Sunday, October 30, 2011

तेलंगाना मुद्दे पर
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आन्ध्र के तीन कांग्रेसी विधायकों ने दिया इस्तीफा
हाथ झटक कर कार पर होंगे सवार

निज़ामाबाद |कांग्रेस पर पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के वादे से पीछे हटने का आरोप लगाते हुए जे कृष्णा राव, एस सत्यनारायण और टी राजनाथ ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. तीनों ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल होने का निर्णय लिया है.तीनों विधायकों ने अपने इस्तीफे कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष बोत्सा सत्यनारायण को भेज दिये हैं.तीनों विधायकों ने संयुक्त रूप से एक संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी नौ दिसम्बर, 2009 को किए अपने वादे से पीछे हट गई है. कांग्रेस ने पृथक तेलंगाना राज्य की प्रक्रिया शुरू करने का वादा किया था.कृष्णा राव ने कहा, "तेलंगाना के हालात से कांग्रेस और क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं की आंखें खुल जानी चाहिए. हम इसके लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं." राव ने तेलंगाना क्षेत्र के सभी मंत्रियों व विधायकों से भी आग्रह किया कि उन्हें अपने इस्तीफे दे देने चाहिए.वारंगल जिले के स्टेशन घानपुर से विधायक टी राजनाथ ने कहा, "हमने क्षेत्र की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप तेलंगाना आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए इस्तीफे दिए हैं."एस सत्यनारायण ने कहा, "हम पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए किसी भी पार्टी के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं."कृष्णा राव ने कहा, "क्षेत्र में जनता के बीच कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा है. लोगों को लगता है कि कांग्रेस ने उनके साथ धोखा किया है और 700 युवकों की आत्महत्या के लिए वह जिम्मेदार है. तेलंगाना का कोई भी कांग्रेसी नेता पार्टी का झंडा लगाकर क्षेत्र में घूमने की स्थिति में नहीं है."कृष्णा राव महबूबनगर जिले की कोल्लापुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने पृथक तेलंगाना के पक्ष में निर्णय लेने के लिए पार्टी नेताओं पर दबाव बनाने हेतु मई में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.


Friday, October 28, 2011


श्री लाल शुक्ल नहीं रहे

लखनऊ: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी के मशहूर व्यंग्यकार श्रीलाल शुक्ल का शुक्रवार को सुबह एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे।उनकी पत्नी का निधन कुछ वर्ष पहले हो चुका था।

31 दिसंबर 1925 को जन्मे शुक्ल को हाल ही में प्रख्यात कलाकार अमरकांत के साथ ग्यानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया था।

शुक्ल के निधन पर हिन्दी साहित्य में शोक की लहर दौड़ गई है। भारतीय ज्ञानपीठ,जनवादी लेखक संघ प्रगतिशील लेखक संघ समेत कई साहित्यिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल और अमरकांत को संयुक्त रूप से वर्ष 2009 के लिए 45वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया था। अस्वास्थ्य होने के कारण उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने उन्हें अस्पताल में जाकर अवार्ड प्रदान किया था।

2008 में उन्हें पदमभूषण सम्मान से नवाजा गया था। श्रीलाल शुक्ल कोराग दरबारी’, ‘मकान’, ‘सूनी घाटी का सूरज’, ‘पहला पड़ाव’, ‘अज्ञातवासतथाविश्रामपुर का संतआदि कालजयी रचनाओं केमाध्यम से साहित्य जगत में अपनी एक अलहदा एवं प्रतिष्ठित पहचान बनाई है।

संक्षिप्त जीवन परिचय

हिन्दी के प्रमुख साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल का जन्म उत्तर प्रदेश में सन् 1925 में हुआ था। उनका पहला प्रकाशित उपन्यास 'सूनी घाटी का सूरज' (1957) तथा पहला प्रकाशित व्यंग 'अंगद का पांव' (1958) है। स्वतंत्रता के बाद के भारत के ग्रामीण जीवन की मूल्यहीनता को परत दर परत उघाड़ने वाले उपन्यास 'राग दरबारी' (1968) के लिये उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके इस उपन्यास पर एक दूरदर्शन-धारावाहिक का निर्माण भी हुआ। श्री शुक्ल को भारत सरकार ने 2008 मे पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है।

