Friday, December 18, 2009

श्रीक्षेत्र मालेगावं यात्रा ,चित्रों की जुबानी















Wednesday, December 16, 2009

तेलंगाना विरोधी समाचार

चेनलों का प्रसारण बंद

निज़ामाबाद ,पृथक तेलंगाना कों लेकर आंध्र प्रदेश का आन्ध्र एवम रायल सीमा क्षेत्र जल रहा है,वहीँ कुछ निजी टी वी चेनलों ने तेरास प्रमुख के।सी.आर की छवि ख़राब करने सम्बंधित खबरे प्रसारित कर रहे हैं ,जिसे तेलंगानावासी कदापि बर्दास्त नहीं करें गे. यह बात बताते हुवे निज़ामाबाद केबल आपरेटर यूनियन के अध्यक्ष एवम तेलगु साप्ताहिक निज़ामाबाद मिरर के संपादक कुलदीप सहनी ने कही .उन्होंने आगे कहा की इसी कों देखते हुवे बीती रात बारह बजे से तेलगु के कुछ चेनलों का प्रसारण बंद कर दिया गया है.श्री सहनी ने आगे कहा की सभी चेनलो के संचालको कों कह दिया गया है कि वे यदि इसे बंद नहीं करते हैं तो आज रात से तेलंगाना के सभी दस जिलों में प्रसारण बंद कर दिए जायेंगे.उन्होने आगे कहा कि काल कडप्पा के सांसद एवम साक्षी तेलगु अखबार व टी वी चेनल के मालिक जगन मोहन रेड्डी ने सांसद भवन में जो एकीकृत आन्ध्र प्रदेश कि बात कि है वह बिलकुल गलत है. हम सब तेलंगानावासी उसका पुरजोर विरोध करते हैं .श्री सहनी का कहना था कि जगन इस लिए बोखलाए हैं कि उनका काफी पैसा तेलंगन क्षेत्र में लगा हुवा है. विजयवाड़ा के सांसद लगड़पाटी राजगोपाल के अनसन पर बैठने के बारे में बोलते हुवे उनका कहना था कि वे नाटक कर रहे हैं, चेनल वाले उनके बारे में क्यों नहीं बताते ,उनके चरित्र के बारे में तो चेनल वाले कुछ नहीं बता रहे हैं.कितना धवल चरित्र है उनका,यह सभी जानते हैं.श्री सहनी का कहना था कि अब लोग साक्षी अखबार का भी विरोध करने का मन बना रहे हैं,जिसके लिए उन्हें बता भी दिया गया है.इस बीच आज दिनभर निज़ामाबाद शहर में प्रजा राज्यम पार्टी प्रमुख सिने अभिनेता चिरंजीव के फिल्मों का बहिष्कार करते हुवे उनके पोस्टरों कों फाड़ते हुवे तोड़ फोड़ की.जिन तेलगु चेनलों कों बंद किया गया है उनमें मुख्य हैं साक्षी टी.वी.,टी वी -9 ,एन टी.वी ,,स्टूडियो एन,महा टी.वी.एवम आई न्यूज आदि.
प्रदीप श्रीवास्तव
(मित्रों आप भी समाचार भेज सकते हैं -संपादक)
mail :apkinews@gmail.com

