Sunday, August 21, 2011

कलाकारों को प्रोत्साहित करेगी" प्रेरणा "
निज़ामाबाद, प्रेरणा का उद्देश्य है जिले के उभरते कलाकारों को मंच प्रदान करना |जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिले |यह बात शनिवार को आयोजित प्रेरणा के शुभारंभ अवसर पर बोलते हुए उसके संस्थापक श्री बल्लभ सारडा ने कही |वहीँ मुख्य अतिथि धनपाल सूर्य नारायण का कहना था कि वे इस संस्था क़ी स्थापना से कलाकारों को आगे बदने का मौका मिलेगा|उनहोने आगे कहा कि वे संस्था के लिये तन-मन व धन से सहयोग करते रहेंगे | राज कुमार सूबेदार का कहना था कि इस संस्था के मध्यम से लोगों को कला एवम संस्कृति के प्रति लगाव पैदा होगा| कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ | इस अवसर पर श्रीमती सपना के गए भजनों ने श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया | वही शहर के लोकप्रिय संगीतकार कृष्णा सरस्वती के भजनों ने भी शमा बांध दिया | इस अवसर पर सर्वश्री वेद प्रकाश मित्तल ,डॉ ओ एम शेख ,सतीश शाह,अतुल मांगे,सीता राम पाण्डे,सीता राम व्यास ,विजय मोदानी,चन्द्र प्रकाश मोदानी,सायं अग्रवाल,सायं तिवारी,जुगल सोनी,सुनील दायमा ,मदन मोहन ओझा आदि उपस्थित थे |


Friday, August 19, 2011

युवा शक्ति राष्ट्र शक्ति
है :अन्ना हजारे
नई दिल्‍ली. रामलीला में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा, 'युवा शक्ति राष्ट्रशक्ति है। राख के ढेर से जापान खड़ा हो गया तो अपना देश भी खड़ा हो जाएगा। इस देश का युवक जग गया है। इस समाज और देश का उज्ज्वल भविष्य दूर नहीं। जिन गद्दारों ने देश को लूटा है, उन्हें हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अपनी आज़ादी को हम हरगिज भुला सकते नहीं, सिर कटा सकते हैं मगर सिर झुका सकते नहीं।
अन्‍ना ने कहा कि कई सालों से युवकों को जगाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन आज पता नहीं भगवान ने कैसे मुझे आप सबके सामने खड़ा कर दिया है। कई देशों में क्रांति हुई है। अब भारत में नई क्रांति करनी है। सिर्फ क्रांति नहीं करनी है। आपने देखा कि कई जगहों पर रक्त क्रांति हुई है। वे क्रांतियां जनता को तकलीफ देते हुए की गई हैं। लेकिन आपने जो क्रांति की है, उसमें राष्ट्रीय संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। अहिंसा से कैसे क्रांति होती है, यह भारत के युवाओं ने दिखाया। हमारी क्रांति दुनिया के लिए मिसाल है। कमजोरी होने के नाते इस वक्त कम बोलूंगा। लेकिन मुझे आप से बहुत विस्तार से बात करनी है। जब तक लोकपाल बिल नहीं आएगा, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। भारत माता की जय... इंकलाब जिंदाबाद...।'
चार दिन से अनशन कर रहे, 74वर्षीय अन्‍ना हजारे ने कहा कि अभी कमजोरी के कारण ज्‍यादा नहीं बोल सकूंगा, लेकिन काफी बातें करनी हैं। रामलीला मैदान पहुंचने से पहले अन्‍ना राजघाट गए (आज पल-पल क्‍या हुआ, जानने के लिए रिलेटेड आर्टिकल पर क्लिक करें)। रामलीला मैदान में बारिश के बावजूद समर्थक डटे हुए हैं और मजबूत लोकपाल बिल पारित होने तक डटे रहने का ऐलान कर रहे हैं।
जनलोकपाल बिल की मांग पर अड़े अन्‍ना हजारे तीन दिनों के बाद आज तिहाड़ जेल से बाहर निकले। इस दौरान अनशन के बावजूद उनके तेवर में कमी नहीं दिखी। जेल के गेट पर मौजूद हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा, ‘क्रांति की शुरुआत हो गई है। अन्‍ना रहे न रहे क्रांति की मशाल जलती रहे। इस मशाल को बुझने न दें। आजादी के 64 साल बाद भी हमें असली आजादी नहीं मिल पाई है। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है। यह अत्‍याचार मुक्‍त भारत का आंदोलन है।’ उन्‍होंने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आंदोलन को पुरजोर समर्थन देने के लिए जनता का शुक्रिया अदा किया।
अन्‍ना तिहाड़ से तिरंगे से सजे खुले ट्रक पर सवार होकर मायापुरी की ओर रवाना हुए। उनके साथ दो किलोमीटर तक लोगों का हुजूम भी चल रहा था। अन्‍ना के साथ ट्रक पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया सहित कई सहयोगी भी थे। भारी बारिश के बावजूद लोगों का हौसला नहीं टूटा और अन्‍ना के साथ जुड़ने वाले लोगों की संख्‍या बढ़ती ही गई। मायापुरी के बाद अन्‍ना कार में सवार होकर राजघाट पहुंचे। वहां से वह रामलीला मैदान पहुंचे।
इस बीच, अन्‍ना के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन जारी है। आज मुंबई में डिब्‍बावालों की हड़ताल है। वहीं राजस्‍थान के उदयपुर में चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने बंद का ऐलान किया है। मुंबई में भारत मर्चेंट चैम्‍बर भुलेश्‍वर से आजाद मैदान तक रैली आयोजित कर रहा है। कोलकाता में सिटी सेंटर पर अन्‍ना के आंदोलन के समर्थन में एक सभा हो रही है। टीम अन्‍ना ने समर्थकों से आज शाम से रामलीला मैदान जुटने की अपील की है।
कायस्थ इण्डिया से आभार सहित