उपन्यास : सूनी घाटी का सूरज · अज्ञातवास · रागदरबारी · आदमी का ज़हर · सीमाएँ टूटती हैं। कहानी संग्रह: यह घर मेरा नहीं है · सुरक्षा तथा अन्य कहानियां · इस उम्र में। व्यंग्य संग्रह: अंगद का पांव · यहां से वहां · मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनायें · उमरावनगर में कुछ दिन · कुछ जमीन पर कुछ हवा में · आओ बैठ लें कुछ देर। आलोचना: अज्ञेय: कुछ राग और कुछ रंग।


सड़क दुर्घटना में 6 लोगों की मौत

निज़ामाबाद | जिला मुख्यालय से लगभग बीस किलोमीटर दूर मोर्ताड तहसील के निकट राज्य मार्ग संख्या ६३
पर शुक्रवार की सुबह हुई एक सड़क दुर्घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों सहित 6 लोगों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई ,जबकि सात अन्य लोग घायल है जन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है | घटना स्थल से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के नादेड जिले के धरमाबाद तहसील के सारडा ,बजाज एवं लोया परिवार के लोगआदिलाबाद के मंचिरियल में अपने एक रिश्तेदार के यहाँ एक कार्यक्रम में शामिल होने टाटासुमो से जा रहे थे,
जिनके साथ निज़ामाबाद के सायं सुन्दर लोया एवम उनकी पत्नी भी थीं |घटना स्थल से मिली जानकारी के मुताबिक सुबह लगभग आठ से नौ बजे के बीच ये लोग मोर्ताड के निकट पहुंचे ही थे कि तभी विपरीत दिश से एक तेज रफ़्तार मोटर साईकिल आ रही थी,जिसे बचाने के चक्कर में सुमो ड्राइवर ने अपने वहां को किनारे करना चाहा, तभी सुमो पास के खाई में जा गिरी,जिससे ड्राइवर सहित ६ लोगों की वहीँ पर मौत हो गई |मृतकों में श्याम सुन्दर लोया (निज़ामाबाद )गोपी किसन सारडा ,ओमप्रकाश सारडा ,द्वारिका दास सारडा (एक ही परिवार के )एवं श्रीमती बजाज (सभी धरमाबाद ) तथा सुमो ड्राइवर श्रीनिवास चन्दवार शामिल हैं |घायलों में नरसिंह दास बजाज ,रामनिवास सारडा एवम श्रीमती प्रेम लता लोया शामिल हैं |

