Sunday, March 13, 2011

जगन ने फहराया वाईएसआर कांग्रेस का झंडा

निज़ामाबाद |जगन मोहन रेड्डी ने अपनी नई पार्टी नई पार्टी का जिस तरह का झंडा तैयार किया है, वो इस बात का संकेत है कि वाईएस राजशेखर रेड्डी की राजनीतिक विरासत के लिए जगनमोहन रेड्डी और कांग्रेस के बीच ज़बरदस्त घमासान होने वाला है.तीन रंग के इस झंडे के बीचों बीच वाईएसआर के चित्र हैं और उस के इर्दगिर्द उन कल्याण योजनाओं के नाम लिखे हैं जो वाईएसआर ने ग़रीबों के लिए शुरू किए थे और जिनके बलबूते पर उन्होंने अपनी ग़रीबों की मसीहा की छवि बना ली थी.जगनमोहन रेड्डी और उनकी माँ विजय लक्ष्मी ने ये झंडा कडपा जिले में इदुपुलापाया में वाईएसआर की समाधि के निकट फहराया.इस अवसर पर परिवारजनों के अलावा कांग्रेस के एक लोक सभा सदस्य राजमोहन रेड्डी और 11 विधायक और कुछ दूसरे नेता भी मौजूद थे.जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि वो अपनी पार्टी के कार्यक्रम और नीतियों के घोषणा कुछ दिनों के बाद करेंगे.इस समारोह पर एक विवाद के बादल भी मंडराए क्योंकि चुनाव आयोग ने जगनमोहन रेड्डी से कहा कि वो इस समय कोई बड़ा समारोह या सम्मलेन आयोजित नहीं कर सकते हैं क्योंकि विधान परिषद के लिए कडपा में होने वाले चुनाव के आचार संहिता लागू है.इसी के साथ अब ये तय हो गया है कि कडपा लोक सभा सीट के लिए दोबारा जगन ही चुनाव लड़ेंगे.जगनमोहन रेड्डी ने गत नवंबर में त्यागपत्र देते हुए ये सीट खाली की थी.इसी तरह उनकी माँ भी पुलिवेंदुला विधानसभा सीट के लिए दोबारा चुनाव लड़ेंगी क्योंकि उन्होंने भी इस सीट से त्यागपत्र दे दिया था.सितंबर, 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाईएसआर की मृत्यु के बाद से ही उनका परिवार कांग्रेस से दूर होने लगा था क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व ने जगनमोहन रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग ठुकरा दी थी.जगन ने ये कहते हुए कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था कि पार्टी उनके परिवार का अपमान कर रही है और उसमें फूट डालने की कोशिश कर रही है. लेकिन इस बीच कांग्रेस के अन्दर जगनमोहन रेड्डी का समर्थन काफ़ी घट गया है.जहाँ पहले लगभग सभी विधायक जगन का समर्थन कर रहे थे अब केवल एक दर्जन विधायक ही उनके साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.कडपा लोक सभा और पुलिवेंदुला विधानसभा उप चुनाव के बाद ही ये स्पष्ट हो सकेगा कि जगन को आम लोगों का समर्थन कहाँ तक प्राप्त है.इधर कांग्रेस उन 11 विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई कर सकती है जो पार्टी के अनुशासन का उल्लंघन करते हुए जगन के समारोह में शरीक हुए थे.

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