Thursday, August 18, 2011

जौनपुर के डॉ लालजी सिंह
बी.एच.यू. के कुलपति
जौनपुर के एक लाल ने एक बार फिर जौनपुर का नाम रोशन किया है यह कोई नया चेहरा नही बल्कि डी एन ये जाच की खोज करके दुनिया भर में भारत का परचम बुलद करने वाले पदमश्री डॉ लालजी सिंह है डॉ सिंह को बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय का कुलपति का भार भारत सरकार ने सैपा है डी एन ए वैजानिक को बी एच यू की कमान मिलने से जौनपुर के लोगो का सीना फक्र से उचा हो गया है. सभी को आशा ही पूरा विश्वास है की श्री सिंह मालवीय जी के सपनों को साकार करेगे.उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के सदर तहसील एवं सिकरारा थाना क्षेत्र के कलवारी गांव के निवासी स्व.ठाकुर सूर्य नारायण सिंह के पुत्र के रप में पांच जुलाई 1947 को डा0 लालजी सिंह का जन्म हुआ था. इण्टरमीडियेट तक शिक्षा जिले में लेने के बाद उच्च शिक्षा के लिये 1962 में श्री सिंह बीएचयू गये 1 जहां पर उन्होंने बीएससी एमएससी व पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.वर्ष 1971 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे कोलकाता गये जहां पर साइंस में 1974 तक एक फोलोशिप के तहत रिसर्च किया। इसके बाद वे छह माह की फोलोशिप पर यू.के. गये और तीन माह की बढोत्तरी लेकर नौ माह बाद वापस भारत आये.जून 1987 में सीसीएमबी हैदराबाद में वैज्ञानिक पद पर कार्य करने लगे और 1998 से 2009 तक वहां का निदेशक रहे। इस दौरान उन्होंने डीएनए फिंगर प्रिंट की खोज किया जिसके आधार पर राजीव गांधी हत्याकाण्ड सहित कई मामलों में सफलता मिली.उन्होंने वादा किया कि बीएचयू के कुलपति के रूप में कार्य करने के दौरान अपना पूरा वेतन भटनागर फेलोशिप से ही लूंगा और बीएचयू से प्रतीक .टोकन. स्वरप एक रपया प्रतिमाह वेतन लूंगा.
हमारा जौनपुर डाट इन /एच एच से साभार

