Tuesday, August 31, 2010

अब जीमेल खुद बतायेगा , कौन सा ईमेल पहले पढ़ें

सर्च इंजन गूगल ने अपनी मुफ्त ईमेल सुविधा का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक नया टूल जारी किया है. इसके जरिए जीमेल में लोग अपने ईमेल की वरीयता तय कर सकेंगे और रोज आने वाली ईमेल की बाढ़ से बच सकेंगे.
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अब जीमेल खुद बतायेगा ,
कौन सा ईमेल पहले पढ़ें
इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने अपनी मुफ्त ईमेल सुविधा का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक नया टूल जारी किया है. इसके जरिए जीमेल में लोग अपने ईमेल की वरीयता तय कर सकेंगे और रोज आने वाली ईमेल की बाढ़ से बच सकेंगे. सोमवार 30अगस्त की देर शाम इस नए टूल की घोषणा की गई. इसे प्रायोरिटी इनबॉक्स नाम दिया गया है. यह आने वाले ईमेल को तीन श्रेणियों में बांट देता है. इसका ऑटोमैटिक प्रोग्राम बिना पढ़े महत्वपूर्ण मैसेज एक जगह रखता है. वे मैसेज अलग जगह होते हैं, जिन्हें इस्तेमाल करने वालों ने स्टार कैटिगरी में रखा है. और बाकी सब ईमेल अलग जगह रखे जाते हैं.गूगल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर डग आबेरडीन ने कहा, "कौन से मैसेज ज्यादा अहम हैं, इसका फैसला करने के लिए जीमेल बहुत सारे सिग्नलों का इस्तेमाल करती है. और जैसे जैसे आप जीमेल को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, यह बेहतर होता जाएगा. तब आपके मैसेजों की छटनी यह और बेहतर तरीके से करेगा."डग इसे आसान शब्दों में समझाते हुए कहते हैं कि उन लोगों के मैसेज को ज्यादा अहमियत दी जाएगी, जिन्हें आप ज्यादा ईमेल भेजते हैं. गूगल की साइट के मुताबिक रोजाना 294 अरब ईमेल भेजे जाते हैं. इस हिसाब से इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता औसतन 150 मैसेज भेजते या पाते हैं.डग कहते हैं, "लोग हमें हमेशा बताते रहते हैं कि उन्हें ज्यादा ईमेल मिल रहे हैं और अक्सर वे इससे काफी खुश होते हैं। लेकिन किस मेल को पहले पढ़ना चाहिए और किसे बाद में, इस बात का फैसला करने में वक्त खर्च होता है." जीमेल का यह नया टूल इसी वक्त को बचाने की कोशिश है.
साभार :डच रेडियो,जर्मन





Monday, August 30, 2010



बरसात के चलते
चारमीनार को नुकसान

हैदराबाद। लगातार हो रही तूफ़ानी बारिश के कारण नवाबों के शहर हैदराबाद की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक चारमीनार को नुक़सान पहुँचा है। इसे देखकर स्‍थानीय लोगों में बेचैनी है। रविवार रात लगातार कई घंटों की भारी बारिश के कारण चारमीनार की एक मीनार की दूसरी मंजिल से कुछ मलबा टूट कर नीचे गिर गया जिसके बाद इलाक़े में दहशत फैल गई और चार सौ वर्ष पुराने इस भवन की सुरक्षा को लेकर अफ़वाहें चल निकलीं।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण-पूर्व छोर की मीनार के कुछ कंगूरे अचानक टूट गए। मलबे का कुछ हिस्सा वहां से गुजरती हुई एक कार पर भी गिरा और लोग डरकर भाग खड़े हुए।इस स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उस जगह को घेर लिया और व्यस्त सड़क का ट्रैफिक रोक दिया। लेकिन बाद में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चारमीनार को कोई नुक़सान नहीं पहुँचा है और उसका ढांचा सुरक्षित है।राज्य के पुरातत्व विभाग के निदेशक चन्ना रेड्डी ने कहा कि केवल ऊपरी नुक़सान पहुँचा है जिसकी मरम्मत की जा सकती है। इससे पहले पश्चिमी छोर की मीनार का एक बड़ा टुकड़ा भी इसी तरह टूट कर गिर पड़ा था।इन घटनाओं ने चारमीनार की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं और स्थानीय लोग सरकारी अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि वो इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं।हर रोज़ हजारों पर्यटक चारमीनार को देखने आते हैं और उन्हें केवल पहली मंजिल पर चढ़ने की अनुमति दी जाती है। ये ऐतिहासिक इमारत 1591 में मोहम्मद क़ुतुब शाह ने बनवाई थी और ये विश्व में अपनी तरह का एक अलग स्मारक माना जाता है।

