Saturday, April 2, 2011

२८ साल बाद भारत ने रचा इतिहास भारत
मुंबई। गौतम गंभीर (97) की विषम परिस्थितियों में खेली गई अद्भुत पारी और महेन्द्र सिंह धोनी (नाबाद 91) के कप्तानी प्रहारों से भारत ने श्रीलंका को वानखेडे स्टेडियम में शनिवार रात छह विकेट से जमींदोज करते हुए 28 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश का और अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का विश्वकप जीतने का सपना पूरा कर दिया। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दो अप्रैल का स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया है। धोनी के धुरंधरों ने वही कारनामा कर दिखाया जो कपिल देव के जांबाजों ने 1983 में लॉर्ड्स में वेस्टइंडीज को हराकर दिखाया था।
श्रीलंका ने अनुभवी बल्लेबाज महेला जयवर्द्धने के नाबाद 103 रन की बदौलत छह विकेट पर 274 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था, लेकिन गंभीर और धोनी ने भारत को शुरुआती झटकों से उबारते हुए चौथे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी कर जीत की दहलीज पर डाल दिया। भारत ने 48.2 ओवर में चार विकेट पर 277 रन बनाकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर लिया।
कप्तान धोनी ने कल कहा था कि भारतीय टीम का सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है और उन्होंने क्या खूब बात कही थी। धोनी ने टूर्नामेंट का अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाते हुए और कप्तानी की यादगार पारी खेलते हुए वह इतिहास बना दिया जिसका 121 करोड़ भारतीयों को लंबे समय से इंतजार था।
धोनी के जांबाजों में चार पूर्व चैंपियनों को एक के बाद एक ध्वस्त करते हुए वानखेडे में तिरंगा लहरा दिया। धोनी ने विश्व विजयी छक्का मारकर करोड़ों भारतीयों को आज रात जश्न मनाने का मौका दे दिया। धोनी के छक्का मारते ही सारे भारतीय खिलाड़ी मैदान में कूद पड़े और सबने एक-दूसरे को गले लगा लिया। इस छक्के के लगते की पूरे देश में आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा।
विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेन्द्र सेहवाग के शून्य और अनुभवी बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के 18 रन बनाकर आउट हो जाने के बाद भारतीय उम्मीदें धूमिल नजर आने लगी थी। लेकिन गंभीर ने अपने जीवन की सबसे यादगार पारी खेलते हुए 122 गेंदों में नौ चौकों की मदद से 97 रन बनाए। हालांकि वह शतक से चूक गए, लेकिन उन्हें इसका अफसोस नहीं होगा क्योंकि उन्होंने भारत को विश्वविजेता बनाने में सबसे बड़ा योगदान दिया।
कप्तान धोनी ने तीन विकेट 114 रन पर गिर जाने के बाद खुद को बल्लेबाजी क्रम को युवराज सिंह से ऊपर लाते हुए यह साबित किया कि वह चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं और उनमें भारत को विश्व चैंपियन बनाने का माद्दा है। गंभीर और विराट कोहली (35) ने तीसरे विकेट के लिए 83 रन की बहुमूल्य साझेदारी की थी।
मगर भारतीय जीत को अमली जामा पहनाने का श्रेय गंभीर और धोनी के बीच चौथे विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी को गया। विश्वकप में अब तक एक भी अर्धशतक नहीं बना पाए धोनी ने 79 गेंदों पर आठ चौकों और दो छक्कों की मदद से नाबाद 91 रन की ऐसी पारी खेली जिसे भारतीय क्रिकेटप्रेमी वर्षों तक याद रखेंगे।