कभी भी हो सकती है जगन क़ी गिरफतारी
निज़ामाबाद । सीबीआई ने जगन मोहन रेड्डी पर शिंकजा कसना शुरू कर दिया है।जिसके चलते कभी भी जगन मोहन रेड्डी क़ी गिरफतारी हो भी सकती है| गुरूवार को सीबीआई ने जगन के हैदराबाद, बेंगलूरू, चेन्नई और मुंबई स्थित ठिकानों पर छापे मारे। बताया जा रहा है कि सीबीआई ने जगन के न्यूज चैनल "साक्षी" और हैदराबाद स्थित भारती सीमेंट कंपनी के ऑफिस और जगन के घर बंजारा हिल्स पर भी छापा मारा। सीबीआई ने आंध्र के प्रमुख सचिव बीपी आचार्य के घर पर भी छापा मारा। सीबीआई ने दुबई स्थित एमआर प्रोपर्टीज व दिल्ली और हैदराबाद स्थित एमआर एमजीएफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।अ़ब सीबीआई जगन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रही है। जगन मोहन पर आय से अधिक संपत्ति एकत्रित करने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश की हाईकोर्ट ने मामले की सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया था, जिसे जगन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन उन्हें वहां से भी राहत नहीं मिली।
उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय जाँच ब्यूरो (सी बी.आई .)ने अघोषित संपत्ति मामले में जगन मोहन के खिलाफ बुधवार को प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी|उधर सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक साक्ष्यों से खिलवाड़ कराने के आरोप में उनकी गिरफ़्तारी क़ी संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता है |
पता हो कि भारतीय लोकतंत्र में जन सेवा के नाम पर अपना घर भरने वाले नेताओं के लिये यह एक सबक है कि जिस दिन सत्ता का समीकरण जरा सा भी गड़बड़ाया उस दिन उससे जेल क़ी सलाखें दूर नहीं होंगीं | उसके द्वारा कमाई गई अथाह संपत्ति उसके हाथ से जायेगी ही वहीँ समाज में बदनामी व मुसीबते भी उसका दामन नहीं छोड़ेंगीं |जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है तत्कालीन खेल मंत्री सुरेश कलमाड़ी,संचार मंत्री ए.राजा एवं भारतीय राजनीति में अपनी पकड़ बनाने वाले करूणानिधि क़ी सांसद बेटी कोनिमझी |उसी सूचि में दयानिधि मारन के बाद एक नया नाम जुडा है,आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री डॉ वाई.एस.राजशेखर के पुत्र एवम कडप्पा के सांसद जगन मोहन रेड्डी का | जिन पर आरोप है कि कम समय में आय से अधिक संपत्ति जुटाने का |समाप्ति के मामले में जगन को घेरने का कम किया है कांग्रेस पार्टी ने | जिसके एक नेता एवम मंत्री पी .शिवशंकर ने |जिनकी एक याचिका पर हाल ही में आन्ध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने जगन मोहन रेड्डी द्वारा कथित तौर पर पर भारी संपत्ति बनाने तथा धन क़ी हेरा फेरी के मामले क़ी प्रारंभिक जाँच कराने का आदेश केन्द्र्य जाँच ब्यूरो (सी.बी.आई.) को दिया है }उच्च नयायालय के मुख्य न्यायधीश निसार अहमद काकरू एवम न्यायमूर्ति विलास वी.अफजलपुरकर क़ी खंड पीठ ने सी.बी.आई से दो सपताह में जाँच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश कराने को कहा है |जिस पर जगन मोहन ने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया ,लेकिन वहाँ से भी उन्हें राहत नही मिली| इस बीच सी.बी.आई जगन मोहन के घर ,दफ्तर व अन्य प्रतिष्ठानों यानि जागति पब्लिकेशन (जो साक्षी समाचार चैनल एवम तेलगु दैनिक साक्षी का संचालन करती है),भारती सीमेंट व रियल स्टेट आदि में घपले खंगाल रही है|इन पक्तियों के लिखे जाने तक सी.बी.आई के हाथ कुछ भी नहीं लगा था | जगन के खिलाफ कांग्रेसी नेताओं के साथ -साथ तेदेपा के कुछ नेताओं व एक वकील ने भी जनहित याचिका दायर कर जगन के खिलाफ सी.बी.आई जाँच क़ी मांग क़ी थी |जनहित दायर कराने वाले वकील के.के.शेरवानी के अनुसार अदालत ने कहा है कि सी.बी.आई.के निदेशक या उनके द्वारा नामित एक अधिकारी मामले क़ी जाँच कर सकते हैं |इसके साथ ही अदालत के समक्ष पेश किये गए सभी सबूत जाँच के लिये उन्हें (सी.बी.आई.)सौंप दिए जाएँगे | इस संदर्भ में अदालत ने सभी सरकारी विभागों तथा जवाबदेह लोगों से सी.बी.आई.को जाँच में सहयोग देने को कहा है|कंगारेशी नेता एवम मंत्री का आरोप है कि जगन ने फर्जी फर्में चलाकर धन क़ी हेरा-फेरी क़ी है और मारीशस क़ी एक कम्पनी के मध्यम से कला धन एकत्र किया है | श्री राव का यह भी आरोप है कि जगन ने यह सब अपने पिता स्व वाई .एस.राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्रित्व कल में किया है|इसके लिये कई भूमि कानूनों का उल्लंघन किया गया है |राव का आरोप है कि मार्च 2004 में जगन क़ी आय मात्र ग्यारह लाख रुपये थी , जो अब बाद कर 43 ,000 हजार करोड़ हो गई है| उस समय उनके पिता प्रदेश के मुखिया थे|
विदित हो कि सन 2004 के चुनाव मैं वाई.एस राजशेखर रेड्डी ने अपने हलफनामे मैं कुल 9 .18 करोड़ क़ी संपत्ति बताई थी,जब कि सन 2011 के उप चुनाव मैं जगन मोहन रेड्डी ने अपने हलफ नामे मैं कुल संपत्ति 365 करोंड रुपये बताई है| प्रश्न यह उठ रहा है कि पिछले चुनाव मैं उनके पास कुल 9 .18 करोंड क़ी मलकियत थी जो मात्र आठ वर्षों में 365 करोंड कैसे पहुच गई|सन 2009 मैं स्वयं जगन रेड्डी सांसद बनने से पहले अपनी संपत्ति 77 .40 करोड़ रुपये दिखाई थी| उनहोने 2009 -10 मैं 3,59,59,731 रुपये आयकर का भुगतान किया | इसी वर्ष उनहोने 80 करोड़ रुपये अग्रिम आयकर का भुगतान भी कर दिया है| आधिकारिक रूप से जगन मोहन रेड्डी के पास आज जो संपत्ति है उसकी कीमत 365,68,55,224 रुपये है|यह भी सच है कि मात्र आठ वर्षों में इतनी बड़ी रकम अर्जित कर लेना हर किसी को आश्चर्यचकित कर सकता है| सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सांसद एन.नागेश्वर राव के पास 173 करोड़ ,कांग्रेस के सांसद लगड़पाटी राजगोपाल के पास 120 करोड़ एवम कांग्रेस के ही एक अन्य सांसद जी .विनोद के पास कुल 75 करोंड क़ी संपत्ति है|

