Thursday, September 30, 2010

तीन हिस्सों में बांटीं जाए विवादित
जमीन :इलाहाबाद उच्च न्यालय
लखनऊ (आप की न्यूज ) इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बाबरी मस्जिद रामजन्मभूमि पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा है कि विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जाए।
भा ज पा के वरिष्ठ नेता एवम वकील रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि तीनों जज ने अपने फैसले में कहा है कि विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटा जायेगा.उसका एक हिस्सा (जहाँ रामलला की प्रतिमा विराजमान है )उसे हिन्दुओं को मंदिर के लिए दिया जायेगा,दूसरा निर्मोहीं अखाडा को तथा तीसरा हिस्सा मस्जिद के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जायेगा.न्यालय ने फ़िलहाल तीनों को सम्पूर्ण विवादित जमीन का सयुंक्त मालिक बताया है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच की जस्टिस डी. वी. शर्मा, जस्टिस एस. यू. खान और जस्टिस सुधीर अग्रवाल की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला कोर्ट नंबर 21 में दोपहर 3.30 बजे से सुनाना शुरू कर दिया। मीडियाकर्मियों को अदालत जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। बाद में डीसी ऑफिस में बनाए गए मीडिया सेंटर में मीडियाकर्मियों को तीनों जजों के फैसलों की सिनॉप्सिस दी गई।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट को 24 सितंबर को ही फैसला सुना देना था, लेकिन पूर्व नौकरशाह रमेश चंद्र त्रिपाठी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर को निर्णय एक हफ्ते के लिए टाल दिया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपाठी की अर्जी खारिज कर दी। उसके बाद हाई कोर्ट के फैसले सुनाने का रास्ता साफ हुआ।.
अर्से पुराने मुद्दे का दोनों समुदायों के बीच बातचीत से कोई हल नहीं निकल सका। पूर्व प्रधानमंत्रियों- पी. वी. नरसिम्हा राव, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर ने भी इस मुद्दे के बातचीत से निपटारे की कोशिश की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
हालांकि, उस जमीन पर विवाद तो मध्ययुग से चला आ रहा है लेकिन इसने कानूनी शक्ल वर्ष 1950 में ली। देश में गणतंत्र लागू होने से एक हफ्ते पहले 18 जनवरी 1950 को गोपाल सिंह विशारद ने विवादित स्थल पर रखी गईं मूर्तियों की पूजा का अधिकार देने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया था।
तब से चली आ रही इस कानूनी लड़ाई में बाद में हिन्दुओं और मुसलमानों के प्रतिनिधि के तौर पर अनेक पक्षकार शामिल हुए। अदालत ने इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के सैकड़ों गवाहों का बयान लिया। अदालत में पेश हुए गवाहों में से 58 हिन्दू पक्ष के, जबकि 36 मुस्लिम पक्ष के हैं और उनके बयान 13 हजार पन्नों में दर्ज हुए।
हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए वर्ष 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ( एएसआई ) से विवादित स्थल के आसपास खुदाई करने के लिए कहा था। इसका मकसद यह पता लगाना था कि मस्जिद बनाए जाने से पहले उस जगह कोई मंदिर था या नहीं। हिंदुओं और मुसलमानों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई खुदाई मार्च में शुरू होकर अगस्त तक चली।
इस विवाद की शुरुआत सदियों पहले सन् 1528 में मुगल शासक बाबर के उस स्थल पर एक मस्जिद बनवाने के साथ हुई थी। हिंदू समुदाय का दावा है कि वह स्थान भगवान राम का जन्मस्थल है और पूर्व में वहां मंदिर था। विवाद को सुलझाने के लिए तत्कालीन ब्रितानी सरकार ने वर्ष 1859 में दोनों समुदायों के पूजा स्थलों के बीच बाड़ लगा दी थी। इमारत के अंदर के हिस्से को मुसलमानों और बाहरी भाग को हिन्दुओं के इस्तेमाल के लिए निर्धारित किया गया था। यह व्यवस्था वर्ष 1949 में मस्जिद के अंदर भगवान राम की मूर्ति रखे जाने तक चलती रही।
उसके बाद प्रशासन ने उस परिसर को विवादित स्थल घोषित करके उसके दरवाजे पर ताला लगवा दिया था। उसके 37 साल बाद एक याचिका पर वर्ष 1986 में फैजाबाद के तत्कालीन जिला जज ने वह ताला खुलवा दिया था
समय गुजरने के साथ इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। वर्ष 1990 में वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर से अयोध्या के लिए एक रथयात्रा निकाली, मगर उन्हें तब बिहार में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। केंद्र में उस वक्त विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में जनता दल की सरकार थी। 31 अक्टूबर 1990 को बड़ी संख्या में राम मंदिर समर्थक आंदोलनकारी अयोध्या में आ जुटे और पहली बार इस मुद्दे को लेकर तनाव, संघर्ष और हिंसा की घटनाएं हुईं।
सिलसिला आगे बढ़ा और 6 दिसम्बर 1992 को कार सेवा करने के लिए जुटी लाखों लोगों की उन्मादी भीड़ ने वीएचपी, शिव सेना और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया। प्रतिक्रिया में प्रदेश और देश के कई भागों में हिंसा हुई, जिसमें लगभग दो हजार लोगों की जान गई। उस समय उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार थी और केंद्र में पी. वी. नरसिम्हा राव की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार थी। हालांकि, इस बार अदालत का फैसला आने के समय वर्ष 1990 व 1992 की तरह कोई आंदोलन नहीं चल रहा था, बावजूद इसके सुरक्षा को लेकर सरकार की सख्त व्यवस्था के पीछे कहीं न कहीं उन मौकों पर पैदा हुई कठिन परिस्थितियों की याद से उपजी आशंका थी।
अयोध्या के विवादित स्थल पर स्वामित्व संबंधी पहला मुकदमा वर्ष 1950 में गोपाल सिंह विशारद की तरफ से दाखिल किया गया , जिसमें उन्होंने वहां रामलला की पूजा जारी रखने की अनुमति मांगी थी। दूसरा मुकदमा इसी साल 1950 में ही परमहंस रामचंद्र दास की तरफ से दाखिल किया गया , जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया। तीसरा मुकदमा 1959 में निर्मोही अखाडे़ की तरफ से दाखिल किया गया, जिसमें विवादित स्थल को निर्मोही अखाडे़ को सौंप देने की मांग की गई थी। चौथा मुकदमा 1961 में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की तरफ से दाखिल हुआ और पांचवां मुकदमा भगवान श्रीरामलला विराजमान की तरफ से वर्ष 1989 में दाखिल किया गया। वर्ष 1989 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन महाधिवक्ता की अर्जी पर चारों मुकदमे इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में स्थानांतरित कर दिए गए थे।

