Tuesday, April 26, 2011


साईं थे शांति के प्रतीक,

सत्यजीत-रत्नाकर ने मचाई अशांति

आन्ध्र प्रदेश । सत्य साईं की महासमाधि से पहले ही 40 हजार करो़ड के साईं ट्रस्ट पर हक को लेकर सत्य साईं के निजी सेवक सत्यजीत और उनके भतीजे रत्नाकर में जंग छि़ड चुकी है। इस जंग पर विराम के लिए ही बुधवार को साईं का अंतिम संस्कार होते ही ट्रस्टियों की बैठक बुलाई गई है। सत्यजीत का दावा है कि साईं बाबा अपनी वसीयत में 40 हजार करो़ड का ट्रस्ट उनके नाम कर गए हैं, वहीं रत्नाकर साईं के निधन के लिए सत्यजीत को ही आरोपों में घेर रहे हैं। कहा जाता है कि सत्यजीत को18 साल पहले खुद सत्य साईं बाबा ने अपना निजी सचिव बनाया था।> सत्यजीत 33 साल के हैं जिन्होंने साईं संस्थान से एमबीए किया और हमेशा बाबा के करीबी रहे। उन्हें बाबा के बाद आश्रम का सबसे ताकतवर इंसान माना जाता है। शायद इसी वजह से साईं के निधन के बाद से उनके अंतिम दर्शन और समाधि की सारी तैयारियों की जिम्मेदारी खुद उठा रहे हैं। इसके पीछे वजह ये है कि साईं के निधन के बाद ही खबर उ़डी कि बाबा ने एक वसीयत छो़डी है जिसमें 40 हजार करो़ड के ट्रस्ट की पूरी जिम्मेदारी सत्यजीत को सौंपी है। माना जा रहा है कि खुद सत्यजीत ही ये बात सबके सामने उ़डा रहे हैं। वो खुद को सत्य साईं ट्रस्ट का एकछत्र मालिक करार देने की तैयारी में हैं। > > सत्यजीत ऎसा करके बाबा के भतीजे और इलाके के केबल किंग रत्नाकर के दावे को सिरे से खारिज करना चाहते हैं। भतीजे आरजे रत्नाकर को उनके पिता के निधन के पांच साल बाद सत्य साईं ने 2010 में ट्रस्ट का सदस्य बनाया। ट्रस्ट के तमाम सदस्यों में रत्नाकर ही इकलौते हैं जिनका साईं से खून का रिश्ता था। सत्यजीत का ट्रस्ट पर दावा खारिज करने के लिए रत्नाकर ने एक चेहरा सामने कर दिया। ये हैं सत्य साईं से 43 सालों से जु़डे रहे एक प्रोफेसर श्याम सुंदर। प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि सत्यजीत और उनके साथी पिछले 6 साल से साईं बाबा को नींद की गोलियां खिला रहे थे। साईं को ये गोलियां जबरन दी जाती थीं ताकि वह नशे के आदी हो जाएं। प्रोफेसर की मानें तो नींद की गोलियों के चलते ही सत्य साईं प्रार्थनाओं में देर से आते और दोपहर में सोने लगे थे।> आरोप तो ये भी उछले हैं कि हॉस्पिटल में जब तक सत्य साईं रहे उस दौरान सत्यजीत और डॉक्टरों के अलावा और किसी को बाबा के पास जाने की इजाजत नहीं थी। इसलिए साईं की मौत का ठीकरा रत्नाकर और उनके करीबी सत्यजीत के सिर पर ही फो़ड रहे हैं ताकि 40 हजार करो़ड की मिल्कियत के मालिक की दावेदारी खारिज हो जाए। सत्य साईं को नींद की गोलियों की बात आखिरी वक्त में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर सफाया ने भी कबूल की है। यानि 40 हजार करो़ड के इस झग़डे की शुरूआत सत्य साईं के रहते ही शुरू हो गई थी। अब उनके जाने के बाद ट्रस्ट पर कब्जे की जंग और तेज होती जा रही है।> ट्रस्ट पर कब्जे के लिए शुरू हुए इस घमासान का ही नतीजा है कि सत्य साईं का वारिस बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे सत्यजीत पर जान का खतरा मंडराने लगा है। खुद राज्य सरकार के खुफिया विभाग ने इसकी जानकारी ट्रस्ट को दी है।