यहाँ यह बताना समयोचित होगा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में जगन मोहन ने 80 करोड़ रुपये अग्रिम आयकर के रूप में भर भी दिए हैं| इन दिनों इस बात क़ी भी चर्चा है कि जगन के पास जो संपत्ति है उसकी कीमत 3 अरब 65 करोड़ से भी अधिक है |आश्चर्य क़ी बात यह है कि गत आठ वर्षों में इतनी बड़ी रकम अर्जित कर लेना कोई साधारण बात नहीं है |

अगर राजनितिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो आन्ध्र क्षेत्र में जगन के बढ़ाते प्रभाव से कांग्रेस बौखला सी गई है| पिता के आकस्मिक निधन के बाद जगन क़ी निगाह प्रदेश क़ी बागडोर सम्हालने वाली कुर्सी पर लगी थी,लेकिन कांग्रेस के अन्य नेता नहीं चाहते थे क़ी चार दिन पहले राजनीति में आनें वाला युवक प्रदेश का मुख्य मंत्री बने|कांग्रेस हाई कमान ने प्रदेश क़ी बागडोर पार्टी के वरिष्ठ नेता के. रोसय्या के हाथ में सौप दी | जिससे आन्ध्र में कांग्रेस के दो फाड़ हो गए| जिसे देखते हुवे जगन ने कडप्प लोक सभा सीट से इस्तीफा दे दिया ,उधर पुन्दिवेला (जो वाई एस राज शेखर रेड्डी का निर्वाचन क्षेत्र था)से उनकी पत्नी विजया लक्ष्मी को पार्टी ने चुनाव लड़वाकर विधान सभा पहुंचा दिया| लेकिन बेटे क़ी पार्टी में उपेक्षा को देखते हुए उनहोने अपने बेटे के साथ ही विधान सभा से इस्तीफा दे दिया |जिसके चलते पुनः उपचुनाव हुए,जिसमे माँ एवम बेटे ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल क़ी |जगन ने कांग्रेस से अलग हने के बाद अपने पिता के नाम पर वाई एस.आर कांग्रेस के नाम से एक नई पार्टी का गठन किया| इस बीच तेलंगाना क़ी मांग को लेकर कांग्रेश के सभी तेलंगाना के सांसद ,विधायकएवम मंत्रियों ने पार्टी से बगावत कर इस्तीफा दे दिया (इन पंक्तियों के लिखे जाने तक स्वीकार नही किया गया था) |उधर तेलंगाना क़ी बयार में जगन ने आन्ध्र क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है |जिसका लबोलुआब यह है कि यदि तेलंगाना का गठन हो जाता है तो अगले चुनाव में जगन को आन्ध्र का मुख्यमंत्री बनाने से कोई नहीं रोक पायेगा| यदि तेलंगाना राज्य बनाने में रूकावट आती है तो सन २०१४ के आम चुनाव में आन्ध्र प्रदेश से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो जायेगा |