गंभीर का विकेट 223 के स्कोर पर गिरा तब भारतीय पारी पर कुछ दबाव नजर आना लगा था, लेकिन धोनी ने अपनी 'कैप्टन कूल' प्रतिष्ठा के अनुरूप पूरा संयम दिखाते हुए युवराज (नाबाद 21) के साथ भारत को 48.2 ओवर में जीत की मंजिल पर पहुंचा दिया। युवराज ने 24 गेंदों की अपनी पारी में दो चौके लगाए।
धोनी इस खिताबी जीत के साथ क्रिकेट इतिहास के ऐसे पहले कप्तान बन गए जिन्होंने ट्वेंटी-20 विश्वकप के साथ-साथ एकदिवसीय विश्वकप भी अपने नाम कर लिया। फाइनल में भारत ने विश्व कप इतिहास में लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ी जीत हासिल की और साथ ही श्रीलंका से 1996 के विश्व कप सेमीफाइनल में कोलकाता में मिली पराजय का बदला चुका लिया।
भारत ने चार पूर्व चैंपियनों को अपने खिताबी सफर में ध्वस्त किया। भारत ने अंतिम समूह मैच में दो बार के चैंपियन वेस्टइंडीज को, क्वार्टरफाइनल में चार बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को, सेमीफाइनल में एक बार के चैंपियन पाकिस्तान को और फाइनल में एक बार के चैंपियन श्रीलंका को शिकस्त झेलने के लिए मजबूर कर दिया।
किस्मत के महाधनी धोनी ने फाइनल से पहले कहा था कि टीम सही समय पर अपने चरम पर पहुंच गई है और उनके इस साहस और संकल्प के सामने श्रीलंका का 274 रन का स्कोर भी छोटा पड़ गया। पूरा वानखेडे स्टेडियम धोनी के प्रहारों के चलते झूम रहा था। जहां भी देखो वहीं तिरंगे लहरा रहे थे।
श्रीलंका को लसित मलिंगा ने सेहवाग को पगबाधा और सचिन को विकेटकीपर कुमार संगकारा के हाथों कैच कराकर उम्मीद बंधाई थी, लेकिन गंभीर ने चट्टान की तरह श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण के सामने डटकर भारतीय उम्मीदों को लगातार बनाए रखा। जब विराट कोहली को तिलकरत्ने दिलशान ने अपनी ही गेंद पर कैच किया तो फिर श्रीलंका की उम्मीद जाग उठी।
मगर धोनी ने कप्तानी पारी खेलते हुए श्रीलंका को अंततः निराशा झेलने के लिए मजबूर कर दिया। इस हार के साथ श्रीलंका के विश्व रिकॉर्डधारी मुथैया मुरलीधरन के अंतर्राष्ट्रीय जीवन का थोड़ा दुखद समापन हुआ। वह अपने आखिरी एकदिवसीय मैच में कोई विकेट नहीं ले पाए।
इससे पहले अनुभवी बल्लेबाज मॉहेला जयवर्द्धने (नाबाद 103) ने खिताबी मुकाबले में आखिर अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप खेलते हुए बेहतरीन शतक बनाते हुए श्रीलंका को छह विकेट पर 274 रन के मजबूत स्को पर पहुंचाया था।
चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे महेला ने मात्र 88 गेंदों में अपनी नाबाद 103 रन की पारी में 13 चौके लगाए और उन्होंने मध्यक्रम के बल्लेबाजों थिलन समरवीरा (21) नुवान कुलशेखरा (32) और तिषारा परेरा (नाबाद 22) के साथ उपयोगी साझेदारियां करते हुए श्रीलंका को विश्वकप फाइनल में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया।
कप्तान कुमार संगकारा ने 48 और सलामी बल्लेबाज तिलकरत्ने दिलशान ने 33 रन बनाए। श्रीलंका ने एक समय अपने तीन विके 28वें ओवर में 122 रन पर गंवा दिए थे, लेकिन उसके बाद महेला की बेशकीमती पारी से श्रीलंका ने अंतिम 22.1 ओवर में 152 रन जोड़ डाले। अंतिम 10.1 ओवर में श्रीलंका ने जबर्दस्त बल्लेबाजी की और इस दौरान 92 रन बटोर डाले।