Saturday, September 25, 2010

हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने की मांग

निज़ामाबाद । हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने की मांग तूल पक़डती जा रही है। पांच दशक पहले संविधान निर्माता डॉ बीआरअंबेडकर द्वारा अपने लेख में कही गयी इस बात का उल्लेख करते हुए दलित संघ राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।इस बाबत तीसरी आवाज (थर्ड वाइस) के नाम पर ‘हैदराबाद बचाओ एजिटेशन’ (एचबीए) के संयोजक ताल्लपल्ली प्रशांत कुमार ने अपना मसौदा प्रस्ताव हैदराबाद में अखबारों के कार्यालयों को जारी किया है। उन्होंने अंबेडकर की विचारधारा के अनुसार ‘एजुकेट, एजिटेट, आर्गनाइज’(चेतना लाओ, संघर्ष करो तथा संगठित करो) नामक कार्यक्रम का ब्यौरा दिया, जिसकी शुरुआत की जानी है। हैदराबाद बचाओ आंदोलन के प्रति जागरूकता, चर्चा व प्रचार जैसे सभी कार्यक्रम दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शुरू होकर छह दिसंबर को अंबेडकर की पुन्यतिथि पर समाप्त होंगे। दूसरे चरण में उसी दिन अर्थात्‌ छह दिसंबर को आंदोलन तेज करते हुए राजनीतिक दलों के साथ धरना शुरू किया जायेगा।हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाये जाने की मांग का समर्थन करते हुए प्रस्ताव पारित किया जायेगा और बाद में आंदोलन के तौरतरीके तय किये जायेंगे। ताल्लपल्ली प्रशांत कुमार ने चार वर्ष पहले ही ‘तेलंगाना की प्रगति के लिए’ नामक मंच के द्वारा हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाने की मांग करते हुए ‘नर्मदा बचाओ’ की तरह ‘हैदराबाद बचाओ’ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस आंदोलन को तेज करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि पृथक तेलंगाना व एकीकृत आंध्र आंदोलन के समानांतर उन्हें तीसरी आवाज (थर्ड वाइस) के रूप में ‘हैदराबाद बचाओ’ आंदोलन के माध्यम से हमारी मांग सुननी प़डेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान आंदोलन की प्रेरणा से ही सभी तेलुगु भाषियों को एकजुट कर हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाने तक संघर्ष करेंगे।उन्होंने कहा कि सहयोग देने वाले लोगों, संस्थाआें, राजनीतिक पार्टियों तथा विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर ‘हैदराबाद जेएसी’ नामक कार्य प्रणाली संघ स्थापित किया जाएगा। ताल्लपल्ली ने बताया कि इस जेएसी का मुख्य लक्ष्य पूरे आंध्र प्रदेश के लोगों को एकजुट कर दिल्ली के बाद हैदराबाद को दूसरी राजधानी बनवाने के लिए प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि राज्य को चाहे दो भागों में बांटा जाये या चार भागों में, हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाना ही हमारी मांग है।डॉबीआर अंबेडकर द्वारा उनके ‘राइटिंग्स एंड स्विचेस, थाट्‌स आन लिंग्विस्टिक स्टेट्‌स, पार्ट५, चैप्टर२ में प्रस्तावित विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तीसरी आवाज की गूूंंज है। उन्होंने बताया कि ‘एचबीए जेएसी’ प्रदेश में ३१ दिसंबर के बाद स़डकों पर उतर कर आपस में भ़िडने की तैयारी में जुटे दोनों खेमों का माइंड सेट बदलने के साथ ही उन्हें एक मंच पर लायेगी। उन्होंने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी का दर्जा दिलाने के लिए शुरू किये जा रहे आंदोलन में तेलंगाना और एकीकृत आंध्र प्रदेश के सभी लोग आगे आयेंगे।