Monday, August 15, 2011


१६ अगस्त ,शिवाला युद्ध के 230 साल
पहले स्वतंत्रता संग्राम का
बिगुल काशी में ही बजा था

घोड़े पर हौदा -हाथी पर जीन |
चुपके से भागा वारेन हेस्टिंग ||
यह कहावत आज भी बनारस (काशी या फिर वाराणसी के नाम से जानते हैं) क़ी गलियों में पुराने लोगों के बीच लोकप्रिय है |जिसके पीछे एक कहानी है |कहते हैं के आज से लगभग दो सौ तीस साल पहले काशी राज्य क़ी तुलना देश क़ी बड़ी रियासतों में क़ी जाती थी | भूगोलिक दृष्टिकोण से काशी राज्य भारत का ह्रदय प्रदेश था | जिसे देखते हुए उन दिनों ब्रिटिश संसद में यह बात उठाई गई थी कि यदि काशी राज्य ब्रिटिश हुकूमत के हाथ आ जाये तो उनकी अर्थ व्यवस्था तथा व्यापार का काफी विकास होगा |इस विचार विमर्श के बाद तत्कालीन गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग को भारत पर अधिकार करने के लिये भेजा गया |काशी राज्य पर हुकूमत करने के लिये अग्रेजों ने तत्कालीन काशी नरेश से ढाई सेर चीटीं के सर का तेल या फिर इसके बदले एक मोटी रकम क़ी मांग रखी |अंग्रेजों द्वारा भारत को गुलाम बनाने क़ी मंशा को काशी नरेश राजा चेत सिंह ने पहले ही भांप लिया था |अतः उन्होंने रकम तक देने से साफ मना कर दिया |परन्तु उन्हें लगा कि अंग्रेज उनके राज्य पर आक्रमण कर सकते हैं | इसी को मद्देनजर रखते हुए काशी नरेश ने मराठा,पेशवा एवम ग्वालियर जैसी कुछ बड़ी रियासतों से संपर्क कर इस बात कि संधि कर ली थी कि यदि जरुरत पड़ी तो इन फिरंगियों को भारत से खदेड़ने का सयुंक्त प्रयास करेंगे |
14 अगस्त 1781 ,दिन शनिवार ,जनरल वारेन हेस्टिंग एक बड़े सैनिक जत्थे के साथ गंगा जलमार्ग से काशी पहुंचा | उसने कबीरचौरा स्थित" माधव दास का बाग (" जिसे आज"स्वामी बाग" के नाम से जाना जाता है | जो डॉ शिव प्रसाद जिला चिकित्सालय के ठीक बगल में है ) को अपना ठिकाना बनाया|कहते हैं कि राजा चेत सिंह के दरबार से निष्काषित औसान सिंह नामक एक कर्मचारी ने कोलकाता (पुराना नाम कलकत्ता)जा कर वारेन हेस्टिंग से मिला और उसका विश्वासपात्र बन बैठा |जिसे अंग्रेजों ने "राजा" क़ी उपाधि से नवाजा भी था |उसी के मध्यम से अंग्रेजों ने काशी पहुँचने के बाद काशी नरेश राजा चेत सिंह को गिरफ्तार करने क़ी कूटनीतिक योजना बनाई |दिन रविवार ,तारीख १५ ,माह अगस्त (१५ अगस्त १७८१) क़ी सुबह वारेन हेस्टिंग ने अपने एक अंग्रेज अधिकारी मार्कहम को एक पत्र दे कर राजा चेत सिंह के पास से ढाई किलो चीटी के सर का तेल या फिर उसके बदले एक मोटी रकम लाने को भेजा | उस पत्र में हेस्टिंग ने राजा चेत सिंह पर राजसत्ता के दुरुपयोग एवम षड्यंत्र का आरोप लगाया था |पत्र के उत्तर में राजा साहब ने षड्यंत्र के प्रति अपनी अनभिज्ञता प्रकट क़ी| उस दिन यानि १५ अगस्त को राजा चेत सिंह एवम वारेन हेस्टिंग के बीच दिन भर पत्र वव्हार चलता रहा |
दूसरे दिन १६ अगस्त को सावन का अंतिम सोमवार ,हर वर्ष क़ी तरह राजा चेत सिंह अपने रामनगर किले क़ी बजाय शंकर भगवान क़ी पूजा अर्चना कराने गंगा के इस पार छोटे किले शिवाला (चेत सिंह घाटके ऊपर बने ) पार आए थे| इसी किले में उनकी तहसील का छोटा सा कार्यालय भी था |कहते हैं कि जिस समय काशी नरेश शिव पूजन से निवृत हो कर अपने दरबार में कार्य देख रहे थे, कि उसी समय गवर्नर वारेन हेस्टिंग क़ी सेना उनके दरबार में प्रवेश करने का प्रयास कर रही थी| परन्तु काशी के सैनिकों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया,तब