Tuesday, April 26, 2011


साईं थे शांति के प्रतीक,

सत्यजीत-रत्नाकर ने मचाई अशांति

आन्ध्र प्रदेश । सत्य साईं की महासमाधि से पहले ही 40 हजार करो़ड के साईं ट्रस्ट पर हक को लेकर सत्य साईं के निजी सेवक सत्यजीत और उनके भतीजे रत्नाकर में जंग छि़ड चुकी है। इस जंग पर विराम के लिए ही बुधवार को साईं का अंतिम संस्कार होते ही ट्रस्टियों की बैठक बुलाई गई है। सत्यजीत का दावा है कि साईं बाबा अपनी वसीयत में 40 हजार करो़ड का ट्रस्ट उनके नाम कर गए हैं, वहीं रत्नाकर साईं के निधन के लिए सत्यजीत को ही आरोपों में घेर रहे हैं। कहा जाता है कि सत्यजीत को18 साल पहले खुद सत्य साईं बाबा ने अपना निजी सचिव बनाया था।> सत्यजीत 33 साल के हैं जिन्होंने साईं संस्थान से एमबीए किया और हमेशा बाबा के करीबी रहे। उन्हें बाबा के बाद आश्रम का सबसे ताकतवर इंसान माना जाता है। शायद इसी वजह से साईं के निधन के बाद से उनके अंतिम दर्शन और समाधि की सारी तैयारियों की जिम्मेदारी खुद उठा रहे हैं। इसके पीछे वजह ये है कि साईं के निधन के बाद ही खबर उ़डी कि बाबा ने एक वसीयत छो़डी है जिसमें 40 हजार करो़ड के ट्रस्ट की पूरी जिम्मेदारी सत्यजीत को सौंपी है। माना जा रहा है कि खुद सत्यजीत ही ये बात सबके सामने उ़डा रहे हैं। वो खुद को सत्य साईं ट्रस्ट का एकछत्र मालिक करार देने की तैयारी में हैं। > > सत्यजीत ऎसा करके बाबा के भतीजे और इलाके के केबल किंग रत्नाकर के दावे को सिरे से खारिज करना चाहते हैं। भतीजे आरजे रत्नाकर को उनके पिता के निधन के पांच साल बाद सत्य साईं ने 2010 में ट्रस्ट का सदस्य बनाया। ट्रस्ट के तमाम सदस्यों में रत्नाकर ही इकलौते हैं जिनका साईं से खून का रिश्ता था। सत्यजीत का ट्रस्ट पर दावा खारिज करने के लिए रत्नाकर ने एक चेहरा सामने कर दिया। ये हैं सत्य साईं से 43 सालों से जु़डे रहे एक प्रोफेसर श्याम सुंदर। प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि सत्यजीत और उनके साथी पिछले 6 साल से साईं बाबा को नींद की गोलियां खिला रहे थे। साईं को ये गोलियां जबरन दी जाती थीं ताकि वह नशे के आदी हो जाएं। प्रोफेसर की मानें तो नींद की गोलियों के चलते ही सत्य साईं प्रार्थनाओं में देर से आते और दोपहर में सोने लगे थे।> आरोप तो ये भी उछले हैं कि हॉस्पिटल में जब तक सत्य साईं रहे उस दौरान सत्यजीत और डॉक्टरों के अलावा और किसी को बाबा के पास जाने की इजाजत नहीं थी। इसलिए साईं की मौत का ठीकरा रत्नाकर और उनके करीबी सत्यजीत के सिर पर ही फो़ड रहे हैं ताकि 40 हजार करो़ड की मिल्कियत के मालिक की दावेदारी खारिज हो जाए। सत्य साईं को नींद की गोलियों की बात आखिरी वक्त में उनका इलाज करने वाले डॉक्टर सफाया ने भी कबूल की है। यानि 40 हजार करो़ड के इस झग़डे की शुरूआत सत्य साईं के रहते ही शुरू हो गई थी। अब उनके जाने के बाद ट्रस्ट पर कब्जे की जंग और तेज होती जा रही है।> ट्रस्ट पर कब्जे के लिए शुरू हुए इस घमासान का ही नतीजा है कि सत्य साईं का वारिस बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे सत्यजीत पर जान का खतरा मंडराने लगा है। खुद राज्य सरकार के खुफिया विभाग ने इसकी जानकारी ट्रस्ट को दी है।

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