वर्ष १९४८ से पूर्व देश में ५०० स्वदेशी संस्थान थे, जिनमें से सबसे ब़डा हैदराबाद संस्थान था। इसका पूर्व वैभव लौटना चाहिए। हैदराबाद नगर का स्तर दिल्ली के समान होना चाहिये। हैदराबाद अगर दूसरी राजधानी बनता है, तो व विश्वपटल पर अपना स्थान बना सकेगा और अंतर्राष्ट्रीय नगर के रूप अपना नाम भी दर्ज करा पायेगा। देश की आजादी के बाद राज्यों के गठन के दौरान डॉ अंबेडकर ने कहा था कि देश की दो राजधानी होनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली सहित दक्षिण में सिकंदराबाद, हैदराबाद नगर तथा बोलारम को मिलाकर एक मुख्य आयुक्त या लेफ्टीनेंट गवर्नर के शासन में स्वायत्तता वाली दूसरी राजधानी की जरूरत बतायी थी। इस बात को उन्होंने ‘थाट्‌स आन लिंग्विस्टिक स्टेट्‌स’ (भाषा आधारित राज्यों पर विचार) पुस्तक में पांचवें पार्ट के दूसरे अध्याय में ‘द नीड फॉर ए सेकेंड कैपिटल’ (दूसरी राजधानी की आवश्यकता) में समग्र रूप से विवरण देते हुए उन्होंने प्रश्न किया था कि सभी परिस्थितियों व राजधानी के लिए उपयुक्त हैदराबाद को चुनने में गलत क्या है और इससे किसे परेशानी है?’ उन्होंने कहा, ‘आजादी से पूर्व मुगल और अंग्रेजों के शासनकाल में भारत की दो राजधानियां हुआ करती थीं। आजादी मिले लगभग छह दशक पूरे होने को हैं, लेकिन आज भी देश में उत्तरदक्षिण का भेदभाव चल ही रहा है। दिल्ली का मौसम कभी भी दक्षिण भारतवासियों को रास नहीं आया। अगर कभी युद्घ की स्थिति पैदा हो जाती है, तो दिल्ली छ़ोडना अनिवार्य हो जायेगा। उस समय देश की दूसरी राजधानी किसे चुनना चाहिये, इस पर विचार होना चाहिए।उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरी जानकारी है, हैदराबाद जैसा उपयुक्त नगर कोई दूसरा नहीं है। कोलकाता और मुंबई वैकल्पिक राजधानी नहीं बन सकते, क्योंकि वहां के हालात कुछ ऐसे हैं। देश के सभी क्षेत्रों का केंद्र बिंदु है हैदराबाद। दिल्ली के मुकाबले हैदराबाद सभी मामलों में काफी बेहतर है। राजधानी बनाने के लिए सभी तरह की योग्यता रखने वाले हैदराबाद में सभी ृसुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां एक नये भवन का निर्माण करना केंद्र सरकार के लिए कोई मुश्किल का काम नहीं है।’ ये सभी बातें अंबेडकर ने वर्ष १९५३ में अपनी पुस्तक में लिखी थीं। अंबेडकर खुद अपनी पुस्तक में हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने की वकालत कर चुके हैं। बोलारम में राष्ट्रपति भवन विद्यमान है। केंद्र सरकार से ज़ुडे दक्षिण भारत स्तर के क्षेत्रीय कार्यालय, सबसे ब़डा हवाई अड्डा, विश्व का सबसे ब़डा बस स्टेशन, मेट्रो रेल, रेल निलमय, वायु सेना, थल सेना, नौ सेना के रेजिमेंट, अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बहुराष्ट्रीय कंपनियां व विश्वविद्यालय बने हुए हैं। वर्तमान हैदराबद वर्ष १९६९७१ के हैदराबाद से बिलकुल अलग है।हैदराबाद एक ब़डा आईटी हब है और एक अंतर्राष्ट्रीय मंच बना हुआ है। सभी मामलों में हैदराबाद दिल्ली के बराबार है। नगर की सीमाएं सौ किलो मीटर तक फैली हुई हैं। आउटर रिंगरोड, ग्रोथ कॉरिडोर, अत्याधुनिक मेट्रो रेल, विशेष आर्थिक क्षेत्र के साथ विश्वस्तर पर नगर फैल रहा है। ताल्लपल्ली प्रशांत कुमार ने कहा कि जिस तरह जिस राज्य के सांसद केंद्र में रेलवे मंत्री बनते हैं, तो अपने राज्य के लिए नयी एक्सप्रेस ट्रेनें, नई रेल परियोजनाएं शुरू करते हैंं, उसी तरह, देश के लिए दूसरी राजधानी बनाने की मांग किसी दूसरे राज्य के प्रतिनिधियों के करने से पहले हमें इसकी मांग करनी होगी।