एक अंग्रेज रेजीडेंट ने राजा साहब से मिलने क़ी इच्छा जाहिर क़ी और कहलवाया कि वह गवर्नर साहब का एक जरुरी सन्देश ले कर आया है| किन्तु राजा साहब के यह सन्देश प्रकट कराने पर कि वह तो आया है पर इतनी सेना साथ क्यों लाया है? इसके जवाब में रेजिडेंट ने यह कहकर नई चल चली कि सेना तो वैसे ही उसके साथ चली आई है , किले में केवल हम दो-तीन अधिकारी ही आएंगे|इस पर राजा साहब क़ी आज्ञा पर उन्हें अन्दर किले में भेज दिया गया | बातों ही बातों में दोनों ओर से तलवारें खिंच गई,इसी दौरान एक अंग्रेज अधिकार ने राजा चेत सिंह को लक्ष्य कर बन्दुक तानी,जब तक उसकी अंगुली बन्दुक के स्ट्रिंगर पर दबाती कि उसके पहले काशी के महशूर गुंडे बाबू नन्हकू सिंह क़ी तलवार के ही वार में उस अंग्रेज अधिकारी का सर काट कर दन जमीन पर आ गिरा,चारों ओर खून ही खून बिखर गया,जिसे देख कर खून से सने अंग्रेज अधिकारी चीखते-चिलात्ते उलटे पावं बाहर भागे |उधर किले के बाहर चारों तरफ छिपे किन्तु सतर्क काशी के बीर रण बांकुरों ने देख कर यह समझ लिया कि अन्दर किले में मर-काट मच गई है| फिर क्या था सभी बज क़ी तरह गोरी चमड़ी वालों पर टूट पड़े,लेकिन किस ने किस क मारा यह तो आज तक पाता नहीं चल सका |परन्तु शिवाला घाट पर बने उस किले के बाहर लगे शिला पत् पर अंग्रेजों ने यह जरुर अंकित करवा दिया कि इसी जगह पर तीन अंग्रेज अधिकारियों लेफ्टिनेंट स्टाकर ,लेफ्टिनेंट स्काट एवम लेफ्टिनेंट जार्ज सेम्लास सहित लगभग दो सो सैनिक मारे गए थे |
इस घटना के तुरन्त बाद राजा कशी नरेश के मंत्री बाबू मनियर सिंह ने गवर्नर वारेन हेस्टिंग को गिरफ्तार करने क़ी सलाह राजा साहेब को दी,लेकिन उनके दीवान बक्शी सदानंद ने उन्हें ऐसा कराने से मना कर दिया |उधर वारेन हेस्टिंग अपने पकडे जाने के भय से "माधव दस बाग "के मालिक पंडित बेनी राम से चुनर जाने के लिये सहायता मांगी | इसी बीच उसे पाता चल गया कि अज साहब क़ी एक बड़ी फौज उसे गिरफ्तार कराने इसी तरफ आ रही है|कहते हैं क़ी अपनी गिरफ्तारी के डर से वारेन हेस्टिंग उसी माधव दास बाग के भीतर बने एक कुँए में कूद गया | जब रात हुई तो उसने स्त्री का भेष धारण कर चुनर क़ी ओर कूच कर गया |
राजा चेत सिंह के दीवान बक्शी सदानंद क़ी यह सलाह कि वारेन हेस्टिंग को न गिरफ्तार किया जाय ,भारत के लिये दुर्भाग्य पूर्ण रहा |अगर उस दिन वारेन हेस्टिंग काशी नरेश क़ी सेना के हाथों गिरफ्तार कर लिया गया होता तो शायद अंग्रेजों के पावं भारत मेंही ज़माने नही पाते |मजे क़ी बात तो यह है कि अंग्रेज इतिहासकारों ने काशी नरेश राजा चेत सिंह को भगोड़ा साबित किया है ,और वहीँ दूसरी तरफ शिवाला घाट पर जो शिलापट्ट लगवाया उसमे साफ-साफ शब्दों में लिखवाया कि "इसी जगह उनके तीन अधिकारियों सहित दो सौ सैनिक मारे गए थे |जिसे आज भी वहाँ पर देखा जा सकता है | वे वारेन हेस्टिंग के भगोड़ा होने क़ी बात पर चुप्पी साध गए|अगर इस घटना पर विचार करें तो स्वतंत्रता आन्दोलन का पहला बिगुल काशी में ही बजा था | लेकिन दुर्भाग्य यह है कि उस घटना क़ी याद में आज तक वहाँ पर कोई स्मारक तक नहीं बन सका है |हाँ इस दिन यानि १६ अगस्त को जिन परिवार के पूर्वजों ने स्वतंत्रता के लिये उस दिन अपनी क़ुरबानी दी थी उनके परिजन जरुर एक " दीपक " उनकी याद में जरुर जलाते हैं |उस गौरव गाथा को आज भी इस प्रकार गया जाता है ,घोड़े पर हौदा ,हाथी पर जीन , चुपके से भागा वारेन हेस्टिंग...|
प्रदीप श्रीवास्तव


