Thursday, September 2, 2010

भौगोलिक पहचान मिलेगी"हैदराबादी हलीम" को


"तिरुपति के लड्डू"
जैसी
भौगोलिक पहचान
मिलेगी"हैदराबादी हलीम" को

प्रसिद्ध और पोषक तत्वों से भरपूर इस व्यंजन हलीम को मुस्लिम पवित्र माह रमजान में खास तौर से परोसा जाता है। इस लजीज व्यंजन को अब दार्जीलिंग चाय, बनारसी सिल्क और तिरुपति के लड्डू जैसी भौगोलिक पहचान मिलने वाली है।भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) का दर्जा मिलने के बाद हलीम बनाने वाले लोग इसे हैदराबादी हलीम के नाम से हैदराबाद के बाहर नहीं बेच पाएंगे। इसके अलावा शहर में भी जो लोग इसे बेचना चाहेंगे उन्हें गुणवत्ता मानकों को पूरा करना पड़ेगा।अधिकारी आईपी परामर्श एजेंसी के बौद्धिक संपदा परामर्शदाता और पेटेंट प्रबंधक एस. रवि ने कहा, "हमें उम्मीद है कि रमजान का महीना खत्म होने से पहले इसे भौगोलिक पहचान का दर्जा मिल जाएगा।"रवि के मुताबिक हैदराबाद के हलीम निर्माता संघ की ओर से चेन्नई स्थित भारत के भौगोलिक पहचान रजिस्ट्रार को इसके लिए आवेदन भेजा गया था। रजिस्ट्रार ने लोगों से अपनी आपत्तियां पेश करने के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया था।उनके मुताबिक "29 अगस्त तक आपत्तियां पेश करने की समय सीमा खत्म होने तक कोई आपत्ति पेश नहीं की गई है।"

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