जानेमाने लेखक पत्रकार

नंदन पंचत्तव में विलीन

निज़ामाबाद हिंदी के जानेमाने लेखक और पत्रकार कन्हैयालाल नंदन का शनिवार की त़डके नई दिल्ली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह ७७ वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्हें बुधवार की शाम निम्न रक्तचाप और सांस लेने में तकलीफ होने के बाद राजधानी के रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने आज त़डके तीन बजकर १० मिनट पर अंतिम सांस ली। वह पिछले आठ साल से डायलिसिस पर थे। उनके परिवार में पत्नी और दो पुत्रियां हैं। उनके शव को साकेत के पुष्पावती सिंघानिया शोध संस्थान (पीएसआरआई) में रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि उनकी छोटी बेटी के कनाडा से आने के बाद उनका अंतिम संस्कार रविवार की सुबह लोधी रोड श्मशान घाट पर किया गया नंदन का जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के परस्तेपुर गांव में एक जुलाई, १९३३ को हुआ था। डीएवी कानपुर से स्नातक की प़ढाई करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया और भावनगर विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की।पत्रकारिता में आने से पहले कन्हैयालाल नंदन ने करीब चार साल तक मुंबई विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया था। वह वर्ष १९६१ से १९७२ तकधर्मयुगमें सहायक संपादक रहे। इसके बाद उन्होंनेटाइम्स ऑफ इडियाकी पत्रिकाओंपराग’, ‘सारिकाऔरदिनमानमें संपादक का कार्यभार संभाला। तीन सालों तक वहनवभारत टाइम्सके फीचर संपादक भी रहे। टाइम्स समूह से अलग होने के बाद वह छह साल तक हिंदी के साप्ताहिक अख़बारसंडे मेलके प्रधान संपादक रहे। १९९५ से उन्होंने इंडसइंड मीडिया में बतौर निदेशक कार्य किया। नंदन को पद्मश्री, भारतेंदु पुरस्कार, अज्ञेय पुरस्कार और नेहरू फेलोशिप सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने विभिन्न विषयों में तीन दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखीं। वह मंचीय कवि और गीतकार के रूप में मशहूर रहे। उनकी प्रमुख कृतियांलुकुआ का शाहनामा’, ‘घाटघाट का पानी’, ‘आग के रंग’, ‘गुजरा कहां कहां सेआदि हैं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डायलिसिस पर रहते हुए पिछले आठ साल के दौरान उन्होंने कई किताबें लिखीं। मुंबई के संस्मरणों पर आधारित किताबकहना जरूरी थाअभी प्रेस में है।श्री नंदन जी को आपकी न्यूज अपनी श्रधांजलि अर्पित करता है

Monday, September 20, 2010

लन्दन में तेलंगाना मुक्ति दिवस मानते हुए तेलंगाना के अप्रवासीय भारतीय ,जिसमें दिखाई दे रहे हैं दानम नरेश,राजू,प्रकाश,एवम सतीश आदि.
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लन्दन में भी मनाया गया
तेलंगाना
मुक्ति दिवस

होउनास्लो (लन्दन)17 सितम्बर को लन्दन के होउनास्लो प्रान्त के लम्टोम स्कूल में यहाँ रह रहे तेलंगाना के अप्रवासीय भारतीयों ने बड़े उत्साह के साथ तेलंगाना मुक्ति दिवस मनाया.जिसमें काफी संख्या में भारतीयों ने भाग लिया.जिनमें सतीश,राजू, प्रकाश एवम दानम नरेश आदि शामिल थे.इस अवसर पार अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। यह रपट आप की न्यूज के पाठकों के लिए दानम नरेश ने भेजी है
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Saturday, September 18, 2010

लन्दन में भी "श्री गणेश उत्सव

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सात समन्दर पार लन्दन में भी
"श्री गणेश उत्सव कि
धूम "

इन दिनों देश में ही नहीं विदेशों में भी बड़े उत्साह के साथ श्री गणेश उत्सव मनाया जा रहा है. यह चित्र हमें भेजा है लन्दन में रह रहे निज़ामाबाद के रहने वाले दारम नरेश ने.जो इन दिनों लन्दन के होउनास्लो प्रान्त में रहते हैं.उनके साथ उत्तर भारतीय परिवार को भी देखा जा सकता है.
अगर आप भी सात समंदर विषय के किसी देश में रह रहे हैं तो आप भी वहां कि सांसकृतिक ,साहित्यिक एवम धार्मिक गतिविधियाँ फोटो सहित हमें भेज सकते हैं.जिसे प्रकाशित करने में हमें बड़ी प्रसन्ता होगी .
आप नीचे के मेल पर भेज सकते हैं.
apkinews@gmail.com
nizamabadnews@gmail.com
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Friday, September 17, 2010

रंगा- रंग जेसीज टेलेंट





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रंगा
-रंग जेसीज टेलेंट वीक-2010 का शुभारंभ