Wednesday, December 9, 2009

पृथक तेलंगाना राज्य के गठन

की प्रक्रिया शुरु होगी:चिदंबरम


अलग तेलंगाना राज्य को लेकर आंध्र प्रदेश में चल रहे आंदोलन पर दिल्ली में हुई कई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु की जाएगी.
केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने देर रात पत्रकारों को बताया कि इसके लिए राज्य विधानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा.हालांकि उन्होंने इसकी कोई तारीख़ नहीं बताई है.
इस घोषणा के बाद से हैदराबाद में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेताओं ने इसे अपनी जीत बताया है.उधर हैदराबाद में पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन कर रहे टीआरएस के चंद्रशेखर राव को इंजेक्शन के ज़रिए कुछ तरल पदार्थ दिया गया है जिसके बाद उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ है.चंद्रशेखर राव के बेटे के तारक रामाराव ने कहा है कि अब चंद्रशेखर राव अपना अनशन समाप्त कर देंगे.राज्य विघानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश कियाजाएगा। पी चिदंबरमप्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने रात कोई साढ़े ग्यारह बजे पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने कहा, "इसके लिए राज्य विघानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा."
गृहमंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैया से कहा गया है कि 29 नवंबर, 2009 के बाद तेंलंगाना राज्य के आंदोलनकरियों और छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज सभी मुक़दमे वापस ले लिए जाएं.
उन्होंने कहा, "हम चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित हैं और हम सभी आंदोलनकारियों विशेषकर छात्रों से अनुरोध करते हैं कि वे अपना आंदोलन वापस ले लें."
इस सवाल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया कि यह प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा.
उनका कहना था कि प्रधानमंत्री देश में नहीं थे और उनके लौटने के बाद बैठकें हुईं और उसमें यह निर्णय लिया गया.
ख़ुशी की लहर
गृहमंत्री पी चिदंबरम की घोषणा के बाद हैदराबाद में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.इस घोषणा को टीआरएस के नेताओं ने अपनी जीत बताया है.हालांकि अभी राज्य के लोगों को मुख्यमंत्री की ओर से किसी तरह की औपचारिक घोषणा का भी इंतज़ार है.
राज्य के मुख्यमंत्री के रोसैया दिल्ली से विशेष विमान से हैदराबाद के लिए रवाना हुए हैं.
संभावना है कि वे ख़ुद निज़ाम अस्पताल पहुँचकर टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव से मिलेंगे और उनका अनशन ख़त्म करवाएँगे.अभी यह घोषणा नहीं की गई है कि राज्य विधानसभा में तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया कब शुरु की जाएगी. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इसकी भी घोषणा कर सकते हैं.
केंद्र सरकार ने यह प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा ऐसे समय में की है जब टीआएएस की ओर से गुरुवार को छात्रों की बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की जा रही थी.
टीआरएस की ओर से कहा गया था कि सभी विश्वविद्यालयों से एक लाख छात्र विधानसभा की ओर मार्च करेंगे.लेकिन इस घोषणा के बाद इस रैली को विजय रैली में तब्दील करने की घोषणा की गई है.
बैठकों का दौरप्रधानमंत्री के दिल्ली लौटने के साथ ही बैठकों को लंबा सिलसिला चला.
मुख्यमंत्री के रोसैया को पहले ही दिल्ली बुलवा लिया गया था.तेलंगाना के मसले पर कांग्रेस कोर ग्रुप की दो बैठकें हुई जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की.इस बीच मुख्यमंत्री के रोसैया ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर ली थी.कांग्रेस कोर ग्रुप की दूसरी बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम, रक्षामंत्री एके एंटनी, विधि मंत्री वीरप्पा मोइली भी सोनिया गांधी से मिलने उनके निवास पहुँचे.बैठकों के इन दौर के बाद गृहमंत्री ने अलग राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की

