Wednesday, July 27, 2011

मुंशी प्रेमचंद की कहानी के एक मात्र
अंतिम पात्र "मैकू" का निधन

( वाराणसी से वरिष्ठ पत्रकार रजनीश त्रिपाठी की विशेष रपट )

वाराणसी में पाण्डेयपुर स्थित नयी बस्ती की कुम्हार पट्टी में सोमवार की सुबह कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी मैकू के नायक मैकू ने अंतिम सांस ली। वह करीब 104 साल के थे। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद के रामकटोरा स्थित छापेखाने में काम तो करीब दो साल ही किया किंतु इसी दौरान उनकी एक चर्चित कहानी का नायक बनने का मौका पाने वाले llसौभाग्यशाली बन गये। मुंशी जी के निधन के बाद करीब तीन दशक तक मैकू ने इलाहाबाद स्थानांतरित हो चुके सरस्वती प्रेस और हंस प्रकाशन में काम किया। इसके बाद वह पाण्डेयपुर में अपने चार बेटों के संयुक्त परिवार के साथ रह रहे थे। बेटों का परिवार अपने पारंपरिक धंधे में है। सभी मिट्टी के कुल्हड़ और घड़ा आदि बनाने के काम करते हैं। उनके बड़े बेटे का निधन हो चुका है।मैकू के पुत्र कैलाश प्रजापति ने बताया कि वह लंबे समय से देख पाने में असमर्थ थे किंतु हमेशा मुंशी प्रेमचंद के बारे में बताते रहते थे। उन्हें उनकी अधिकतर कहानियां याद थीं। मैकू की प्रेमचंद से पहली मुलाकात 1934 में लमही गांव में तब हुई थी जब वह बेरोजगार युवक थे और उसी गांव में स्थित अपनी बहन की ससुराल गये थे। प्रेमचंद ने उन्हें अपने छापेखाने में काम दिया था। पाण्डेयपुर मूल रामकटोरा डयूटी व्व्व इन्दुर्हिंदिसमितिन्ज्ब ब्लागस्पाट क्रम में ही एक बार मैकू का चौकाघाट स्थित ताड़ीखाने के पास एक नशेड़ी से झगड़ा हो गया। लठैत मैकू ने उसे धूल चटा दी। छापेखाने में आकर उन्होंने प्रेमचंद से इसकी चर्चा की। इसके कुछ समय बाद अचानक उन्हें हंस पत्रिका में अपने नाम के ही शीर्षक वाली मैकू कहानी दिख गयी। यह नशा-मुक्ति पर लिखी प्रेमचंद की एक अमर कथा-कृति है।

( मूल कहानी) के लिये यहां किलिक करे
www.indurhindisamitinzb.blogspot.com



Friday, July 22, 2011


भामाशाही परम्पराएँ आज भी चित्तौड़
की पहचान है- कलेक्टर रवि जैन
चित्तौड़गढ़ ‘‘चित्तौड़गढ़ जैसा मेवाड़ी प्रदेश आज भी देश भर में अपनी भामाशाही परम्पराओं के जरिये दान वीरों से भरा हैं जहां साल दर साल जुलाई में स्कूल के निर्धन और प्रतिभावान विद्यार्थियों को शिक्षण सहायक सामग्री वितरित की जाती रही हैं। लाभांवित बच्चे अपने घर-परिवार और विद्यालय समाज का नाम रोशन करेंगे, तो दानवीरों का दान भी संतुष्टि पायेगा।’’
यह विचार चित्तौड़गढ़ के जिला कलेक्टर रवि जैन ने भगवान महावीर मानव सेवा समिति चित्तौड़गढ़ द्वारा नगर की जैन धर्मशाला में 22 जुलाई को आयोजित निःशुल्क गणवेश वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। सुबह 9ः00 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ और आस-पास के क्षेत्र के 14 शैक्षणिक संस्थानों के 691 बालक-बालिकाओं को निःशुल्क स्कूली पोशाक वितरण की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने भी अपने संक्षिप्त उद्बोधन में दानवीर को कर्मवीर से भी ऊँचा स्थान दिया और कहा कि दान देने के लिए असल मायनों में बड़े दिल की जरूरत होती है, न कि धन दौलत के भण्डार की। एक बात और कि भारत के विश्व शक्ति बनने के क्रम में यह बात भी बड़ी मायने रखती है कि निर्धन और सबसे आखिरी व्यक्ति कितना सुरक्षित और मजबूत हैं। संस्था के अध्यक्ष और आयोजन समन्वयक शिक्षाविद डॉ. ए.एल. जैन ने संस्था के 2004 से अबतक हुई गतिविधयों के बारे में जानकारी देते हुए अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि सीधे रूप से भारत की दो तस्वीरें बन चुकी है। जहाँ असली भारत सरकारी स्कूलों में भर्ती हैं और इण्डिया निजी स्कूलो में शिक्षा पा रहा हैं। हमें घर से बाहर निकलकर थोड़ा-सा इस असली भारत के बारे में भी सोचने की जरूरत हैं।
कार्यक्रम में शामिल 14 संस्थानों में उप्रावि गाड़ी लौहार, उप्रावि सेगवा, उप्रावि बराड़ा, नवीन प्राथमिक विद्यालय प्रतानगर, बालिका उप्रावि स्टेशन, आदर्श उप्रावि लालजी का खेड़ा, बालिका उप्रावि सेंती, उप्रावि (बालक) सेंती, उप्रावि ओछड़ी, उप्रावि पुलिस लाईन, उप्रावि कच्ची बस्ती गांधीनगर, उप्रावि कुम्भानगर, उप्रावि लक्ष्मीपुरा, उप्रावि प्रेमनगर के संस्था प्रधान और प्रतिनिधि अध्यापक शामिल थे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संरक्षक हीरालाल दोषी, लक्ष्मीलाल उपाध्याय, चैनसिंह खेरी, चन्द्रभान, उपाध्यक्ष राजेन्द्र दोषी, स्पिक मैके अध्यक्ष जे.पी. भटनागर, डॉ. आर.एल. मारू, एन.के. मेहता ने माल्यार्पण द्वारा किया। अन्त में आभार संस्था सचिव एम.एल. मेहता ने प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन अपनी माटी वेबपत्रिका सम्पादक माणिक ने किया।

Wednesday, July 20, 2011

देखिये भारत के सबसे अमीर मंदिर
पदनाभस्वामी मंदिर
हाल ही में केरल राज्य की राजधानी तिरुअनंतपुरम स्थित श्री स्वामी पदनाभस्वामी मंदिर के तहखानो से निकले खजानों से यह बात सिद्ध हो गई की यह मंदिर दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है,जबकि मंदिर का एक तहखाना अभी खोला जाना बाकी है |अबतक मंदिर से लगभग एक लाख करोड़ की संपत्ति मिल चुकी है| जिसमे सोने का मुकुट,१७ किलो सोने के सिक्के ,१८ फुट लम्बा 2 .5 किलो वजन का एक हर ,सोने की रस्सियाँ ,हीरों जवाहरात से भारी बोरियां ,प्राचीन जेवरातों के टुकडे आदि शामिल हैं|
श्री तिरुमाला तिरुपति
वेंटेश्र मंदिर
आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित श्री तिरुमाला तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर को देश का सबसे अमीर मंदिर माना जाता रहा है| जिसकी वार्षिक आय 650 करोड़ थी अब वह दूसरे स्थान पार आ गया है|बताते हैं कि मंदिर का 3000 से अधिक किलोग्राम सोना विभिन्न बैंकों में फिक्स्ड डिपाजिट के रूप में रखा है , इसके साथ ही 1000 करोड़ रुपये जमा हैं| यही नहीं मंदिर ट्रस्ट हर साल तीन सौ करोंड रुपये नकद एवम तीन सौ पचास किलो सोना तथा पांच सौ किलो चांदी दान के रूप प्राप्त करती है| श्री साईं संस्थान शिरडी
महाराष्ट्र के अहमद नगर स्थित श्री साईं संस्थान शिरडीमंदिर भी देश के अमीर मंदिरों मे से एक है |जिसके पास लगभग बत्तीस करोड़ मूल्य के आभूषण है| वहीँ मंदिर के दस्तावेजों के मुताबिक मंदिर प्रसाशन द्वारा बत्तीस करोड़ की लगत से विभिन्न सामाजिक योजनायें चलाई जा रही हैं | मंदिर ट्रस्ट के पास 24.41 करोड़ मूल्य का सोना, 3.26 करोड़ की चांदी के साथ-साथ 6 . 12 करोड़ मूल्य के चांदी के सिक्के हैं| बताते हैं कि 1.288 करोड़ के सोनेकेसिक्के एवम 1.123 करोड़ कीमत के लाकेट हैं| कहा जाता हे कि मंदिर की वार्षिक आय 450 करोड है|
माता वैष्णव देवी
जम्मू कश्मीर स्थित माता वैष्णव देवी मंदिर में तिरुपति के बाद सबसे अधिक भक्त दर्शन करने जाते है| माता वैष्णव देवीमंदिर की वार्षिक आय पांच सौ करोड़ बताई जाती है|जिसका संचालन श्री माता वैष्णव देवी श्राईन बोर्ड करता है| कहते है कि माता वैष्णव देवी मंदिर की प्रति दिन की आय लगभग चार सौ पचास करोड़ की है|