SRIRAM SAGAR ,NIZAMABAD

श्रीराम सागर के नौ गेट खोले गए
निज़ामाबाद , रविवार की शाम दक्षिण की गंगा कही जाने वाली गोदावरी नदी पर निज़ामाबाद जिले के आरमुर तहसील मे पोचमपाड में बने श्रीराम सागर परियोजना(पोचमपाड डैम) केनौ गेट खोल दिए गए.क्यों कि गोदावरी नदी के उपरी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण जिला प्रशासन कों यह निर्णय लेना पड़ा.उल्लेखनीय है कि 1091 फीट जल संग्रहण कि क्षमता वाले इस परियोजना में रविवार कि दोपहर तक 1090 .10 फीट तक पानी का जमाव हो चुका था.इस सन्दर्भ में परियोजना के अधिकारियों के मुताबिक प्रति घंटा 60 हजार क्यूसेक पानी डैम में जमा हो रहा है.वहीँ गोदावरी के उपरी क्षेत्र महाराष्ट्र के नादेड ,परभणी नासिक जिलों में हो रही भारी बर्षा के कारण पानी का इनफ्लो तेजी से बढ़ रहा है.वहीँ दूसरी ओर मंजीरा नदी एवम नांदेड के विषाणुपूरी डैम से भी पानी छोड़ा जा रहा है.पता हो कि गत वर्ष अगस्त के अंतिम सप्ताह में कुल 1049 .10 फीट तक ही पानी जमा हुआ था.अधिकारियों के मुताबिक गोदावरी का पानी काकतिया,सरस्वती एवम लक्ष्मी नहरों द्वारा छोड़ा जा रहा है.इन सभी गेटों से 16 हजार क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है.उल्लेखनीय है कि गोदावरी नदी पर बना श्रीरा सागर सबसे बड़ा डैम है ,जिसमे 42 गेट बनाये गए हैं .जबकि औरंगाबाद (महाराष्ट्र )के पैठन में बना दूसरे नंबर का डैम है.श्री राम सागर परिय्जना कि आधारशिला 1957 में तत्कालीन प्रधान मंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू ने रखी थी.यह डैम राष्ट्रिय राज मार्ग नंबर 7 पर स्थित है. इस परियोजना से निज़ामाबाद,आदिलाबाद,नलगोंडा,वारंगल,करीम नगर एवम खम्मम जिले के किसानो कों सिंचाई का लाभ मिलता है.

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Thursday, August 26, 2010


पत्रकार कुमार केतकर को
तिलक जीवन गौरव पुरस्कार
महाराष्ट्र सरकार द्वारा हर साल दिया जाने वाला लोकमान्य तिलक जीवन गौरव पुरस्कार( सन 2009 - 2010 का) पत्रकारिता में विशेष योगदान के लिये लोकसत्ता के मुख्य संपादक कुमार केतकर कों दिए जाने की घोषणा राज्य ने की है. जिसके तहत पुरस्कार ग्रहिता कों 51 हजार रुपये नकद,स्मृति चिन्ह एवं सम्मानपत्र प्रदान किया जाता है.इससे पहले मराठी दैनिक नवाकाल के संपादक नीलकंठ खाडिलकर ,महाराष्ट्र टाइम्स के पूर्व संपादक गोविन्द तलवलकर कों दिया जा चुका है. पता हो कि श्री केतकर पिछले चालीस वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हैं ,आजकल वे इन्डियन एक्सप्रेस समूह के मराठी दैनिक "लोकसत्ता"के मुख्य संपादक के पद पर कार्यरत हैं.इससे पहले उनहोने महाराष्ट्र टाइम्स एवम लोकमत अखबार मुख्य संपादक का दायित्व निभाया था.इसके अलावा उनहोने ने डेली आब्जर्वर के स्थानीय संपादक एवम इकोनामिक्स टाइम्स के विशेष सवाददाता के रूप में भी कम किया है.
श्री केतकर के पत्रकारिता में किये गए कार्य कों देखते हुए सन 2001 में केंद्र सरकार ने उन्हें "पदमश्री "सम्मान से नवाजा था.वहीँ अंतरराष्ट्रिय स्तर पर समाचार संकलन के लिये "जाएंट्स इंटरनेशनल"पुरस्कार " भी उन्हें दिया जा चुका है. वहीँ "राजीवगांधी पुरस्कार", "नवरतन" तथा "रत्न दर्पण "जैसे महत्व पूर्ण सम्मानों से श्री केतकर जी कों नवाजा जा चुका है.आर्थिक विषय पर लिखने के लिये श्री केतकर कों "सी.डी.देशमुख "पुरस्कार के लिये चुना गया है.उनहने देश-विदेश के विश्व विधालयों में अनेकों विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये हैं. कई देशों कि यात्रायें भी कि हैं.

