Saturday, September 25, 2010

हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने की मांग

निज़ामाबाद । हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने की मांग तूल पक़डती जा रही है। पांच दशक पहले संविधान निर्माता डॉ बीआरअंबेडकर द्वारा अपने लेख में कही गयी इस बात का उल्लेख करते हुए दलित संघ राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।इस बाबत तीसरी आवाज (थर्ड वाइस) के नाम पर ‘हैदराबाद बचाओ एजिटेशन’ (एचबीए) के संयोजक ताल्लपल्ली प्रशांत कुमार ने अपना मसौदा प्रस्ताव हैदराबाद में अखबारों के कार्यालयों को जारी किया है। उन्होंने अंबेडकर की विचारधारा के अनुसार ‘एजुकेट, एजिटेट, आर्गनाइज’(चेतना लाओ, संघर्ष करो तथा संगठित करो) नामक कार्यक्रम का ब्यौरा दिया, जिसकी शुरुआत की जानी है। हैदराबाद बचाओ आंदोलन के प्रति जागरूकता, चर्चा व प्रचार जैसे सभी कार्यक्रम दो अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शुरू होकर छह दिसंबर को अंबेडकर की पुन्यतिथि पर समाप्त होंगे। दूसरे चरण में उसी दिन अर्थात्‌ छह दिसंबर को आंदोलन तेज करते हुए राजनीतिक दलों के साथ धरना शुरू किया जायेगा।हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाये जाने की मांग का समर्थन करते हुए प्रस्ताव पारित किया जायेगा और बाद में आंदोलन के तौरतरीके तय किये जायेंगे। ताल्लपल्ली प्रशांत कुमार ने चार वर्ष पहले ही ‘तेलंगाना की प्रगति के लिए’ नामक मंच के द्वारा हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाने की मांग करते हुए ‘नर्मदा बचाओ’ की तरह ‘हैदराबाद बचाओ’ आंदोलन शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में इस आंदोलन को तेज करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि पृथक तेलंगाना व एकीकृत आंध्र आंदोलन के समानांतर उन्हें तीसरी आवाज (थर्ड वाइस) के रूप में ‘हैदराबाद बचाओ’ आंदोलन के माध्यम से हमारी मांग सुननी प़डेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान आंदोलन की प्रेरणा से ही सभी तेलुगु भाषियों को एकजुट कर हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाने तक संघर्ष करेंगे।उन्होंने कहा कि सहयोग देने वाले लोगों, संस्थाआें, राजनीतिक पार्टियों तथा विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर ‘हैदराबाद जेएसी’ नामक कार्य प्रणाली संघ स्थापित किया जाएगा। ताल्लपल्ली ने बताया कि इस जेएसी का मुख्य लक्ष्य पूरे आंध्र प्रदेश के लोगों को एकजुट कर दिल्ली के बाद हैदराबाद को दूसरी राजधानी बनवाने के लिए प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि राज्य को चाहे दो भागों में बांटा जाये या चार भागों में, हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाना ही हमारी मांग है।डॉबीआर अंबेडकर द्वारा उनके ‘राइटिंग्स एंड स्विचेस, थाट्‌स आन लिंग्विस्टिक स्टेट्‌स, पार्ट५, चैप्टर२ में प्रस्तावित विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तीसरी आवाज की गूूंंज है। उन्होंने बताया कि ‘एचबीए जेएसी’ प्रदेश में ३१ दिसंबर के बाद स़डकों पर उतर कर आपस में भ़िडने की तैयारी में जुटे दोनों खेमों का माइंड सेट बदलने के साथ ही उन्हें एक मंच पर लायेगी। उन्होंने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी का दर्जा दिलाने के लिए शुरू किये जा रहे आंदोलन में तेलंगाना और एकीकृत आंध्र प्रदेश के सभी लोग आगे आयेंगे।