श्री सिद्धिविनाय मंदिर
मुम्बई के बीच स्थित महाराष्ट्र का दूसरा सबसे आमिर मंदिर श्री सिद्धिविनायक मंदिर की वार्षिक आय 46 करोड़ है|जबकि 125 करोड़ रुपये का फिक्स डिपाजिट है| दान के लिए यह मंदिर सबसे प्रसिद्ध है |मंदिर को हर साल 10 -15 करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं| श्री सिद्धिविनायक मंदिर का संचालन गणपति मंदिर ट्रस्ट करता है|मंदिर के दस्तावेजों के मुताबिक मार्च 2009 तक मंदिर के पास 140 करोड़ की संपत्ति थी |

श्री गुरुवायर स्वामी मंदिर
दक्षिण भारत का दूसरा सबसे प्रसिद्ध मंदिर है श्री गुरुवायर स्वामी मंदिर, केरल राज्य में स्थित श्री गुरुवायर स्वामी मंदिर भगवान श्री कृष्ण का मंदिर है |जिसका संचालन केरल देवस्वाम बोर्ड द्वारा गठित एक नौ सदस्यीय समिति करती है | मंदिर की वार्षिक आय 2.5 करोड़ के आसपास है | मंदिर के फिक्स डिपाजिट में लगभग 140 करोड़ जमा है |मंदिर की विशेषता यह है कि मंदिर के गर्भ गृह में आयोजित की जाने वाली पूजा की विशेष मांग है| बताते हैं की सुबह से शाम तक की जाने वाली पूजा की शुल्क पचास हजार है |जिसे उदयस्थामाना पूजा के नाम से जाना जाता है | इस पूजा के लिए सन 2049 तक की प्रतीक्षा सूची है |

राहुल को आधा भारतीय
कहने पर कैट ने मांगी माफी
मुंबई| माई नेम इज शीला और शीला की जवानी में अब ऊबाल आने लगा है। सल्लू से मनभेद और मतभेद बढऩे के बाद शीला की जवानी आपे से बाहर हो रही है। शीला को पता भी नही चला कि उसके द्वारा किया गया कमेंट्स किसी नए बवाल को खड़ा कर देगा। बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ का कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को आधा भारतीय और आधा इटेलीयन बताना भारी मंहगा पड़ गया। हर कोई शीला की जवानी केपीछे हाथ धोकर पड़ गया है। बेचारी शीला अपनी जवानी को बचाने के लिए भागे फिर रही है। हालाकि कैटरीना ने अपने उस ब्यान के लिए माफी भी मांग ली लेकिन बयान से कांग्रेस भड़क गई। पार्टी ने कैटरीना के बयान की कड़ी आलोचना की। कैट ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी कहा था उसे तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। कैट ने कहा कि अगर उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई है तो वह इसके लिए माफी मांगती हैं।
कैट ने अपनी नागरिकता को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था कि वे दुनिया में अकेली ऐसी इंसान नहीं है जिनके पिता एशियाई और मां ब्रिटेन से हैं। जिस तरह राहुल गांधी आधे भारतीय हैं उसी तरह वे भी आधी भारतीय और आधी ब्रिटिश हैं। कैट ने यह बात एक समाचार पत्र को साक्षात्कार में कही थी। शीला की इस ब्यानबाजी पर सल्लू भी उससे दूरी बढ़ा चुके है क्योकि उसे पता है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस काशासन है और वह वैसे भी चिंकारा कांड में बुरी तरह फंसा हुआ है। ऐसे में शीला को बार - बार हाथ जोड़ कर माफी मांगनी पड़ रही है। सूत्रो का तो यहां तक कहना है कि कांग्रेस के कोप से बचने के लिए शीला उर्फ कैटरीना कैफ ब्रिट्रीस दुतावास से संपर्क कर यूपीए की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी से मिल कर उन्हे अपने विवादास्पद ब्यान को लेकर माफी मांगने एवं अपना पक्ष रखने के लिए मिलने जानेवाली है।
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मलबे में दबे मिले 25 करोड़ के हीरे
मुंबई | यहां के ओपेरा हाउस धमाके के दौरान बिखरे हीरों में से 65 हीरे मिल गए हैं। ये मलबे में दबे हुए थे। इन हीरों की कीमत लगभग 25 करोड़ रूपए मानी जा रही है। मुम्बई डायमंड मर्चेट्स एसोसिएशन के सदस्य संजय शाह ने बताया कि राहतकर्मियों को सफाई के दौरान हीरे मिले थे। उन सभी हीरो को मुम्बई पुलिस को सौंप दिया गया है। श्री शाह ने कहा कि मलबे में अभी ऐसे और हीरे दबे हो
सकते हैं। मालूम हो 13 जुलाई को देश के सबसे बड़े हीरा बाजार ओपेरा हाउस में धमाकों के दौरान हीरे व अन्य कीमती रत्न बिखर गए थे। पहले इन हीरों और अन्य रत्नों को पुलिसकर्मियों के ले जाने की आशंका जताई जा रही थी। शाह ने बताया, 'हमारा मानना है कि ये हीरे गुजरात से यहां आने वाले व्यापारियों के हैं। सूरत और भावनगर की फैक्टरियों से ये छोटे व्यापारी मुंबई में बेचने आते हैं। कुछ औरहीरे मलबे में दबे हो सकते हैं। मुंबई में हुए तिहरे धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। झवेरी बाजार ब्लास्ट में घायल हुए 45 वर्षीय अशोक भाटे की मंगलवार सुबह 11:15 बजे मौत हो गई। झवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए धमाकों में 130 से ज्यादा घायल हो गए थे। इसके अलावा 15 घायलों ने बधिरता की शिकायत की है। धमाकों के दौरान जो व्यक्ति उस स्थान के निकट थे, उन्हें सुनाई देनेमें दिक्कत आ रही है। उनका इलाज किया जा रहा है। सबसे ज्यादा आठ लोगों का इलाज जेजे अस्पताल में चल रहा है।
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गरमगोश का होश उड़ाता धंधा
नई दिल्ली| दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने राजधानी में चल रहे एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ कर छह विदेशी युवतियों और दो दलालों को गिरफ्तार कर लिया है। एक दलाल महिला उज्बेकिस्तान की रहने वाली है। गिरफ्तार सभी युवतियां कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान व नेपाल मूल की हैं। गिरोह का मुखिया आशीष बताया गया है, जो वेबसाइट के माध्यम से देह व्यापार का धंधा कर रहा
था। बताया जाता है कि वह दलालों व युवतियों को लाखों रुपए प्रति माह पगार देने के साथ-साथ ही उनके रहने व खाने का खर्च भी उठाता था। कजाकिस्तान व उज्बेकिस्तान से महिलाएं व युवतियां छह माह के टूरिस्ट वीजा पर भारत आतीं थीं और यहां पर दो से छह महीने तक देह व्यापार करने के बाद वापस लौट जाती थीं। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त अशोक चांद ने बताया कि एडिशनल डीसीपी पीएस कुशवाह की टीम
में शामिल इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार और एसआई ज्ञानेंद्र राणा को सूचना मिली कि साउथ एक्स पार्ट-वन में विदेशी युवतियों से देह व्यापार कराया जा रहा है। इस पर प्रवीण कुमार व ज्ञानेंद्र राणा नकली ग्राहक बन कर साउथ एक्स पार्ट-वन पहुंचे, जहां वे दीपक वर्मा (25) नामक दलाल से मिले। दीपक उन्हें घर के अंदर ले गया और उज्बेकिस्तान मूल की महिला दलाल से उनको मिलवाया। महिला दलाल ने दोनोंसे बात कर एक युवती के लिए 20 से 25 हजार रुपए की मांग की। सौदा तय होने के बाद नकली ग्राहक के वेश में मौजूद पुलिसकर्मियों को तीसरे तल पर ले जाया गया। इसके तुरंत बाद ही पुलिस पार्टी ने घर में दबिश देकर महिला व पुरुष दलाल के साथ ही छह युवतियों को दबोच लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि एक युवती कजाकिस्तान और महिला दलाल व तीन युवतियां उज्बेकिस्तान व दो युवतियां नेपाल की हैं। आरोपी
दीपक वर्मा ने बताया कि गिरोह का सरगना आशीष नामक व्यक्ति है, जो उसे इस काम के लिए 10 हजार रुपए प्रतिमाह पगार देता है। आशीष हर ग्राहक को दीपक वर्मा का ही नंबर देता था, जिसके बाद वह ग्राहकों से बातचीत कर उन्हें साउथ एक्स पार्ट वन बुला लेता है। यहां आने पर ग्राहक को महिला दलाल से मिलवाया जाता था और आगे की सौदेबाजी वह तय करती थी। आशीष देह व्यापार का धंधा दिल्ली टॉप एस्कोर्ट्स के नाम से वेबसाइट से चलाता था। जांच में पता चला कि महिला दलाल कई बार भारत आ चुकी है और वह दक्षिणी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में इस धंधे को करती थी। जिस घर में यह धंधा चल रहा था, उसका किराया 35 हजार रुपए प्रति माह था। महिला दलाल हर युवती को एक लाख रुपए प्रतिमाह पगार के तौर पर देती थी। इसके साथ ही, खाने व रहने का खर्च अलग से उठाया जाता था। यह गिरोह ज्यादातर पुराने और परिचित लोगों के
साथ ही धंधा करता था। किसी भी नए ग्राहक को परिचित के रेफरेंस पर ही सेवा दी जाती थी। पुलिस ने बताया कि 6 रशियन युवतियों को गिरफ्तार किया गया है। तीन दलालों को भी गिरफ्तार किया गया है जिसमें से दो युवतियां हैं जबकि एक आदमी है। यह युवतियां दिल्ली में एक फ्लैट किराए पर लेकर सेक्स का धंधा चलाती थीं। ये सभी टूरिस्ट वीजा लेकर दिल्ली में रह रही थीं। बताया जा रहा है कि हर युवती एक महीने में कम से कम पांच लाख तक कमाती थी। पुलिस को इनकी छह महीने से तलाश थी। आखिरकार दिल्ली पुलिस आज इन्हें पकडऩे में कामयाब हुई। दरअसल क्राइम ब्रांच पुलिस ने आज सुबह अपने एक ग्राहक द्वारा दलाल को फोन करवाया। दलाल ने ग्राहक को एक फ्लैट पर बुलाया और उसके सामने पांच लड़कियां पेश की गईं। एक लड़की के बदले में ग्राहक से 25,000 रुपए की मांग की गई। मौके पर पहुंची क्राइम ब्रांच पुलिस ने युवतियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को पूछताछ में यह भी पता चला कि यह युवतियां रशिया से सस्ते खिलौने भी लाती थीं जिसे भारत आकर बेचा जाता था। साथ ही भारत से भी कुछ महंगा सामान वह रशिया ले जाकर बेचती थीं। फिलहाल पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। पुलिस को शक है युवतियों का पासपोर्ट भी जाली हो सकता है।