महेला ने कुलशेखरा के साथ छठे विकेट की साझेदारी में 66 रन जोड़े और परेरा के साथ सातवें विकेट की अविजित साझेदारी में आखिरी दो ओवरों में 26 रन ठोक डाले। इस साझेदारी में परेरा ने मात्र नौ गेंदों में तीन चौके और एक छक्का उड़ाते हुए नाबाद 22 रनों का योगदान दिया।
भारत की तरफ से जहीर खान ने 60 रन देकर दो विकेट और युवराज सिंह ने 49 रन देकर दो विकेट लिए जबकि ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह को 50 रन देकर एक विकेट मिला। खिताबी मुकाबले में टीम में शामिल किए गए शांतकुमारन श्रीसंत खासे महंगे साबित हुए और उन्होंने आठ ओवर में 52 रन लुटाए। मुनाफ पटेल ने अच्छी गेंदबाजी की और नौ ओवर में 41 रन दिए।
विश्व कप फाइनल में टॉस को लेकर उलझन हुई और एक नहीं दो बार टॉस हुआ। संगकारा ने दूसरी बार टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। जहीर ने अपने शुरुआती स्पैल में बहुत कसी हु गेंदबाजी की। पहले छह ओवर में श्रीलंका सिर्फ 17 रन बना पाया था और जहीर ने अपने पहले तीन ओवर तो मेडन ही फेंके थे।
जहीर ने अपने चौथे ओवर की पहली गेंद पर लय में चल रहे सलामी बल्लेबाज उपुल थरंगा (दो) को पहली स्लिप में वीरेन्द्र सेहवाग के हाथों कैच करा दिया। दिलशान और संगकारा ने दूसरे विकेट की साझेदारी में 43 रन जोड़े। दिलशान ने 49 गेंदों में तीन चौकों की मदद से 33 रन बनाकर टूनामेंट में सबसे पहले 500 रन पूरे कर लिए।
लेकिन वह हरभजन की गेंद पर बोल्ड हो गए और भारत को दूसरी सफलता हाथ लग गई। संगकारा और महेला की तीसरे विकेट की 62 रन की साझेदारी खतरनाक रूप ले रही थी कि बाएं हाथ के स्पिनर युवराज सिंह की गेंद को पीछे हटकर कट करने की कोशिश में संगकारा विकेटकीपर महेन्द्र सिंह धोनी के हाथों लपके गए। संगकारा ने 48 रन की अपनी पारी में 67 गेंदों का सामना किया और इस दौरान पांच चौके लगाए।
महेला ने इसके बाद समरवीरा (21) के साथ मिलकर श्रीलंका के स्कोर को 179 रन तक पहुंचाया। समरवीरा को युवराज ने पगबाधा किया जबकि चामरा कापूगेदेरा एक रन बनाकर जहीर का दूसरा शिकार बन गए। नुवान कुलशेखरा ने 30 गेंदों में एक चौके और एक छक्के की मदद से 32 रन बनाए। इस दौरान जयवर्द्धने ने विश्व कप का अपना तीसरा और ओवरआल 14वां शतक 84 गेंदों में 13 चौकों की मदद से पूरा कर लिया।कुलशेखरा रन आउट हुए, लेकिन इसके बाद परेरा ने ताबड़तोड़ शॉट खेलते हुए श्रीलंकाई स्कोर को मजबूती दे दी। परेरा ने जहीर के पारी के आखिरी ओवर में दो चौके और एक छक्का उड़ाकर 18 रन बटोरे जिससे जहीर का गेंदबाजी विश्लेषण पूरी तरह बिगड़ गया।
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कप्तान की कहानी
