Sunday, July 3, 2011

तेलंगाना के इतिहास में चार जुलाई

तेलंगाना के इतिहास में चार जुलाई का महत्व
निज़ामाबाद |आज चार जुलाई को जहाँ पूरे देश की निगाहें पांच दशक पुराने पृथक राज्य तेलंगाना के गठन तेलंगाना क्षेत्र के सांसदों,विधायकों एवं मंत्रियों के इस्तीफे देने पार लगी है ,वहीँ अगर यह हो जाता है तो तेलंगाना के इतिहास में चार जुलाई फिर एक बार स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जायेगा |
इतिहास पर नजर डालें तो चार जुलाई १८९७ को पश्चिम गोदावरी जिले के
भगलू गाँव में देश की आजादी के लिए अपने प्राण गवाने वाले अमर शहीद भारतवीर अल्लूरी सीताराम राजू का जन्म हुआ था|जिन्हें गोदावरी नदी में स्नान करते समय गोरिली नमक एक अंग्रेज ने गिरफ्तार कर एक पेड से बांध कर उन्हें गोलियों से भून दिया था|यह घटना ७ मई १९२४ की है|सीताराम राजू ने ही आदिवासियों के विकास के लिए १८८२ मद्रास वन कानून के खिलाफ आवाज बुलंद की थी|
चार जुलाई १९४६ के दिन तेलंगाना के वारंगल जिले में भूमिहीनों के लिए जमींदारों के लिए आवाज उठाने वाले दो युवकों दोद्दी कोमरय्या एवम मल्लाया को जमींदारों ने गोली मार दी थी,इसी के बाद से सशस्त्र तेलंगाना आन्दोलन ने अपना रूप धारण किया|
चार जुलाई १९७० को ही तेलंगाना के जनकवि श्री श्री ने अन्य कवियों के साथ मिलकर "तेलंगाना क्रांतकारी लेखक संगठन की स्थापना की थी| जिससे तेलंगाना राज्य के प्रति के प्रति तेलंगानावासियों को जाग्रति किया जा सके|
चार जुलाई को ही अमेरिका अपना स्वतंत्रता दिवस भी मनाता है|

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