Sunday, July 17, 2011

कहानी मंदिर के संपत्ति की

नही रहे भगवान का खजाना
बचाने वाले भक्त टी.पी सुंदरराजन

निज़ामाबाद | तिरूअनंतपुरम से खबर है की पदनाभास्वामी मंदिर के सबसे अहम् व्यक्ति टी.पी.सुन्दरम की आज (रविवार 17 जुलाई ) सुबह संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया,वे सत्तर वर्ष के थे|सुंदरराजन विगत दो दिनों से बुखार से पीडित थे। आज सुबह उनकी अचानक तबियत बिगडी और उनकी मौत हो गई।श्री टीपी सुंदरराजन ने ही मंदिर में दबे खजाने की जांच की मांग की थी |बताया जाता है कि उन्हें दो दिन से बुखार था औररविवार सुबह उनकी मौत हो गई। वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनी सात सदस्यीय कमेटी के भी सदस्य थे। सुंदरराजन 1964 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की सुरक्षा में लगे स्टाफ में भी काम किया था। लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड दी थी और वे वकालत करने लगे थे। वे मंदिर परिसर में ही रहते थे, लेकिन कुछ दिनों पूर्व मंदिर प्रबंधन ने उन्हें परिसर से बाहर निकालने का आदेश दिया था |

सत्तर साल के बुजुर्ग, पूर्व आइपीएस अधिकारी टी.पी. सुंदरराजन ने दो साल पहले अकल्पनीय काम किया. वे श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से बमुश्किल 100 फुट की दूरी पर एक सादगीभरी ब्राह्मण बस्ती में रहते हैं.उन्होंने एक याचिका दाखिल की जिसकी बदौलत मंदिर के तहखानों को नाटकीय ढंग से खोलने का आदेश मिला और फिर इतना खजाना मिला जिसके बारे में कुछ लोगों का आकलन है कि वह 1 लाख करोड़ रु. से अधिक का है (केरल के पूर्व मुख्य सचिव सी.पी. नायर के मुताबिक, मंदिर के खजाने का बाजार भाव पांच लाख करोड़ रु. से अधिक हो सकता है.) इसने केरल के सबसे बड़े मंदिर को शायद दुनिया की सबसे धनी धार्मिक स्थान बना दिया है.इसने उस राज्‍य को चकित कर दिया है जो भारत के 936 टन वार्षिक सोना उपभोग का करीब 20 फीसदी इस्तेमाल करता है. और इसने खजाने के स्वामित्व पर पेचीदा सवाल खड़े कर दिए हैं.सुंदरराजन सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित उस सात सदस्यीय समिति के सदस्य थे जो गर्भ गृह के इर्दगिर्द के छह तहखानों में गई और वहां का मुआयना किया. उनकी सफेद दाढ़ी उनके खुले सीने पर लहराती रहती थी और कभी-कभी वे ऑक्सीजन मास्क लगाए रहते थे |समिति के अन्य सदस्यों के साथ वे दो तहखानों में गए. मंदिर के भूरे ग्रेनाइट फर्श के पांच फुट नीचे चार सीढ़ियां उतरने पर उन तहखानों में हजारों फ्रांसीसी और डच सोने के सिक्कों, हीरे और सोने की मूर्तियों और हीरा जड़ित जेवर समेत 1 टन सोना मिला.मंदिर अधिकारियों ने उस खजाने की कीमत 1 लाख करोड़ रु. आंकी है, लेकिन इसमें उसके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुराने होने के मूल्य को शामिल नहीं किया गया है. फ्रांसीसी औपनिवेशिक काल के 5 ग्राम के एक असली सोने के सिक्के, 'नैपोलियन' का मौजूदा बाजार भाव 10,000 रु. से थोड़ा अधिक होगा. लेकिन संग्रहकर्ता इसके लिए 1 लाख रु. चुका सकते हैं.इस बीच सुंदरराजन ने इससे भी बड़े खजाने की ओर संकेत किया था जो जमीन के नीचे स्थित एक तहखाना, जहां माना जाता है कि त्रावणकोर के शासक मलयालम कैलेंडर के आखिरी महीने करकिडिकम के दौरान मंदिर के अंदरूनी हिस्से में तांबे के बर्तनों में सोने के सिक्के रखते थे. वे कहते थे कि , ''यह प्रथा सदियों तक चली लेकिन उस तहखाने के रास्ते के निशान मिट गए हैं.''पश्चिम बंगाल काडर के 1964 के अधिकारी सुंदरराजन ने खुफिया ब्यूरो में सहायक निदेशक के रूप में काम किया और वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के भी करीबी सहयोगी थे. उन्होंने छह साल बाद आइपीएस से इस्तीफा दे दिया| इस संदर्भ मैं उनका कहना था कि ''मैं अंदरूनी राजनीति नहीं झेल सका''-और सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू कर दी. लेकिन '80 के दशक में अपने पैतृक इलाके तिरुअनंतपुरम में ''अपने पिता को प्रतिदिन पद्मनाभस्वामी मंदिर ले जाने की खातिर'' लौटने से पहले वकालत छोड़ दी.लेकिन आखिर उस ब्रह्मचारी और विष्णु के भक्त, जो दशकों से दिन में तीन बार मंदिर में प्रार्थना करता था,को न्यायिक हस्तक्षेप कराने के लिए क्यों बाध्य हुआ? सुंदरराजन का कहना था कि इसकी शुरुआत 1997 में उस समय हुई जब उन्होंने तत्कालीन त्रावणकोर राज परिवार के प्रमुख 89 वर्षीय उतरदम तिरुनल मार्तंड वर्मा का एक संदेश देखा. उस संदेश में उन्होंने इस प्रसिद्ध खजाने का मुआयना करने की इच्छा जाहिर की थी.इस पर सुंदरराजन का कहना था कि , ''मुझे डर लगा कि खजाने को पार किया जा