निज़ामाबाद मै हर्षोल्लास के साथ

मनाया गया 66 वां स्वतंत्रता दिवस



सोमवार को निज़ामाबाद के पुलिस परेड ग्राउंड में ६६ स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया |इस अवसर पर बोधन के विधायक एवम प्रदेश के सिचाई मंत्री पी. सुदर्शन रेड्डी मुख्य अतिथि थे,जिनके कर कमलों से राष्ट्रिय धवज फहराया गया |अन्य अतिथियों में जिलाधिश डी. वार प्रसाद,उप पुलिस महा निदेशक निज़ामाबाद - मेढक परिक्षेत्र एवम जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे|इस अवसर पर स्कूली छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये,जिसकी लोगों ने काफी सहराना क़ी|

Sunday, August 14, 2011






नहीं रहे शम्मी कपूर
आप की न्यूज ब्यूरो
मुम्बई अपनी खासयाहूशैली के कारण बेहद लोकप्रिय रहे हिंदी फिल्मों के पहले सिंगिंग-डांसिग स्टार शम्मी कपूर का आज तड़के मुंबई में निधन हो गया।यह जानकारी बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट 'ट्विटर' के जरिये सबसे पहले दी है। उनहोने ने शोक जताते हुए कहा है कि शम्मी कपूर जी का आज तड़के देहांत हो गया है। बच्चन ने नके निधन पर दुख प्रकट करते हुये कहा कि अपनी तरह के डांस के अनोखे अंदाज से लोगों को मंत्रमुग्ध करने वाले वह एक बेमिसाल अभिनेता थे।

79 साल के शम्मी कपूर को बीते रविवार को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह गुर्दे संबंधी बीमारी से पीडित थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह शनिवार तक वेंटिलेटर पर थे। उन्होंने तड़के पांच बजकर 15 मिनट पर आखिरी सां
ली।
बॉलीवुड अभिनेत्री जया बच्चन शम्मी कपूर के देहांत की जानकारी मिलते ही अस्पताल गईं।

राजकपूर और शशि कपूर उनके दो और भाई थे , जिनमें राजकपूर ने बहुत पहले ही उनका साथ छोड़ दिया था और आज शम्मी कपूर ने भी बॉलीवुड को अलविदा कह दिया। शम्मी कपूर को बॉलीवुड में नये युग की शुरूआत के लिए जाना जाता है। फिल्म अभिनेता और नेता राजा मुराद के मुताबिक शम्मी कपूर 40 साल आगे की सोच रखते थे।

शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था। वे मशहूर फिल्मी कलाकार पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे। पृथ्वीराज कपूर के तीन बेटों में शम्मी के बड़े भाई राज कपूर थे और छोटे भाई शशि कपूर है। शम्मी कपूर ने 1955 में अभिनेत्री गीता बाली से शादी की थी। 1965 में गीता बाली के निधन के बाद शम्मी ने 1969 में नीला देवी गोहिल से विवाह किया। कपूर के दो बच्चे हैं। बेटे का नाम आदित्य राज और बेटी कंचन देसाई है।

शम्मी कपूर ने अभिनय की शुरुआत पृथ्वी थियेटर से की। 1953 में शम्मी की पहली फिल्म 'जीवन ज्योति' पर्दे पर आई। इसके बाद उन्होंने जंगली, प्रफेसर, चाइना टाउन, कश्मीर की कली, तीसरी मंजिल, ब्रह्मचारी और विधाता जैसी कई सुपरहिट फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता शम्मी कपूर पर फिल्माया गया गाना 'चाहे मुझे कोई जंगली कहे... याहू' बेहद लोकप्रिय हुआ। शम्मी कपूर को 1968 में 'ब्रह्मचारी' के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट ऐक्टर अवॉर्ड मिला। 1982 में 'विधाता' के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग ऐक्टर का अवॉर्ड भी मिला। हर अच्छे अभिनेता की तरह उन्हें भी शुरू में रेल का डिब्बा, लैला मजनू, ठोकर, शमा, परवाना, हम सब चोर हैं जैसी कई असफल फि ल्मों के दौर से गुजरना पड़ा। कपूर को सफलता का स्वाद 1957 में मिला जब उनकी फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' को दर्शकों ने सराहा।
शम्मी कपूर के देहांत की खबर मिलते ही समूचा बॉलीवुड शोक की लहर में डूब गया है। फिल् इंडस्ट्री के कई