Tuesday, April 12, 2011

सात माह से कमरे में बन्द
थी दो जिन्दा कंकाल

नई दिल्ली । नोएडा में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को सोचने पर मजबूर की दिया। पिता के मौत के बाद दो बहनों ने खुद को पिछले सात महिलों से बंद कर रखा था। पुलिस ने आज समाज सेवा संस्‍थानों के साथ मिलकर उन्‍हें घर से बाहर निकाला। दोनों लड़कियां जीवित कंकाल की तरह हैं और उनकी हालत काफी नाजुक बनी है। यह अजीबो गरीब सनसनीखेज वाक्‍या नोएडा सेक्‍टर 29 में सामने आया है। यहां के फ्लैट नम्‍बर 326 में दो लड़किया पिछले सात महिनों से बंद थी। आसपास के लोगों ने कुछ महिनों पूर्व पुलिस से इस बात की शिकायत की थी कि उन्‍हें आजतक नहीं पता चल सका है कि इस फ्लैट में कौन रहता है तथा सिर्फ हल्‍की आवाजें सुनाई देती हैं। उसके बाद आज सुबह नोएडा पुलिस ने समाजसेवी संगठन की मदद से फ्लैट में पहुंची और दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगी। पुलिस जब दरवाजा खोलने की कोशिश कर रही थी तो अंदर से सिर्फ यही आवाज आ रही थी नहीं ऐसा न करो। मगर पुलिस जब दरवाजा खोलने में कामयाब हो गई तब उसके बाद जो नजारा सामने आया पुलिस हैरान रह गई। कमरे से किसी चीज के सड़े होने की बदबू आ रही थी। अंदर दो लड़कियां थी। एक लड़की तो बिल्‍कुल कंकाल में तब्‍दील हो चुकी थी अंतर सिर्फ इतना था कि उसकी सांसे चल रही थी। पुलिस ने बताया कि दोनों लड़कियां आपस में सगी बहने हैं। एक बहन का नाम सोनाली, दूसरी का अनुराधा बताया जा रहा है। एक बहन तो उठने की स्थिति में ही नहीं थी और पूरी तरह से कंकाल हो चुकी थी। उसे किसी तरह स्ट्रेचर पर बाहर लाया गया। दूसरी बहन भी सूख चुकी थी। उसके मुंह से इतनी बदबू आ रही थी कि उसके सामने खड़ा होना भी मुश्किल था। इतनी गरमी में भी वो तीन-तीन स्वेटर पहने हुई थी। दोनों बहनों को नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सोसाइटी के सदस्‍य ने बताया कि हम लोग रोज कोशिश करते थे कि कोई दरवाजा खोले लेकिन लड़कियों ने दरवाजा नहीं खोला। केवल एक लड़की दिखती थी दूसरी तो दिखती भी नहीं थी। समाजसेवी उषा ठाकुर ने कहा कि कल भी पुलिस यहां आई तो इन लड़कियों ने दरवाजा नहीं खोला। कल इनके पास महिला पुलिस नहीं थी इसलिए वापस चले गए। इन लड़कियों ने खाना नहीं खाया, पानी नहीं पिया। कपड़े भी 6 महीने से नहीं बदले। पुलिस ने बताया कि जब से उनके पिता का देहांत हुआ था तबसे आजतक उन दोनों बहनों ने बाहर की रोशनी तक नहीं देखी। पुलिस ने बताया कि दोनों का एक भाई था जो कुछ साल पहले उन्‍हें छोड़कर चला गया था।
पुलिस के अनुसार दोनों बहनों की उम्र 40 साल के आसपास है। पिता की मौत के बाद पिछले सात महीने से उन्होंने खुद को घर में बंद कर रखा था।पुलिस के साथ मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता ऊषा ठाकुर ने संवाददाताओं को बताया, "जैसे ही दरवाजा खोला गया, दरुगध से सभी लोगों को उल्टी आने
लगी। बड़ी महिला अर्धनग्न अवस्था में थी। मैं सोचती हूं वह कोमा में है। वह बोल नहीं पा रही थी और न ही समझ पा रही थी कि क्या हो रहा है। इसलिए मैंने कैलाश अस्पताल से सम्पर्क किया।"ठाकुर के अनुसार, "मैं समझती हूं वे मानसिक रूप से परेशान हैं.. उनका भाई भी उन्हें छोड़कर सेक्टर-39 में रहने चला गया। उन्हें सांत्वना देने के लिए या उनसे बात करने के लिए कोई नहीं था।" उन्होंने बताया कि उनका भोजन किसी कैंटीन से आता था। पड़ोसियों ने बताया कि भोजन दरवाजे के बाहर रखा रहता था। जब घर का दरवाजा खोला गया तो महिलाओं ने पानी मांगा।मनोचिकित्सक के अनुसार, यह भावनात्मक अलगाव के कारण हो सकता है। उन्होंने कहा, "यह अत्यधिक तनाव या तनाव बढ़ाने वाले कुछ मनोरोग सम्बंधी तत्वों के कारण हो सकता है। निश्चित रूप से दोनों बेटियां पिता के बहुत करीब रही होंगी और वह उनके सभी फैसले लेते होंगे।"मनोचिकित्सक के अनुसार यह ऐसे लोगों के साथ भी हो सकता है, जो बहुत अंतर्मुखी होते हैं।

Friday, April 8, 2011

अन्ना हम सब आप के साथ हैं......


निज़ामाबाद(आंध्र प्रदेश) जन लोकपाल विधेयक क़ी मांग को लेकर नई दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशन पर बैठे समाजसेवी अन्ना हजारे के समर्थन में आज पूरा देश खड़ा होगया है| देश के हर शहर ,कस्बे व गावों में लोग अन्ना के समर्थन में उतर आए हैं .शुक्रवार को निज़ामाबाद क़ी जनता भी" सिटिजन आफ निज़ामाबाद "के बैनर के नीचे आ कर अनशन पर बैठे ,जिसमे व्यापारी ,उधोगपति, डाक्टर,वकील,जनता के प्रतिनिधि,सरकारी कर्मचारीसमेत तमाम आम आदमी ने खुले मन से भाग लिया.

Thursday, April 7, 2011

कार्टूनिस्ट की नज़र मैं अन्ना हजारे

साभार :भड़ास डाट काम

क्या है जन लोकपाल बिल ?