===========================================

बारूद के ढेर पर बैठा तेलंगाना

के.सी.आर.की हालत बिगड़ी, आन्दोलन जारी
लगभग ४६ साल बाद एक बार फिर से आंध्र प्रदेश में पृथक राज्य तेलंगन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस बार के इस आन्दोलन में अब तक ४० से अधिक लोंगों ने अपनी जाने तक दे दी है. इसके अलावा यह आन्दोलन जंगल में लगे आग की तरह पूरे तेलंगन में फैल चुकी है. जिसकी लपट में केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं अपितु केंद्र सरकार की भी चूल्हें हिलने लगी है. पिछले १३ दिनों से तेलंगाना राष्ट्र समिति के मुखिया के चन्द्र शेखर राव आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनकी बिगड़ती हालत कों देखते हुए उन्हें हेदराबाद के निम्स (निजाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस ) भारती कराया गया है. जहाँ पर उनकी हालत गंभीर (इन पंक्तियों के लिखने तक )बनी हुई है.उधर उनकी बिगडती हालत कों देखते हुए उनकी पुत्री कविता ने बुधवार (९ दिसंबर ०९ )की सुबह निम्स जाकर अपने पिता से उनकी तबियत कों देखते अनसन ख़त्म करने की अपील की है. कविता ने यहाँ तक कह दिया है की यदि वे अनसन नहीं तोड़ते हैं तो वह भी भूख हड़ताल पर बैठ जाएँगी .इस बीच खबर मिली है की श्री राव धरम पत्नी की भी भूख से हालत बिगड़ती जा रही है उन्होंने भी पिछले कई दिनों से अपने मुंह में अन्न का एक भी दाना नहीं डाला है राजधानी हेदराबाद से मिली खबर के मुताबिक .मुख्य मंत्री के.रोशय्या यू पी ए अध्यक्ष सोनिया से मिलाने आज दिल्ली पहुँच गए हैं. जहाँ पर श्रीमती गाँधी कों उनके ६३ वें जनम दिन पर उन्हें मुबारक वाद दें गए ,वहीँ इस बात के भी कयास लगाये जारहे है की उनसे तेलंगाना मुद्दे पर भी बात-चीत कर कोई ठोस निर्णय लेने का भी आग्रह करेंगे. इधर पूरे तेलंगन क्षेत्र ,जिसमे आंध्र प्रदेश के दस जिलों (निज़ामाबाद,आदिलाबाद ,करीमनगर,वारंगल,मेदंक ,नलगोंडा,महबूबनगर ,रंगारेड्डी खम्मम एवम प्रदेश की राजधानी हेदराबाद शामिल है.) में पृथक तेलंगाना राज्य की मांग जोर पकड़ती जा रही है. अब तक चालीस से अधिक तेलंगाना समर्थको ने अपनी जानें १३ दिनों के भीतर दे चुके हैं,जिनमें छात्र ,पुलिसकर्मी,किसानों के साथ-साथ लड़कियां भी शामिल हैं इसके अलावा आगजनी,तोड़ फोड़ ,बंद रास्ता रोको का सिलसिला जारी ही है.तेलंगाना के जिलों में पिछले पंद्रह दिनों से स्कुल व कालेज तो बंद ही चल रहे हैं. जिससे पढाई का कफी नुकसान बच्चों कों उठाना पढ़ रहा है. क्या है तेलंगाना मुद्दा?बात सन १९४६ की है ,आन्ध्र प्रदेश के संसथापक पोट्टी श्रीरामलू ने तेलगु बोली बोलने वालों के लिए अपना बलिदान दे दिया था,तब भाषावार प्रान्त की रचना के लिए फज़ल अली कमीशन कों बनाया गया था.उनदिनों तेलगु भाषी प्रान्त मद्रास (अब चेन्नई) प्रान्त और निजाम हैदराबाद की रियासत में रहते थे ,मराठवाडा एवम तेलंगाना उस सियासत के हिस्सा थे. तब मद्रास प्रान्त के मुख्यमंत्री तेलगु भाषी टी.प्रकाशम् हुआ करते थे .उन्होंने जिस आंध्र प्रदेश की बुनियाद डाली थी ,आज वही प्रदेश टूट की कगार पर तीसरी बार खड़ा है.उसका सबसे बड़ा कारण है भाषा ,जो एक जज्बाती मामला है.