Friday, August 20, 2010

अब पर्यटकों कों आकर्षित
करेंगी सायना नेहवाल
दुनिया क़ी दूसरे नंबर क़ी बैडमिन्टन खिलाडी खेल रत्न से सम्मानित सायना नेहवाल अब आन्ध्र प्रदेश के पर्यटन स्थलों कों दिखने के लिये देशी-विदेशी पर्यटकों कों लुभाएँगी. जिसके लिये आन्ध्र प्रदेश सरकार ने सायना कों राज्य का नया ब्रांड दूत बनाने का फैसला किया है.प्रदेश के पर्यटन सचिव जयेश रंजन के मुताबिक उनहोने ब्रांड दूत बनाने कि मंजूरी भी दे दी है.जिसके लिये शीघ्र ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होंगे. दुनिया कि दूसरे नंबर कि खिलाडी सायना नेहवाल आगामी 27 सितम्बर विश्व पर्यटन दिवस पर अपनी यह जिम्मेदारी संभालेंगी .इस समय सानिया 23 अगस्त कों पेरिस में होने वाली विश्व चेम्पियनशिप क़ी तैयारी में लगी हैं.सायना के शब्दों मे "आन्ध्र प्रदेश का ब्रांड दूत बनाने पर में अपने कों गौरवानित महसूस कर रही हूँ,इसी के साथ मुझे उम्मीद है कि बैडमिन्टन में भी मेरा अच्छा प्रदर्शन रहेगा".इस बारे में आन्ध्र प्रदेश कि पर्यटन मंत्री श्रीमती (डा.)गीता रेड्डी कहती हैं कि "सानिया दुनिया भर में खेलती है,विश्व बैडमिन्टन में उसके वर्तमान स्थिति कों देखते हुए वह आंध्र प्रदेश का बखूबी प्रचार कर सकेगी.इससे हमारे पर्यटन कों काफी बढ़ावा मिलेगा हालही में लगातार तीन ख़िताब जीतकर जीत का हैट्रिक बनाने वाली सानिया मूलतः हरियाणा की रहने वाली है,जिसने अब हैदराबाद कों अपना घर बना लिया है".इससे पहले सायन के कोच एवम आल इंग्लेंड चेम्पियन पुलेला गोपीचंद भी प्रदेश के ब्रांड दूत रह चुके हैं,वहीँ टेनिस स्टार सानिया मिर्जा (अब सानिया सोयब मलिक) भी यह जिम्मेदारी निभा चुकी हैं .17 मार्च कों हरियाणा के हिसार जिले में जन्मी बीस वर्षीय सायना ने उस उम्र में बैडमिन्टन थामा जब बच्चे खासकर लड़कियों के हाथों में गुड्डे-गुड़ियाँ होते हैं या फिर वे टी.वी.पर कार्टून देखतें हैं.माता-पिता दोनों के बैडमिन्टन खिलाडी होने के कारण सायना का भी बचपन से ही बैडमिन्टन की ओर झुकाव हुआ.वैज्ञानिक पिता हरवीर सिंह ने बेटी की रूचि कों देखते हुए उसे अपना पूरा सहयोग प्रोत्सहन दिया.आठ साल की उम्र में सायना ने अपने नन्हें व कोमल हाथों में बैडमिन्टन थाम लिया.सन 2006 में सायना ने एशियन सेटलाइट चेम्पियनशिप जीती.वहीँ सानिया ओलिम्पिक खेलों में महिला एकल बैडमिंटन के क्वार्टरफाइनल तक पहुँचने वाली वे देश की पहली महिला खिलाड़ी हैं. पता हो कि सायना कि पिता डॉ. हरवीर नेहवाल एवम माता श्रीमती उषा रानी हरियाणा राज्य के लिये बैडमिन्टन खेला करते थे. माता पिता ने उसके प्रतिभा कों पहचाना ,ओंर उनहोने सायना कों उसके गुर सिखाने लगे.माता -पिता के बाद सायना कों बैडमिन्टन सिखाने का काम उसके गुरु एस.ऍम आरिफ ने संभाला ,बाद में गोपीचंद अकादमी के मुखिया पी.