देश में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों से निपटने का

सबसे कारगर उपाय हो सकता

है जन लोकपाल/बिल

न्यायाधीश संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण और अरविंद केजरीवाल द्वारा बनाया गया यह विधेयक लोगों द्वारा वेबसाइट पर दी गई प्रतिक्रिया और जनता के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इस बिल को शांति भूषण, जे.एम. लिंग्दोह, किरन बेदी, अन्ना हजारे आदि का समर्थन प्राप्त है. इस बिल की प्रति प्रधानमंत्री एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक दिसम्बर को भेजा गया था.
1 इस कानून के अंतर्गत, केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त का गठन होगा

.2. यह संस्था निर्वाचन आयोग और सुप्रीम कोर्ट की तरह सरकार से स्वतंत्र होगी. कोई भी नेता या सरकारी अधिकारी जांच की प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर पाएगा.

3. भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कई सालों तक मुकदमे लम्बित नहीं रहेंगे. किसी भी मुकदमे की जांच एक साल के भीतर पूरी होगी. ट्रायल अगले एक साल में पूरा होगा और भ्रष्ट नेता, अधिकारी या न्यायाधीश को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा.
4. अपराध सिद्ध होने पर भ्रष्टाचारियों से सरकार को हुए घाटे को वसूल किया जाएगा.
5. यह आम नागरिक की कैसे मदद करेगा : यदि किसी नागरिक का काम तय समय सीमा में नहीं होता, तो लोकपाल जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाएगा और वह जुर्माना शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में मिलेगा.
6. अगर आपका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट आदि तय समय सीमा के भीतर नहीं बनता है या पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नहीं करती तो आप इसकी शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं और उसे यह काम एक महीने के भीतर कराना होगा. आप किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की शिकायत लोकपाल से कर सकते हैं जैसे सरकारी राशन की कालाबाजारी, सड़क बनाने में गुणवत्ता की अनदेखी, पंचायत निधि का दुरुपयोग. लोकपाल को इसकी जांच एक साल के भीतर पूरी करनी होगी. सुनवाई अगले एक साल में पूरी होगी और दोषी को दो साल के भीतर जेल भेजा जाएगा.
7. क्या सरकार भ्रष्ट और कमजोर लोगों को लोकपाल का सदस्य नहीं बनाना चाहेगी? ये मुमकिन नहीं है क्योंकि लोकपाल के सदस्यों का चयन न्यायाधीशों, नागरिकों और संवैधानिक संस्थानों द्वारा किया जाएगा कि नेताओं द्वारा. इनकी नियुक्ति पारदर्शी तरीके से और जनता की भागीदारी से होगी.
8. अगर लोकपाल में काम करने वाले अधिकारी भ्रष्ट पाए गए तो? लोकपाल/लोकायुक्तों का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी होगा. लोकपाल के किसी भी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उसकी जांच अधिकतम दो महीने में पूरी कर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा.
9. मौजूदा भ्रष्टाचार निरोधक संस्थानों का क्या होगा? सीवीसी, विजिलेंस विभाग, सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (अंटी कारप्शन डिपार्टमेंट) का लोकपाल में विलय कर दिया जाएगा. लोकपाल को किसी न्यायाधीश, नेता या अधिकारी के खिलाफ जांच करने मुकदमा चलाने के लिए पूर्ण शक्ति और व्यवस्था भी होगी.
आठ बार लोकसभा में पेश:
देश में लोकपाल की स्थापना संबंधी बिल की अवधारणा सबसे पहले 1966 में सामने आई. इसके बाद यह बिल लोकसभा में आठ बार पेश किया जा चुका है. लेकिन आज तक यह पारित नहीं हो पाया. पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के कार्यकाल में एक बार 1996 में और अटलबिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में दो बार 1998 और 2001 में इसे लोकसभा में लाया गया.

वर्ष 2004 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वादा किया था कि जल्द ही लोकपाल बिल संसद में पेश किया जाएगा. अब तक सरकार ने इसकी सुध नहीं ली. इस बिल के तहत प्रधानमंत्री को लाया जाए या नहीं इस पर लंबे समय से मशक्कत चल रही है. अब तक कोई नतीजा नहीं. जजों को भी लोकपाल/लोकायुक्त के अधिकार में लाया जाएगा.
अन्ना हजारे के प्रतिनिधि अग्निवेश और सिब्बल
के
बीच पहले दौर की बातचीत सकारात्मक

नई दिल्ली। देश में व्याप्त हद दरजे के भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के मंत्री कपित सिबल के बीच पहले दौर की बातचीत के सकारात्मक रहन की खबर है। हजारे की तरफ से स्वामी अग्निवेश और आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने सिबल से बातचीत की। दूसरे दौर की बातचीत शाम तीन बजे शुरू होगी।लोकपाल विधेयक तैयार करने के लिए सामाजिक संगठनों और सरकार के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे गांधीवादी और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच गुरुवार की सुबह बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताया है।अन्ना हजारे की तरफ से बातचीत में सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और सूचना अधिकार कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने और सरकार की ओर से मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने हिस्सा लिया।
बातचीत के बाद संवाददाताओं से सिब्बल ने कहा कि वह चाहते हैं कि अन्ना हजारे जल्द से जल्द अनशन खत्म करें, लेकिन उन्होंने बातचीत के बारे कोई विस्तृत जानकारी देने से इंकार किया। वहीं स्वामी अग्निवेश ने भी कहा कि बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वे अन्ना हजारे से चर्चा करने के बाद दोपहर 1.30 बजे एक बार फिर सिब्बल से मिलेंगे।


