Thursday, December 30, 2010


आंध्र को मिलेगा कृष्णा का सर्वाधिक जल

नई दिल्ली दक्षिण भारत के तीन राज्यों में कृष्णा नदी के जल बंटवारे के मुद्दे पर गठित दूसरे कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण ने अपना फैसला सुनाते हुए आंध्र प्रदेश को सर्वाधिक १००१ अरब घन फुट (टीएमसी), कर्नाटक को ९११ टीएमसी फुट तथा महाराष्ट्र को ६६६ टीएमसी फुट जल देने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति ब्रजेश कुमार की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने इन तीनों राज्यों को अलगअलग हिस्सा देने के साथ ही बाकी बचे २८५ टीएमसी फुट जल का बंटवारा भी इन्हीं राज्यों के बीच करने को कहा है। न्यायमूर्ति डीकेसेठ और न्यायमूर्ति एसपी श्रीवास्तव इस न्यायाधिकरण के अन्य सदस्य थे। हालांकि यह फैसला अंतर्राज्य नदी जल विवाद अधिनियम १९५६ की धारा छह के अनुरूप आधिकारिक गजट में प्रकाशित होने के बाद ही अमल में आ सकेगा। उस समय तक न्यायमूर्ति बछावत न्यायाधिकरण के निर्देश ही लागू रहेंगे। नया फैसला वर्ष २०५० तक प्रभावी रहेगा। गौरतलब है कि कृष्णा जल बंटवारे पर पहले बने बछावत न्यायाधिकरण के फैसले में आंध्र प्रदेश का हिस्सा ८११ टीएमसी फुट था, जो नये फैसले में ब़ढकर १००१ टीएमसी फुट हो गया है। आंध्र प्रदेश को अतिरिक्त जल का ४७ प्रतिशत भी मिलेगा। न्यायाधिकरण ने सभी संबंधित पक्षों को फैसले के अनुरूप ही कृष्णा नदी के जल का इस्तेमाल करने की हिदायत हुये कहा है कि उन्हें इसका बाकायदा रिकार्ड भी रखना होगा, जिसे कृष्णा नदी जल फैसला कार्यान्वयन बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। केंद्र और तीनों राज्य सरकारों को इस फैसले के गजट में प्रकाशित होने के तीन महीनों के भीतर इस बोर्ड में अपना प्रतिनिधि नामित करना होगा। तुंगभद्रा उप तटीय क्षेत्र में कर्नाटक का हिस्सा ३६० टीएमसी फुट कर दिया गया है, लेकिन परियोजना सुविधाआें के लिए राज्य ३२० टीएमसी फुट से ज्यादा जल का उपयोग नहीं कर सकता।

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