Wednesday, December 9, 2009

पृथक तेलंगाना राज्य के गठन

की प्रक्रिया शुरु होगी:चिदंबरम


अलग तेलंगाना राज्य को लेकर आंध्र प्रदेश में चल रहे आंदोलन पर दिल्ली में हुई कई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु की जाएगी.
केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने देर रात पत्रकारों को बताया कि इसके लिए राज्य विधानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा.हालांकि उन्होंने इसकी कोई तारीख़ नहीं बताई है.
इस घोषणा के बाद से हैदराबाद में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेताओं ने इसे अपनी जीत बताया है.उधर हैदराबाद में पिछले 11 दिनों से आमरण अनशन कर रहे टीआरएस के चंद्रशेखर राव को इंजेक्शन के ज़रिए कुछ तरल पदार्थ दिया गया है जिसके बाद उनकी हालत में कुछ सुधार हुआ है.चंद्रशेखर राव के बेटे के तारक रामाराव ने कहा है कि अब चंद्रशेखर राव अपना अनशन समाप्त कर देंगे.राज्य विघानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश कियाजाएगा। पी चिदंबरमप्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने रात कोई साढ़े ग्यारह बजे पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने कहा, "इसके लिए राज्य विघानसभा में समुचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा."
गृहमंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैया से कहा गया है कि 29 नवंबर, 2009 के बाद तेंलंगाना राज्य के आंदोलनकरियों और छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज सभी मुक़दमे वापस ले लिए जाएं.
उन्होंने कहा, "हम चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंतित हैं और हम सभी आंदोलनकारियों विशेषकर छात्रों से अनुरोध करते हैं कि वे अपना आंदोलन वापस ले लें."
इस सवाल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया कि यह प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा.
उनका कहना था कि प्रधानमंत्री देश में नहीं थे और उनके लौटने के बाद बैठकें हुईं और उसमें यह निर्णय लिया गया.
ख़ुशी की लहर
गृहमंत्री पी चिदंबरम की घोषणा के बाद हैदराबाद में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.इस घोषणा को टीआरएस के नेताओं ने अपनी जीत बताया है.हालांकि अभी राज्य के लोगों को मुख्यमंत्री की ओर से किसी तरह की औपचारिक घोषणा का भी इंतज़ार है.
राज्य के मुख्यमंत्री के रोसैया दिल्ली से विशेष विमान से हैदराबाद के लिए रवाना हुए हैं.
संभावना है कि वे ख़ुद निज़ाम अस्पताल पहुँचकर टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव से मिलेंगे और उनका अनशन ख़त्म करवाएँगे.अभी यह घोषणा नहीं की गई है कि राज्य विधानसभा में तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया कब शुरु की जाएगी. माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इसकी भी घोषणा कर सकते हैं.
केंद्र सरकार ने यह प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा ऐसे समय में की है जब टीआएएस की ओर से गुरुवार को छात्रों की बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी की जा रही थी.
टीआरएस की ओर से कहा गया था कि सभी विश्वविद्यालयों से एक लाख छात्र विधानसभा की ओर मार्च करेंगे.लेकिन इस घोषणा के बाद इस रैली को विजय रैली में तब्दील करने की घोषणा की गई है.
बैठकों का दौरप्रधानमंत्री के दिल्ली लौटने के साथ ही बैठकों को लंबा सिलसिला चला.
मुख्यमंत्री के रोसैया को पहले ही दिल्ली बुलवा लिया गया था.तेलंगाना के मसले पर कांग्रेस कोर ग्रुप की दो बैठकें हुई जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की.इस बीच मुख्यमंत्री के रोसैया ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात कर ली थी.कांग्रेस कोर ग्रुप की दूसरी बैठक के बाद केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम, रक्षामंत्री एके एंटनी, विधि मंत्री वीरप्पा मोइली भी सोनिया गांधी से मिलने उनके निवास पहुँचे.बैठकों के इन दौर के बाद गृहमंत्री ने अलग राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा की

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बारूद के ढेर पर बैठा तेलंगाना