नई दिल्‍ली। 28 साल बाद एक बार फिर भारत को विश्‍व कप दिलाने वाले कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी इतिहास पुरुष बन गए हैं। 7 जुलाई 1981 को तत्‍कालीन बिहार की राजधानी रांची में जन्मे धोनी ने अपना क्रिकेट करियर 1999-2000 में शुरू किया था। पहली बार एकदिवसीय मैच खेलने का मौका उन्हें बांग्लादेश के खिलाफ 23 दिसंबर 2004 को मिला। हालांकि इस मैच में वे पहली ही गेंद पर आउट हो गए थे। इसके बाद अगले चार मैचों में उनकी बल्लेबाजी किसी को प्रभावित नहीं कर पाई थी। विशाखापट्टनम में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पांचवे मैच में उनका जो कमाल दिखा, उससे उनके प्रति लोगों की सोच ही बदल गई। इस मैच में उन्होंने 123 गेंदो पर 148 रन बनाए। धोनी ने 15 चौके और चार छक्के लगाए और अपनी जिंदगी का पहला मैन ऑफ द मैच अवार्ड जीता। धोनी ने खुद को न सिर्फ एक अच्छा विकेटकीपर बल्कि अव्‍वल बल्‍लेबाज भी साबित किया है।
धोनी के नेतृत्‍व में भारत टी20 वर्ल्‍ड कप पहले ही जीत चुका है और वह टेस्‍ट क्रिकेट में भारतीय टीम को नंबर 1 रैंकिंग भी दिला चुके हैं। वर्ल्‍ड कप में जीत के बाद टीम वनडे क्रिकेट में भी नंबर 1 हो गई है। बस आईसीसी की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।धोनी को बिहार के अंडर 19 टीम में 1998-99 में शामिल किया गया। तब उन्होंने 5 मैचों में 176 रन बनाए। बिहार टीम में रणजी ट्रॉफी के लिए उन्होंने 1999–2000 के सीज़न में पहली बार खेला। 2003/04 के सीज़न में रणजी मुकाबले में धोनी ने असम के खिलाफ शतक लगाया जिससे उन्हें पहचान मिली और उन्हें भारत-ए में जिम्बाववे और केन्या के दौरे में मौका दिया गया। इस दौरे के दौरान उनके प्रदर्शन को काफी सराहना और पहचान मिली। कई बड़े खिलाड़ियों के साथ साथ उन्होंने तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का ध्यान आकर्षित किया।
18 सितंबर 2007 को वनडे टीम की कप्तानी उन्हें मिली। उस दौरान ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का टूर्नामेंट चल रहा था। अंतत: 24 सितंबर को वह शुभ घड़ी आई जब भारत ने उनके नेतृत्‍व में आईसीसी ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता लिया। उसके बाद भारत ने 2007-08 में कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज, कॉम्पैक कप (2009-10) और एशिया कप (2010) जीत लिया।
धोनी ने कभी भी क्रिकेट करियर में रैंकिग को महत्व नहीं दिया। उनकी नज़र में रैंक से बढ़कर टीम का प्रदर्शन और खेल जीतना है।
रांची में पले-बड़े धोनी के परिवार में उनकी मां देवकी देवी और पिता पान सिंह के अलावा एक बहन और एक भाई है। धोनी को म्यूज़िक सुनना बहुत पसंद है और खासतौर पर वे लता मंगेशकर और किशोर कुमार को सुनना पसंद करते हैं। बाइक्स का धोनी को खासतौर पर बेहद शौक है। उनका कहना है कि उन्हे स्पीड बहुत पसंद है। धोनी भगवान में पक्‍का विश्वास रखने वाले शख्‍स हैं। इसके अलावा उन्हें कंप्यूटर गेम्स और बैडमिंटन खेलना भी पसंद है। धोनी एडम गिलक्रिस्ट के बड़े फैन हैं।
धोनी आत्मविश्वास से भरे हुए रहते हैं। मैदान पर वह आक्रामक प्रदर्शन के लिए जाने जाते हैं। धोनी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह सकारात्मक विचार रखते हैं और अपना आपा नहीं खोते हैं। तभी उन्‍हें कैप्टन कूल कहा जाता है। धोनी में सही फैसले लेने की गजब की क्षमता है। इसके अलावा वह अपनी गलतियों की जिम्मेदारी भी बखूबी लेना जानते हैं।
