Thursday, October 28, 2010


रचना प्रस्तुत करते हुए शायर राजीव दुआ .
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निज़ामाबाद की एक
रात कविताओं के नाम

निज़ामाबाद,रविवार 24 अक्टूबर की रात निज़ामाबाद के राजस्थान भवन के प्रांगण मे गीत पूर्णिमा एवम निज़ामाबाद जिला माहेश्वरी सभा के सयुंक्त तत्वधान में शरद पूर्णिमा के अवसर कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया .जिसका शुभारंम्भ शहर के व्यवसायी गिरिवर लाल अग्रवाल एवम हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता के स्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव द्वारा दीप प्रज्वल्लन के साथ हुआ .इस अवसर पार बोलते हुए श्री श्रीवास्तव ने कहा कि कविता हर भाषाओं को अपने आगोश में बांधती है.आप इसे अलग कर के नहीं देख सकते हैं.यही कारण है कि आज पुरे विश्व में हिंदी अपने यहाँ कि अपेक्षा कहीं अधिक फल-फूल रही है.आज से पच्चीस साल पहले इसी शहर में हिंदी प्रेमियों ने "इंदूर हिंदी समिति "की स्थापना की थी.जिसका उद्देश्य था की आहिंदी भाषी क्षेत्र में हिंदी भाषा के प्रोत्साहन के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करना .कई कार्यक्रम हुए भी .लेकिन कुछ समय बाद यह संस्था शिथिल पढ़ गई थी,जिसे पुनः सक्रीय किया गया है.जिसके पोर्टल www.indurhindisamitinzb.blogspot.comपार जा कर देखा जा सकता है कि केवल भारत में ही नहीं विदेशो में किस तरह लोग हिंदी के दीवाने हैं.वहीँ श्री अग्रवाल ने कवि सम्मलेन के आयोजन के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त किया.कवि सम्मलेन कि शुरुआत श्रीमती हरबंस कौर के गीत "आज"से हुई ,जिसमे उनहोने इंसानों के बिच इन्सान खोजने का प्रयास किया.शहर के कवि घनश्याम पाण्डे ने "चांदनी रात .."में प्रेयसी को खोजने कि बात कही.श्रीमती सुषमा बोधनकर ने लोक प्रिय देश भक्ति गीत "-मेरे वतन के लोंगों " की तर्ज पर एक पैरोडी सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी.रियाज तनहा एवम रहीम कमर ने अपनी गजलों से समां बांध दिया.नांदेड(महाराष्ट्र) से आये हास्य कवि बजरंग पारीक ने अपनी हास्य रचनाओं से काव्य रसिकों को लोट-पोट कर दिया.गीत पूर्णिमा के एक संयोजक एवम कवि विजय कुमार मोदानी ने हास्य श्रंगार रस की रचनाओं से सभी को प्रभावित कर दिया.उन्हों ने कहा कि "भावनाओं की कलम जब प्रेम रस में डूब जाती है तो वह कविता बन जाती है.देश के प्रसिद्ध शायर एवम इंदूर हिंदी समिति के अध्यक्ष राजीव दुआ ने श्रृगार रस से ओत-प्रोत एक गजल "गरीबों के एक आँगन में था ईद का चाँद ,कभी मुस्कराता तो क्या बात होती..." पर तालियों की गडगडाहट से परिसर गुन्ज्मय हो उठा.बल कवि कर्मवीर सिंह की कविताओं को श्रोताओं ने काफी पसंद किया.नांदेड से आये कवि खटपट भेंसवी की रचना "हर बहु बेटी घर की शान होती है ,बहु भी तो बेटी के समान होती है"को लोंगों ने काफी पसंद किया.युवा कवि पवन पाण्डे ने माँ को अर्पित अपनी कविता से लोगों का मनमोह लिया .गीत पूर्णिमा के मुखिया एवम कवि समेलन के संयोजक सीताराम पाण्डे ने जहाँ कवि सम्मलेन का सुन्दर संचालन किया वहीँ उनकी कवित "में हूँ हिंदुस्तान" ने लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया.इस अवसर पर हैदराबाद से आये कवि एवम मुख्य अतिथि वेणु गोपाल भट्टल ने अपनी रचना "चिराग ऐसे जले कि बेमिसाल रहे ,किसी का घर जले यह ख्याल रहे"ने सभी को आकर्षित कर दिया.उनके द्वारा राजस्थानी शेली में प्रस्तुत रचनाओं को भी सराहा गया.इस मौके पर संस्था की ओर से उनका शाल श्रीफल दे कर सम्मानित किया गया .इस अवसर पर कवियों के साथ मंच पर सर्वश्री गिरिवर लाल अग्रवाल.बालकिशन इन्नानी .जसवंत लाल के.शाह के साथ साथ चन्द्र प्रकाश मोदानी,नरेश मोदानी,दामोदर लाल जोशी भी उपस्थित थे.


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