ००४ कि अपेक्क्षा इस बार महाराष्ट्र में कांग्रेस को और अधिक सीटें मिलेंगी .
श्री यास्की ने आगे कहा कि पार्टी हाई कमान पर निर्भर करता है कि वह किसे वहाँ का मुखिया बनती हैं.उनका कहना था कि इस बार वहाँ के चुनाव में कि को मुख्य मंत्री के लिए प्रोजेक्ट नहीं किया गया.इससे आप समझ सकते हैं कि मुख्य मंत्री कोन हो सकता है .बस थोडा सा इंतजार कीजिये ,परिणाम कल (गुरुवार) दपहर तक तो आ ही जायेगा.जब उनसे आंध्र प्रदेश के सन्दर्भ में यह पूछा गया कि मुख्य मंत्री के लिए वाई यस के बेटे जगन के नाम के बारे ने पूछा गया तो श्री यास्कीने कहा कि पार्टी हाई कमान ने तो अभी तक इसी कोई बात नहीं कही है,देखिये पार्टी हाई कमान ही इस पर अपना कोई बयां डे सकता है.हम लोग कुछ नहीं कह सकते हें ।
वाई यस के निधन के बारे में उनका कहना था कि इसके लिए काफी हद तक राज्य सरकार भी दोषी है,इसी लिए में ने कल हैदराबाद में यह बात कही है कि प्रदेश कि गृह मंत्री को नैतिकता के अधर पर अपना पद छोड़ देना चाहिए .क्योंकि उनका दायित्व बनता है कि उडान से पहले संबंधित विभाग हेलीकाप्टर कि जाँच क्यों नहीं की ।

आप कि न्यूज संवाददाता

Sunday, October 18, 2009

खबरें अभी -अभी

एशिया का सबसे लंबा

फ्लाई ओवर ब्रिज
जी हाँ चोकियें नही ,यह सच है कि एशिया का सबसे लंबा ओवर ब्रिज हैदराबाद में बनाया गया है.जिसका नाम दिया गया है स्वर्गीय प्रधान मंत्री पी .वी.नर्सिहमाराव एलिवेटेड एक्सप्रेस हाई-वे .जिसकी लम्बाई ११.६३३ किलोमीटर है.इस पुल के निर्माण पर ६०० करोड़ कि लगत आई है.यह पुल मेहँदीपट्टनम से शुरू हो कर आराम घर तक जाता है.इस पुल पर केवल कार ,बस व वेन अदि के ही चलने कि अनुमति आंध्र प्रदेश सरकार ने दी है.जिससे शमसाबाद हवाई अड्डे जाने वालों को कोई तकलीफ न हो.इस पुल पर पैदल ,साईकिल व ऑटो से नही जाया जा सकेगा .अति ४० किलोमीटर से ले कर ६० किलोमीटर तक कि ही निर्धारित कीगई है.जिसका शुभारम्भ सोमवार १९ अक्तूबर को आन्ध्र की मुख्या मंत्री के.रोश्य्या के कर कमलों से हुआ ।
आपकी न्यूज सवांददाता
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सड़क दुर्घटना में आठ लोंगो

की मौत ,सभी नांदेड के
निजामाबाद (आप की न्यूज )19 अक्तूबर :जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर करीमनगर जिले के जग्तायल तहसील के पास हुई एक सड़क दुर्घटना में महाराष्ट्र के नांदेड जिले के आठ लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई,जब नादेड के लोग टाटा सूमो में गोदावरी के तट पर स्थित भगवन लक्ष्मी नरसिंहमाँ स्वामी के मंदिर जा रहे थे. तभी करीम नगर के जगत्यल तहसील के पास विपरीत दिशा से आ रही सीमेंट से भरी लारी से आमने-सामने की टक्कर हो गई.
घटना स्थल से हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता के संवाददाता के.नरेश के मुताबिक ड्राइवर सहित आठ लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई.जब की दो की हालत गंभीर बनी है. हादसा इतना भयानक था की लोगो के शव दूर-दूर तक जा गिरे थे. मृतकों में अलका राव(१२).माधुरी(४०) ,रेणुका तानेकर(२०) ,शांति बाई(७५),आनंद राव(२२),एल.राव (५०),प्रह्लाद राव(८०) एवं ड्राइवर (जिसका नाम का पता नहीं चल सका है) शामिल हैं.इस हादसे मे. पॉँच लोग गम्भीर घायल हुवे हैं जिनमे दो की हालत चिंताजनक बनी हुई है,जिनके नाम हैं सविता(५०),भले राव ,सुमिता गजानंद एवम सुनीता. सविता को हेदराबाद भेज दिया गया है,जबकि सुमिता का इलाज जगत्यल के सरकारी अस्पताल में किया जा रहा है.