पर प्रश्न है कि आज तक तेलंगाना के विकास के लिए किसी ने कुछ नहीं किया चाहे वह टी.प्रकाशम् रहे हों या फिर नीलम संजीव रेड्डी ,पी.वी.नर्सिमाराव ,एन, टी रमाराव, नाराचंद्र बाबु रहे हों या फिर वाई एस राजशेखर रेड्डी ,या अब के रोश्या . तेलंगाना के अंतर्गत २९४ विधान सभा क्षेत्र आते हैं.जिनकी भाषा उर्दू कही जाती है.१९४६ में कामरेड वासुपुन्येया कि अगुवाई में कमुनिस्ट ने प्रथक तेलंगन कि मुहीम शुरू कि थी.उस समय इस आन्दोलन का उद्देश्य था भूमिहीनों कों भूपति बनाना.६ सालों तक यह आन्दोलन चला,लेकिन बाद में इसकी कमर टूट गई.जो बाद में नक्सलवाद में तब्दील हो गई. जिसकी कमान आज भी नक्सलियों के ही हाथ में है.उसके बाद भी पृथक तेलंगाना कों लेकर कई बार आन्दोलन चले,लेकी कोई सफलता नहीं मिली .बात केवल जनता कों रिझाने व राजनितिक रोटियां सकने तक ही रहा.सभी पार्टियों ने पृथक तेलंगाना मुद्दे कों केवल मोहरा ही बनाया है.कभी किसी पार्टी ने तेलंगाना वासियों कि भावनावों कों समझाने की कोशिश ही नहीं की, जो पार्टियाँ पहले विरोध करती थी अब वे ही समर्थन में खड़ी हैं,जो समर्थन की बात करती थी वे ही अब उसका खिलाफत कर रही हैं. एक समय तेलंगाना का समर्थन पी वी नर्सिघा राव करते थे ,लेकिन अपने कार्यकाल में उन्होंने कभी भी पृथक तेलंगाना के लिए कुछ नहीं किया.उन्होंने भी तेलंगाना कें पर तेलंगानावाशियों कों बरगलाया ही. यहाँ पर यह भी बताना जरुरी है कि भाषाई अधर पर बनने वाला आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य है, जबकि पंडित नेहरू भासी अधर पर राज्य बनने के पक्क्ष में थे ही नहीं.तब पोट्टी श्रीरामलू कि अगुवाई में आंध्र के लोग मरने मरने पर उतारू हो गए थे,जिसके लिए श्री रामलू कों अनसन के दौरान अपनी जान देनी पड़ी थी .जिससे मजबूर होकर पंडित नेहरू जी कों मज़बूरी में भासी अधर पर आन्ध्र परदेश राज्य कि मंजूरी देनी पड़ी थी.शायद आज एक बार फिर से उसी की पुनरावृति हो रही है कि चन्द्र शेखर राव कों भूख हड़ताल पर बैठन पड़ा है.उच्च ही लोगों कों याद होगा कि १९६८ में एक बार फिर तेलंगाना राज्य के लिए आन्दोलन चला था, बताते हैं कि उस समय लगभग चार सो से अधिक लोगों कों अपनी जान गवानी पड़ी थी.तब से अब तक तेलंगाना का मुद्दा अधर में ही पड़ा है. क्योंकि उस समय वरिस्थ कांग्रेसी नेता डॉ चेन्ना रेड्डी और ब्रह्मा नन्द रेड्डी कि अन्दुरुनी लड़ाई के कारण यह मामला एक बार फिर से लटक गया तो आज तक लटका ही है.यह भी जानना जरुरी है कि १९८८ के चुनाव में भारतीय जनता पारी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पृथक तेलंगाना राज्य का वादा किया था,लेकिन बाबु के सियासी मजबूरियों या फिर उनके खोफ के चलते तेलंगाना रूपि बारूद कों तीली नहीं दिखा सके . आज तेलंगन बारूद के ढेर पर बैठा है .जिसे तीली दिखाई जाती है तो भी विस्फोट होगा,नहीं दिखाई गई तो भी विस्फोट होना ही है. जरुरत है सयंम व विवेक से निर्णय लेने की. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पूरे तेलंगन में आन्दोलन जारी है, दस दिसंबर कों चलो हेदराबाद का आह्वान किया गया है,जिसे विफल करने की कोशिश राज्य सरकार कर रही है.प्रसन यह है की यदि कों निर्णय शीघ्र नहीं लिया जाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है.

