Saturday, July 9, 2011

पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे .......




पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे

तहखाने में बंद है कई रहस्य ?

तिरूवनंतपुरम। सुप्रीम कोर्ट में पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने को खोलने के सवाल पर सुनवाई चल रही थी तो दूसरी तरफ पद्मनाभस्वामी मंदिर के सामने लोग पूजा-पाठ और हवन कर रहे थे। इन्हें डर था कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने छठे दरवाजे को खोलने की इजाजत दे दी और दरवाजा तोडा गया तो भगवान पkनाभस्वामी नाराज हो जाएंगे और फिर होगा...सर्वनाश! सन 1930 में एक अखबार में छपा एक लेख बेहद ही डरावना था।
लेखक एमिली गिçRस्ट हैच के मुताबिक 1908 में जब कुछ लोगों ने पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने के दरवाजे को खोला गया तो उन्हें अपनी जान बचाकर भागना पडा क्योंकि तहखाने में कई सिरों वाला किंग कोबरा बैठा था और उसके चारों तरफ नागों का झुंड था। जान बचाने के लिए सारे लोग दरवाजा बंद करके जान बचाकर भाग खडे हुए। तहखाने में छुपा है कई सिरों वाला नाग कहा जा रहा है कि एक विशालकाय किंग कोबरा जिसके कई सिर हैं और उसकी जीभ कांटेदार है वो मंदिर के खजाने का रक्षक है। अगर छठे दरवाजे के तहखाने को खोला गया तो वो किंग कोबरा बिजली की रफ्तार से पानी के अंदर से निकलेगा और सब कुछ तहसनहस कर देगा। वैसे नागों के जानकारों का कहना है कि तहखाने के अंदर किसी भी किंग कोबरा के जिंदा रहने की संभावना नामुमकिन है। क्योंकि बंद तहखाने के अंदर ऑक्सीजन न के बराबर है और न ही खाने-पीने का कोई सामान है। ऎसे हालात में किंग कोबरा प्रजाति का कोई भी नाग जिंदा नहीं रह सकता है। लेकिन धार्मिक मान्यताएं और आस्थाएं इन दलीलों को नहीं मानतीं इसलिए लोग किसी भी अनहोनी को टालने के लिए लगातार पूजा-पाठ कर रहे हैं।
ज्योतिषाचायों का मानना है कि नाग धन का रक्षक है इसलिए पहले नाग प्रतिमा की पूजा की जानी चाहिए वरना तहखाना खोलने की कोशिश खतरनाक भी साबित हो सकती है। इससे तिरूअनंतपुरम और पूरे राज्य पर संकट आ सकता है। वैसे बंद तहखाने को खोलने के लिए शास्त्रों में विधि बताई गई है। सबसे पहले सांप की पहचान की जाए, जो खजाने की रक्षा कर रहा है। इसके बाद वैदिक और शास्त्रों की पद्धतियों से नाग की उस जाति की पूजा कर उसे प्रसन्न किया जाए। इसके बाद तहखाना खोला गया तो किसी प्रकार के अपशकुन से बचा जा सकता है।
आ सकती है भीषण बाढ़
मान्यता के मुताबिक करीब 136 साल पहले तिरूअनंतपुरम में अकाल के हालात पैदा हो गए थे। तब मंदिर के कर्मचारियों ने इस छठे तहखाने को खोलने की कोशिश की थी और उन्हें इसकी कीमत चुकानी प़डी थी। अचानक उन्हें मंदिर में तेज रफ्तार और शोर के साथ पानी भरने की आवाजें आने लगी थीं। इसके बाद उन्होंने तुरंत दरवाजे को बंद कर दिया था। शहर के लोगों का मानना है कि मंदिर का ये छठा तहखाना सीधे अरब सागर से जु़डा है जो इस पूरे राज्य को पश्चिमी दुनिया से जो़डता है।
माना जाता है कि त्रावणकोर शाही घराने ने अपने वक्त के ब़डे कारीगरों से एक तिलिस्म बनवाया है जिसमें समंदर का पानी भी शामिल है। वजह ये कि अगर उस वक्त कोई खजाने को हासिल करने के लिए छठा दरवाजा तो़डता तो अंदर मौजूद समंदर का पानी बाकी खजाने को बहा ले जाता और किसी के हाथ कुछ नहीं लगता। महान आत्माएं जाग जाएंगी सभी छह तहखाने मंदिर के मुख्य देवता अनंतपkनाभ स्वामी की मूर्ति के चारों तरफ मौजूद हैं। इनमें तहखाने मूर्ति के सिर की तरफ मौजूद हैं। मान्यता है कि छठा तहखाना महान आत्माओं की समाधि है। और अगर इसे खोला गया तो वो महान आत्माएं जाग जाएंगी और विनाश होगा। इन्हीं मान्यताओं की वजह से यहां लोग छठे तहखाने का दरवाजा नहीं खोलना चाहते। ढह जाएगा पूरा मंदिर कयास ये भी हैं कि मंदिर की बनावट कुछ इस तरह की है कि छठे तहखाने से उसकी नींव का रिश्ता है। कहा जा रहा है कि तहखाने में लोहे की दीवार है और इससे छे़डछ़ाड की गई तो मंदिर के भरभराकर गिरने का अंदेशा है।हो सकता है और ज्यादा खजाना अब तक के पांच तहखानों में एक लाख करो़ड से भी ज्यादा दौलत पाई गई है। इतनी दौलत एक साथ पहले किसी ने नहीं देखी थी लेकिन लोगों की मान्यता है कि ये दौलत तो कुछ भी नहीं क्योंकि छठे दरवाजे में इतनी दौलत मौजूद है कि अब तक की मिली दौलत बौनी साबित होगी।


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