Saturday, September 24, 2011


तेलंगाना में नहीं चल रही रेल
के पहिये ,जन-जीवन प्रभावित
निज़ामाबाद |पृथक राज्य तेलंगाना की मांग को लेकर पिछले १२ दिनों से चली आ रही हड़ताल के तहत शनिवार से आन्दोलनकारियों ने ४८ घंटे का रेल रोको अन्द्न्दोलन भी शुरू कर दिया है इसी के साथ तेलंगाना के सभी दसों जिलों में पेट्रोल पम्प ,आटो रिक्शा ,बार आदि भी बंद हैं |जिसके चलते लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है|दक्षिण मध्य रेलवे ने पहले से ही तेलंगाना से गुजरने वाली गाड़ियों को स्थगित कर दिया है या फिर कुछ के मार्ग बदल दिए हैं | पता हो की पिछले छ दिनों से राज्य सड़क परिवहन निगम क़ी बसे सडकों पर नहीं चल रहीं है,वहीँ प्राइवेट बसें आन्दोलनकारियों का शिकार बनी इस लिये वे भी नहीं चल रही है |तेलंगाना के जिन जिलन से रेल पटरियां गुजर रहीं हैं उन पर शनिवार क़ी सुबह से तेलंगाना समर्थक बैठ गए है |हजारों लोग वहाँ पर बैठे हुए है |सबसे अधिक प्रभाव सिकंदराबाद,निज़ामाबाद,आदिलाबाद,करीमनगर,वारंगल खम्मम आदि स्टेशनों पर देखने को मिल रहा है |तेलंगाना समर्थकों ने रेलवे स्टेशनों ,उसके परिसरों क खेल का मैदान बना लिया है|कई जगहों पर सामूहिक खाने का भी आयोजन किया गया है |इस बीच तेलंगाना समर्थकों ने यू.पी.अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी की एक शव यात्रा निकली जो सहर के मुख्य मार्गों से होते हुए केन्द्रीय बास स्टेसन तक गया जहाँ पर उसका अंतिम संस्कार किया गया |
उधर "तेलंगाना समर्थक रेल रोकने पर इसलिए मजबूर हुए क्योंकि गत 12 दिनों से चल रही हड़ताल पर अब तक राज्य
और केंद्र सरकार ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है और तेलंगाना के साढ़े चार करोड़ लोगोंकी एक जायज़ मांग को अनदेखा करने की कोशिश की है|हालाँकि हर स्टेशन पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है लेकिन उन का काम केवलशांति बनाए रखना है और वो आंदोलनकारियों को स्टेशनों और पटरियों से हटाने की कोई करवाई नहीं कर रहे हैं.हड़ताल के आह्वान के मद्देनज़र दक्षिण मध्य रेलवे पहले ही सौ के क़रीब एक्सप्रेस ट्रेनों और 267 यात्री ट्रेनों को रद्द कर चुकी है.लम्बी दूरी की 56 ट्रेनों का रास्ता बदल दिया गया है और वो तेलंगाना के इलाक़े में आए बिना ही दूसरे मार्गों से चल रही हैं.दूसरे क्षेत्रों और राज्यों से तेलंगाना आने वाली ट्रेनों को विशाखापटनम, विजयवाड़ा, गुंटूर और कुरनूल पर ही रोका जा रहा है.हैदराबाद में लगभग तीन सौ लोकल ट्रेन सेवाओं को रद्द कर दिया गया है.

रेल पटरियों पर धरना देने वाले तेलंगाना राष्ट्र समिति के विधायक तारक रामराव ने कहा, "तेलंगाना समर्थक रेल रोकने पर इसलिएमजबूर हुए क्योंकि गत 12 दिनों से चल रही हड़ताल पर अब तक राज्य और केंद्र सरकार ने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है और तेलंगाना के साढ़े चार करोड़ लोगों की एक जायज़ मांग को अनदेखा करने की कोशिश की है."|इस बीच सिंगरेनी के खदानों में कोयले का उत्पादन बंद हो जाने से परेशान राज्य सरकार ने हड़ताल कर रहेकर्मचारियों को लुभाने की कोशिश करते हुए कहा है कि अगर खदान मज़दूर एक दिन काम करेगा तो उसे दो दिनों का वेतन दिया जाएगा.तेलंगाना के संगठनों और सिंगरेनी मजदूरों की यूनियन ने इसे सरकार की एक साज़िश बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है.|इधर रेल मार्ग बंद रहने से दूसरे राज्यों से कोयला लाने की कोशिशों में भी बाधाएं आ रही हैंऔर बिजली का उत्पादन और भी घट जाने की आशंका है.अगर

ऐसा हुआ तो बिजली की कटौती की अवधि और भी बढ़ानी पड़ेगी.फ़िलहाल बड़े नगरों में दो घंटे की, छोटे नगरों में चार घंटे की और ग्रामीण इलाक़ों में आठ घंटे की बिजली कटौती चल है.

ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि तेलंगाना के कम से कम चार मंत्री और 20 कांग्रेसी विधायकों ने तेलंगाना कीजनता के दबाव के आगे झुकते हुए जल्द ही त्याग पत्र देने का मन बना लिया है.इससे एक क़दम आगे जाते हुए एक विधायक दामोदर रेड्डी ने कहा है कि वो कांग्रेस छोड़ने औरराज्य में कांग्रेस की सरकार को गिराने के लिए भी तैयार हैं.तेलंगाना के समर्थन में पेट्रोल पंप भी बंद

सरकारी कार्यालय और शिक्षा संस्थान बंद, बिजली नहीं, बस सेवा नहीं, और अब ऑटो रिक्शा औररेलें भी नहीं, पेट्रोल पम्प बंद और अब शराब की दुकानें भी बंद.यह है तेलंगाना प्रांत की वो तस्वीर जो 11 दिन से चली आ रही अनिश्चित काल की हड़ताल से उभर कर सामने आई है.अलग राज्य के लिए दशकों से लड़ने वाले तेलंगाना क्षेत्र में खुद वहां के आम लोगों ने ही वहां के सामान्यजीवन को स्थगित करके रख दिया है क्योंकि उनके अनुसार केंद्र सरकार और कांग्रेस पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्वकी लापरवाही और खामोशी को तोड़ने का इसके सिवा अब कोई रास्ता नहीं रह गया है.जहाँ आठ लाख से भी ज्यादा सरकारी कर्मचारियों, अध्यापकों और दूसरे कामगारों की हड़ताल से आम जीवनठप हो कर रह गया है और प्रशासन बिलकुल निलंबित है.गत चार दिनों से सरकारी परिवहन निगम की दस हज़ार बसें सड़कों से गायब है वहीं आज शुकवार कोअर्धरात्रि से हैदराबाद सहित पूरे तेलंगाना क्षेत्र में पांच लाख ऑटो रिक्शा भी हड़ताल पर जा रहे हैं.शनिवार की सुबह से 48 घंटों के लिए रेल सेवाएँ भी बंद हो रही हैं. ऑटो रिक्शा ड्राईवर्स की संयुक्त संघर्षसमिति ने तेलंगाना के समर्थन में 48 घंटों के बंद का आह्वान किया है जिसको कड़ी के साथ लागू किया जाएगा.इसी तरह तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने कल सुबह से 48 घंटों के रेल रोको कार्यक्रम का आह्वान किया है औरतेलंगाना के आम लोगों से कहा है की वोह लाखों की संख्या में रेल की पटरियों पर जा बैठें और रेल न चलने दें.वैसे भी रेल प्रशासन आम लोगों से टकराने के मूड में नहीं हैं और उस ने खुद ही तेलंगाना में चलने या उस से गुज़रकर जाने वाली सारी ही एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनें रद्द करदेने करने की घोषणा की है.इससे दक्षिणी और उत्तरी भारत के बीच एक अहम रेल संपर्क टूट जाएगा क्योंकि तेलंगाना से होकर जानेवाली लंबी दूरी की कई रेलें या तो रद्द होगी हैं या फिर उनका रास्ता बदल दिया गया है.इस बीच तेलंगाना वड्डी छात्रों ने कल एक दिन पेट्रोल पम्प और शराब की दुकानों को भी बंद रखने का आह्वानकिया है. उनका कहना है कि उसका उद्देश्य इन दोनों से राज्य सरकार को होने वाली आय को नुकसान पहुंचना है.वैसे भी कार्यालय बंद रहने से और टैक्स वसूल न होने, कोयले का उत्पादन बंद हो जाने, बिजली का उत्पादन कमहो जाने और बसें न चलने और कुल मिला कर अनिश्चित काल की हड़ताल से राज्यसरकार को तीन हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.जहाँ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले ही सरकार दो घंटों से लेकर आठ घंटों तकबिजली की कटौती की घोषणा कर चुकी है.वहीं आज से किसानों को रोज़ाना मुफ्त दी जाने वाली बिजली को सात घंटों से घटा कर छह घंटे कर दिया गया है.अधिकारियों का कहना है कि जैसे जैसे बिजली का उत्पादन और घटेगा, उन्हें बिजली कटौती की अवधि घटानी पड़ेगी.वैसे बिजली विभाग के अधिकारी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं की अगर यह स्थिति कुछ और दिन चली तो पूरा राज्य ही अँधेरे में डूबने वाला है.इस के अलावा डॉक्टरों और वकीलों की हड़ताल से भी अदालतों और अस्पतालों का काम भी ठप पड़ गया है केवल आपात कालीन जैसे ही देख रहे हैं और आम रोगियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सरकार की खामोशी!तेलांगना में हड़ताल के संपूर्ण और सफल होने के बावजूद राज्य और केंद्र सरकार दोनों का व्यवहार ऐसा है जैसे सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा है.दिल्ली में कांग्रेस के दो प्रवक्ताओं रेणुका चौधरी और अभिषेक मनु सिंघवी ने तो यह कह कर तेलंगाना के लोगोंको और भी भड़का दिया है कि तेलंगाना में आम जीवन और सरकार पर हड़ताल का कोई असर नहीं पद रहा है.केंद्र सरकार की खामोशी पर आम लोगों के साथ खुद कांग्रेस के तेलंगाना नेता भी बहुत नाराज़ हैं और उन्होंने भी हड़ताल का समर्थन शुरू कर दिया है.कल रात कांग्रेस के तेलंगाना सांसदों ने मुख्य मंत्री किरण कुमार रेड्डी से भेंट की और दोनों के बीच तीखी बहस हो गई.