धोनी यूथ आइकन हैं। उनके लंबे बाल कभी युवाओं के बीच चर्चा का विषय थे। पूर्व पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रपति परवेज मुशर्रफ भी उनकी उस हेयरस्टाइल के कायल हो गए थे। प्यार से लोग उन्हे माही बुलाते हैं। धोनी मैदान पर जितने आक्रामक दिखते हैं, निजी जिंदगी में वैसे बिलकुल नहीं है। उनके मुताबिक वे निजी जिंदगी में बड़े लापरवाह हैं और उन्हें बातें करना बिलकुल पसंद नहीं हैं। वे ज़्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं। वे काफी मस्तमौला और मजाकिया किस्म के इंसान हैं।

कप्तान के तौर पर धोनी की खूबियां
- खिलाडिय़ों में टीम भावना को बढ़ाने का काम किया।
- परिस्थिति के मद्देनजर सही खिलाडिय़ों को सही मौके पर आजमाया।
- वरिष्ठ खिलाडिय़ों से सलाह-मशविरा करने में पीछे नहीं हटे।
- मानसिक आवेग पर अंकुश रखा और चेहरे पर विश्वास को कायम रखा।
लकी कप्तान : एम एस धोनी
मैदानी रणनीति में माहिर हैं तथा कुशल कप्तानी से खिलाडिय़ों को सौ प्रतिशत देने के लिए प्रेरित किया। खिलाडिय़ों को बदलने व मैदानी निर्णय लेने के मामले में किसी दबाव में नहीं आए। सभी खिलाडिय़ों को खेलने का मौका दिया। वे दूसरों को प्रेरित करते रहे। सेमीफाइनल तक उनका बल्ला खामोश ही रहा। लेकिन फाइनल में विजयी पारी खेली।
०९ मैचों में २४१ रन बनाए
८१.६९ का है स्ट्राइक रेट
०९ चों में विकेट के पीछे 7 कैच व 3 स्टंपिंग किए
१९ के व ३ छक्के लगाए
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कहाँ गायब हो गई पूनम पाण्डेय
मुंबई।। टीम इंडिया की जीत के बाद हर किसी की जुबान पर यह था कि पूनम पांडे कहां हैं टीम इंडि़या के वर्ल्ड कप जीत जाने के बाद पूनम ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था।
क्रिकेट वर्ल्ड कप 2011 में टीम इंडिया के जीतने पर न्यूड होने का प्रॉमिस कर चुकीं 20 वर्षीय मॉडल पूनम पांडे ने शनिवार रात मैच खत्म होने के तुरंत बाद ट्वीट किया- और जादू काम कर गया!! इतने प्यारे जवाबों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। पूनम ने यह ट्वीट करने से कुछ देर पहले ट्वीट किया था- वंदे मातरम्।
मैच खत्म होने से सात घंटे पहले पूनम ने ट्वीट किया था- मेरा ऑरा काम कर रहा है!!!! तुम सब पर मुझे गर्व है। तैयार रहना!! सूत्रों का कहना है कि पूनम पांडे के पास सैंकड़ों फोन आ रहे थे जिसमें या तो उन्हें अपने चाहने वालों के लिए न्यूड होने के लिए कहा जा रहा था या फिर उन्हें धमकी दी जा रही थी कि भारतीय कल्चर के खिलाफ जा कर अगर वह न्यूड हुईं तो उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।
हालांकि गुरुवार को पूनम ने एक अंगरेजी दैनिक को दिए गए अपने इंटरव्यू में कहा था कि अगर बीसीसीआई उसे परमिशन देता है तो वह अपनी योजनानुसार न्यूड हो कर रहेगीं। उन्होंने शुक्रवार को बीसीसीआई को इस बाबत पत्र भी लिखा था और कहा था कि यदि बीसीसीआई भारत में न्यूड होने के लिए परमिशन नहीं दे सकती तो वह किसी और देश जैसे पैरिस में इस प्रॉमिस को अंजाम देंगीं।
पूनम ने कहा कि वह धमकियों से नहीं डरतीं। यहां बता दें कि भोपाल के एक कोर्ट में उनके खिलाफ केस फाइल किया गया था और मुंबई में भी बीजेपी की महिला विंग ने पुलिस में पूनम के खिलाफ ऐक्शन लेने के लिए मामला दर्ज करवाया |
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