Tuesday, December 1, 2009

पोशेट्टी समेत पचास नेता गिरफ्तार
निज़ामाबाद । बुधवार की सुबह जिलाधीश कार्यालय के बाहर प्रथक तेलंगाना की मांग कर रहे तेरास के प्रदेश महा सचिव ऐ एस पोशेट्टी समेत पचास से अधिक नेताओं व् कार्यकर्ताओं को गिरिफ्तर कर पुलिस स्टेसन भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए नेताओं में श्री पोशेट्टी समेत वि .प्रभाकर ,रवि चन्द,डॉ सत्य नारायण , लक्ष्मण राव,अनिल सिगल आदि। जिन्हें सहर से बीस किलोमीटर दूर माकलुर पुलिस स्टेसन में रखा गया है। पुलिस स्टेसन से ही आप की न्यूज से बात करते हुवे श्री पोशेट्टी ने कहा कि तेलंगन राज्य कि मांग करने वालों के साथ राज्य सरकार ग़लत व्यव्हार कर रही है। अब हम लोग इसी पुलिस स्टेसन मे ही भूख हड़ताल सुरु कर रहे हैं। इसबीच सहर के थ्री टाउन पुलिस स्टेसन में रखे गए तेरस शहर महा सचिव साईं कुमार ने बताया कि उन्हें पोतंगल राम कुमार ,निरंजन सिंह ,भास्कर,एवं प्रकाश गौड़ के साथ जिलाधीश कार्यालय से गिरफ्तार किया गया है.जो पुलिस जय्दाती का नमूना है.उन्हों ने आगे कहा कि अब हम लोग यहीं पर भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं। ख़बर लिखे जाने तक पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां जारी थीं।

