Friday, August 20, 2010

अब पर्यटकों कों आकर्षित
करेंगी सायना नेहवाल
दुनिया क़ी दूसरे नंबर क़ी बैडमिन्टन खिलाडी खेल रत्न से सम्मानित सायना नेहवाल अब आन्ध्र प्रदेश के पर्यटन स्थलों कों दिखने के लिये देशी-विदेशी पर्यटकों कों लुभाएँगी. जिसके लिये आन्ध्र प्रदेश सरकार ने सायना कों राज्य का नया ब्रांड दूत बनाने का फैसला किया है.प्रदेश के पर्यटन सचिव जयेश रंजन के मुताबिक उनहोने ब्रांड दूत बनाने कि मंजूरी भी दे दी है.जिसके लिये शीघ्र ही सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होंगे. दुनिया कि दूसरे नंबर कि खिलाडी सायना नेहवाल आगामी 27 सितम्बर विश्व पर्यटन दिवस पर अपनी यह जिम्मेदारी संभालेंगी .इस समय सानिया 23 अगस्त कों पेरिस में होने वाली विश्व चेम्पियनशिप क़ी तैयारी में लगी हैं.सायना के शब्दों मे "आन्ध्र प्रदेश का ब्रांड दूत बनाने पर में अपने कों गौरवानित महसूस कर रही हूँ,इसी के साथ मुझे उम्मीद है कि बैडमिन्टन में भी मेरा अच्छा प्रदर्शन रहेगा".इस बारे में आन्ध्र प्रदेश कि पर्यटन मंत्री श्रीमती (डा.)गीता रेड्डी कहती हैं कि "सानिया दुनिया भर में खेलती है,विश्व बैडमिन्टन में उसके वर्तमान स्थिति कों देखते हुए वह आंध्र प्रदेश का बखूबी प्रचार कर सकेगी.इससे हमारे पर्यटन कों काफी बढ़ावा मिलेगा हालही में लगातार तीन ख़िताब जीतकर जीत का हैट्रिक बनाने वाली सानिया मूलतः हरियाणा की रहने वाली है,जिसने अब हैदराबाद कों अपना घर बना लिया है".इससे पहले सायन के कोच एवम आल इंग्लेंड चेम्पियन पुलेला गोपीचंद भी प्रदेश के ब्रांड दूत रह चुके हैं,वहीँ टेनिस स्टार सानिया मिर्जा (अब सानिया सोयब मलिक) भी यह जिम्मेदारी निभा चुकी हैं .17 मार्च कों हरियाणा के हिसार जिले में जन्मी बीस वर्षीय सायना ने उस उम्र में बैडमिन्टन थामा जब बच्चे खासकर लड़कियों के हाथों में गुड्डे-गुड़ियाँ होते हैं या फिर वे टी.वी.पर कार्टून देखतें हैं.माता-पिता दोनों के बैडमिन्टन खिलाडी होने के कारण सायना का भी बचपन से ही बैडमिन्टन की ओर झुकाव हुआ.वैज्ञानिक पिता हरवीर सिंह ने बेटी की रूचि कों देखते हुए उसे अपना पूरा सहयोग प्रोत्सहन दिया.आठ साल की उम्र में सायना ने अपने नन्हें व कोमल हाथों में बैडमिन्टन थाम लिया.सन 2006 में सायना ने एशियन सेटलाइट चेम्पियनशिप जीती.वहीँ सानिया ओलिम्पिक खेलों में महिला एकल बैडमिंटन के क्वार्टरफाइनल तक पहुँचने वाली वे देश की पहली महिला खिलाड़ी हैं. पता हो कि सायना कि पिता डॉ. हरवीर नेहवाल एवम माता श्रीमती उषा रानी हरियाणा राज्य के लिये बैडमिन्टन खेला करते थे. माता पिता ने उसके प्रतिभा कों पहचाना ,ओंर उनहोने सायना कों उसके गुर सिखाने लगे.माता -पिता के बाद सायना कों बैडमिन्टन सिखाने का काम उसके गुरु एस.ऍम आरिफ ने संभाला ,बाद में गोपीचंद अकादमी के मुखिया पी.