कता है.'' उन्होंने 'क्वो वारंटो' हासिल कर लिया या दूसरे शब्दों में हाइकोर्ट से मंदिर पर तिरुनल के अधिकार को चुनौती दिलवा ई. इसकी वजह से तत्कालीन राज परिवार और उसके मुखिया के साथ उनका कई बार टकराव हुआ.सुंदरराजन मंदिर का प्रशासनिक कार्य देखने वाले त्रावणकोर के शाही परिवार, खासकर उसके अंतिम महाराजा श्रीचित्र तिरुनल बलराम वर्मा, जिनका 1991 में देहांत हो गया, के काफी करीब थे. श्रीचित्र की जगह उनके छोटे भाई उतरदम तिरुनल ने ली जो अब शहर के पट्टोम पैलेस में रहते हैं. सुंदरराजन के अनुसार , ''राज परिवार के कुछ सदस्यों ने दावा किया कि वे मंदिर और उसके खजाने के मालि क हैं. इसी दावे की वजह से मुझे यह मिशन बनाना पड़ा.''तब उनहोने 2009 में राज्‍य हाइकोर्ट में याचिका दाखिल करके मंदिर का प्रशासन सरकार के हवाले करने को कहा. इस पूर्व पुलिस अधिकारी ने खजाने का मुआयना करने के बाद आरोप लगाया कि उसमें से कुछ हिस्सा निकाल लिया गया होगा.उनका कहना था कि , ''खजाना काफी हद तक सही-सलामत लगता है. पेंटिंग के लिए रखा गया करीब 2.7 टन सोने का डस्ट (या धूल) गायब हो गया है. शायद मंदिर को सील कराने से पहले ही उसे चुरा लिया गया होगा.'' इस आरोप की पुष्टि करना महज इसलिए मुश्किल है क्योंकि उस सोने का हिसाब बहीखाते में नहीं लिखा गया था.

कहानी मंदिर के संपत्ति की

मंदिर के रिकॉर्ड के मुताबिक, इसका निर्माण 10वीं सदी में अए वंश ने कराया था, जो त्रावणकोर राज परिवार से पहले यहां राज करता था. राजमहल के दस्तावेजों

में 15वीं सदी के दौरान भी मंदिर में रखे भगवान के स्वर्ण आभूषणों का जिक्र है. लेकिन इतना धन कहां से आया?अधिकतर सिद्धांत त्रावणकोर राजवंश के संस्थापक और दक्षिण केरल को एकजुट करने वाले योद्धा राजकुमार मार्तंड वर्मा को इसका श्रेय देते हैं. वर्मा ने एक के बाद एक अभियानों में स्थानीय राजाओं को अपने अधीन कर लिया. उन्होंने एक डच समुद्री बेड़े के हमले को भी नाकाम करके उसके बेलजियम के निवासी कमांडर यूस्टेकियस डी'लिनॉय को गिरफ्तार कर लिया.सबसे बढ़कर उन्होंने महत्वपूर्ण कालीमिर्च के व्यापार पर पर कब्जा कर लिया, जिसकी वजह से यूरोपीय लोग केरल आते थे. 1750 तक वणकोर राज कोच्चि से कन्याकुमारी तक फैल गया.ऐसा लगता है कि सोने की कभी कमी नहीं रही. कोलंबिया के मिथकीय 'अल डोराडो' (संपन्नता और अवसरों का स्थान) की याद दिलाने वाले एक वार्षिक समारोह में मार्तंड वर्मा ने सोने के एक बर्तन में स्नान किया और उसे तोड़कर ब्राह्मणों में बांट दिया.इसके अलावा, उन्होंने अपने वजन के बराबर सोना दान किया. इसके बाद उन्होंने मंदिर का उसके मौजूदास्वरूप में पुनर्निर्माण किया. उन्होंने 1750 में एक भव्य समारोह में अपना राज भगवान, पद्मनाभस्वामी को समर्पित कर दिया, जो उसके बाद से 'त्रावणकोर के शासक' के बतौर जाने जाने लगे.वर्मा और उनके शासक भगवान के दास या ''पद्मनाभदासों'' के रूप में शासन करने लगे. यह अपने प्रतिद्वंद्वियों को चकमा देने और अपने शासन को दैविक स्वीकृति दिलाने की रणनीतिक चाल भी थी. मंदिर और उसके भगवान, काले रंग के शालिग्राम पत्थर से बनी विष्णु की मूर्ति जो 100 फनों वाले नाग पर विश्राम की मुद्रा में आरूढ़ हैं, राजवंश से पूरी तरह जुड़ गए.वर्षों तक राजाओं और भक्तों के चढ़ावे, कर और उपहार मंदिर के खजाने में जमा होते रहे. यह मंदिर ऐसे इलाके में स्थित है जहां कोई हमला नहीं हुआ. सिर्फ एक बार मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने हमला किया था लेकिन त्रावणकोर की अग्रिम पंक्ति के रक्षक

दलों ने 1790 में कोच्चि के पास उसे परास्त कर दिया. यह साम्राज्‍य 1947 में भारतीय संघ में शामिल हो गया हालांकि उसके दीवान, सर सी.पी. रामस्वामी अय्यर ने कुछ समय तक आजादी हासिल करने की कोशिश की थी.त्रावणकोर धार्मिक संस्थान कानून 1951 के तहत तत्कालीन रियासत के शासक को मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंप दी गई. यह विशेषाधिकार 1971 में पूर्व रियासतदारों के निजी खर्च भत्ते (प्रिवी पर्स) को खत्म किए जाने तक हासिल था. त्रावणकोर राज परिवार काफी अमीर है और अपनी जायदाद के किराये एवं निवेशों से अपना खर्च चला रहा है. लेकिन मंदिर के साथ उनके सहजीवी संबंध के दिन अब गिनेचुने हो सकते हैं.इस साल 31 जनवरी को न्यायमूर्ति के. सुरेंद्र मोहन और न्यायमूर्ति सी.एन. रामचंद्रन नायर की सदस्यता वाली हाइकोर्ट की पीठ ने सुंदरराजन की याचिका को मंजूरी दे दी. पीठ ने राज्‍य सरकार को तीन महीने के भीतर मंदिर प्रबंधन और संपत्तियों को अपने हाथ में लेने के लिए एक प्राधिकरण के गठन का आदेश दिया. पीठ ने कहा कि त्रावणकोर शाही परिवार मंदिर और उसकी संपत्तियों पर अपना दावा नहीं ठोक सकता. अदालत ने उतरदम तिरुनल की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि 1991 में उनके भाई की मौत के बाद उस मंदिर पर केवल राज्‍य सरकार का स्वामित्व हो सकता है.