के.सी.आर.की हालत बिगड़ी, आन्दोलन जारी
लगभग ४६ साल बाद एक बार फिर से आंध्र प्रदेश में पृथक राज्य तेलंगन की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस बार के इस आन्दोलन में अब तक ४० से अधिक लोंगों ने अपनी जाने तक दे दी है. इसके अलावा यह आन्दोलन जंगल में लगे आग की तरह पूरे तेलंगन में फैल चुकी है. जिसकी लपट में केवल आंध्र प्रदेश ही नहीं अपितु केंद्र सरकार की भी चूल्हें हिलने लगी है. पिछले १३ दिनों से तेलंगाना राष्ट्र समिति के मुखिया के चन्द्र शेखर राव आमरण अनशन पर बैठे हैं, जिनकी बिगड़ती हालत कों देखते हुए उन्हें हेदराबाद के निम्स (निजाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस ) भारती कराया गया है. जहाँ पर उनकी हालत गंभीर (इन पंक्तियों के लिखने तक )बनी हुई है.उधर उनकी बिगडती हालत कों देखते हुए उनकी पुत्री कविता ने बुधवार (९ दिसंबर ०९ )की सुबह निम्स जाकर अपने पिता से उनकी तबियत कों देखते अनसन ख़त्म करने की अपील की है. कविता ने यहाँ तक कह दिया है की यदि वे अनसन नहीं तोड़ते हैं तो वह भी भूख हड़ताल पर बैठ जाएँगी .इस बीच खबर मिली है की श्री राव धरम पत्नी की भी भूख से हालत बिगड़ती जा रही है उन्होंने भी पिछले कई दिनों से अपने मुंह में अन्न का एक भी दाना नहीं डाला है राजधानी हेदराबाद से मिली खबर के मुताबिक .मुख्य मंत्री के.रोशय्या यू पी ए अध्यक्ष सोनिया से मिलाने आज दिल्ली पहुँच गए हैं. जहाँ पर श्रीमती गाँधी कों उनके ६३ वें जनम दिन पर उन्हें मुबारक वाद दें गए ,वहीँ इस बात के भी कयास लगाये जारहे है की उनसे तेलंगाना मुद्दे पर भी बात-चीत कर कोई ठोस निर्णय लेने का भी आग्रह करेंगे. इधर पूरे तेलंगन क्षेत्र ,जिसमे आंध्र प्रदेश के दस जिलों (निज़ामाबाद,आदिलाबाद ,करीमनगर,वारंगल,मेदंक ,नलगोंडा,महबूबनगर ,रंगारेड्डी खम्मम एवम प्रदेश की राजधानी हेदराबाद शामिल है.) में पृथक तेलंगाना राज्य की मांग जोर पकड़ती जा रही है. अब तक चालीस से अधिक तेलंगाना समर्थको ने अपनी जानें १३ दिनों के भीतर दे चुके हैं,जिनमें छात्र ,पुलिसकर्मी,किसानों के साथ-साथ लड़कियां भी शामिल हैं इसके अलावा आगजनी,तोड़ फोड़ ,बंद रास्ता रोको का सिलसिला जारी ही है.तेलंगाना के जिलों में पिछले पंद्रह दिनों से स्कुल व कालेज तो बंद ही चल रहे हैं. जिससे पढाई का कफी नुकसान बच्चों कों उठाना पढ़ रहा है. क्या है तेलंगाना मुद्दा?बात सन १९४६ की है ,आन्ध्र प्रदेश के संसथापक पोट्टी श्रीरामलू ने तेलगु बोली बोलने वालों के लिए अपना बलिदान दे दिया था,तब भाषावार प्रान्त की रचना के लिए फज़ल अली कमीशन कों बनाया गया था.उनदिनों तेलगु भाषी प्रान्त मद्रास (अब चेन्नई) प्रान्त और निजाम हैदराबाद की रियासत में रहते थे ,मराठवाडा एवम तेलंगाना उस सियासत के हिस्सा थे. तब मद्रास प्रान्त के मुख्यमंत्री तेलगु भाषी टी.प्रकाशम् हुआ करते थे .उन्होंने जिस आंध्र प्रदेश की बुनियाद डाली थी ,आज वही प्रदेश टूट की कगार पर तीसरी बार खड़ा है.उसका सबसे बड़ा कारण है भाषा ,जो एक जज्बाती मामला है.पर प्रश्न है कि आज तक तेलंगाना के विकास के लिए किसी ने कुछ नहीं किया चाहे वह टी.प्रकाशम् रहे हों या फिर नीलम संजीव रेड्डी ,पी.