निज़ामाबाद. जूनियर चेंबर आफ इंटरनेशनल निज़ामाबाद के तत्वावधान में शुक्रवार कि रात स्थानीय राजीव गाँधी आडिटोरियम में रंगा- रंग जेसीज टेलेंट वीक 2010 का शुभारंभ विजय शिक्ष संसथान के चेयरमेन के नरेंदर रेड्डी(मुख्य अतिथि) के करकमलों से हुआ .इस अवसर पर विशेष अतिथि स्वतंत्र वार्ता के स्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव एवम शहर के उधोगपति जसवंत के.लाल शाह भी मौजूद थे. इस अवसर पर बोलते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि जेसीज जैसी संस्था से युवाओं को सिखाने कि प्रेणना मिलती है.उन्हों ने आगे कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल किलिंटन भी जेसीज के सदस्य थे वहीँ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी जेसीज के सदस्य रहे हैं .निज़ामाबाद के इसी मंच से जेसीज वीक के कार्यक्रम प्रस्तुत कर इसी शहर के रहने वाले संदीप बोधनकरआज दुनिया में कुचिपुड़ी नृत्य के अलख जला रहे हैं.में युवाओं से कहूँगा कि वे एक नए भारत कि संकलपना करें.जबकि प्रदीप श्रीवास्तव का कहना था कि जेसीज युवाओं के लिये वह बैनर है जहाँ से उन्हें कुछ सिखाने कि प्रेणना मिलती. कला ,संस्कृति को बढावा देने वाली संस्था जेसीज है.जिसमे रहकर व्यकित का विकास होता है,वहीँ हम अपनी लुप्त हो रही संस्कृति को बचा सकते हैं.वहीँ जसवंत लाल शाह ने कहा कि किस तरह जेसीज के सदस्य व पदाधिकारी तन मन से काम कर स्वावलंबी बनते है. जिसकी जितनी बढाई कि जाय काम है.कार्यक्रम का प्रारंभ करते हुए जेसीज के अध्यक्ष निलपेश शाह ने संस्था के बारे में जानकारी दी,कार्यक्रम का संचाल किया प्रोजेक्ट डायरेक्टर सतीश व्यास ने .इससे पहले दोपहर में महिलाओं के लिये रंगोली प्रतियोगिता,तथा बच्चों के लिये निबंध प्रतियोगिता रखी गई थी.रात में बच्चों का फैन्सी ड्रेस शो कय्जन किया गया.जिसमे काफी संख्या में बच्चों ने भाग लिया.सात दिनों (17 सितम्बर से 23 सितम्बर टक चलने वाले इस कार्यक्रम को स्थानीय डिजिटल चेनल पर सीधा प्रसारण किया जा रहा है.कार्यक्रम में सर्वश्री राज कुमार सूबेदार,श्रीराम सोनी,शीतल मेहता विवेक मोदानी ,सचिव पी.हरी,धीरेन पारीख,विवेक गुप्ता,जुनेद अली,टी नागराजू,एन श्रीदेवी भरेया,सी एच राजू,आनंद सोमानी,पत्की आदि उपस्थित थे.


Wednesday, September 15, 2010

निज़ामाबाद जिला विकास समीक्षात्मक की बैठक में हंगामा


निज़ामाबाद के एम.एल.सी
एवं सांसद में तू-तू ,में-में

निज़ामाबाद .बुधवार १५ सितम्बर की दोपहर एक रोचक नज़ारा उस समय देखने को मिला जब निज़ामाबाद जिला विकास मीक्षात्मक की बैठक में जिले के एम्.एल.सी. मोहन रेड्डी एवम सांसद मधु यासकी गौड़ आपस में ही झगड़ पड़े .यह वाक्या तब हुआ जब बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के उच्च एवम एवम जिले की प्रभारी मंत्री श्रीधर बाबू तथा स्वास्थ शिक्षा मंत्री पी. सुदर्शन रेड्डी कर रहे थे.बैठक सुब गयारह बजे स्थानीय प्रगति भवन में बुलाई गई थी ,जो पूरे दो घंटे विलम्ब से प्रारंभ हुई,जिसको लेकर सभा गृह में पहले से बैठे एम्.एल.सी.मो रेड्डी ने सभा के अध्यक्ष श्रीधर बाबू से पूछा की यह क्या तरीका है ? हम लोग कितनी देर से यहाँ बैठे हैं और मंत्री लोग इतनी देर से आते हैं,क्या हमारे पास और काम नहीं है? इतना कहने के बाद उनहोने उदारहण देते हुए कहा कि विधान सभा में भी समय से पहले सभी लोग पहुँच जाते हैं. बस इसी बात को लेकर सांसद मधु गौड़ ने मोहन रेड्डी का विरोध शुरू कर दिया .बात तू-तू,में-में तक पहुँच गई.इस बीच मंत्री श्रीधर बाबू एवम सुदर्शन रेड्डी ने दोनों लोंगो को चुप करने का भरसक प्रयास किया.लेकिन काफी देर तक दोनों जनता के प्रतिनिधियों के बीच विवाद होता रहा.इसी दौरान जिला परिषद अद्याक्ष (जो समिति के उपाध्यक्ष भी हैं )मंत्री ने स्टेज पर बैठने का आग्रह किया लेकिन उन्हों ने स्टेज पर बैठने से मन कर दिया.आज कि बैठक मुख्य एजंडा था,कृषि,सिंचाई,शोचालय एवम जन स्वास्थ, चिकित्सा एवम स्वास्थ,जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डी.आर.डी.ऐ.),गृह तथा शिक्षा .कृषि के सन्दर्भ में जब कृषि विभाग के सयुंक्त कृषि निदेशक नए जानकारी देनी सुरु कि ही थी कि एम.एल.सी डी.राजेश्वर ने नवीनतम आंकड़े प्रश्तुत करने को कहा,जिस पर सयुंक्त कृषि निदेशक बागालें झांकने लगे.इस पर जिलाधीश डी.वर प्रसाद ने बीच-बचाव करते हुवे विधान सभा सदस्य राजेश्वर को समझाने कि कोशिश कि.इसी बात को लेकर एम.एल .सी. ऐ.नारासा रेड्डी.विधायक रविंदर रेड्डी,मंडवा वेंकटेश्वर राव ने भी यूरिया के आपूर्ति का मामला उचल दिया.जिस पर जिला धिष ने विवरण रखे इन पंक्तियों के लिखे जाने तक बैठक जारी थी.
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केसीआर विश्व के सबसे प्रभावशाली

