Tuesday, August 3, 2010

प्रधानमंत्री के साथ रोशय्या व
चव्हाण की बैठक बेनतीजा रही

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच गोदावरी नदी पर बनाये गये विवादास्पद बाबली बांध के मुद्दे का राजनीतिक समाधान खोजने के लिए प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह द्वारा बुलाई गयी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में आपसी सहमति कायम नहीं हो सकी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉकेरोशय्या आज शाम खाली हाथ हैदराबाद वापस लौट गये। डॉरोशय्या ने मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देने से इंकार करते हुए कहा कि बैठक के बारे में जानकारी केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल देंगे।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने एक बयान प़ढकर बताया कि बैठक में उच्चतम न्यायालय का अंतिम निर्णय आने तक इंतजार करने का फैसला किया गया और तब तक दोनों पक्ष अंतरिम आदेश का सम्मान करेंगे। उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय जल आयोग के अधिकारी आंध्र प्रदेश की बात को रखने के लिये जोर दे रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री चुपचाप रहे। माना जा रहा है कि श्री सिंह इस विषय पर इसलिये कोई फैसला नहीं ले सके, क्योंकि दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार है। गौरतलब है कि रोशय्या ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से पिछले सप्ताह अनुरोध किया था कि वे तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख एनचंद्रबाबू नायुडू के नेतृत्व में उनके कार्यकर्ताआें को विवादास्पद बाबली बांध का दौरा करने दें। इस बांध के पास जाने के दौरान धर्माबाद में महाराष्ट्र पुलिस ने श्री नायुडू और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताआें को गिरफ्तार कर लिया था।विवादास्पद बाबली का मुद्दा इस समय उच्चतम न्यायालय में लंबित है। बाबली परियोजना को १९९५ में मंजूरी दी गयी थी, लेकिन इसका निर्माण वर्ष २००४ में प्रारंभ किया गया। आज की बैठक में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल भी शामिल थे। दो सप्ताह पहले रोशय्या एवं तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायुडू ने इसे तेलंगाना क्षेत्र के विधानसभा उपचुनाव के दौरान उठाकर मामले को गरमा दिया। श्री नायुडू ने विवादास्पद बाबली बांध स्थल का अपने पार्टी कार्यकर्ताआें के साथ दौरा किया था और उस दौरान उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर वापस हैदराबाद भेज दिया था। हाल में रोशय्या के नेतृत्व में प्रदेश के एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंप कर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इन सब बातों को ध्यान में रखकर यह बैठक बुलाई गई थी।करीब एक घंटे तक चली बैठक के बाद केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल ने संवाददाताआें को बताया कि बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि मामला उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है और उच्चतम न्यायालय द्वारा इस पर अपना निर्णय सुनाये जाने की संभावना है।उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान दोनों राज्यों के नेता इस बात के लिये राजी हो गये कि वे इस मामले पर उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का पालन करेंगे।बंसल ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग मूल्यांकन का काम जारी रखेगा कि दोनों राज्य उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का अनुपालन कर रहे हैं।आंध्र प्रदेश के नेताआें का दावा है कि महाराष्ट्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय अंतरिम आदेश का उल्लंघन करके बांध का निर्माण किया है। आंध्र प्रदेश बाबली बांध का निर्माण शुरू होते ही इस मामले को वर्ष २००५ में उच्चतम न्यायालय में ले गया कि उसे अपने हिस्से का गोदावरी नदी से पानी नहीं मिल पायेगा।उच्चतम न्यायालय ने वर्ष २००७ में अपने अंतरिम आदेश में कहा कि महाराष्ट्र बांध का निर्माण कार्य जारी रखेगा, लेकिन १३ दरवाजे नहीं लगायेगा। यह अति महत्वपूर्ण भाग है, जो उसकी ऊंचाई को निर्धारित करता है कि कितना पानी एकत्रित किया जा सकता है।महाराष्ट्र के नांदेड से करीब ८३ किलोमीटर दूर गोदावरी नदी पर बाबली बांध का निर्माण किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार का दावा है कि बांध से ५८ गांवों को पानी मिलेगा और करीब आठ हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। दूसरी ओर आंध्र प्रदेश का दावा है कि निर्माण से उसके राज्य में गोदावरी नदी का प्राकृतिक बहाव रुकेगा और नदी घाटी में कृषि प्रभावित होगी। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि बांध का निर्माण पोचमपाड बांध के अप्रवाही जल के भीतर किया जा रहा है और यह ९९७५ के गोदावरी जल विवाद समझौता का सरासर उल्लंघन ह.

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