Saturday, April 2, 2011

२८ साल बाद भारत ने रचा इतिहास भारत
मुंबई। गौतम गंभीर (97) की विषम परिस्थितियों में खेली गई अद्भुत पारी और महेन्द्र सिंह धोनी (नाबाद 91) के कप्तानी प्रहारों से भारत ने श्रीलंका को वानखेडे स्टेडियम में शनिवार रात छह विकेट से जमींदोज करते हुए 28 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश का और अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का विश्वकप जीतने का सपना पूरा कर दिया। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दो अप्रैल का स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया है। धोनी के धुरंधरों ने वही कारनामा कर दिखाया जो कपिल देव के जांबाजों ने 1983 में लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज को हराकर दिखाया था।
श्रीलंका ने अनुभवी बल्लेबाज महेला जयवर्द्धने के नाबाद 103 रन की बदौलत छह विकेट पर 274 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था, लेकिन गंभीर और धोनी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारते हुए चौथे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी कर जीत की दहलीज पर डाल दिया। भारत ने 48.2 ओवर में चार विकेट पर 277 रन बनाकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।
कप्तान धोनी ने कल कहा था कि भारतीय टीम का सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है और उन्होंने क्या खूब बात कही थी। धोनी ने टूर्नामेंट का अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाते हुए और कप्तानी की यादगार पारी खेलते हुए वह इतिहास बना दिया जिसका 121 करोड़ भारतीयों को लंबे समय से इंतजार था।
धोनी के जांबाजों में चार पूर्व चैंपियनों को एक के बाद एक ध्वस्त करते हुए वानखेडे में तिरंगा लहरा दिया। धोनी ने विश्व विजयी छक्का मारकर करोड़ों भारतीयों को आज रात जश्न मनाने का मौका दे दिया। धोनी के छक्का मारते ही सारे भारतीय खिलाड़ी मैदान में कूद पड़े और सबने एक-दूसरे को गले लगा लिया। इस छक्के के लगते की पूरे देश में आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा।
विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सेहवाग के शून्य और अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के 18 रन बनाकर आउट हो जाने के बाद भारतीय उम्मीदें धूमिल नजर आने लगी थी। लेकिन गंभीर ने अपने जीवन की सबसे यादगार पारी खेलते हुए 122 गेंदों में नौ चौकों की मदद से 97 रन बनाए। हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उन्हें इसका अफसोस नहीं होगा क्योंकि उन्होंने भारत को विश्वविजेता बनाने में सबसे बड़ा योगदान दिया।
कप्तान धोनी ने तीन विकेट 114 रन पर गिर जाने के बाद खुद को बल्लेबाजी क्रम को युवराज सिंह से ऊपर लाते हुए यह साबित किया कि वह चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं और उनमें भारत को विश्व चैंपियन बनाने का माद्दा है। गंभीर और विराट कोहली (35) ने तीसरे विकेट के लिए 83 रन की बहुमूल्य साझेदारी की थी।
मगर भारतीय जीत को अमली जामा पहनाने का श्रेय गंभीर और धोनी के बीच चौथे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी को गया। विश्वकप में अब तक एक भी अर्धशतक नहीं बना पाए धोनी ने 79 गेंदों पर आठ चौकों और दो छक्कों की मदद से नाबाद 91 रन की ऐसी पारी खेली जिसे भारतीय क्रिकेटप्रेमी वर्षों तक याद रखेंगे।
गंभीर का विकेट 223 के स्कोर पर गिरा तब भारतीय पारी पर कुछ दबाव नजर आना लगा था, लेकिन धोनी ने अपनी 'कैप्टन कूल' प्रतिष्ठा के अनुरूप पूरा संयम दिखाते हुए युवराज (नाबाद 21) के साथ भारत को 48.2 ओवर में जीत की मंजिल पर पहुंचा दिया। युवराज ने 24 गेंदों की अपनी पारी में दो चौके लगाए।
धोनी इस खिताबी जीत के साथ क्रिकेट इतिहास के ऐसे पहले कप्तान बन गए जिन्होंने ट्वेंटी-20 विश्वकप के साथ-साथ एकदिवसीय विश्वकप भी अपने नाम कर लिया। फाइनल में भारत ने विश्व कप इतिहास में लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी जीत हासिल की और साथ ही श्रीलंका से 1996 के विश्व कप सेमीफाइनल में कोलकाता में मिली पराजय का बदला चुका लिया।
भारत ने चार पूर्व चैंपियनों को अपने खिताबी सफर में ध्वस्त किया। भारत ने अंतिम समूह मैच में दो बार के चैंपियन वेस्टइंडीज को, क्वार्टरफाइनल में चार बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को, सेमीफाइनल में एक बार के चैंपियन पाकिस्तान को और फाइनल में एक बार के चैंपियन श्रीलंका को शिकस्त झेलने के लिए मजबूर कर दिया।
किस्मत के महाधनी धोनी ने फाइनल से पहले कहा था कि टीम सही समय पर अपने चरम पर पहुंच गई है और उनके इस साहस और संकल्प के सामने श्रीलंका का 274 रन का स्कोर भी छोटा पड़ गया। पूरा वानखेडे स्टेडियम धोनी के प्रहारों के चलते झूम रहा था। जहां भी देखो वहीं तिरंगे लहरा रहे थे।
श्रीलंका को लसित मलिंगा ने सेहवाग को पगबाधा और सचिन को विकेटकीपर कुमार संगकारा के हाथों कैच कराकर उम्मीद बंधाई थी, लेकिन गंभीर ने चट्टान की तरह श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण के सामने डटकर भारतीय उम्मीदों को लगातार बनाए रखा। जब विराट कोहली को तिलकरत्ने दिलशान ने अपनी ही गेंद पर कैच किया तो फिर श्रीलंका की उम्मीद जाग उठी।
मगर धोनी ने कप्तानी पारी खेलते हुए श्रीलंका को अंततः निराशा झेलने के लिए मजबूर कर दिया। इस हार के साथ श्रीलंका के विश्व रिकॉर्डधारी मुथैया मुरलीधरन के अंतर्राष्ट्रीय जीवन का थोड़ा दुखद समापन हुआ। वह अपने आखिरी एकदिवसीय मैच में कोई विकेट नहीं ले पाए।
इससे पहले अनुभवी बल्लेबाज मॉहेला जयवर्द्धने (नाबाद 103) ने खिताबी मुकाबले में आखिर अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप खेलते हुए बेहतरीन शतक बनाते हुए श्रीलंका को छह विकेट पर 274 रन के मजबूत स्को पर पहुंचाया था।
चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे महेला ने मात्र 88 गेंदों में अपनी नाबाद 103 रन की पारी में 13 चौके लगाए और उन्होंने मध्यक्रम के बल्लेबाजों थिलन समरवीरा (21) नुवान कुलशेखरा (32) और तिषारा परेरा (नाबाद 22) के साथ उपयोगी साझेदारियां करते हुए श्रीलंका को विश्वकप फाइनल में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
कप्तान कुमार संगकारा ने 48 और सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान ने 33 रन बनाए। श्रीलंका ने एक समय अपने तीन विके 28वें ओवर में 122 रन पर गंवा दिए थे, लेकिन उसके बाद महेला की बेशकीमती पारी से श्रीलंका ने अंतिम 22.1 ओवर में 152 रन जोड़ डाले। अंतिम 10.1 ओवर में श्रीलंका ने जबर्दस्त बल्लेबाजी की और इस दौरान 92 रन बटोर डाले।
महेला ने कुलशेखरा के साथ छठे विकेट की साझेदारी में 66 रन जोड़े और परेरा के साथ सातवें विकेट की अविजित साझेदारी में आखिरी दो ओवरों में 26 रन ठोक डाले। इस साझेदारी में परेरा ने मात्र नौ गेंदों में तीन चौके और एक छक्का उड़ाते हुए नाबाद 22 रनों का योगदान दिया।
भारत की तरफ से जहीर खान ने 60 रन देकर दो विकेट और युवराज सिंह ने 49 रन देकर दो विकेट लिए जबकि ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह को 50 रन देकर एक विकेट मिला। खिताबी मुकाबले में टीम में शामिल किए गए शांतकुमारन श्रीसंत खासे महंगे साबित हुए और उन्होंने आठ ओवर में 52 रन लुटाए। मुनाफ पटेल ने अच्छी गेंदबाजी की और नौ ओवर में 41 रन दिए।
विश्व कप फाइनल में टॉस को लेकर उलझन हुई और एक नहीं दो बार टॉस हुआ। संगकारा ने दूसरी बार टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। जहीर ने अपने शुरुआती स्पैल में बहुत कसी हु गेंदबाजी की। पहले छह ओवर में श्रीलंका सिर्फ 17 रन बना पाया था और जहीर ने अपने पहले तीन ओवर तो मेडन ही फेंके थे।
जहीर ने अपने चौथे ओवर की पहली गेंद पर लय में चल रहे सलामी बल्लेबाज उपुल थरंगा (दो) को पहली स्लिप में वीरेन्द्र सेहवाग के हाथों कैच करा दिया। दिलशान और संगकारा ने दूसरे विकेट की साझेदारी में 43 रन जोड़े। दिलशान ने 49 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 33 रन बनाकर टूनामेंट में सबसे पहले 500 रन पूरे कर लिए।
लेकिन वह हरभजन की गेंद पर बोल्ड हो गए और भारत को दूसरी सफलता हाथ लग गई। संगकारा और महेला की तीसरे विकेट की 62 रन की साझेदारी खतरनाक रूप ले रही थी कि बाएं हाथ के स्पिनर युवराज सिंह की गेंद को पीछे हटकर कट करने की कोशिश में संगकारा विकेटकीपर महेन्द्र सिंह धोनी के हाथों लपके गए। संगकारा ने 48 रन की अपनी पारी में 67 गेंदों का सामना किया और इस दौरान पांच चौके लगाए।
महेला ने इसके बाद समरवीरा (21) के साथ मिलकर श्रीलंका के स्कोर को 179 रन तक पहुंचाया। समरवीरा को युवराज ने पगबाधा किया जबकि चामरा कापूगेदेरा एक रन बनाकर जहीर का दूसरा शिकार बन गए। नुवान कुलशेखरा ने 30 गेंदों में एक चौके और एक छक्के की मदद से 32 रन बनाए। इस दौरान जयवर्द्धने ने विश्व कप का अपना तीसरा और ओवरआल 14वां शतक 84 गेंदों में 13 चौकों की मदद से पूरा कर लिया।कुलशेखरा रन आउट हुए, लेकिन इसके बाद परेरा ने ताबड़तोड़ शॉट खेलते हुए श्रीलंकाई स्कोर को मजबूती दे दी। परेरा ने जहीर के पारी के आखिरी ओवर में दो चौके और एक छक्का उड़ाकर 18 रन बटोरे जिससे जहीर का गेंदबाजी विश्लेषण पूरी तरह बिगड़ गया।
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कूल
-कूल भारतीय
कप्तान की कहानी
नई दिल्‍ली। 28 साल बाद एक बार फिर भारत को विश्‍व कप दिलाने वाले कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी इतिहास पुरुष बन गए हैं। 7 जुलाई 1981 को तत्‍कालीन बिहार की राजधानी रांची में जन्मे धोनी ने अपना क्रिकेट करियर 1999-2000 में शुरू किया था। पहली बार एकदिवसीय मैच खेलने का मौका उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ 23 दिसंबर 2004 को मिला। हालांकि इस मैच में वे पहली ही गेंद पर आउट हो गए थे। इसके बाद अगले चार मैचों में उनकी बल्लेबाजी किसी को प्रभावित नहीं कर पाई थी। विशाखापट्टनम में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पांचवे मैच में उनका जो कमाल दिखा, उससे उनके प्रति लोगों की सोच ही बदल गई। इस मैच में उन्होंने 123 गेंदो पर 148 रन बनाए। धोनी ने 15 चौके और चार छक्के लगाए और अपनी जिंदगी का पहला मैन ऑफ द मैच अवार्ड जीता। धोनी ने खुद को न सिर्फ एक अच्छा विकेटकीपर बल्कि अव्‍वल बल्‍लेबाज भी साबित किया है।
धोनी के नेतृत्‍व में भारत टी20 वर्ल्‍ड कप पहले ही जीत चुका है और वह टेस्‍ट क्रिकेट में भारतीय टीम को नंबर 1 रैंकिंग भी दिला चुके हैं। वर्ल्‍ड कप में जीत के बाद टीम वनडे क्रिकेट में भी नंबर 1 हो गई है। बस आईसीसी की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।धोनी को बिहार के अंडर 19 टीम में 1998-99 में शामिल किया गया। तब उन्होंने 5 मैचों में 176 रन बनाए। बिहार टीम में रणजी ट्रॉफी के लिए उन्होंने 1999–2000 के सीज़न में पहली बार खेला। 2003/04 के सीज़न में रणजी मुकाबले में धोनी ने असम के खिलाफ शतक लगाया जिससे उन्हें पहचान मिली और उन्हें भारत-ए में जिम्बाववे और केन्या के दौरे में मौका दिया गया। इस दौरे के दौरान उनके प्रदर्शन को काफी सराहना और पहचान मिली। कई बड़े खिलाड़ियों के साथ साथ उन्होंने तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का ध्यान आकर्षित किया।
18 सितंबर 2007 को वनडे टीम की कप्तानी उन्हें मिली। उस दौरान ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का टूर्नामेंट चल रहा था। अंतत: 24 सितंबर को वह शुभ घड़ी आई जब भारत ने उनके नेतृत्‍व में आईसीसी ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता लिया। उसके बाद भारत ने 2007-08 में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज, कॉम्पैक कप (2009-10) और एशिया कप (2010) जीत लिया।
धोनी ने कभी भी क्रिकेट करियर में रैंकिग को महत्व नहीं दिया। उनकी नज़र में रैंक से बढ़कर टीम का प्रदर्शन और खेल जीतना है।
रांची में पले-बड़े धोनी के परिवार में उनकी मां देवकी देवी और पिता पान सिंह के अलावा एक बहन और एक भाई है। धोनी को म्यूज़िक सुनना बहुत पसंद है और खासतौर पर वे लता मंगेशकर और किशोर कुमार को सुनना पसंद करते हैं। बाइक्स का धोनी को खासतौर पर बेहद शौक है। उनका कहना है कि उन्हे स्पीड बहुत पसंद है। धोनी भगवान में पक्‍का विश्वास रखने वाले शख्‍स हैं। इसके अलावा उन्हें कंप्यूटर गेम्स और बैडमिंटन खेलना भी पसंद है। धोनी एडम गिलक्रिस्ट के बड़े फैन हैं।
धोनी आत्मविश्वास से भरे हुए रहते हैं। मैदान पर वह आक्रामक प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। धोनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह सकारात्मक विचार रखते हैं और अपना आपा नहीं खोते हैं। तभी उन्‍हें कैप्टन कूल कहा जाता है। धोनी में सही फैसले लेने की गजब की क्षमता है। इसके अलावा वह अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी बखूबी लेना जानते हैं।
धोनी यूथ आइकन हैं। उनके लंबे बाल कभी युवाओं के बीच चर्चा का विषय थे। पूर्व पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ भी उनकी उस हेयरस्टाइल के कायल हो गए थे। प्यार से लोग उन्हे माही बुलाते हैं। धोनी मैदान पर जितने आक्रामक दिखते हैं, निजी जिंदगी में वैसे बिलकुल नहीं है। उनके मुताबिक वे निजी जिंदगी में बड़े लापरवाह हैं और उन्हें बातें करना बिलकुल पसंद नहीं हैं। वे ज़्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं। वे काफी मस्तमौला और मजाकिया किस्म के इंसान हैं।