राजनीतिक हस्तियों की सूची में शामिल

निज़ामाबाद । तेलगाना रा समिति (टीआरएस) के मुखिया के .चन्द्र शेखर राव विश्व भर के 300सबसे भावशाली राजनीतिक हस्तियों की सूची में शुमार हो गये है। मुख्य राजनीतिक नेताओं की प्रतिभावों का अययन कर अमेरिका द्वारा तैयार की गयी नेताओं की सूची में देश से सिफ चशेखर राव का चयन किया गया है। इससे टीआरएस खेमे व तेलगाना क्षे में हर्ष का माहाल है। टीआरएस कार्यकर्ताओं व तेलगाना समथकों का कहना है कि इससे विवतर पर तेलगाना का मान बढेगा। अमेरिका में अतराीय राजनीति पर पाठकम शु करने वाले विववािलयों ने विवभर में इन ३०० राजनेताओं का चयन किया ह। अब विववािलयों के शोधकता इन नेताओं का गहन अययन करेंगे। सूची में भारत से कागेस अयक्ष श्रीमती सोनिया गाधी, डा मनमोहन सिंह, विपक्ष के नेता लालकण आडवाणी, कागेस महासचिव राहल गाधी व मुफ्ती मोहमद सइद जैसे मुख्यनेताओं के अलावा के .चन्द्र शेखर को भी शामिल किया गया ह। पथक तेलगाना राय की माग को लेकर गत वष अनशन कर चचा में आये चशेखर राव ने राीय राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बना ली ह। शोधकता राव के अलावा अय नेताआें के दनिक राजनीतिक कायकमों पर रिपोट तयार कर उसे विववािलय को सापेंगे। अमेरिकी विववािलयों ने यह माना कि टीआरएस मुखिया न केवल तेलगानावासियों, बकि विदेशियों को भी भावित कर रहे है। इस कारण उहें ३०० सबसे भावशाली राजनीतिक हतियों की सूची में शामिल किया गया है।

Sunday, September 12, 2010

खबरें



तीन महीने में सोना
हो
सकता है २२ हजारी

नई दिल्ली म्युचुअल फंडों के साथ ही पूंजी बाजार में निवेश करने वालों के पास भारी नकदी होने से उनके पीली धातु की ओर रुख करने की संभावना बन रही है। इसके मद्देनजर अगले तीन महीने में अर्थात्‌ इस वर्ष के अंत तक सोने के २२ हजार रुपये प्रति १० ग्राम के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। उद्योग एवं वाणिज्य मंडल एसोचैम ने कहा है कि म्युचुअल फंडों के साथ ही निवेशकों के पास ब़डी मात्रा में नकदी होने से उनके पीली धातुकी ओर म़ुडने की उम्मीद बन रही है। इसके साथ ही पूंजी बाजार में भी तेजी आ रही है, लेकिन पूंजी बाजार में टेक्नीकल करेक्शन होने पर उनके सोने में निवेश करने की संभावना है। इस निवेश से सोना २२ हजार रुपये प्रति १० ग्राम के स्तर तक जा सकता है। त्योहारी एवं विवाह के सीजन शुरू होने से दीपावली तक इसके २१ हजार रुपये प्रति १० ग्राम पर पहुंचने की संभावना जतायी गयी है। हालांकि संगठन ने कहा है कि कीमती धातुओं के अब तक उच्चतम स्तर पर पहुंचने से लघु एवं मंझौले आभूषण कारोबारियों के कामकाज के प्रभावित होने की पूरी संभावना है। उसका कहना है कि सोने के १९,५५० रुपये पर पहुंचने से अहमदाबाद के ३० से ४० प्रतिशत आभूषण निर्माताओं ने कारोबार बंद कर दिया है।