एक सांसद पूनम प्रभाकर ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल पर आरोप लगाया की वो केंद्र को गलत रिपोर्टें भेज रहे हैं और सोनिया गाँधी को अँधेरे में रखा जा रहा है.

इस बार मुख्यमंत्री उस सांसद पर बरस पड़े और तमाम सांसद मुख्यमंत्री के व्यवहार के खिलाफ उठ खड़े हुए.

मुख्यमंत्री ने यह कह कर सब को हैरान कर दिया कि उन्होंने अब तक इस हड़ताल के बारे में कोई रिपोर्ट केंद्र को भेजी ही नहीं.केंद्र की खुशी के लेकर तेलंगाना वादी विधायकों और दूसरे नेताओं के विरुद्ध भड़कने लगे हैं.उनका विचार यही है कि केंद्र को तेलंगाना राज्य की स्थापना पर उसी समय मजबूर किया जा सकता है जब तेलंगाना के तमाम विधायक और सांसद इस्तीफा दे दें.अब तक केवल तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 और तेलुगु देसम के चार बागी विधायकों ने ही इस्तीफा दिया है.तेलंगाना के मंत्रियों और कांग्रेस और तेलुगु देसम के सभी विधायकों पर तुरंत त्यागपत्र देने के लिए लोगों का दबाव बढ़ रहा है और वो उन्हें हमलों का निशाना बनाने लगे हैं.आज तेलंगाना के लगभग सभी जिलों में तेलुगु देसम के विधायकों पर हमले किए गए उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़े गए.इन विधायकों पर वारंगल, करीमनगर, निज़ामाबाद, आदिलाबाद, महबूबनगर और दूसरे स्थानों पर उस समय हमला किया गया जबकि वो तेलंगाना के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठने जा रहे थे.टीआरएस और दूसरे तेलंगाना समर्थकों की मांग है कि पहले यह विधायक त्यागपत्र दें और फिर आन्दोलन में शामिल हों.आज ही तेलंगाना में कांग्रेस के दो मंत्रियों डीके अरुणा और सूर्या के निवासस्थान का भी घेराव किया गया.तेलुगु देसम के तेलंगाना विधायकों ने त्यागपत्र देने के लिए 28 सितम्बर की तारीख तय की है जबकि कांग्रेस के तेलंगाना विधायकों और सांसदों ने कहा है कि वो पार्टी आला कमान को 25 सितम्बर तक समय देंगे और उसके बाद त्यागपत्र दे देंगे|

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