सितारे ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचने लगे हैं। शम्मी कपूर का इलाज कर रहे डॉक्टर भूपेंद्र गांधी के मुताबिक बॉलीवुड अभिनेता पिछले कई वर्षों से डा यलिसिस पर थे। शुक्रवार को उनका ब्लड प्रेशर बढ़ गया था जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। शम्मी कपूर का अंतिम संस्कार सोमवार को किया जाएगा।
शम्मी कपूर के बेटे आदित् राज कपूर ने अपने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए
कहा, 'वह तस्वीरों में हमेशा जिंदा हेंगे। मैंने अपना पिता खोया है और फिल् इंडस्ट्री ने प्रेरणास्रोत।'
शम्मी ने डांस को दी नई पहचान |

"याहू" से फिल्मी पर्दे पर डांस को नई पहचान देने वाले शम्मी कपूर हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता थे। देश के पह ले इंटरनेट यूजर शम्मी मुंबई में फिल्म और थियेटर एक्टर पृथ्वीराज कपूर के घर जन्मे शमशेर राज कपूर उनके दूसरे बेटे थे। राज कपू नके बड़े और शशि कपूर छोटे भाई थे। मुंबई में पैदा होने के बावजूद शम्मी ने अपना ज्यादातर जीवन कोलकाता में बिताया।
उन्होंने मुंबई के न्यू एरा स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। मातुंगा के रूइया कॉलेज में पढ़ाई के बाद कपूर ने पिता का "पृथ्वी थियेटर" जॉइन कर लिया

हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता शमशेर राज कपूर ने 1953 में फिल्म "जीवन ज्योति" से बॉलीवुड में एंट्री

की। इसके बाद नासिर हुसैन निर्देशित फिल्म "तुमसा नहीं देखा" से उन्होंने गंभीर भूमिकाओं का रूख किया।
1961 में आई फिल्म "जंगली" ने उनकी फिल्मी करियर को नया मोड़ दिया। इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में उनकी एक नई छवि का निर्माण किया। मशहूर गायक मोहम्मद रफी को अपनी आवाज बनने के लिए चुना था। 1968 में उनको ब्रह्मचारी के लिए फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड से नवाजा गया।
शरीर के बढ़ते वजन ने शम्मी कपूर की सफलता में रोड़े का काम किया और एक रोमांटिकअभिनेता के रूप में उनके
भिनय की गाड़ी आगे नहीं बढ़ पाई। 1971 में आई फिल्म "अंदाज" बतौर लीड हीरो उनकी आखिरी फिल्म थी। इसके बाद मे उन्होंने चरित्र भूमिकाओं का रूख किया और जमीर, हीरो विधाता जैसी फिल्में की। फिल्मी पर्दे पर वे आखिरी बार 2006 मे आई फिल्म सेंडविच में रणबीर कपूर के साथ दिखाई दिए थे। इसके बाद वे इम्तियाई अली की आने वा

ली फिल्म में भी उन्होंने अभिनय किया है।
बॉलीवुड के गलियारों में शम्मी कपूर और गीता बाली का रोमांस ने खूब सुर्खियां बटोरी। 1955 में आई फिल्म रंगीन रातें में कपूर और गीता का आमना-सामना हुआ। कूपर से एक साल बड़ी गीता ने चार महीने बाद मुंबई के बाणगंगा मंदिर में शम्मी से शादी
कर ली। शादी के एक मात्र गवाह हरि वालिया ने उनके परिवारों को शादी की सूचना दी। गीता से शम्मी को एक बेटा आदित्य राज कपूर और बेटी कंचन हैं।
1965 में गीता की स्मॉल पॉक्स से मृत्यू हो गई। इसके बाद 1968 में शम्मी का "ब्रह्मचारी" की अभिनेत्री मुमताज के साथ कुछ दिनों तक रोमांस चला। 1969 में उन्होने नीला देवी गोहिल से दूसरी शादी की।
अवॉर्ड

1968 फिल्म फेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड ब्रह्मचारी

1982 फिल्म फेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवॉर्ड विधाता
1995 फि ल्म फे यर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
1998 कलाकार अवॉर्ड भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए

2009 दादा साहब फाल्के अवॉर्ड
राष्ट्रीय गौरव अवॉर्ड
लीविंग लीजेंड अवॉर्ड पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल |