Wednesday, January 5, 2011


श्रीकृष्ण रिपोर्ट पर चर्चा से पहले राजनीति गर्म

निज़ामाबाद, आंध्र प्रदेश का विभाजन कर अलग तेलंगाना राज्य के गठन के विभिन्न पहलुओं पर रोशनी डालने वाली जस्टिस श्रीकृष्ण कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है. लेकिन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और बीजेपी पहले ही इस बैठक में हिस्सा लेने का एलान कर चुकी हैं.टीआरएस ने बैठक में हिस्सा लेने के लिए चिदंबरम की तरफ से की गई ताजा अपील को भी खारिज कर दिया है. पार्टी सूत्रों का कहना है, "चिदंबरम ने दूसरा पत्र भेजा. लेकिन उन्होंने हमारी इन आपत्तियों का जवाब नहीं दिया है कि एक ही पार्टी को अलग अलग राय नहीं देनी चाहिए. अपने पत्र में चिदंबरम ने कहा कि पांच पार्टियों ने पिछले साल जनवरी में इसी तरह की एक बैठक में एक जैसी राय दी थी. लेकिन विवाद इस बात पर है कि तीन पार्टियों ने अलग अलग राय रखी."चिदंबरम ने इस बैठक में आंध्र प्रदेश की आठ मान्यता प्राप्त पार्टियों को आमंत्रित किया है जिसका टीआरएस बहिष्कार कर रही है. पार्टी सूत्रों का कहना है, "केंद्र सरकार जानबूझ कर पार्टियों में अलग अलग रायों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है क्योंकि सभी पार्टियों से दो प्रतिनिधि बुलाए गए हैं." टीआरएस की मांग है कि केंद्र सरकार बजट सत्र में एक विधेयक पेश कर अलग तेलंगाना राज्य बनाने का मार्ग प्रशस्त करे, भले श्रीकृष्ण कमेटी की सिफारिशें कुछ भी हों.उधर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरन कुमार रेड्डी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. समझा जाता है कि इस बैठक के दौरान राज्य में तेलंगाना राज्य की मांग से पैदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई. रेड्डी सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए बुधवार को ही दिल्ली पहुंच गए.पूरा आंध्र प्रदेश बेसब्री से श्रीकृष्ण कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. इसमें संयुक्त आंध्र प्रदेश या फिर विभाजन कर अलग तेलंगाना राज्य बनाने से जुड़े पहुलओं का विस्तार से विश्लेषण किया गया है. पिछले साल जब केंद्र सरकार ने इस मुद्दे सभी पार्टियों से साल मशविरा करने का फैसला किया तो तेलंगाना क्षेत्र में हिंसा भड़क उठी.

तेलंगाना पर सर्वदलीय बैठक

में टीआरएस और बीजेपी नही

निज़ामाबाद, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का कहना है कि यह बैठक तेलंगाना के मुद्दे पर जानबूझ कर मतभेद पैदा करने की कोशिश है. बीजेपी ने भी गुरुवार को गृह मंत्री पी चिदंबरम की तरफ से दिल्ली में बुलाई जाने वाली इस बैठक में हिस्सा लेने का फैसला किया है.हैदराबाद में टीआरएस के मुखिया के चंद्रशेखर राव ने पत्रकारों से कहा, "गृह मंत्री को एक पार्टी से एक प्रतिनिधि बुलाना चाहिए था और उनसे राय ली जाती. लेकिन हर पार्टी से दो प्रतिनिधि बुलाने का मतलब है कि मतभेद पैदा करने की कोशिश की जा रही है."कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) जैसे राजनीतिक बैठक में दो प्रतिनिधि भेजेंगे ताकि एक प्रतिनिधि तेलंगाना क्षेत्र से और दूसरा गैर तेलंगाना इलाकों से हो. राव ने कहा कि टीआरएस ने पार्टी नेताओं और पोलित ब्यूरो के नेताओं से सलाह मशविरे के बाद बैठक में जाने का फैसला किया है और यह फैसला एकमत से किया गया है. उन्होंने कहा, "हम इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगें क्योंकि यह मजाक है. वहां वही होगा जो 5 जनवरी 2010 को हुई बैठक में हुआ. सबने अपनी अलग राय रखी."चंद्रशेखर राव ने कहा कि चिदंबरम ने हर पार्टी से दो प्रतिनिधि बुला कर ठीक नहीं किया है. गृह मंत्री ने तेलंगाना मुद्दे पर जस्टिस श्रीकृष्ण कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है. यह रिपोर्ट चिदंबरम को पिछले हफ्ते ही सौंपी गई है.चंद्रशेखर राव का कहना है कि टीआरएस "आत्म सम्मान" की खातिर अलग राज्य का निर्माण चाहती है. वह कहते हैं, "हम तेलंगाना चाहते हैं. हमारी सिर्फ यही एक मांग है कि बजट सत्र में अलग राज्य बनाने संबंधी विधेयक संसद के सामने रखा जाए."राज्य बीजेपी अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने कहा है कि केंद्रीय नेताओं से मशविरे के बाद सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने का फैसला किया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसी पार्टियों की बैठक बुलाने का कोई फायदा नहीं है जो इस मुद्दे पर बिल्कुल अलग अलग राय रखती हों. वह कहते हैं, "यह बैठक सिर्फ श्रीकृष्ण कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा के लिए बुलाई गई है. बीजेपी ने कभी इस कमेटी का समर्थन नहीं किया. वह इसके खिलाफ रही है." रेड्डी का कहना है कि इस समस्या को सुलझाने का यही इकलौता तरीका है कि राज्य के बंटवारे के लिए संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की जाए.

सोनिया गांधी के पांव धोऊंगा: चंद्रशेखर

निज़ामाबाद, पिछले दिनों तेलंगाना के मुद्दे पर आमरण अनशन कर चुके के.सी .आर. ने कहा, ''अगर सोनिया गांधी तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देती हैं तो मैं उनका स्वागत करूंगा, उसके पांव धोऊंगा और उनकी पूजा करूंगा। हमें बस तेलंगाना चाहिए।'' दरअसल आंध्र प्रदेश में कांग्रेस भी संकट से गुजर रही है. हेलीकॉप्टर हादसे में पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद से पार्टी को कोई असरदार नेता नहीं दिख रहा है. ऐसे में टीआरएस प्रमुख दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं. कांग्रेस के साथ राजनीतिक भविष्य का संकेत देते हुए वह कहते हैं, ''अगर आप कहते हैं कि तेलंगाना बनेगा तो चंद्रशेखर राव खत्म हो जाएगा. मैं अपना वजूद मिटाने के लिए तैयार हूं. बस तेलंगाना चाहिए.''सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष चाह रहे हैं कि कांग्रेस के गुणगान के साथ तेलंगाना बन जाए. इससे पार्टी को राव जैसा नेता भी मिल जाएगा और कांग्रेस को बड़ा वोट बैंक भी मिलेगा. इससे पहले नौ दिसंबर को बीजेपी भी तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर चुकी है. कांग्रेस और टीआरएस को लग रहा है कि बीजेपी के प्रदर्शनों के चलते तेलंगाना इलाके के लोग उनका साथ छोड़ दें.

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