Monday, March 28, 2011

नांदेड की दो शाम
शास्त्रीय संगी के नाम





निज़ामाबाद | महाराष्ट्र के नादेड शहर मैं सनिवार व् रविवार के दो शामें बड़ी महत्वपूर्ण थी ,वह भी इस लिए कि पहलीबार महाराष्ट्र सरकार के संस्कृतिक विभाग ने संस्कृतिक नगरी पुणे से बाहर संस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया|जिसमे प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित हरी प्रसाद चौरसिया के बांसुरी कि स्वर लहरियां ने समां को जहाँ बांधा वहीँ अदिति भागवत के कत्थक की थाप पर लोग थिरक उठे.समारोह का शुभारम्भ शनिवार को प्रदेश के संस्कृतिक मंत्री संजय देवताले ने दीप जलाकर किया| जिसमे पहले लोकप्रिय शास्त्रीय गायिका सुश्री आरती अंकलीकर -टिकेकर ने अपनी मधुर वाणी मैं पुरिया धन श्री राग बंदिश पेश किया.वहीँ यू. श्रीनिवास ने कर्नाटकी पर आधारित राग मेंदोलिकर प्रस्तुत किया| पंडित भीमसेन जोशी के पुत्र श्री निवास जोशी ने यमन राग मैं "सखी कैसे खिलायें "प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया.हेमा उपासनी के गायन को लोगों जमकर दाद दी|शनिवार २६ एवम रविवार २७ मार्च की शाम नादेडवासियों के लिए यादगार रही|
विवरण व् फोटो:जिला महती कार्यालय ,नादेड के सौजन्य से

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