Thursday, August 18, 2011

जौनपुर के डॉ लालजी सिंह
बी.एच.यू. के कुलपति
जौनपुर के एक लाल ने एक बार फिर जौनपुर का नाम रोशन किया है यह कोई नया चेहरा नही बल्कि डी एन ये जाच की खोज करके दुनिया भर में भारत का परचम बुलद करने वाले पदमश्री डॉ लालजी सिंह है डॉ सिंह को बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय का कुलपति का भार भारत सरकार ने सैपा है डी एन ए वैजानिक को बी एच यू की कमान मिलने से जौनपुर के लोगो का सीना फक्र से उचा हो गया है. सभी को आशा ही पूरा विश्वास है की श्री सिंह मालवीय जी के सपनों को साकार करेगे.उत्तर प्रदेश में जौनपुर जिले के सदर तहसील एवं सिकरारा थाना क्षेत्र के कलवारी गांव के निवासी स्व.ठाकुर सूर्य नारायण सिंह के पुत्र के रप में पांच जुलाई 1947 को डा0 लालजी सिंह का जन्म हुआ था. इण्टरमीडियेट तक शिक्षा जिले में लेने के बाद उच्च शिक्षा के लिये 1962 में श्री सिंह बीएचयू गये 1 जहां पर उन्होंने बीएससी एमएससी व पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.वर्ष 1971 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद वे कोलकाता गये जहां पर साइंस में 1974 तक एक फोलोशिप के तहत रिसर्च किया। इसके बाद वे छह माह की फोलोशिप पर यू.के. गये और तीन माह की बढोत्तरी लेकर नौ माह बाद वापस भारत आये.जून 1987 में सीसीएमबी हैदराबाद में वैज्ञानिक पद पर कार्य करने लगे और 1998 से 2009 तक वहां का निदेशक रहे। इस दौरान उन्होंने डीएनए फिंगर प्रिंट की खोज किया जिसके आधार पर राजीव गांधी हत्याकाण्ड सहित कई मामलों में सफलता मिली.उन्होंने वादा किया कि बीएचयू के कुलपति के रूप में कार्य करने के दौरान अपना पूरा वेतन भटनागर फेलोशिप से ही लूंगा और बीएचयू से प्रतीक .टोकन. स्वरप एक रपया प्रतिमाह वेतन लूंगा.
हमारा जौनपुर डाट इन /एच एच से साभार

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