कप्तान के तौर पर धोनी की खूबियां
- खिलाडिय़ों में टीम भावना को बढ़ाने का काम किया।
- परिस्थिति के मद्देनजर सही खिलाडिय़ों को सही मौके पर आजमाया।
- वरिष्ठ खिलाडिय़ों से सलाह-मशविरा करने में पीछे नहीं हटे।
- मानसिक आवेग पर अंकुश रखा और चेहरे पर विश्वास को कायम रखा।
लकी कप्तान : एम एस धोनी
मैदानी रणनीति में माहिर हैं तथा कुशल कप्तानी से खिलाडिय़ों को सौ प्रतिशत देने के लिए प्रेरित किया। खिलाडिय़ों को बदलने व मैदानी निर्णय लेने के मामले में किसी दबाव में नहीं आए। सभी खिलाडिय़ों को खेलने का मौका दिया। वे दूसरों को प्रेरित करते रहे। सेमीफाइनल तक उनका बल्ला खामोश ही रहा। लेकिन फाइनल में विजयी पारी खेली।
०९ मैचों में २४१ रन बनाए
८१.६९ का है स्ट्राइक रेट
०९ चों में विकेट के पीछे 7 कैच व 3 स्टंपिंग किए
१९ के व ३ छक्के लगाए
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कहाँ गायब हो गई पूनम पाण्डेय
मुंबई।। टीम इंडिया की जीत के बाद हर किसी की जुबान पर यह था कि पूनम पांडे कहां हैं टीम इंडि़या के वर्ल्ड कप जीत जाने के बाद पूनम ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था।
क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 में टीम इंडिया के जीतने पर न्यूड होने का प्रॉमिस कर चुकीं 20 वर्षीय मॉडल पूनम पांडे ने शनिवार रात मैच खत्म होने के तुरंत बाद ट्वीट किया- और जादू काम कर गया!! इतने प्यारे जवाबों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। पूनम ने यह ट्वीट करने से कुछ देर पहले ट्वीट किया था- वंदे मातरम्।
मैच खत्म होने से सात घंटे पहले पूनम ने ट्वीट किया था- मेरा ऑरा काम कर रहा है!!!! तुम सब पर मुझे गर्व है। तैयार रहना!! सूत्रों का कहना है कि पूनम पांडे के पास सैंकड़ों फोन आ रहे थे जिसमें या तो उन्हें अपने चाहने वालों के लिए न्यूड होने के लिए कहा जा रहा था या फिर उन्हें धमकी दी जा रही थी कि भारतीय कल्चर के खिलाफ जा कर अगर वह न्यूड हुईं तो उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।
हालांकि गुरुवार को पूनम ने एक अंगरेजी दैनिक को दिए गए अपने इंटरव्यू में कहा था कि अगर बीसीसीआई उसे परमिशन देता है तो वह अपनी योजनानुसार न्यूड हो कर रहेगीं। उन्होंने शुक्रवार को बीसीसीआई को इस बाबत पत्र भी लिखा था और कहा था कि यदि बीसीसीआई भारत में न्यूड होने के लिए परमिशन नहीं दे सकती तो वह किसी और देश जैसे पैरिस में इस प्रॉमिस को अंजाम देंगीं।
पूनम ने कहा कि वह धमकियों से नहीं डरतीं। यहां बता दें कि भोपाल के एक कोर्ट में उनके खिलाफ केस फाइल किया गया था और मुंबई में भी बीजेपी की महिला विंग ने पुलिस में पूनम के खिलाफ ऐक्शन लेने के लिए मामला दर्ज करवाया |
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Friday, April 1, 2011