गोपीचंद ने सायना कि कमजोरियों कों दूर किया,साथ ही विरोधियों कों छकाने कि कला भी सिखलाई. जिस समय सायना बैडमिन्टन से खेल रही थी उस समय अर्पणा पोपट की बैडमिन्टन की दुनिया में तूती बोलती थी. उस समय किसी भारतीय महिला का पोपट के सामने खेलना भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी.उसी दोरान सायना कों एशियन सेटेलाइट बैडमिन्टन चैम्पियनशिप में अर्पणा पोपट के खिलाफ खेलने का मोका मिला और उसने अपनी चपलता भरे प्रदर्शन से पोपट कों हरा कर जीत हासिल कर ली.फिर क्या था,सायना ने धीरे -धीरे सफलता के परचम लहराना शुरु कर दिया.उसे लोग "सायना शायनिग" के नाम से पुकारने लगे.सन 2003 में मात्र 13 साल की उम्र में सायना ने चेकोस्लोवाकिया जूनियर ओपन का ख़िताब जीत कर अपने नाम कर बैडमिन्टन की दुनिया कों अपनी प्रतिभा से अवगत कराया .सन 2004 में उसने आस्ट्रेलिया में हुए यूथ कामनवेल्थ गेम में उसने रजत पदक प्राप्त किया और .इसी साल उसने एशियन सेटेलाइट बैडमिन्टन का ख़िताब भी अपने नाम कर लिया.सन 2006 सायना के लिये काफी लाभदायक रहा,इस साल जहाँ उसने विश्व जूनियर बैडमिन्टन चैम्पियनशिप की उप विजेता बनी,वहीँ कामनवेल्थ गेम में उसने कांस्य पदक भी हथियाया .इसी साल सायना ने फिलिपिन्स ओपन ग्रां.पी. का ख़िताब भी अपनी झोली में कर लिया.2008 में सायना कों बैडमिन्टन वर्ल्ड फेडरेशन ने "मोस्ट प्रमिसिंग प्लेयर आफ द इयर-2008 "के रूप में चुना.यह सम्मान प्राप्त करने वाली सायना पहली भारतीय महिला खिलाडी थी.इसी साल के अंतिम माह में उसने विश्व रैकिंग में दसवां स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा खेल प्रेमियों कों मनवा दिया.सन 2009 में सायना ने इंडोनेशिया ओपन ख़िताब जीत कर पहली भारतीय महिला खिलाडी बनी ,इस प्रतियोगिता में सायना ने चीन की खिलाडी यिहान वांग कों दूसरे एवम जिम्वांग कों तीसरे पायदान पर पहुंचा दिया.इस साल 27 जून कों हुए इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरिज बैडमिन्टन का ख़िताब जीत कर वह विश्व वरीयता के क्रम में इतिहास रचाने वाली विश्व की दूसरे नंबर की खिलाडी बन गई जकार्ता में ख़िताब जीतने के बाद एक माह में लगातार तीन ख़िताब (हैट्रिक) जीतने वाली सायना एक बार फिर पहली भारतीय खिलाडी बन गई.उसने जून 2010 में इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरिज बैडमिन्टन टूर्नामेंट ,हैदराबाद में आयोजित ओपन ग्रां.पी. और सिंगापूर में सुपर सीरिज कों अपने कब्जे में कर पहली महिला खिलाडी बन गई . वहीँ इस साल भारत सरकार 28 अगस्त कों सायना नेहवाल कों "खेल रत्न" सम्मान से सम्मानित करने जा रही है.अब वही सायना देश -विदेश के पर्यटकों कों आकर्षित कर आन्ध्र प्रदेश के पर्यटन उद्योग कों बढ़ावा देंगी.
प्रदीप श्रीवास्तव

