Sunday, November 22, 2009

कैनवास पर" करो या मरो "



26 नवम्बर नरेन्द्र की तूलिका से कैनवास पर
नांदेड के रहने वाले युवा चित्रकार व् फोटो ग्राफर नरेन्द्र बोरली पवार ने जब गत वर्ष मुंबई में 26 को हुवे आतंकी हमले के बाद एक-एक कर अस्पतालों में आते शवों को देखा तो उनका मन विचलित हो उठा ,उस दृश्य को देख कर वे बीमार पढ़ गए तभी से उनके मन में उन दृश्यों को कैनवास पर उतारने का मन बना लिया.जे.जे स्कुल ऑफ़ आर्ट्स से मास्टर आफ फाइन आर्ट्स की शिक्षा पूरी करने वाले नरेन्द्र के शब्दों में "उनके इन चित्रों में मानव वेदना एवम दुःख की भावना उभरती है.20-20घंटे कैनवास पर उन दर्दों कों उकेरने वाले नरेंद्र कहतें हैं की उनकी इच्छा है कि वे अपनी इस प्रदर्शनी को पूरे देश में लगायें,जिसके लिए वे कुछ भी नहीं लेंगे। श्री नरेन्द्र ने 8x8एवम 5x5फुट के 26कैनवास बनाये हैं। वे कहते हैं कि उनका प्रयास रहा है कि हर भारतवासी कि भावना को अपनी तूलिका के मध्यम से कैनवास पर उकेरें ,उन्होंने कैनवास पर गाढे लाल रंग का ही अधिक उपयोग किया है.उन्हो ने अपने छत्रों में हिन्दी कि कवितायें भी डालीं हैं ,जिनके एक-एक शब्द चोट करतें हैं.वे अपने चित्रों को बेचने के पक्ष में नही हैं.वे कहते हैं कि आज देश में धरम,जाति,भाषा व् वंश के नाम पर भेद भाव पैदा किया जा रहा है। हमें इन सब को भूल कर एक भारतीय के रूप में होना चाहिए.श्री नरेन्द्र कि एक प्रदशनी 26नवंबर से 28नवम्बर तक मुंबई में लग रही है।जिसे उन्होंने शीर्षक दिया है "डू या डाई (करो या मरो)अर्थात " आतंकवाद के खिलाफ कला" जिसका अवलोकन आप भी कर सकते हैं।
स्थान:रविद्र नाट्य मन्दिर, कला वीथिका
सिध्विनायक मन्दिर के निकट
प्रभा देवी ,मुंबई-25
समय : सुबह 11से सायं 7बजे तक

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