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लोकप्रिय गायिका

स्वर्णलता का निधन

हैदराबाद । लोकप्रिय गायिका स्वर्णलता का आज यहां निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से वह लिवर (यकृत) के गंभीर रोग से पी़डत थीं और उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। आज रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। गौरतलब है कि प्रसिद्ध संगीत निदेशक इलैया राजा उन्हें १९८२ में फिल्म उद्योग में लेकर आये थे। स्वर्णलता ने तेलुगु, तमिल, कन्ऩड, मलयालम, हिंदी तथा उर्दू भाषाओं में गीत गाये। तमिल फिल्म ‘कारुट्टम्मा’ के लिए उन्हें सर्वोत्तम गायिका के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

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अनाथाश्रम में ल़डकियों का

यौन शोषण ,संचालक गिरफ्तार

हैदराबाद। नाबालिग ल़डकियों का यौन शोषण करने के आरोप में वनस्थलीपुरम थाना पुलिस ने स्थानीय फेज४ स्थित टीवी कॉलोनी के सिरिया अनाथ आश्रम के संचालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि एक स्थानीय टीवी चैनल के ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के बाद हमने सिरिया अनाथ आश्रम के संचालक मलयाद्री को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक मलयाद्री अनाथ आश्रम में नाबालिग ल़डकियों का यौन शोषण करता था। पुलिस ने बताया कि वह देर रात ल़डकियों को यौन क्रिया के लिए अपने कक्ष में बुलाता था। यौन शोषण करने से पूर्व कई बार वह ल़डकियों को नशीली दवा का इंजेक्शन देकर उन्हें बेहोश कर देता था।पुलिस ने बताया कि प्रकाशम जिले के जरगुमल्ली मंडल के नर्सिंगोलु गांव का निवासी मेडिदा मलयाद्री (३७) गत कुछ वषा] नगर के नागौल इलाके के साईनगर में एक किराये के मकान में रहते हुए २००६ से सिरिया अनाथाश्रम चला रहा था। ३० बच्चों के साथ शुरू किये गये इस अनाथाश्रम में जब बारिश के मौसम में दिक्कत होने लगी, तब मलयाद्री ने तत्कालीन हुडा के चेयरमैन देवीरेड्डी सुधीर रेड्डी से अनाथ आश्रम के लिए दूसरी जगह की मांग की। इस पर सुधीर रेड्डी ने नये आश्रम की स्थापना के लिए वनस्थलीपुरम की टीवी कॉलोनी में एक हजार गज जमीन दिलवा दी। मलयाद्री ने दानदाताआें की मदद से यहां एक भवन बनवाया। फिलहाल इस अनाथाश्रम में करीब १२० ल़डकेल़डकियां हैं, जिन्हें यहां शिक्षा भी दी जाती है। पुलिस ने बताया कि यहां कुल ११ शिक्षक हैं, जिसमें से तीन आश्रम में ही रहते हैं, जबकि अन्य रोजाना यहां आकर अपनी ड्यूटी करके चले जाते हैं।बताया जाता है कि गत कई दिनों से मलयाद्री आश्रम की आठवीं व नौवीं कक्षा की आठ ल़डकियों को डराधमका कर रात में उनका यौन शोषण कर रहा था। इस बीच, रविवार की सुबह इसकी खबर मिलने पर वनस्थलीपुरम थाना के एसीपी श्रीनिवास रेड्डी व इंस्पेक्टर रवींद्र रेड्डी ने अपनी टीम के साथ अनाथाश्रम में जाकर पूछताछ की। ल़डकियों ने महिला पुलिस को बताया कि मलयाद्री रात को उनका यौन शोषण करता है, जिसके बाद पुलिस ने मलयाद्री को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस ने बताया कि पत्नी व बच्चे होने के बावजूद मलयाद्री उनके साथ न रहते हुए आश्रम में ही रहा करता था। पहली पत्नी की माैैत के बाद उसने दूसरी शादी की और बच्चों व उसके अभिभावकों के साथ साईनगर में एक मकान में रहने लगा, लेकिन रात को वह अपने घर न जाकर आश्रम में ही रहता था। आश्रम के कर्मचारियों ने बताया कि मलयाद्री रोजाना किसी न किसी ल़डकी को अपने कमरे में बुलाकर उसका यौन शोषण करता था।अगर कोई ल़डकी नहीं जाना चाहती, तो उसे पीटते हुए वह जबरन अपने कमरे में ले जाता था। पुलिस ने बताया कि वह आठवीं व नौवीं कक्षा की ल़डकियों के साथ अश्लील भाषा में बातें भी करता था। उधर, मलयाद्री ने कहा है कि उसपर लगाये गये सभी आरोप गलत हैं। उसने कहा, ‘अनाथ ल़डके व ल़डकियों की सेवा करने के उद्देश्य से ही मैंने सिरिया आश्रम की स्थापना की और दानदाताआें की मदद से उन्हें शिक्षित कर रहा हूं। मैंने ल़डकियों का कोई यौन शोषण नहीं किया है। कोई उन्हें परेशान न करे, इसलिए मैं वहां पहरेदारी करते हुए आश्रम में ही सो जाया करता था।वनस्थलीपुरम के एसीपी ने बताया कि पक्की सूचा मिलने के बाद उन्होंने ल़डकियों से पूछताछ की। उन्होंने कहा कि अगर मलयाद्री पर आरोप सही पाये जाते हैं, तो उसके खिलाफ संगीन मामले दर्ज किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरी हुआ, तो पी़डतों का मेडिकल टेस्ट भी कराया जायेगा।इस बीच, एलबी नगर के विधायक सुधीर रेड्डी ने कहा कि यदि मलयाद्री पर आरोप साबित होता है, तो उसे क़डी से क़डी सजा मिलनी चाहिए।