क्या सोचती हैं औरतें!
चण्डीदत्त शुक्ल
कौन-सा पुरुष होगा, जो ना जानना चाहे—स्त्रियां उसके बारे में क्या सोचती हैं? ये पता करने का मौक़ा जयपुर में मिला, तो मैं भी छह घंटे सफ़र कर दिल्ली से वहां पहुंच ही गया। मौक़ा था—टूम-10 संस्था की ओर से सात महिला कलाकारों की संयुक्त प्रदर्शनी के आयोजन का. और विषय—द मेल!
मर्द, मरदूद, साथी, प्रेमी, पति, पिता, भाई और शोषक...पुरुष के कितने ही चेहरे देखे हैं स्त्रियों ने. कौन-सी कलाकार के मन में पुरुष की कौन-सी शक्ल बसी है, ये देखने की (परखने की नहीं...क्योंकि उतनी अक्ल मुझमें नहीं है!) लालसा ही वहां तक खींच ले गई.
जयपुरवालों का बड़ा कल्चरल सेंटर है जवाहर कला केंद्र. हमेशा की तरह अंदर जाते ही नज़र आए कॉफी हाउस में बैठे कुछ कहते-कुछ सुनते-कुछ खाते-पीते लोग.
सुकृति आर्ट गैलरी में कलाकारों की कृतियां डिस्प्ले की गई थीं. उद्घाटन की रस्म भंवरी देवी ने अदा की. पर ये रस्म अदायगी नहीं थी. पुरुष को समझने की कोशिश करते चित्रों की मुंहदिखाई की रस्म भंवरी से बेहतर कौन निभाता. वैसे भी, उन्होंने पुरुष की सत्ता को जिस क़दर महसूस किया है, शायद ही किसी और ने किया हो पर अफ़सोस...अगले दिन मीडिया ने उनका परिचय कुछ यूं दिया—फ़िल्म बवंडर से चर्चा में आईं भंवरी…!
इस मौक़े पर चर्चित संस्कृतिकर्मी हरीश करमचंदानी ने 15 साल पुरानी कविता सुनाई—मशाल उसके हाथ में. भंवरी देवी के संघर्ष की शब्द-यात्रा.
एक्जिबिशन में शामिल कलाकारों में से सरन दिल्ली की हैं. वनस्थली से उन्होंने फाइन आटर्स की पढ़ाई की है. उनका पुरुष फूल और कैक्टस के बीच नज़र आता है. कांटे और खुशबू के साथ आदमी का चेहरा. वैसे, लगता है—सरन के लिए पुरुष साथी ही है. रोमन शैली का ये मर्द शरीर से तो मज़बूत है पर उसका चेहरा कमनीय है, जैसे—चित्रकार बता रही हों...वो बाहर से कठोर है और अंदर से कोमल।
सुनीता एक्टिविस्ट हैं...स्त्री विमर्श के व्यावहारिक और ज़रूरी पक्ष की लड़ाई लड़ती रही हैं. वो राजस्थान की ही हैं. सुनीता ने स्केचेज़ बनाए हैं. उनकी कृतियों में पुरुष की तस्वीर अर्धनारीश्वर जैसी है...शायद आदमी के अंदर एक औरत तलाशने की कोशिश. लगता है—वो पुरुष को सहयोगी और हिस्सेदार समझती हैं.
संतोष मित्तल के चित्र ख़ूबसूरत हैं, फ़िगरेटिव हैं, इसलिए जल्दी ही समझ में आ जाते हैं. कलरफुल हैं पर चौंकाते हैं. उनके ड्रीम मैन हैं—अमिताभ बच्चन. इस बात पर बहस हो सकती है कि किसी स्त्री के लिए अमिताभ पसंदीदा या प्रभावित करने वाले पुरुष क्यों नहीं हो सकते! पर सवाल थोड़ा अलग है—संतोष के चित्रों में तो फ़िल्मी अमिताभ की देह भाषा प्रमुख है, उनका अंदाज़ चित्रित किया गया है. जवानी से अधेड़ और फिर बूढ़े होते अमिताभ. ख़ैर, पसंद अपनी-अपनी!
एक और कलाकार हैं सीता. वो राजस्थान के ही सीमांत ज़िले श्री गंगानगर की हैं. कलाकारी की कोई फॉर्मल एजुकेशन नहीं ली. पति भी कलाकार हैं, तो घर में रंगों से दोस्ती का मौक़ा अच्छा मिला होगा. उनकी एक पेंटिंग में साधारण कपड़े पहने पुरुष दिखता है. पर बात यहीं खत्म नहीं होती. वो दस सिर वाला पुरुष है...क्या रावण! एक और कृति में सीता ने उलटे मटके पर पुरुष की ऐसी शक्ल उकेरी है, जैसे—किसान खेतों में पक्षियों को डराने के लिए बज़ूका बनाते हैं. तो क्या इसे विद्रोह और नाराज़गी की अभिव्यक्ति मानें सीता?
मंजू हनुमानगढ़ की हैं. पिछले 20 साल से बच्चों को पढ़ाती-लिखाती रही हैं, यानी पेशे से शिक्षिका हैं. उनकी कृतियों में प्रतीकात्मकता असरदार तरीक़े से मौजूद है. तरह-तरह की मूंछों के बीच नाचता घाघरा और दहलीज़ पर रखे स्त्री के क़दम...ऐसी पेंटिंग्स बताती हैं...अब और क़ैद मंज़ूर नहीं.
ज्योति व्यास शिलॉन्ग में पढ़ी-लिखी हैं पर रहने वाली जोधपुर की हैं. प्रदर्शनी में उनके छायाचित्र डिस्प्ले किए गए हैं. चूड़ियां, गाढ़े अंधेरे के बीच जलता दीया और बंद दरवाज़े के सामने इकट्ठे तोते. ये एक बैलेंसिग एप्रोच है पर थोड़ी खीझ के साथ.
निधि इन सबमें सबसे कम उम्र कलाकार हैं. फ़िल्में बनाती हैं, स्कल्पचर और पेंटिंग्स भी. ख़ूबसूरत कविताएं लिखती हैं और ब्लॉगर भी हैं.
निधि पुरुष के उलझाव बयां करती हैं और इस दौरान उसके हिंसक होते जाने की प्रक्रिया भी. समाज के डर से सच स्वीकार करने की ज़िम्मेदारी नहीं स्वीकार करने वाले पुरुष का चेहरा अब सबके सामने है. जहां चेहरा नहीं, वहां उसके तेवर बताती देह.
एक चित्र में अख़बार को रजाई की तरह इस्तेमाल कर उसमें छिपे हुए पुरुष के पैर बाहर हैं...जैसे कह रहे हों, मैंने बनावट की बुनावट में खुद को छिपा रखा है, फिर भी चाहता हूं—मेरे पैर छुओ, मेरी बंदिनी बनो!
एक्रिलिक में बनाए गए नीले बैकग्राउंड वाले चित्र में एक आवरण-हीन पुरुष की पीठ है. उसमें तमाम आंखें हैं और लाल रंग से उकेरी गई कुछ मछलियां. ये अपनी ज़िम्मेदारियों से भागते पुरुष की चित्त-वृत्ति का पुनःपाठ ही तो है!
उनके एक चित्र में देह का आकार है...उसकी ही भाषा है. कटि से दिल तक जाती हुई रेखा...मध्य में एक मछली...और हर तरफ़ गाढ़ा काला रंग. ये एकल स्वामित्व की व्याख्या है. स्त्री-देह पर काबिज़ होने, उसे हाई-वे की तरह इस्तेमाल करने की मंशा का पर्दाफ़ाश. निधि के पांच चित्र यहां डिस्प्ले किए गए हैं।
( चण्डीदत्त शुक्‍ल। यूपी के गोंडा ज़िले में जन्म। दिल्ली में निवास। लखनऊ और जालंधर में पंच परमेश्वर और अमर उजाला जैसे अखबारों व मैगजीन में नौकरी-चाकरी, दूरदर्शन-रेडियो और मंच पर तरह-तरह का काम करने के बाद दैनिक जागरण, नोएडा में चीफ सब एडिटर रहे। अब फोकस टीवी के प्रोग्रामिंग सेक्शन में स्क्रिप्टिंग की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं। दूरदर्शन-नेशनल के साप्ताहिक कार्यक्रम कला परिक्रमा के लिए लंबे अरसे तक लिखा। आप इनसे chandiduttshukla@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं। इनका ब्लॉग है… chauraha।)

