Tuesday, April 12, 2011

सात माह से कमरे में बन्द
थी दो जिन्दा कंकाल

नई दिल्ली । नोएडा में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को सोचने पर मजबूर की दिया। पिता के मौत के बाद दो बहनों ने खुद को पिछले सात महिलों से बंद कर रखा था। पुलिस ने आज समाज सेवा संस्‍थानों के साथ मिलकर उन्‍हें घर से बाहर निकाला। दोनों लड़कियां जीवित कंकाल की तरह हैं और उनकी हालत काफी नाजुक बनी है। यह अजीबो गरीब सनसनीखेज वाक्‍या नोएडा सेक्‍टर 29 में सामने आया है। यहां के फ्लैट नम्‍बर 326 में दो लड़किया पिछले सात महिनों से बंद थी। आसपास के लोगों ने कुछ महिनों पूर्व पुलिस से इस बात की शिकायत की थी कि उन्‍हें आजतक नहीं पता चल सका है कि इस फ्लैट में कौन रहता है तथा सिर्फ हल्‍की आवाजें सुनाई देती हैं। उसके बाद आज सुबह नोएडा पुलिस ने समाजसेवी संगठन की मदद से फ्लैट में पहुंची और दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगी। पुलिस जब दरवाजा खोलने की कोशिश कर रही थी तो अंदर से सिर्फ यही आवाज आ रही थी नहीं ऐसा न करो। मगर पुलिस जब दरवाजा खोलने में कामयाब हो गई तब उसके बाद जो नजारा सामने आया पुलिस हैरान रह गई। कमरे से किसी चीज के सड़े होने की बदबू आ रही थी। अंदर दो लड़कियां थी। एक लड़की तो बिल्‍कुल कंकाल में तब्‍दील हो चुकी थी अंतर सिर्फ इतना था कि उसकी सांसे चल रही थी। पुलिस ने बताया कि दोनों लड़कियां आपस में सगी बहने हैं। एक बहन का नाम सोनाली, दूसरी का अनुराधा बताया जा रहा है। एक बहन तो उठने की स्थिति में ही नहीं थी और पूरी तरह से कंकाल हो चुकी थी। उसे किसी तरह स्ट्रेचर पर बाहर लाया गया। दूसरी बहन भी सूख चुकी थी। उसके मुंह से इतनी बदबू आ रही थी कि उसके सामने खड़ा होना भी मुश्किल था। इतनी गरमी में भी वो तीन-तीन स्वेटर पहने हुई थी। दोनों बहनों को नोएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सोसाइटी के सदस्‍य ने बताया कि हम लोग रोज कोशिश करते थे कि कोई दरवाजा खोले लेकिन लड़कियों ने दरवाजा नहीं खोला। केवल एक लड़की दिखती थी दूसरी तो दिखती भी नहीं थी। समाजसेवी उषा ठाकुर ने कहा कि कल भी पुलिस यहां आई तो इन लड़कियों ने दरवाजा नहीं खोला। कल इनके पास महिला पुलिस नहीं थी इसलिए वापस चले गए। इन लड़कियों ने खाना नहीं खाया, पानी नहीं पिया। कपड़े भी 6 महीने से नहीं बदले। पुलिस ने बताया कि जब से उनके पिता का देहांत हुआ था तबसे आजतक उन दोनों बहनों ने बाहर की रोशनी तक नहीं देखी। पुलिस ने बताया कि दोनों का एक भाई था जो कुछ साल पहले उन्‍हें छोड़कर चला गया था।
पुलिस के अनुसार दोनों बहनों की उम्र 40 साल के आसपास है। पिता की मौत के बाद पिछले सात महीने से उन्होंने खुद को घर में बंद कर रखा था।पुलिस के साथ मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता ऊषा ठाकुर ने संवाददाताओं को बताया, "जैसे ही दरवाजा खोला गया, दरुगध से सभी लोगों को उल्टी आने
लगी। बड़ी महिला अर्धनग्न अवस्था में थी। मैं सोचती हूं वह कोमा में है। वह बोल नहीं पा रही थी और न ही समझ पा रही थी कि क्या हो रहा है। इसलिए मैंने कैलाश अस्पताल से सम्पर्क किया।"ठाकुर के अनुसार, "मैं समझती हूं वे मानसिक रूप से परेशान हैं.. उनका भाई भी उन्हें छोड़कर सेक्टर-39 में रहने चला गया। उन्हें सांत्वना देने के लिए या उनसे बात करने के लिए कोई नहीं था।" उन्होंने बताया कि उनका भोजन किसी कैंटीन से आता था। पड़ोसियों ने बताया कि भोजन दरवाजे के बाहर रखा रहता था। जब घर का दरवाजा खोला गया तो महिलाओं ने पानी मांगा।मनोचिकित्सक के अनुसार, यह भावनात्मक अलगाव के कारण हो सकता है। उन्होंने कहा, "यह अत्यधिक तनाव या तनाव बढ़ाने वाले कुछ मनोरोग सम्बंधी तत्वों के कारण हो सकता है। निश्चित रूप से दोनों बेटियां पिता के बहुत करीब रही होंगी और वह उनके सभी फैसले लेते होंगे।"मनोचिकित्सक के अनुसार यह ऐसे लोगों के साथ भी हो सकता है, जो बहुत अंतर्मुखी होते हैं।

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