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तेलंगाना : छात्रों के खिलाफ

मामले वापस लेने की मांग

हैदराबाद. आंध्र प्रदेश में तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से तेलंगाना आंदोलन में भाग ले रहे छात्रों एवं युवाओं के खिलाफ दर्ज मामले दो अक्टूबर तक वापस लेने की मांग की है।सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों, विधायकों एवं अन्य नेताओं ने अगली रणनीति तय करने के लिए रविवार को बैठक की। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता के. केशव राव ने की।कुछ प्रतिभागियों ने सुझाव दिया कि यदि मामले वापस नहीं लिए जाते हैं तो आंध्र प्रदेश स्थापना दिवस (1 नवंबर) के कार्यक्रमों का बहिष्कार किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष दिसंबर में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा की गई घोषणा पर अमल नहीं किया गया।उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अलग तेलंगाना राज्य के लिए किए गए हिंसक प्रदर्शनों में शामिल छात्रों एवं युवाओं के खिलाफ पुलिस ने मामले दर्ज किए थे।यदि दो अक्टूबर तक मामले वापस नहीं लिए गए तो ये नेता फिर बैठक कर आन्दोलन का निर्णय लेंगे।



Wednesday, September 8, 2010

पृथक तेलंगाना राज्य के लिये गठित श्री कृष्ण समिति का निज़ामाबाद दौरा

निज़ामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए श्री कृष्ण समिति के सदस्य वी. के.दुग्गल
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समय सीमा से पंद्रह दिन पहले सरकार
को
रिपोर्ट सौपेंगी श्री कृषण समिति :दुग्गल

पृथक तेलंगाना कि मांग कों ले कर केंद्र सरकार द्वारा गठित श्री कृष्ण समिति के सदस्यों ने बुधवार कों निज़ामाबाद जिले का दौरा किया .इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए समिति के सचिव एवम सदस्य वी. के. दुग्गल ने कहा कि "समिति के रिपोर्ट्स कों लेकर किसी भी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए".उन्हों ने आगे कहा कि समिति हर पहलू का गंभीर अध्ययन कर के ही सरकार कों अपनी रिपोर्ट सौंपेगी .जिससे दोनों क्षेत्रो (तेलंगाना एवम आन्ध्र) के लोगों के साथ इंसाफ हो और वहाँ कि जनता के साथ इंसाफ हो.श्री दुग्गल ने आगे कहा कि समिति निर्धारित समय के एक पखवाड़े के पूर्व ही सरकार कों अपनी रिपोर्ट सौंप देगी.उन्हों ने आगे कहा कि दोनों क्षेत्रों के लोगों से काफी संख्या में आवेदन एवम सुझाव मिलें हैं,जिन्हें गुप्त रखा गया है.
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पृथक तेलंगाना राज्य के लिये गठित
श्री कृष्ण समिति का निज़ामाबाद दौरा
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लेकिन रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भीएक क्षेत्र का पक्ष नहीं लिया जायेगा .उनहोने आगे कहा कि यह बात कही जा रही है कि समिति से कोई फायदा नहीं होने वाला है? लेकिन में कहना चाहूँगा कि यह सोचना गलत है,क्यों कि समिति की रिपोर्ट से कोई कोई निष्कर्स तो निकलने वाला ही है.श्री दुग्गल ने कहा की समिति के सदस्यों ने अब तक राजनीतिक,सामाजिक.आर्थिक एवम संस्कृति का अध्यन किया है.उन्हों ने ताया कि समिति के पास अब तक एक लाख बीस हजार आवेदन एवम अन्य सुझाव मिलें है.जिनमे से चार हजार आवेदन ऐसे हैं जिनका उपयोग रिपोर्ट तैयार करने में किया जा रहा है.समिति के सदस्यों ने बताया कि इसके बाद वे आदिलाबाद,भद्राचलम एवम खम्मम जिलों का दौरा करेंगें.सके बाद ही सरकार कों अपनी रिपोर्ट सौपेंगे .अगर जरुरत पड़ी तो समिति के सदस्य कुछ क्षेत्रों का फिर दौरा कर सकते हैं.इस मौके पर श्रीमती रविंदर कौर ,रणबीर सिंह एवम रवि बिन्दें के साथ निज़ामाबाद के जिलाधीश डी.वार प्रसाद ,जिला पुलिस आधीक्षक एवम सयुंक्त जिलाधीश जगान्न्थंम आदि उपस्थित थे. इससे पहले समिति के सदस्यों ने जिले के डिचपल्ली तहसील के गन्नारम एवम वर्णी मंडल के श्रीनगर गावों का दौरा कर वहाँ के लोगों से बातचीत कर हालत का जायजा लिया.और जिले के जनप्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श भी किया.
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