पृथक तेलंगाना की मांग को लेकर

कांस्टेबल ने स्वयं को गोली मारी
निज़ामाबाद । जिला मुख्यालय से लगभग ६० किलो मीटर दूर कमारेड्डी तहसील में राष्ट्रीय राज मार्ग नम्बर आठ पर स्थित एक मोबाईल टावर पर चढ़ कर देर रत स्वयं को गोली मर कर आत्म हत्या कर ली। कामारेड्डी से तेलगु दैनिक वार्ता के सवंदाता मोईन ने आपकी न्यूज़ को बताया की सोमवार की रात ९ बजे माचा रेड्डी पुलिस स्टेशन में तैनात क्रिस्टाया नामक कांस्टेबल एन एच ७ पर स्थित एक मोबाईल टावर पर चढ़ गया ,और ऊपर से जय तेलंगाना के नारे लगाने लगा ,यह ख़बर लगते ही कामारेड्डी के सी आई एवम एस ई ने घटना स्थल पर पहुँच कर उसे समझाने के साथ ही निचे उतर आने की बात करने लगे ,लेकिन क्रिस्टाया ने उनकी बात न मन कर ऊपर से ही जय तेलंगाना के नारे ही लगता ही रहा । इस बीच रात के ३ बज गए ,लेकिन वह नीचे नहीं उतरा ,यह घटना देख कर राज मार्ग पर लोंगो का ताँता लग गया । लेकिन आधी रात के बाद क्रिस्टाया ने ऊपर से ही कहा की बिना उसकी मौत क तेलंगाना राज्य की स्थापना नहीं हो सकती ,इतना कहने के बाद उसने अपने सरकारी बन्दुक से अपने कनपटी पर गोली मार ली,जिससे उसकी वहीं पर मौत हो गई। मंगलवार की सुबह लगभग ६ बजे टावर से उसका शव नीचे उतारा गया । जिसकी सूचना मिलते ही जिला पुलिस अधीक्षक जगमोहन रेड्डी सहित वरिष्ठ अधिकारी घटना स्थल पर पहुँच गए। एक अधिकारी क मुताबिक आत्महत्या से पहले क्रिस्टाया ने लोक गायक ग़दर से बात करने की बात कही थी ,जिस पर पुलिस ने बात भी करवाई .उस समय क्रिस्टाया ने ग़दर से भी इस बात का उल्लेख किया था की बिना उसकी मौत क तेलंगाना की स्थापना नही हो सकती है । ख़बर लिखे जाने तक तेरस क किसी बड़े नेता का बयां नहीं आया था ।