खबरें विश्व कप की


श्यामा ने कहा भारत ही जीतेगा

ऑक्टोपस पॉल बाबा को लोग अभी भूले नहीं हैं, जिसने फ़ुटबाल वर्ल्ड कप में सटीक भविष्यवाणी कर काफ़ी नाम कमाया। लेकिन अपने देश में भी एक ऐसी चिड़िया है, जो पॉल की तरह ही लगातार सही भविष्यवाणी करती रही है। इस बार इस चिड़िया ने भारत को फ़ाइनल मैच से 2 दिन पहले ही क्रिकेट वर्ल्ड कप का विजेता घोषित कर दिया है। संगम तट पर श्यामा पंछी का दरबार लगा है और लोग जानने के लिए खड़े हैं कि श्रीलंका और भारत में से क्रिकेट वर्ल्ड कप का विजेता कौन होगा। इस काम के लिए पहले से तैयार 51 लिफ़ाफ़ों में दोनों देशों के नाम डाल कर लिफ़ाफ़ों को ताश के पत्तों की तरह फेंटा गया और फिर पंछी के मालिक ने एक-एक लिफ़ाफ़ा श्यामा के सामने रखना शुरू कर दिया। बहुत से लिफ़ाफ़ों को नज़रंदाज़ करने के बाद श्यामा ने एक लिफ़ाफ़े में से एक परचा खींच कर निकाला। जिसके बाद वहां मौज़ूद सभी लोगो में ख़ुशी की लहर दौड़ गआ। अगर आपको श्यामा पर यक़ीन है, तो मान लीजिए की यह विश्वकप टीम इंडिया ही जीतेगी।
श्यामा ने अभी 2 दिन पहले ही सेमीफ़ाइनल में पकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत की जीत की भविष्यवाणी की थी, जो सही साबित हुई। वैसे भी उत्तर भारत में श्यामा पंछी से भविष्य विचरवाने की परंपरा काफ़ी पुरानी है, जिसपर लोग आज भी यक़ीन करते हैं। भारत इस बार क्रिकेट का विश्व विजेता बनेगा या नही ये तो मैच के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन श्यामा पंछी ने हमें 2 दिन पहले ही ख़ुश होने का मौक़ा ज़रूर दे दिया है।
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और मुम्बई हवाई अड्डे पर
रोकी
गई विश्व कप ट्राफी