वी.नर्सिमाराव ,एन, टी रमाराव, नाराचंद्र बाबु रहे हों या फिर वाई एस राजशेखर रेड्डी ,या अब के रोश्या . तेलंगाना के अंतर्गत २९४ विधान सभा क्षेत्र आते हैं.जिनकी भाषा उर्दू कही जाती है.१९४६ में कामरेड वासुपुन्येया कि अगुवाई में कमुनिस्ट ने प्रथक तेलंगन कि मुहीम शुरू कि थी.उस समय इस आन्दोलन का उद्देश्य था भूमिहीनों कों भूपति बनाना.६ सालों तक यह आन्दोलन चला,लेकिन बाद में इसकी कमर टूट गई.जो बाद में नक्सलवाद में तब्दील हो गई. जिसकी कमान आज भी नक्सलियों के ही हाथ में है.उसके बाद भी पृथक तेलंगाना कों लेकर कई बार आन्दोलन चले,लेकी कोई सफलता नहीं मिली .बात केवल जनता कों रिझाने व राजनितिक रोटियां सकने तक ही रहा.सभी पार्टियों ने पृथक तेलंगाना मुद्दे कों केवल मोहरा ही बनाया है.कभी किसी पार्टी ने तेलंगाना वासियों कि भावनावों कों समझाने की कोशिश ही नहीं की, जो पार्टियाँ पहले विरोध करती थी अब वे ही समर्थन में खड़ी हैं,जो समर्थन की बात करती थी वे ही अब उसका खिलाफत कर रही हैं. एक समय तेलंगाना का समर्थन पी वी नर्सिघा राव करते थे ,लेकिन अपने कार्यकाल में उन्होंने कभी भी पृथक तेलंगाना के लिए कुछ नहीं किया.उन्होंने भी तेलंगाना कें पर तेलंगानावाशियों कों बरगलाया ही. यहाँ पर यह भी बताना जरुरी है कि भाषाई अधर पर बनने वाला आंध्र प्रदेश देश का पहला राज्य है, जबकि पंडित नेहरू भासी अधर पर राज्य बनने के पक्क्ष में थे ही नहीं.तब पोट्टी श्रीरामलू कि अगुवाई में आंध्र के लोग मरने मरने पर उतारू हो गए थे,जिसके लिए श्री रामलू कों अनसन के दौरान अपनी जान देनी पड़ी थी .जिससे मजबूर होकर पंडित नेहरू जी कों मज़बूरी में भासी अधर पर आन्ध्र परदेश राज्य कि मंजूरी देनी पड़ी थी.शायद आज एक बार फिर से उसी की पुनरावृति हो रही है कि चन्द्र शेखर राव कों भूख हड़ताल पर बैठन पड़ा है.उच्च ही लोगों कों याद होगा कि १९६८ में एक बार फिर तेलंगाना राज्य के लिए आन्दोलन चला था, बताते हैं कि उस समय लगभग चार सो से अधिक लोगों कों अपनी जान गवानी पड़ी थी.तब से अब तक तेलंगाना का मुद्दा अधर में ही पड़ा है. क्योंकि उस समय वरिस्थ कांग्रेसी नेता डॉ चेन्ना रेड्डी और ब्रह्मा नन्द रेड्डी कि अन्दुरुनी लड़ाई के कारण यह मामला एक बार फिर से लटक गया तो आज तक लटका ही है.यह भी जानना जरुरी है कि १९८८ के चुनाव में भारतीय जनता पारी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में पृथक तेलंगाना राज्य का वादा किया था,लेकिन बाबु के सियासी मजबूरियों या फिर उनके खोफ के चलते तेलंगाना रूपि बारूद कों तीली नहीं दिखा सके . आज तेलंगन बारूद के ढेर पर बैठा है .जिसे तीली दिखाई जाती है तो भी विस्फोट होगा,नहीं दिखाई गई तो भी विस्फोट होना ही है. जरुरत है सयंम व विवेक से निर्णय लेने की. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पूरे तेलंगन में आन्दोलन जारी है, दस दिसंबर कों चलो हेदराबाद का आह्वान किया गया है,जिसे विफल करने की कोशिश राज्य सरकार कर रही है.प्रसन यह है की यदि कों निर्णय शीघ्र नहीं लिया जाता है तो स्थिति और बिगड़ सकती है.

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