Tuesday, July 5, 2011


इस्तीफों के बाद आन्ध्र मैं राजनीतिक
संकट गहराया ,यूपीए सरकार पशोपेश मैं
निज़ामाबाद|तेलंगाना क्षेत्र के चार और सांसदों एवं 16 विधायकों द्वारा मंगलवार को इस्तीफा दे देने से आंध्र प्रदेश में राजनीतिक संकट गहरा गया। स्थिति से निपटने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने जहां राज्य के नेताओं से बातचीत की वहीं 48 घंटे के बंद से राज्य में जनजीवन अस्त-व्यस् रहा।तेलंगाना राष्ट्र मिति (टीआरएस) और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के संसद सदस्यों ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव और उनकी सहयोगी विजयाशांति ने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को अपना इस्तीफा फैक्स कर दिया। जबकि तेदेपा के सांसदों एन. नागेश्वर रा और रमेश राठौड़ ने नई दिल्ली में अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को सौंपा।इस रह सोमवार से इस्तीफा देने वाले सांसदों की संख्या अब 14 हो गई है। इस बीच, एक मंत्री सहित विधानसभा के 18 और सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपने त्यागपत्र दे दिए हैं। टीआरएस के विधानसभा के सभी 11 सदस्यों और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के सभी चार सदस्यों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दोनों सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया है।इस तरह से इस्तीफा देने वाले कुल विधायकों की संख्या 99 हो गई है।राज्य की 294 सदस्यों वाली विधानसभा में तेलंगाना से 119 विधायक और लोकसभा के 42 सदस्यों में से 17 सदस्य आते हैं। उल्लेखनीय है कि 11 मंत्रियों सहित विधानसभा के कुल 81 सदस्यों ने सोमवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था।वहीं, पृथक तेलंगाना राज्य के लिए संघर्ष कर रहे समूहों ने उन सांसदों और विधायकों पर दबाव बढ़ा दिया है जिन्होंने अब तक इस्तीफा नहीं दिया है। तेलंगाना संयुक्त कार्रवाई समिति (जीएसी), तेलंगाना राष्ट्रीय समिति, बीजेपी और अन्य समूहों ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी और विधायकों सहित सांसदों के घरों के समक्ष प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग की। समूहों ने इस्तीफा देने वाले नेताओं को 'धोखेबाज' करार दिया है।इस बीच, तेलंगाना के नेताओं के बढ़ते इस्तीफे और आम हड़ताल को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने इस संकट का रास्ता निकालने के लिए नई दिल्ली में
राज्य के मंत्रियों और सांसदों के साथ बातचीत की। आंध प्रदेश के प्रभारी और पार्टी महासचिव गुला नबी आजाद ने राज्य के नेताओं से बातचीत की। राज्य के नेता चाहते हैं कि नौ दिसम्बर 2009 के बयान के अनुसार केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया तुरंत शुरू करे।बातचीत में राज्य के नेताओं ने साफ कर दिया कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन के प्रति सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता लिए बगैर उनका वापस जाना सम्भव नहीं है। जबकि आजाद ने उनसे कहा कि वह उनके विचारों को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी तक पहुंचाने के बाद उनसे फिर मिलेंगे। इसके बाद आजाद ने सोनिया से मुलाकात की। इस बीच, सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल और जयपाल रेड्डी ने शाम के वक्त तेलंगाना के सांसदों और अन्य नेताओं के साथ एक बैठक की।वहीं, 48 घंटे के बंद के आह्वान से पूरे तेलंगाना क्षेत्र में बस परिवहन व्यवस्था ठप्प हो गई है। आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने तेलंगाना के सभी जिलों और उससे सटे विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, कुरनूल और आंध्र और रयालसीमा में अपनी सारी सेवाएं निलम्बित कर दी है। निगम ने हैदराबाद और सिकंदराबाद में भी बस सेवाएं स्थगित कर दी है। इसके चलते लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।सबसे बड़े बस अड्डे महात्मा गांधी बस स्टेशन से तेलंगाना क्षेत्र की ओर चलने वाली 3500 बसों को स्थगित कर दिया गया है। सिकंदराबाद के जुबली बस स्टेशन पर ऐसे ही हालात हैं। दक्षिण मध्य रेलवे ने एहतियातन हैदराबाद और सिकंदराबाद में स्थानीय रेलगाड़ियों का परिचालन बंद कर दिया है। वारंगल, निजामाबाद, करीमनगर, मेडक और आदिलाबाद जिलों में बंद का पूरा असर देखा जा रहा है।हैदराबाद स्थित उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई। छात्रों ने पुलिस पर पत्थर फेंके जबकि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस ने विश्वविद्यालय परिसर की ओर बढ़ने वाले तेदेपा और टीआरएस नेताओं को भी गिरफ्तार किया।इसके अलावा पुलिस ने विधानसभा भवन के समक्ष स्थित गन पार्क से भी तेदेपा नेताओं को गिरफ्तार किया। हैदराबाद के पुलिस आयुक्त .के. खान ने पत्रकारों को बताया कि शहर में स्थिति शांतिपूर्ण रही।

उधर तेलंगाना के सभी दस जिलों मैं दो दिन के बंद के दौरान पहले दिन

बंद सफल एवम

शांति पूर्ण रहा |कहीं भी बसें नहीं चलीं ,जिसके चलते यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा|निज़ामाबाद मैं भी बंद पूरी तरह सफल रहा|दिन भर धरना - प्रदर्शन जारी रहे|इस बीच निज़ामाबाद के एक एम्.एल.सी.डी राजेश्वर द्वारा अभी तक इस्तीफा दिए जाने के कारण तेलंगाना समर्थकों ने उनके घर के बाहर प्रदर्शन किये ,जिन्हें गिरफ्तार कर लियागया था, बाद मैं उन्हें छोड़ दिया गया| सभी चित्र निज़ामाबाद के




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