Friday, August 13, 2010

63 वीं स्वतंत्रता दिवस पर विशेष

63 वीं स्वतंत्रता दिवस पर विशेष
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हम सभी भूल चूके हैं राष्ट्रीय ध्वज
के
निर्माता "पिंगली वेंकैय्या" को


पंद्रह अगस्त कों जहाँ हम स्वतंत्रता दिवस कि 63 वीं वर्ष गांठ मना रहे होंगे वहीँ दूसरी ओर अपने राष्ट्रीय झंडे क़ी संरचना करने वाले पिंगली वेंकैय्या कों कोई भी याद तक नहीं करेगा.राष्टरीय ध्वज क़ी डिजाईन तैयार करने वाले स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या का जन्म आन्ध्र प्रदेश के कृष्ण जिले के "दीवी" तहसील के "भटाला पेनमरू " नामक गाँव में दो अगस्त 1878 कों हुई थी,उनके पीटा का नाम पिंगली ह्न्मंत रायडू एवम माता का नाम वेंकटरत्न्म्मा था. पिंगली वेंकैय्या ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू एवम मछलीपट्टनम से प्राप्त करने के बाद १९ वर्ष कि उम्र में मुंबई चले गए .वहाँ जाने के बाद उनहोने सेना में नौकरी कर ली,जहाँ से उन्हें दक्षिण अफ्रीका भेज दिया गया .सन 1899 से 1902 के बीच दक्षिण अफ्रीका के "बायर " युद्ध में उन्होंने भाग लिया.इसी बीच वहाँ पर वेंकैय्या साहब क़ी मुलाकात महात्मा गाँधी जी से हो गई,वे उनके विचारों से काफी प्रभावित हुए ,स्वदेश वापस लौटने पर मुंबई (तब मुंबई कों बम्बई कहा जाता था) में रेलवे में गार्ड की नौकरी में लग गए.इसी बीच मद्रास (जिसे चेन्नई के नाम से पुकारते हैं)में प्लेग नामक महामारी के चलते कई लोंगों की मौत हो गई जिससे उनका मन व्यथित हो उठा,और उनहोने वह नौकरी भी छोड़ दी. वहाँ से मद्रास में प्लेग रोग निर्मूलन इन्स्पेक्टर के पद पर तैनात हो गए.स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या का संस्कृत ,उर्दू एवम हिंदी आदि भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी. इसके साथ ही वे भू-विज्ञानं एवम कृषि के अच्छे जानकर भी थे.बात सन 1904 की है जब जापान ने रूस कों हरा दिया था.इस समाचार से वे इतना प्रभावित हुए की उन्हों तुरंत जापानी भाषा सीख ली.उधर महात्मा गाँधी जी का खड़ी आन्दोलन चल ही रहा था,इस आन्दोलन ने भी पिंगली वेंकैय्या के मन कों बदल दिया.उस समय उनहोने अमेरिका से कम्बोडिया नामक कपास की बीज का आयात ओउर इस बीज कों भारत के कपास बीज के साथ अंकुरित कर भारतीय संकरित कपास का बीज तैयार किया .जिसे (उनके इस शोध कार्य के लिये ) बाद में " वेंकैय्या कपास "के नाम से जाना जाने लगा.उधर ब्रिटिश सरकार ने स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या कों "रायल एग्रीकल्चरल सोसायटी ऑफ़ लन्दन "का सदस्य के रूप में मनोनीत कर उनके गौरव कों बढाया .सन 1906 में भातीय राष्ट्रीय कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन कलकत्ता में हुआ,जिसकी अध्यक्षता "ग्रेंड ओल्ड मैन"के नाम से जाने जाने वाले दादा भाई नौरोजी ने की थी,इस सम्मेलन में दादा भाई नौरोजी ने स्व.