तिरुनल ने इस आदेश को चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी विशेष अवकाश याचिका के आधार पर हाइकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. लेकिन न्यायमूर्ति आर.वी. रवींद्रन और न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक की सदस्यता वाली पीठ ने तहखानों को खोलने और संपत्ति का विस्तृत ब्यौरा बनाने का आदेश दे दिया. तहखानों को खोलने और उसकी निगरानी के लिए सात सदस्यीय समिति बना दी गई, जिसमें हाइकोर्ट के दो पूर्व न्यायाधीश और राज्‍य सरकार का एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. संपत्ति के ब्यौरे को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जाना है. इस मामले की सुनवाई अगस्त में होने वाली है.सुंदरराजन शिवसेना जैसे हिंदू समूहों के लिए घृणा के पात्र बन गए हैं. वे उन्हें मंदिर पर राज्‍य के कब्जे की इजाजत देने का दोषी मानते हैं. उन्हें चौबीसों घंटे पुलिस संरक्षण दिया जा रहा है और दूसरी ओर लोग उनकी मंशा पर सवाल उठाने लगे हैं. पूर्व डीजीपी पी.आर. चंद्रन का कहना है, ''सुंदरराजन की निजी ईमानदारी और भगवान पद्मनाभस्वामी के प्रति भक्ति निष्पाप है. यह अफसोस की बात है कि उनके मौजूदा मिशन के पीछे निजी हित बताया जा रहा है.''इस बीच, संरक्षण विशेषज्ञों ने खजाने को केरल के उष्णकटिबंधी जलवायु और अधिक आर्द्रता वाले क्षेत्र से किसी सुरक्षित माहौल में रखने के लिए कहा है. पेरिस स्थित इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्युजियम के भारतीय खंड के महासचिव एम.वी. नायर का कहना है, ''सबसे बड़ी चुनौती यह है कि खजाना तेजी से पुराना पड़ सकता है. हमें फौरन संरक्षण की पहल करनी चाहिए.''अभी तक छह तहखानों में से आखिरी नहीं खुला है लेकिन सार्वजनिक बहस छिड़ गई है कि मंदिर की संपत्ति का क्या किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी.आर. कृष्ण अय्यर चाहते हैं कि खजाने को बेचकर उसका पैसा सामाजिक कार्यों में लगा दिया जाए. जाने-माने इतिहासकार के.एन. पणिक्कर का कहना है, ''इस खजाने को रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने का यह शानदार अवसर है. दुनियाभर के लोग इसे देखेंगे.''

विद्वानों का कहना है कि इसे मंदिर के निकट एक संग्रहालय में रखना चाहिए ताकि आम लोग और विद्वान अध्ययन के लिए उसे देख सकें. काहिरा स्थित मिस्त्री संग्रहालय इसी तरह का है. एका कल्चरल रिसोर्सेज के प्रबंध निदेशक प्रमोद कुमार के.जी. का कहना है, ''मंदिर का खजाना इलाके की भौतिक संस्कृति का ठोस सबूत है और बाहरी दुनिया के साथ इस इलाके के समृद्ध व्यापार और वाणिद्गियक संबंधों का अनुमान लगाने के लिए इसकी सभी पहलुओं से जांच की जानी चाहिए.यह भारत का संभवतः इकलौता ऐसा भंडार है जिसे चुराया नहीं गया और इसकी वजह से हमें अनुसंधान एवं अध्ययन का बड़ा अवसर मिला है.''लेकिन मंदिर से निकले खजाने के स्वामित्व पर सार्वजनिक बहस और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक संपत्ति का ब्यौरा तैयार होने तक इंतजार करना होगा. हालांकि न तो उतरदम तिरुनल, न ही राज परिवार के किसी सदस्य ने इन घटनाओं पर कोई टिप्पणी की है लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे इससे कतई खुश नहीं हैं.

वैसे, वे संपत्ति का ब्यौरा तैयार किए जाने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन उन्हें अंदेशा है कि खजाने के ब्यौरे और उसकी जगह के बारे में सार्वजनिक रूप से बातचीत होने से मंदिर की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है. इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए तिरुनल ने अपनी प्रतिक्रिया में रुआंसा मुंह बना लिया.मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कहा है कि खजाना मंदिर के भीतर ही रहना चाहिए और राज्‍य सरकार सुरक्षा प्रदान कराएगी. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि 1878 का ट्रेजर ट्रोव (खजाने का भंडार) कानून, जिसके मुताबिक जमीन के भीतर मिलने वाला सभी खजाना राज्‍य का होता है, इस मामले में लागू नहीं होता.हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और सात सदस्यीय समिति के पर्यवेक्षक सी.एस. राजन का कहना है, ''मंदिर और उसके भगवान की इस संपत्ति पर न तो सरकार, न ही राजा दावा ठोक सकते हैं. यह कोई खजाना नहीं है बल्कि ऐसी संपत्ति है जिस पर मंदिर का अधिकार है और इसे साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज भी हैं.''हिंदू संगठनों की एक राय है कि वह खजाना मंदिर का है और उसे मंदिर परिसर से बाहर नहीं निकाला जाना चाहिए. उन्होंने इसे निजाम के जेवरों की तरह दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रालय में भेजे जाने के सुझाव का विरोध किया है. ऐसे में लगता है कि देवभूमि की संपत्ति उसके अपने ही इलाके में रहेगी.

Wednesday, July 13, 2011

तेलंगाना के नौ जिलों मैं सफल

रहा " वंटा वार्पू "का आयोजन

निज़ामाबाद |पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर तेलंगाना जे ऐ सी के अहवाह्न पर मंगलवार को तेलंगाना के नौ जिलों (हैदराबाद को छोड़कर) मैं "वटा वार्पू " यानि सड़क पर खाना पकाओ और खाओ का आयोजन किया गया |इसके पहले जून माह की बीस तारीख को प्रदेश की राजधानी हैदराबाद मैं यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था| जिसकी तीखी गंध से यू पी ऐ सरकार की जहाँ नीद हरम हुई वहीँ प्रदेश की राजनीति मैं एक नया भूचाल सा आ गया ,जिसके तहत तेलंगाना क्षेत्र के लगभग सभी राजनितिक पार्टियों (जिसमे कांग्रेस भी शामिल)के विधायकों सांसदों ने तो इस्तीफा दिया ही वहीँ सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस के मंत्रियों को भी इस्तीफा देने पर मजबूर होना पड़ा| अब पृथक तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने मंगलवार को तेलंगाना क्षेत्र में सड़कों पर भोजन पकाकर प्रदर्शन किया, वहीं उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों का आमरण अनशन दूसरे दिन जारी रहा।
तेलंगाना संयुक्त कार्रवाई समिति (जीएसी) के कार्यकर्ताओं ने अपने जारी आंदोलन के तहत नौ जिलों में यह अनोखा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पिछले माह चूंकि हैदराबाद में ऐसा प्रदर्शन हुआ था, इसलिए जेएसी ने इस समय क्षेत्र के शेष भागों में यह कार्यक्रम चलाया।तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जेएसी से जुड़े अन्य दलों एवं संगठनों के नेताओं ने 'वंता वारपू' (सड़क पर भोजन पकाकर प्रदर्शन) में भागीदारी की। यह प्रदर्शन क्षेत्र के वारंगल, करीमनगर, निजामाबाद, मेडक, आ
दिलाबाद, नलगोंडा, महबूबनगर एवं अन्य जिलों में आयोजित किया गया।राजनीतिक एवं गैर-राजनीतिक संगठनों के नेताओं ने सड़कों पर बड़ी संख्या में रसोई स्थापित की, खाना पकाया और मिल-जुलकर भोजन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। वे मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार जल्द ही पृथक राज्य गठन की प्रक्रिया शुरू करे।भाजपा राज्य इकाई के अध्यक्ष जी. किशन रेड्डी ने वारंगल कस्बे में किए गए प्रदर्शन में भाग लिया।
इस बीच, उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों का आमरण अनशन दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। किसी भी हिंसक प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस तथा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि छात्रों ने अधिकारियों से अनुमति लिए बगैर अनशन शुरू किया।उस्मानिया विश्वविद्यालय संयुक्त कार्रवाई समिति (ओयूजीएसी) ने तेलंगाना क्षेत्र में बुधवार को सभी शैक्षिक संस्थान बंद रखने का ऐलान किया है।ओयूजीएसी ने जीएसी के आह्वान पर गुरुवार को तेलंगाना क्षेत्र में सड़क जाम करने की मुहिम को समर्थन देने की घोषणा की। छात्रों की योजना क्षेत्र के विधायकों के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा स्वीकार करने की मांग को लेकर शुक्रवार को विधानसभा तक जुलूस निकालने की है।उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह क्षेत्र के कम से कम 100 विधानसभा सदस्यों ने अपना इस्तीफा पेश किया था।

