Thursday, November 25, 2010


नंबर बदले बिना मोबाइल

आपरेटर बदलने की सुविधा शुरू

नई दिल्ली। मोबाइल नंबर बदले बिना आपरेटर बदलने की बहुप्रतीक्षित सेवा कल से हरियाणा में शुरू हो गयी। संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कल हरियाणा के रोहतक में एक समारोह में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने इस मौके पर समारोह में मौजूद हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेसिंह हुड्डा को इस सेवा के तहत लिये गये कनेक्शन से फोन किया। समारोह में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री सचिन पायलट भी मौजूद थे। सिब्बल ने कहा कि यह सेवा अगले साल २० जनवरी से देशभर में शुरू कर दी जायेगी। उन्होंने कहा कि इस सेवा से विभिन्न आपरेटरों के बीच स्वस्थ स्पर्धा होगी, जिसका लाभ आम आदमी को मिलेगा। सरकार की प्रगतिगामी नीतियों और आपरेटरों के सक्रिय योगदान की बदौलत आज देश में मोबाइल उपभोक्ताआें की संख्या ७० कऱोड तक पहुंच चुकी है। अब इस सेवा के शुरू हो जाने से उपभोक्ता पसंदीदा विकल्पों का चुनाव कर सकेंगे। प्रीपेड और पोस्टपेड कोई भी मोबाइल उपभोक्ता इस सेवा का फायदा उठा सकता है, बशर्ते वह कम से कम ९० दिन तक किसी आपरेटर की मोबाइल सेवा का इस्तेमाल कर चुका हो।

आपरेटर बदलने के लिए उपभोक्ता को अधिकतम १९ रुपये की राशि अपने नये आपरेटर को अदा करनी होगी। आपरेटर इसे कम या माफ भी कर सकता है। उपभोक्ता को इसके अलावा अपने मोबाइल नंबर से १९०० नंबर पर एक एसएमएस करना होगा। इस पर उसके मौजूदा आपरेटर से उसे एसएमएस के जरिये एक विशेष कोड नंबर मिलेगा।उपभोक्ता को अपने नये चयनित आपरेटर के पास एक फार्म जमा करना होगा, जिस पर यह कोड नंबर लिखना होगा। नया आपरेटर सात दिन के भीतर उस उपभोक्ता को अपने नेटवर्क से ज़ोड देगा। पोस्टपेड उपभोक्ताआें को यह ध्यान में रखना होगा कि आपरेटर बदलने का आवेदन करने से पहले वे अपने पिछले बिल का भुगतान कर दें, अन्यथा उनका अनुरोध नामंजूर कर दिया जायेगा। प्रीपेड उपभोक्ता की यदि कोई राशि शेष है, तो वह नये आपरेटर के नेटवर्क के लिए इस्तेमा नहीं हो पायेगी। एमएनपी सेवा के शुरू होने से देश में मोबाइल सेवाआें की गुणवत्ता में सुधार होगा। अभी तक मोबाइल उपभोक्ता खराब गुणवत्ता के बावजूद अपना आपरेटर बदलने से हिचकते थे, क्योंकि ऐसा करने पर उन्हें नया मोबाइल नंबर लेना प़डता था, लेकिन अब ऐसी कोई परेशानी नहीं होगी, इसलिये वे आपरेटर बदल सकेंगे और इससे आपरेटरों पर बेहतर गुणवत्ता देने का दबाव रहेगा। यह सेवा पहले पिछले वर्ष दिसंबर में शुरू की जानी थी, लेकिन आपरेटरों की तैयारी पूरी नहीं होने जैसे कारणों से इसे दोतीन बार टाल गया।





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