पिंगली वेंकैय्या के द्वारा निःस्वार्थ भाव से किये गए कार्यों की सरहना की ,बाद में उन्हें राष्ट्रीय कांग्रेस का सदस्य मनोनीत कर दिया गया. कांग्रेस के इस अधिवेशन में "यूनियन जैक " का झंडा फहराया गया था,जिसे देख कर स्व.पिंगली वेंकैय्या का मन द्रवित हो उठा.उसी दिन से वे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की संरचना में लग गए.1916 में उन्हों ने "ए नेशनल फ्लैग फार इण्डिया" नामक एक पुस्तक प्रकाशित की,जिसमे उनहोने राष्ट्रीय ध्वज के तीस नमूने प्रकाशित किये थे.पॉँच साल बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक सन 1921 में विजयवाड़ा में हुई तो उसमे महात्मा गाँधी जी ने सभी कों स्व.पिंगली वेंकैय्या द्वारा तैयार किये गए राष्ट्रीय ध्वज के चित्रों की जानकारी दी.इसी बैठक में स्व.पिंगली वेंकैय्या जी द्वारा बनाये गए राष्ट्रीय ध्वज क़ी डिजाईन कों महात्मा गाँधी ने मान्यता दी.इस सन्दर्भ में महात्मा गाँधी ने "यंग इण्डिया" नामक अख़बार के सम्पादकीय में " आवर नेशनल फ्लैग " शीर्षक से लिखा कि"राष्ट्रीय ध्वज के लिये हमें बलिदान देने कों तैयार रहना चाहिए,वे आगे लिखते हैं कि मछलीपट्टनम के आन्ध्रा कालेज के पिंगली वेंकैय्या ने देश का झंडा के सन्दर्भ एक पुस्तक प्रकाशित क़ी है ,जिसमे उनहोने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज से सम्बंधित अनेकों चित्र प्रकाशित कियर हैं ,जिसके लिये में उनके श्रम कों देखते हुए उनका आदर करता हूँ ". गाँधी जी अपने सम्पादकीय में आगे लिखते हैं कि "जब मैं विजयवाड़ा के दौरे पर था उस दौरान पिंगली वेंकैय्या ने मुझे हरा एवम लाल रंगों से बने बिना चरखों वाले केई चित्र बनाकर दिए थे .हर झंडे की रूप-रेखा पर उन्हें कम से कम तीन घंटे तो लगे ही थे.मैं ने उन्हें एक झंडे मैं बीच मैं सफ़ेद रंग की पट्टी डालने की सलाह दी,जिसका उद्देश्य था कि सफ़ेद रंग सत्य व अहिंसा का होता है.उन्हों ने इसे तुरंत मान लिया " .इसी के बाद पिंगली वेंकैय्या द्वारा किये गए झंडे का नाम "झंडा वेंकैय्या " लोगों के बीच लोक प्रिय हो गया.चार जुलाई 1963 कों श्री पिंगली वेंकैय्या का निधन हो गया. भारतीय डाक-तार विभाग ने 12 अगस्त 2009 कों यानि उनके निधन के पूरे 46 साल बाद स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या पर एक पॉँच रुपये का डाक टिकट जारी किया.सिमित संख्या मैं जारी इस डाकटिकट कों महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले के वरिष्ट पत्रकार एवम डाक-टिकट संग्रहक मोती चाँद मुथा के पास देखा जा सकता है.दुःख तो इस बात कि है कि स्वर्गीय पिंगली वेंकैय्या द्वारा किये गए कार्य कि न तो भारत सरकार ने न ही कांग्रेस ने सही ढंग आदर दिया है.
प्रदीप श्रीवास्तव