Monday, July 11, 2011

अनशन पर बैठने से पहले कई छात्र गिरफ्तार
उस्मानिय विश्वविद्यालय बनी पुलिस छावनी


हैदराबाद: हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने की कोशिश कर रहे कई छात्रों को पुलिस ने सोमवार रात को गिरफ्तार कर लिया। विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं।एक अधिकारी ने बताया कि तेलंगाना क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से हैदाराबाद आ रहे कई छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने कल रात को ही उस्मानिया विश्वविद्यालय संयुक्त कार्रवाई समिति (ओयूजेएसी) के कुछ नेताओं को भी विश्वविद्यालय परिसर और छात्रावासों से गिरफ्तार कर लिया था।इसके अलावा वारंगल, करीमनगर और अन्य शहरों में भी ऐसे छात्रों को गिरफ्तार किया गया जो हैदराबाद आने का प्रयास कर रहे थे।ओयूजेएसी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि अनशन को रोकने के लिए पुलिस बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार कर रही है। नेताओं का यह भी कहना है कि वह इस आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैंविश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।नेताओं को अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने से रोकने के लिए परिसर की ओर जाने वाले सारे रास्तों को बंद कर दिया गया है।पुलिस द्वारा परिसर में वाहनों की जाँच किए जाने और अवरोधक लगाए जाने से तनाव फैल गया है।गौरतलब है कि ओयूजेएसी के नेताओं ने करीब 10,000 छात्रों के साथ अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने की योजना बनाई है।पुलिस आयुक्त ए.के.खान ने कहा कि इस तरह के अनशन की अनुमति नहीं दी गई है। उच्चत्तम न्यायालय के आदेश के बाद परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।

Saturday, July 9, 2011


तेलंगाना मैं 14 को रेल रोको

एवम 12 को सड़क पर खाना पकाओ

निज़ामाबाद ! आंध्र प्रदेश में पृथक तेलंगाना राज्य के लिए संघर्षरत तेलंगाना संयुक्त कार्य समिति (जेएसी) ने तेलंगाना क्षेत्र में 14 जुलाई को एक दिन के 'रेल रोको' आंदोलन का ऐलान किया है।वहीं राज्य के सरकारी कर्मचारी एक अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।विभिन्न राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक समूहों की सर्वोच्च निकाय जेएसी ने 'वंता वारपू' यानी सड़क पर खाना पकाने के अभियान की घोषणा भी की है जो नौ जिलों में 12 जुलाई से शुरू होगी।जेएसी के संयोजक एम. कोदंदाराम ने परिचालन समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि चूंकि पिछले महीने 'वंता वारपू' का आयोजन हैदराबाद में हुआ था, इसलिए इसे 12 जुलाई से अन्य इलाकों में आयोजित करने का निर्णय लिया गया।जेएसी ने पहले आठ और नौ जुलाई को दो दिन के 'रेल रोको' आंदोलन की घोषणा की थी लेकिन इस कार्यक्रम में कांग्रेस, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) एवं अन्य दलों को शामिल कर इसे संयुक्त आंदोलन का रूप देने के लिए इसे स्थगित कर दिया था।जब कांग्रेस एवं तेदेपा ने संयुक्त आंदोलन के सुझाव पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया तब जेएसी ने 14 जुलाई को 'रेल रोको' आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।जेएसी ने यह घोषणा भी की कि तेलंगाना क्षेत्र के सरकारी कर्मचारी एक अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। जेएसी में शामिल कर्मचारी संघ 13 जुलाई को सरकार को हड़ताल का नोटिस देंगे।कोदंदाराम ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के साथ एकता प्रदर्शित करने के लिए 15 जुलाई से रैलियां आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सिंगारेनी कोलियरीज कम्पनी लिमिटेड और विद्युत विभाग के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल होने को तैयार हैं।


दक्षिण सूडान बना दुनिया का 193 वां देश

नई दिल्ली ! दक्षिणी सूडान शनिवार को दुनिया का नवीनतम और संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता वाला अफ्रीका का 54वां देश बन गया।हजारों की संख्या में सूडानी नागरिकों ने राजधानी जूबा में आयोजित एक स्वतंत्रता समारोह में अपने राष्ट्रध्वज को लहरा कर खुशी जाहिर की। दुनिया में अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रों की संख्या 193 हो गई है।दक्षिणी सूडान को नए राष्ट्र के रूप में उभरने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को वहां की सरकार और उसके नागरिकों को बधाई दी। दक्षिणी सूडान के राष्ट्रपति साल्वा किर मयारडिट को लिखे पत्र में मनमोहन सिंह ने कहा, ''इस महत्वपूर्ण और खुशी के मौके पर भारत सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं दक्षिणी सूडान की सरकार और वहां के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।''राजधानी जूबा में एक रंगारंग समारोह में राष्ट्रपति सल्वा कीर मायारडिट ने दक्षिणी सूडान के स्वतंत्र राष्ट्र बनने की घोषणा की। दक्षिणी सूडान दशकों के गृहयुध्द के बाद नया राष्ट्र घोषित किया गया। इस संघर्ष में करीब 20 लोगों को अपने जान न्योछावर करने पड़े।ज्ञात हो कि दक्षिणी सूडान की आजादी के लिए हुए जनमत संग्रह को सूडान द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद दक्षिणी सूडान दुनिया का 193वां देश बन गया है। इसके साथ ही सूडान और दक्षिणी सूडान के बीच हुए शांति समझौते से देश में गृह युध्द का अंत हो गया।आजादी के मौके पर राजधानी जूबा में नौ जुलाई को आयोजित समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दक्षिणी सूडान के साथ अपने विकास के अनुभव को साझा और सम्भावित मदद करने के लिए तैयार है।उन्होंने कहा, ''मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के आपसी हितों के लिए हमारा आपसी सहयोग बढ़ेगा।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''दक्षिणी सूडान के साथ सभी गतिरोध वाले मुद्दों को शांतिपूर्वक और सौहार्द्रपूर्ण तरीके से सुलझाने की आपकी प्रतिबध्दता की हम प्रशंसा करते हैं।ज्ञात हो कि भारत ने दक्षिणी सूडान को व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों व ग्रामीण प्रौद्योगिकी उद्यानों जैसी क्षमता विकास परियोजनाओं के लिए 50 लाख डॉलर की सहायता देने की हाल ही में घोषणा की थी।वेबसाइट 'बीबीसी डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक समारोह में उपस्थित प्रमुख लोगों में सूडान के राष्ट्रपति उमर अल-बशीर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून और भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी शामिल थे। लम्बे समय तक चले गृह युध्द के बाद वर्ष 2005 में हुए शांति समझौते के कारण दुनिया के इस नवीनतम देश का जन्म सम्भव हो सका है।सूडान पहुंचने से पहले रास्ते में विमान में सवार पत्रकारों से बातचीत करते हुए अंसारी ने कहा कि अफ्रीकी देश भारत के अनुभव से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर जूबा में भारत की उपस्थिति खासतौर से सूडान के साथ और पूरे अफ्रीका के साथ युगों पुराने सम्बंधों को जाहिर करती है।बीबीसी के मुताबिक लोग अपनी तमाम समस्याओं को किनारे रखते हुए जश् मना रहे हैं। वे सड़कों पर ड्रम बजाते हुए राष्ट्रपति साल्वा किर मयारडिट के समर्थन में नारेबारी कर रहे हैं।जूबा में जश् की शुरुआत आधी रात (नौ बजे) से हुई। शहर के मध्य में उलटी गिनती के लिए लगी घडी ज़ैसे ही शून्य पर पहुंची, नया राष्ट्रगान टेलीविजन पर बजने लगा।शनिवार को आयोजित स्वतंत्रता समारोह में दक्षिणी सूडान विधानसभा के अध्यक्ष जेम्स वानी इग्गा ने दक्षिणी सूडान की आजादी का घोषणा पत्र पढ़ा। उसके बाद उपस्थित जनसमूह खुशियों से झूम उठा, क्योंकि सूडान का राष्ट्रध्वज झुका दिया गया और दक्षिणी सूडान का ध्वज फहरा दिया गया।समारोह में हिस्सा लेने वाले अन्य लोगों में पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री कोलिन पावेल, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि सुसान राइस, औैर अफ्रीकी कमान के अमेरिकी सैन्य प्रमुख जनरल कार्टर हैम शामिल थे।समग्र शांति समझौते के तहत जनमत संग्रह करवाया गया, जिसमें 99 फीसदी से अधिक लोगों ने स्वतंत्रता के पक्ष में मतदान किया। नए देश के पास तेल का काफी भंडार है, लेकिन यह दुनिया का एक अल्प विकसित देश है। यहां पर पांच साल से कम उम्र के हर सातवें बच्चे की मौत हो जाती है।उत्तरी और दक्षिणी सूडान के बीच दशकों तक चले संघर्ष में करीब 20 लाख लोग मारे जा चुके हैं। इससे पहले दक्षिणी सूडान के औपचारिक रूप से 54वां अफ्रीकी राष्ट्र बनने से एक दिन पूर्व सूडान ने उसे मान्यता दे दी।खार्तूम में सरकारी टीवी पर शुक्रवार को राष्ट्रपति कार्यालय मामलों के मंत्री बक्री हसन सालेह ने कहा, ''सूडान गणराज्य, दक्षिणी सूडान गणराज्य को एक स्वतंत्र देश के रूप में एक जनवरी 1956 को परिभाषित सीमा के मुताबिक मान्यता की घोषणा करता है।''