वर्ष १९४८ से पूर्व देश में ५०० स्वदेशी संस्थान थे, जिनमें से सबसे ब़डा हैदराबाद संस्थान था। इसका पूर्व वैभव लौटना चाहिए। हैदराबाद नगर का स्तर दिल्ली के समान होना चाहिये। हैदराबाद अगर दूसरी राजधानी बनता है, तो व विश्वपटल पर अपना स्थान बना सकेगा और अंतर्राष्ट्रीय नगर के रूप अपना नाम भी दर्ज करा पायेगा। देश की आजादी के बाद राज्यों के गठन के दौरान डॉ अंबेडकर ने कहा था कि देश की दो राजधानी होनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली सहित दक्षिण में सिकंदराबाद, हैदराबाद नगर तथा बोलारम को मिलाकर एक मुख्य आयुक्त या लेफ्टीनेंट गवर्नर के शासन में स्वायत्तता वाली दूसरी राजधानी की जरूरत बतायी थी। इस बात को उन्होंने ‘थाट्‌स आन लिंग्विस्टिक स्टेट्‌स’ (भाषा आधारित राज्यों पर विचार) पुस्तक में पांचवें पार्ट के दूसरे अध्याय में ‘द नीड फॉर ए सेकेंड कैपिटल’ (दूसरी राजधानी की आवश्यकता) में समग्र रूप से विवरण देते हुए उन्होंने प्रश्न किया था कि सभी परिस्थितियों व राजधानी के लिए उपयुक्त हैदराबाद को चुनने में गलत क्या है और इससे किसे परेशानी है?’ उन्होंने कहा, ‘आजादी से पूर्व मुगल और अंग्रेजों के शासनकाल में भारत की दो राजधानियां हुआ करती थीं। आजादी मिले लगभग छह दशक पूरे होने को हैं, लेकिन आज भी देश में उत्तरदक्षिण का भेदभाव चल ही रहा है। दिल्ली का मौसम कभी भी दक्षिण भारतवासियों को रास नहीं आया। अगर कभी युद्घ की स्थिति पैदा हो जाती है, तो दिल्ली छ़ोडना अनिवार्य हो जायेगा। उस समय देश की दूसरी राजधानी किसे चुनना चाहिये, इस पर विचार होना चाहिए।उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरी जानकारी है, हैदराबाद जैसा उपयुक्त नगर कोई दूसरा नहीं है। कोलकाता और मुंबई वैकल्पिक राजधानी नहीं बन सकते, क्योंकि वहां के हालात कुछ ऐसे हैं। देश के सभी क्षेत्रों का केंद्र बिंदु है हैदराबाद। दिल्ली के मुकाबले हैदराबाद सभी मामलों में काफी बेहतर है। राजधानी बनाने के लिए सभी तरह की योग्यता रखने वाले हैदराबाद में सभी ृसुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां एक नये भवन का निर्माण करना केंद्र सरकार के लिए कोई मुश्किल का काम नहीं है।’ ये सभी बातें अंबेडकर ने वर्ष १९५३ में अपनी पुस्तक में लिखी थीं। अंबेडकर खुद अपनी पुस्तक में हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने की वकालत कर चुके हैं। बोलारम में राष्ट्रपति भवन विद्यमान है। केंद्र सरकार से ज़ुडे दक्षिण भारत स्तर के क्षेत्रीय कार्यालय, सबसे ब़डा हवाई अड्डा, विश्व का सबसे ब़डा बस स्टेशन, मेट्रो रेल, रेल निलमय, वायु सेना, थल सेना, नौ सेना के रेजिमेंट, अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बहुराष्ट्रीय कंपनियां व विश्वविद्यालय बने हुए हैं। वर्तमान हैदराबद वर्ष १९६९७१ के हैदराबाद से बिलकुल अलग है।हैदराबाद एक ब़डा आईटी हब है और एक अंतर्राष्ट्रीय मंच बना हुआ है। सभी मामलों में हैदराबाद दिल्ली के बराबार है। नगर की सीमाएं सौ किलो मीटर तक फैली हुई हैं। आउटर रिंगरोड, ग्रोथ कॉरिडोर, अत्याधुनिक मेट्रो रेल, विशेष आर्थिक क्षेत्र के साथ विश्वस्तर पर नगर फैल रहा है। ताल्लपल्ली प्रशांत कुमार ने कहा कि जिस तरह जिस राज्य के सांसद केंद्र में रेलवे मंत्री बनते हैं, तो अपने राज्य के लिए नयी एक्सप्रेस ट्रेनें, नई रेल परियोजनाएं शुरू करते हैंं, उसी तरह, देश के लिए दूसरी राजधानी बनाने की मांग किसी दूसरे राज्य के प्रतिनिधियों के करने से पहले हमें इसकी मांग करनी होगी।

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