Wednesday, August 11, 2010

पृथक तेलंगाना राज्य



पृथक तेलंगाना राज्य का मामला
एक बार फिर केंद्र के पाले में
हाल में तेलंगाना के 119 विधान सभा सीटों में से मात्र 12 बारह सीटों के लिये हुए उप चुनाव में ग्यारह सीटों पर तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की वहीँ एक मात्र निज़ामाबाद शहर की सीट पर( तेलंगाना राष्ट्र समिति द्वारा समर्थित ) भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वाई लक्ष्मीनारायण की झोली में फिर से जाने के बाद यह कहा जा सकता है कि इस चुनाव परिणाम से पूरे तेलंगाना क्षेत्र की जनाभिव्यक्ति नहीं है,लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है किबारह सीटों के लिये हुए यह चुनाव केवल विधान सभा की खाली हुई बारह सीटों कों भरने का उपक्रम नहीं ,बल्कि तेलंगाना क्षेत्र में कराया गया एक जनमत संग्रह था.क्यों कि इन बारह सीटों के चुनाव से तेलंगाना क्षेत्र की सभी 119 सीटों की जनभावनाएं सिमटी हुईं थीं प्रथक तेलंगाना की मांग के सन्दर्भ मे केंद्र सरकार द्वारा गठित श्री कृष्णा समिति के सामने पूरे क्षेत्र का यह सर्वाधिक सशक्त प्रमाणिक दस्तावेज है.जिसे समिति अपने रिपोर्ट बना सकती है .वैसे निराने तो केंद्र सरकार कांग्रेस अध्यक्ष कों ही लेना है.लेकिन चुनाव परिणामों से इतना तो कहा ही जा सकता है कि इस मामले में अब संदेह कि कोई गुंजाईश नहीं रह गई है कि तेलंगाना क्षेत्र की वास्तविक आकांक्षा क्या है.सही मायने में देखा जाय तो 30 जुलाई ,दिन शुक्रवार वर्ष 2010 का दिन भी तेलंगाना के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो गया .27 जुलाई कों मतदान तो केवल चुनाव की औपचारिकता भर थी.इस दिन तो पूरे तेलंगाना क्षेत्र के चार करोड़ निवासियों कि पृथक राज्य कि कामना अट्टहास कर रही थी.क्यों कि प्रथक तेलंगाना एवम सयुंक्त आंध्र ,दोनों नावों पर पेर रखने वालों का सूपड़ा साफ होगया था.सबसे बुरा हाल तो तेलुगु देशम पार्टी के मुखिया नारा चन्द्र बाबू का हुआ ,जिनके प्रताशियों की जमानत तक नहीं बचा सकी. ये वही बाबू हैं जिन्होंने तेलंगाना एवम आन्ध्र कों अपनी दोनों आखें बता रहे थे ,और ठीक चुनाव के पहले बभाली बांध परियोजना का हंगामा खड़ा कर लोंगों का ध्यान तेलंगाना से हटा कर बभाली की तरफ बटाना चाहते थे लेकिन चुनाव में वे चौथे स्थान पर रहे. कुल मतदान का आठवां हिस्सा भी उनकी झोली में नहीं गिरा. जिसे देख कर कहा जा सकता है कि तेलंगाना क्षेत्र में में उनकी पार्टी के लिये अस्तित्व का ही खतरा पैदा होगया है. शायद यही कारण हैकि उनकी पार्टी के कई नेता उनका साथ छोड़कर तेरास का दमन थाम रहे हैं.वहीँ कांग्रेस कों भी कोई सफलता नहीं मिली ,एक भी सीट उन्हें भी नहीं मिली .लेकिन तेदेपा से उनकी स्थिति बेहतर कही जा सकती है.शायद कांग्रेसी नेताओं कि मज़बूरी थी कि उन्हें पार्टी हाई कमान के आदेश कों मानना मज़बूरी थी, लेकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी श्रीनिवास (निज़ामाबाद शहर से कांग्रेस प्रत्याशी) कों जनता ने कतई माफ़ नहीं किया .उन्हें लगातार दूसरी बार हर का सामना करना पड़ा.वे अंतिम chhdon तक अपनी राजनितिक महत्वकाक्षावों के लिये अपना स्वर बदलते रहे.लेकिन जनता ने इस बार भी उन्हें नकार दिया.श्री श्रीनिवास कों लगा था कि इस बार जीतने के बाद वे मुख्य मंत्री सही काम से काम उप मुख्यमंत्री तो बन ही जायेंगे. सन 2004 के चुनाव में उनहोने तत्कालीन मुख्य मंत्री वाई एस राज शेखर रेड्डी के साथ मील कर काफी मेहनत की थी ,जिसके परिणाम स्वरुप प्रदेश में काफी समय बाद कांग्रेस की सरकार बनी.अभी से डी एस की नज़र मुख्य मंत्री की कुर्सी पर टिकी हुई है.उस समय वाई एस की पदयात्रा की सफलता ने उन्हें मुख्य मंत्री बनवा दिया था ,इसी के चलते उस समय मुख्य मंत्री की कुर्सी उनके हाथ से फिसल गई.फिर आया पूरे पॉँच साल बाद चुनाव का मौका .सन 2009 के चुनाव में डी एस अंतिम चरण में अपने अल्पसंख्यकों के लिये दिए एक बयान "जो आप की तरफ उंगली उठायेगा,उसके हाथ काट दूंगा" से हिन्दू मतदाता उनके खिलाफ हो गए ,फिर क्या सभी ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारवाईलक्ष्मी नारायण कों जीता कर विधान सभ में भेज दियाइसी बीच वाई एस की एक दुर्घटन में मौत हो गई,उस समय भी डी एस कों उम्मीद थी की वे ही मुख्य मंत्री बनेंगे लेकिन विधान सभा के सदस्य होने के कारण इस बार भी वे चुक गए अपने लक्ष्य से.