बाबा आम्टे की पत्नी
साधनाताई का निधन

नागपुर ! वरिष्ठ समाज सेविका और प्रसिद्ध समाज सेवक बाबा आम्टे की पत्नी साधनाताई आम्टे का चंद्रपुर जिले के आनंदवन में आज निधन हो गया |वह 86 वर्ष की थी |
सुश्री साधनाताई बाबा आम्टे की कुष्ठ रोगियों की सेवा में पूरा सहयोग करती थी. वह वरोरा इलाके में ..महारोगी सेवा संस्थान.. में कुष्ठ रोगियों की सेवा करती थीं| पिछले लगभग आठ माह से वह बीमार रहने लगी थी|
प्रकाश और विकास उनके दो पुत्र हैं|
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पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे .......




पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे

तहखाने में बंद है कई रहस्य ?

तिरूवनंतपुरम। सुप्रीम कोर्ट में पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने को खोलने के सवाल पर सुनवाई चल रही थी तो दूसरी तरफ पद्मनाभस्वामी मंदिर के सामने लोग पूजा-पाठ और हवन कर रहे थे। इन्हें डर था कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने छठे दरवाजे को खोलने की इजाजत दे दी और दरवाजा तोडा गया तो भगवान पkनाभस्वामी नाराज हो जाएंगे और फिर होगा...सर्वनाश! सन 1930 में एक अखबार में छपा एक लेख बेहद ही डरावना था।
लेखक एमिली गिçRस्ट हैच के मुताबिक 1908 में जब कुछ लोगों ने पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने के दरवाजे को खोला गया तो उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पडा क्योंकि तहखाने में कई सिरों वाला किंग कोबरा बैठा था और उसके चारों तरफ नागों का झुंड था। जान बचाने के लिए सारे लोग दरवाजा बंद करके जान बचाकर भाग खडे हुए। तहखाने में छुपा है कई सिरों वाला नाग कहा जा रहा है कि एक विशालकाय किंग कोबरा जिसके कई सिर हैं और उसकी जीभ कांटेदार है वो मंदिर के खजाने का रक्षक है। अगर छठे दरवाजे के तहखाने को खोला गया तो वो किंग कोबरा बिजली की रफ्तार से पानी के अंदर से निकलेगा और सब कुछ तहसनहस कर देगा। वैसे नागों के जानकारों का कहना है कि तहखाने के अंदर किसी भी किंग कोबरा के जिंदा रहने की संभावना नामुमकिन है। क्योंकि बंद तहखाने के अंदर ऑक्सीजन न के बराबर है और न ही खाने-पीने का कोई सामान है। ऎसे हालात में किंग कोबरा प्रजाति का कोई भी नाग जिंदा नहीं रह सकता है। लेकिन धार्मिक मान्यताएं और आस्थाएं इन दलीलों को नहीं मानतीं इसलिए लोग किसी भी अनहोनी को टालने के लिए लगातार पूजा-पाठ कर रहे हैं।
ज्योतिषाचायों का मानना है कि नाग धन का रक्षक है इसलिए पहले नाग प्रतिमा की पूजा की जानी चाहिए वरना तहखाना खोलने की कोशिश खतरनाक भी साबित हो सकती है। इससे तिरूअनंतपुरम और पूरे राज्य पर संकट आ सकता है। वैसे बंद तहखाने को खोलने के लिए शास्त्रों में विधि बताई गई है। सबसे पहले सांप की पहचान की जाए, जो खजाने की रक्षा कर रहा है। इसके बाद वैदिक और शास्त्रों की पद्धतियों से नाग की उस जाति की पूजा कर उसे प्रसन्न किया जाए। इसके बाद तहखाना खोला गया तो किसी प्रकार के अपशकुन से बचा जा सकता है।
आ सकती है भीषण बाढ़
मान्यता के मुताबिक करीब 136 साल पहले तिरूअनंतपुरम में अकाल के हालात पैदा हो गए थे। तब मंदिर के कर्मचारियों ने इस छठे तहखाने को खोलने की कोशिश की थी और उन्हें इसकी कीमत चुकानी प़डी थी। अचानक उन्हें मंदिर में तेज रफ्तार और शोर के साथ पानी भरने की आवाजें आने लगी थीं। इसके बाद उन्होंने तुरंत दरवाजे को बंद कर दिया था। शहर के लोगों का मानना है कि मंदिर का ये छठा तहखाना सीधे अरब सागर से जु़डा है जो इस पूरे राज्य को पश्चिमी दुनिया से जो़डता है।
माना जाता है कि त्रावणकोर शाही घराने ने अपने वक्त के ब़डे कारीगरों से एक तिलिस्म बनवाया है जिसमें समंदर का पानी भी शामिल है। वजह ये कि अगर उस वक्त कोई खजाने को हासिल करने के लिए छठा दरवाजा तो़डता तो अंदर मौजूद समंदर का पानी बाकी खजाने को बहा ले जाता और किसी के हाथ कुछ नहीं लगता। महान आत्माएं जाग जाएंगी सभी छह तहखाने मंदिर के मुख्य देवता अनंतपkनाभ स्वामी की मूर्ति के चारों तरफ मौजूद हैं। इनमें तहखाने मूर्ति के सिर की तरफ मौजूद हैं। मान्यता है कि छठा तहखाना महान आत्माओं की समाधि है। और अगर इसे खोला गया तो वो महान आत्माएं जाग जाएंगी और विनाश होगा। इन्हीं मान्यताओं की वजह से यहां लोग छठे तहखाने का दरवाजा नहीं खोलना चाहते। ढह जाएगा पूरा मंदिर कयास ये भी हैं कि मंदिर की बनावट कुछ इस तरह की है कि छठे तहखाने से उसकी नींव का रिश्ता है। कहा जा रहा है कि तहखाने में लोहे की दीवार है और इससे छे़डछ़ाड की गई तो मंदिर के भरभराकर गिरने का अंदेशा है।हो सकता है और ज्यादा खजाना अब तक के पांच तहखानों में एक लाख करो़ड से भी ज्यादा दौलत पाई गई है। इतनी दौलत एक साथ पहले किसी ने नहीं देखी थी लेकिन लोगों की मान्यता है कि ये दौलत तो कुछ भी नहीं क्योंकि छठे दरवाजे में इतनी दौलत मौजूद है कि अब तक की मिली दौलत बौनी साबित होगी।