मुम्बई| वानखेड़े स्टेडियम में शनिवार को होने वाले विश्व कप क्रिकेट फाइनल के पूर्व छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर अजीबोगरीब ड्रामा हुआ। कस्टम अधिकारियों ने सीमा शुल्क अदा करने पर र्ल्ड कप ट्राफी को हवाईअड्डे पर रोक लिया। अधिकारियों ने ट्राफी को छुड़ाने के लिए बीसीसीआइ से 15 लाख रुपये बतौर सीमा शुल्क जमा करने के लिए कहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल का कहना है कि कस्टम के कब्जे में पड़ी ट्राफी र्ल्ड कप ट्राफी की प्रतिकृति है।कस्टम अधिकारियों ने उपरोक्त र्ल्ड कप ट्राफी को आस्ट्रेलियाई नागरिक एमिल फैलिसिटी वेट के कब्जे से बरामद किया। अधिकारियों ने वेट को उस समय ट्राफी के साथ पकड़ा, जब वह ट्राफी के बारे में जानकारी दिए बगैर ग्रीन चैनल का पार करने का प्रयास कर रहा था। कस्टम अधिकारियों को एमिल फैलिसिटी वेट के आगमन के बारे में आगाह किया गया था। वेट ट्राफी के साथ कोलंबो से 9डब्ल्यू 255 विमान से गुरुवार-शुक्रवार की रात को मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा था। जब अधिकारियों ने ट्राफी के बारे में उससे पूछताछ की तो वह उससे संबंधित कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर पाया। इसके बाद अधिकारियों ने ट्राफी को अपने कब्जे में ले लिया। हालांकि बयान दर्ज करने के बाद वेट को शुक्रवार तड़के जाने दिया गया। कस्टम के अतिरिक्त आयुक्त पी प्रेमचंद की अगुवाई में अधिकारियों के दल ने र्ल्ड कप ट्राफी का निरीक्षण किया।शुक्रवार दिन में इस बारे में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड [बीसीसीआइ] को भी अवगत करा दिया गया। कस्टम ने बीसीसीआइ से सीमा शुल्क के रूप में 15 लाख रुपये अदा कर ट्राफी छुड़ा लेने के लिए कहा। इस बारे में बीसीसीआइ अध्यक्ष रत्‍‌नाकर शेट्टी से बात नहीं हो पाई। जबकि कस्टम अधिकारियों का कहना है कि बगैर सीमा शुल्क चुकाए ट्राफी को वे एयरपोर्ट से ले नहीं जाने देंगे। ट्राफी को लेकर शुक्रवार को देर शाम तक असमंजस की स्थिति बनी रही। ट्राफी अभी भी मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ही मौजूद है।हालांकि आइसीसी के मीडिया निदेशक किलिन गिब्सन ने कहा है कि यह र्ल्ड कप ट्राफी की प्रतिकृति है, जिसका हम व्यापारिक उद्देश्यों के इस्तेमाल करते हैं। साभार:मिड डे

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कपडे उतारने से पहले ब्रह्मण समाज

ने पूनम को न्यायलय मैं खींचा

किंगफिशर मॉडल पूनम पांडेय ने शुक्रवार की दोपहर कई टीवी चैनलों को इंटरव्यू देते हुए यह ऐलान कर दिया कि अगर भारत जीतेगा तो वो न्यूड यानी निर्वस्त्र हो जाएंगी। पूनम के न्यूड होने से पहले उन्हें ब्राह्मण समाज ने कोर्ट में खींच लिया है। भोपाल के ब्राह्मण समाज ने पूनम के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज कराया है। समाज की ओर से याचिका आरके पांडेय ने दाखिल की है। उनका का कहना है कि पूनम ऐसा करके ब्राह्मणों का नाम खराब कर रही हैं, जो वो हरगिज़ नहीं होने देंगे। समाज ने न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा दर्ज कराते हुए किंगफिशर के मालिक विजय माल्या पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने किंगफिशर कैलेंडर में पूनम की अर्द्धनग् तस्वीरें छापी हैं, तो वो भी इसके दोषी हैं। ब्राह्मण समाज का आरोप है कि माल्या ने ही पूनम को न्यूड होने के लिए उकसाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई की तारीख 5 अप्रैल सुनिश्चित की है।उधर शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भी पूनम को ऐसा ना करने की हिदायत दी है। मनसे ने कहा है कि अगर पूनम ने ऐसा कुछ भी किया जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ है, तो उनसे बुरा कोई नहीं होगा। अगर पूनम ने ऐसा कुछ भी किया तो वो उसे अपने तरीके से नियंत्रित करेंगे।