इसी दौरान पृथक तेलंगाना राज्य की मांग ने जोर पकड़ा ,कई छात्रों तेलंगाना समर्थकों ने अपनी जन तक दे डाली,जिसके चलते तेलंगाना के कई विधायकोने तेलंगाना की मांग के समर्थ में इस्तीफा दे दिया,जिनमे 12 विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिये गए,जिनमे निज़ामाबाद शहर विधयक लक्ष्मी नारायण भी शामिल थे.फिर उप चुनाव की घोषणा हुई,जिसके बाद डी एस कों लगा की इस बार वह जरुर जीत जाएँगे.इस उप चुनाव में उनहोने पैसा पानी की तरह बहाया ,बताते हैं की कम से कम तीस से चालीस करोड़ खर्च किये.लेकिन वे सफल नहीं हो पाए ,लगातार दूसरी बार हर के चलते उनके राजनैतिक जीवन पर एक प्रश्न लग गया .चुनाव के दौरान वे एक ही रात लगाते रहे की तेलंगन की मांग कों केवल कांग्रेस ही पूरी कर सकती है.इस बीच उन्हों ने यह संकेत भी देने शुरू कर दिए कि चुनाव में जीत के बाद वे मुख्य मंत्री या उप मुख्य मंत्री तो जरुर बनेंगे ,तब तेलंगाना का भाग्य पलट देंगे.लेकिन तेलंगाना कि जनता ने उनके इन वायदों कों झुठलाते हुए उन्हें विधान दभा में ही जाने से रोक दिया.मजे कि बात यह हैकि इस चुनाव में उनकी पार्टी के कि भी बड़े नेता ने प्रचार ही नहीं किया,यहाँ तक कि मुख्य मंत्री रोश्य्या ने भी नहीं .यही हाल टी डी पी का रहा .
उनके प्रमु बाबू ने भी प्रचार कि जहमत उठाने कि कोशिस नहीं की,उन्हें लगा की बभाली का मुद्दा उनके लिये राम बाढ़ सिद्ध होगा. लेकी पाशा ही पलट गया ,बभाली मामला उनके गले की हादी बनगया.ते.दे.पे प्रत्याशी .नरसा रेड्डी की जमानत ही जब्त हो गई .सभी बारह सीटों पर उनके प्रत्याशी हर गए.उल्लेखनीय है की टी.आर.एस.मुखिया के.चन्द्र शेखर राव अपने चुना अभियान में जुटे रहे उनहन ने बाबू के बभाली अभियान पर जरा सा भी धयान नहीं दिया,साया वह इस बात कों समझ रहे थे की "लक्ष्य भटकाव नुकसान पहुंचा सकता है.यह उनका अपना निजी अनुभव भी रहा होगा.इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि यह चुनाव उनके जीवन-मृत्यु का प्रश्न था?अगर एक भी सीट कम आती तो यही कहा जाता कि सम्पूर तेलंगाना पृथक तेलंगाना के पक्ष में नहीं है.यकीन अब किसी कों इस बात में नहीं है कि तेलंगाना की जनता स्वतंत्र राज्य नहीं चाहती.शायद राव साहेब के लिये यह चुनाव एक चुनौती थी जिसे उन्हों ने स्वीकार कर साबित कर दिया की यह चुनाव सत्ता के लिये नहीं था. तभी तो चुनाव की घोषणा के बाद उन्हों ने कह दिया कि जरुरत पड़ी तो उनके विधायक फिर अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं.श्री राव का यह भी मानना है कि चुनाव जीतने का मतलब यह नहीं है कि वे चार साल तक विधान सभा में बैठ कर बिताएंगें.तभी तो वह कहते हैं कि "हम विधानसभा क़ी फिर से सदयस्ता प्राप्त करने के लिये चुनाव में नहीं उतारे थे,बल्कि पृथक तेलंगाना क़ी जनभावना कों प्रमाणित करने के लिये मुकाबले में उतरे थे. इसी लिये उनहोने केंद्र सरकार से मांग क़ी है कि वह इस चुनाव के परिणामों कों जनमत संग्रह कि तरह स्वीकार पृथक राज्य के लिये सीधे लोकसभा में प्रस्ताव पेश करे.इसके साथ ही उनहोने अपने कार्यकर्ताओं कों भी सलाह दी है कि वे बहुत उत्तेजित हों,क्योंकि इस चुनाव परिणामों ने उनके कंधे पर एक जबरदस्त जिम्मेदारी दल डी है.बात जो भी हो इस चुनाव परिणामों से एक बात तो सिद्ध हो गई है कि तेलंगाना कि जनता अलग राज्य चाहती है ,इस लिये केंद्र सरकार कों तेलंगाना राज्य कि मांग स्वीकार कर लेनी चाहिए.इस उपचुनाव परिणामो से श्री कृष्ण समिति कों भी अब कोई खास मशक्कत करने कि कोई जरुरत नहीं है.समिति चाहे तो 31 दिसंबर के पहले ही अपनी रिपोर्ट सरकार कों सौंप दे.अगर ऐसा नहीं होता है तो तेलंगाना कि जनता एक बार फिर से आन्दोलन के लिय सड़क पर उतर सकती है,किसका परिणाम सन 1968 -69 एवम 2009 के आन्दोलन से कही भयंकर होगा.अब कुल मिला कर इतना तो जरुर कहा जा सकता है कि गेंद अब फिर केंद्र सरकार के पाले में है. परन्तु वह किस तरह खेलती है ,यह देखना होगा.
प्रदीप श्रीवास्तव