गोपीचंद ने सायना कि कमजोरियों कों दूर किया,साथ ही विरोधियों कों छकाने कि कला भी सिखलाई. जिस समय सायना बैडमिन्टन से खेल रही थी उस समय अर्पणा पोपट की बैडमिन्टन की दुनिया में तूती बोलती थी. उस समय किसी भारतीय महिला का पोपट के सामने खेलना भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी.उसी दोरान सायना कों एशियन सेटेलाइट बैडमिन्टन चैम्पियनशिप में अर्पणा पोपट के खिलाफ खेलने का मोका मिला और उसने अपनी चपलता भरे प्रदर्शन से पोपट कों हरा कर जीत हासिल कर ली.फिर क्या था,सायना ने धीरे -धीरे सफलता के परचम लहराना शुरु कर दिया.उसे लोग "सायना शायनिग" के नाम से पुकारने लगे.सन 2003 में मात्र 13 साल की उम्र में सायना ने चेकोस्लोवाकिया जूनियर ओपन का ख़िताब जीत कर अपने नाम कर बैडमिन्टन की दुनिया कों अपनी प्रतिभा से अवगत कराया .सन 2004 में उसने आस्ट्रेलिया में हुए यूथ कामनवेल्थ गेम में उसने रजत पदक प्राप्त किया और .इसी साल उसने एशियन सेटेलाइट बैडमिन्टन का ख़िताब भी अपने नाम कर लिया.सन 2006 सायना के लिये काफी लाभदायक रहा,इस साल जहाँ उसने विश्व जूनियर बैडमिन्टन चैम्पियनशिप की उप विजेता बनी,वहीँ कामनवेल्थ गेम में उसने कांस्य पदक भी हथियाया .इसी साल सायना ने फिलिपिन्स ओपन ग्रां.पी. का ख़िताब भी अपनी झोली में कर लिया.2008 में सायना कों बैडमिन्टन वर्ल्ड फेडरेशन ने "मोस्ट प्रमिसिंग प्लेयर आफ द इयर-2008 "के रूप में चुना.यह सम्मान प्राप्त करने वाली सायना पहली भारतीय महिला खिलाडी थी.इसी साल के अंतिम माह में उसने विश्व रैकिंग में दसवां स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा खेल प्रेमियों कों मनवा दिया.सन 2009 में सायना ने इंडोनेशिया ओपन ख़िताब जीत कर पहली भारतीय महिला खिलाडी बनी ,इस प्रतियोगिता में सायना ने चीन की खिलाडी यिहान वांग कों दूसरे एवम जिम्वांग कों तीसरे पायदान पर पहुंचा दिया.इस साल 27 जून कों हुए इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरिज बैडमिन्टन का ख़िताब जीत कर वह विश्व वरीयता के क्रम में इतिहास रचाने वाली विश्व की दूसरे नंबर की खिलाडी बन गई जकार्ता में ख़िताब जीतने के बाद एक माह में लगातार तीन ख़िताब (हैट्रिक) जीतने वाली सायना एक बार फिर पहली भारतीय खिलाडी बन गई.उसने जून 2010 में इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरिज बैडमिन्टन टूर्नामेंट ,हैदराबाद में आयोजित ओपन ग्रां.पी. और सिंगापूर में सुपर सीरिज कों अपने कब्जे में कर पहली महिला खिलाडी बन गई . वहीँ इस साल भारत सरकार 28 अगस्त कों सायना नेहवाल कों "खेल रत्न" सम्मान से सम्मानित करने जा रही है.अब वही सायना देश -विदेश के पर्यटकों कों आकर्षित कर आन्ध्र प्रदेश के पर्यटन उद्योग कों बढ़ावा देंगी.
प्रदीप श्रीवास्तव

No comments:

Post a Comment