Thursday, July 7, 2011

पद्मनाभ मंदिर में 5 लाख करोड़
का खजाना,रहस्य बरक़रार
केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर से अब तक मिला खजाना कितने मूल्‍य का है, यह अभी तक सस्‍पेंस ही बना है। मीडिया में तहखाने से मिली चीजों की कीमत 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा बताई जा रही है। लेकिन केरल के पूर्व मुख्‍य सचिव सीपी नायर ने दावा किया है कि खजाना करीब पांच लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। नायर ने मंदिर की सुरक्षा आर्मी के कमांडो के हवाले किए जाने का भी सुझाव दिया है।
मंदिर में मिले खजाने पर किसका हक हो? यह बड़ा सवाल बनता जा रहा है। मंदिर के तहखानों से अरबों रुपये का खजाना मिलने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि इसका इस्तेमाल लोक कल्याण के लिए किया जाए या फिर यह संपत्ति मंदिर प्रशासन के पास रहे।
अब तक खोले गए मंदिर के तहखाने से मिले खजाने पर भगवान विष्‍णु का हक है और इस पर दूसरा कोई पना दावा नहीं जता सकता है। यहां तक कि सरकार भी नहीं। यह कहना है वरिष्‍ठ नौकरशाहों, प्रख्‍यात इतिहासकारों और धार्मिक नेताओं का।
इंडियन काउंसिल फॉर हिस्‍टोरिकल रिसर्च के पूर्व चेयरमैन और प्रख्‍यात इतिहासकार प्रो. एमजीएस नारायणन ने 'डीएनए' को बताया, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर खोले गए तहखाने में मिले सभी कीमती पत्‍थर, जवाहरात और अन्‍य सामान के दस्‍तावेज अच्‍छी तरह तैयार किए गए हैं। हर एक सामान की गिनती की गई है और इसके मालिकाना हक को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। यह सब कुछ भगवान पद्मनाभ का है जो त्रावणकोर शाही खानदान के देवता हैं।'
केरल के पूर्व मुख्‍य सचिव आर रामचंद्रन नायर भी कहते हैं कि यह खजाना मंदिर की संपत्ति है और इस पर कोई दूसरा हक नहीं जता सकता है। उन्‍होंने कहा कि पुर्तगाल, नीदरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन और पूर्व के कई देशों के शासकों और व्‍यापारियों ने इस मंदिर में चढ़ावा चढ़ाया है। नायर के मुताबिक, पद्मनाभ स्‍वामी मंदिर के खजाने की कीमत पांच लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है। इस तरह यह मंदिर दुनिया का सबसे धनी मंदिर बन सकता है। उन्‍होंने कहा, 'मेरी सलाह यह है कि इस मंदिर की सुरक्षा सेना के कमांडो के हवाले कर देनी चाहिए।'
मंदिर के ट्रस्‍ट का संचालन करने वाला त्रावणकोर शाही खानदान इस मामले में चुप है। त्रावणकोर रियासत के मौजूदा वारिस यू टी मार्तंड वर्मा की भतीजी प्रिंसेज गौरी लक्ष्‍मी बाई ने 'डीएनए' से कहा, 'त्रावणकोर के महाराजा के दिन की शुरुआत इस मंदिर में पूजा अर्चना से होती थी। यदि किसी वजह से वह ऐसा नहीं कर पाते थे तो उन्‍हें जुर्माना अदा करना पड़ता था। यह भक्‍तों की ओर से चढ़ाया गया चढ़ावा है और इसलिए यह उनकी (भगवान की) संपत्ति है। ये खजाना नहीं है।'कानून के जानकारों के मुताबिक, ‘कुछ लोग यह मांग कर रहे हैं कि इस खजाने का इस्तेमाल लोगों की भलाई के काम में होना चाहिए। लेकिन कानूनन यह संभव नहीं है। अगर गहने और दूसरी कीमती चीजें मंदिर को दान में दी गई हैं, तो उन पर सिर्फ मंदिर के देवता का ही हक है। अगर मंदिर प्रशासन यह निर्णय लेता है कि तहखाने से मिले खजाने को बेचकर नकद राशि इकट्ठा की जाती है तो भी उस धन का इस्तेमाल मंदिर के विकास पर ही खर्च किया जा सकता है, जहां खुद भगवान विराजमान होते हैं।’
सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के मुताबिक किसी मंदिर के देवता उस मंदिर से जुड़ी संपत्ति के मालिक होते हैं। अगर कोई व्यक्ति मंदिर से जुड़ी संपत्ति पर अपना दावा करता है तो वह इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ सकता है। ऐसे मामलों में अदालत में मंदिर के देवता का प्रतिनिधित्व मंदिर के ट्रस्ट का कोई सदस्य करता है। हालांकि इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट कोई निर्देश दे सकता है।


""केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर से सोने का अब तक का सबसे बड़ा भंडार मिला है.मंदिर से अब तक 1 लाख करोड़ का खजाना मिलने की बात कही जा रही है. फिलहाल खजाने की लिस्ट बनाने का काम जारी है. हिंदुओं के पद्मनाभस्वामी मंदिर में भगवान विष्णु की उपासना होती है. इसके तहखाने में छुपाए गए सोने के खजाने के मिलने के बाद श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर दुनिया का सबसे अमीर धार्मिक स्थल बन गया है. यह मंदिर त्रावणकोर राजाओं के शासनकाल में 1772 में राजा मार्तण्‍ड वर्मा ने बनवाया था। इस शासन के नियमों के अनुसार मंदिर की संपत्ति पर केंद्र या राज्‍य सरकार का हक नहीं बनता है. खजाने का पता चलने के बाद से मंदिर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पद्मनाभस्‍वामी मंदिर के कुल 6 तहखानों में से 5 तहखाने खोले जा चुके हैं. इनमें से सोना, हीरे, जेवरात, मर्तियां और सिक्‍के मिले हैं. इनकी कीमत लगभग 1 लाख करोड़ आंकी गई है.
अब इस बात पर बहस हो रही है कि मंदिर से मिले खजाने को कहां रखा जाए. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से खजाने का स्रोत और प्राचीनता का पता लगाने का आदेश दिया है. मंदिर में मिली संपत्ति में भगवान विष्‍णु की हीरे, पन्‍ने और रूबी जड़ी 3.5 फुट ऊंची मूर्ति है. इसके अलावा 35 किलों की 18 फुट लंबी एक चेन भी बरामद हुई है. तहखाने में से 1 फुट लंबी एक और मूर्ति भी मिली है.
राज परिवार के सूत्रों का कहना है कि चेंबर बी के मुख्य द्वार पर सांप का बना होना यह दर्शाता है कि इसे खोलना अशुभ होगा. सूत्रों ने कहा जांच कमेटी भी इसे नहीं खोलेगी क्योंकि इसके साथ मंदिर की काफी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. एक मान्यता के अनुसार चेंबर बी के नीचे एक सुरंग है जो समुद्र तक जाती है. इस बीच मंदिर और इसके आसपास 24 घंटे का पहरा जारी है.
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by dr mandhata singh