Sunday, October 23, 2011


14 नवम्बर को साकार हो सकता है पृथक राज्य तेलंगाना का सपना
प्रदीप श्रीवास्तव
निज़ामाबाद (आन्ध्र प्रदेश), एक लम्बे समय से चली रही अलग राज्य तेलंगाना की मांग आगामी चौदह नवम्बर को साकार हो सकती है |राजनितिक गलियारों से जो सुचनाये निकल कर बाहर रही हैं ,उससे तो यही संकेत मिल रहे है कि केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार अगले माह की चौदह तारीख को अलग तेलंगाना राज्य के गठन पर मुहर लगा सकती है |इस बात की पुष्टि आज निज़ामाबाद में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम प्रकाशित किये जाने की शर्त पर कहा कि "आप देखियेगा चौदह नवम्बर को कांग्रेस पृथक राज्य की घोषणा कर देगी" |जब उनसे इन पंक्तियों के लेखक ने यह पूछा कि आप यह बात किस आधार पर कह सकते हैं कि चौदह नवम्बर को ही इसकी घोषणा की जाएगी ? इस प्रश्न पर उनका कहना था कि "इस दिन का अपना महत्व है,पहली बात इस दिन हम देश के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिन को "बाल दिवस "के रूप में मानते हैं ,दूसरी बात 26 जुलाई 1963 को जब तत्कालीन प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू पोचमपाड़ में गोदावरी नदी पर बनाने वाले सबसे बड़ी "श्रीराम सागर परियोजना" की आधार शिला रखने निज़ामाबाद आये थे ,तब उनहोने शहर के खलीलवाडी मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि यदि तेलंगाना का आन्ध्र के साथ नहीं निभता है तो वह उससे जब चाहे तलाक ले सकता है | इसी बात को लेकर कांग्रेस अब तेलंगाना में अपनी खोती जनाधार को पुनः प्राप्त करना चाहती है,इसी लिए इस आन्दोलन को वह अपने पक्ष में करने के लिए इस दिन को चुन रही है |
कयोंकि हाल के बांसवाडा उपचुनाव में कांग्रेस ने अपने हालात अवलोकन कर ही लिया है |
कुलमिलाकर इतना तो कहा ही जा सकता हे कि कांग्रेस का तेलंगाना से काफी लगाव रहा है |सन 2004 के चुनाव में कांग्रेस के पुनर्वापसी तेलंगाना के शसक्त कांग्रेसी नेता डी श्रीनिवास के चलते ही हुई थी ,बाद में 2009 के चुनाव का भी श्री उन्ही को जाता है |आपातकाल के बाद श्रीमती इंदिरा गाँधी इसी तेलंगाना के मेदक जिले से ही जीत कर संसद पहुंची थी,ठीक है बाद में उनहोने यहाँ से इस्तीफा दे दिया था |सन 2004 एवम सन 2009 के चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी जी ने तेलंगाना के ही अधिकतर क्षेत्रों में चुनावी दौरा किया था |उनके बाद कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने भी तेलंगाना का कई बार दौरा किया है |इस बात से लगता है कि कांग्रेस अलग राज्य तेलंगाना का श्रेय किसी और को नहीं देना चाहती है|
हाल ही में अपनी जनचेतना यात्रा के दौरान भाजपा नेता लाल कृष्ण अडवाणी ने भी निज़ामाबाद की एक प्रेस कांफ्रेंस में भी संकेत दिया था कि सन 2012 की सुबह तेलंगाना वालों के लिए एक नई सुबह होगी |वहीँ तेलंगाना विरोधी आन्ध्र के सांसद लगड़पाटी राजगोपाल ने भी हाल ही में अपने एक बयान में कहा था कि तेलंगाना मामले का हाल निकल चुका है जो सोनिया जी के पास है ,बस समय का इंतजार कीजिये ? इन सभी बयानूं व् निष्कर्षों से इस बात के संकेत तो मिल ही रहे हैं की तेलंगाना के बारे में निर्णय इसी वर्ष के अंत तक हो जायेगा,अगर अब नही हुआ तो अगले पचास सालों में नही हो पाएगा |

Wednesday, October 19, 2011


बुधवार को आन्ध्र प्रदेश के निज़ामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए श्री लाल कृष्ण अडवाणी |

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सन २०१२ की सुबह तेलंगनावासियों

की एक नई सुबह होगी :आडवाणी
प्रदीप श्रीवास्तव

निज़ामाबाद |जनचेतना की यात्रा पर निकले भारतीय जनता पार्टी के वरिस्थ नेता एवम पूर्व प्रधान मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि "में आशा करता हूँ कि सन २०१२ की पहली जनवरी तेलंगानावासियों के लिए उनके सपने को हकीकत में बदलने वाली होगी |"इसके साथ उन्हों ने यह भी कहा कि यह तभी संभव है जब प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह एवम कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी सख्ती से निर्णय लेते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में तेलंगाना सम्बन्धी आवश्यक विधेयक पेश करे |

श्री अडवाणी कल शाम ही अपनी यात्रा के दौरान निज़ामाबाद पहुंचे थे |बुधवार की सुबह वह पत्रकारों के साथ बात करते हुए श्री अडवाणी ने यूपीए सर्कार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने वायदों से पीछे हटती जा रही है ,साथ ही क्षेत्र को समस्यों में धकेल रही है |उनका कहना था कि तेलंगाना राज्य के निर्माण के लिए राज्य विधान सभा में किसी प्रस्ताव की जरुरत नहीं है ,संसद चाहे तो शीतकालीन सत्र में ही पृथक तेलंगाना राज्य का निर्माण कर सकती है |उन्हों ने कहा कि में सुन रहा हूं कि इसके लिय पहले विधान सभा में प्रस्ताव रखने की जरुरत है ,में आप लगों के माध्यम से इस बात को साफ करना चाहता हूं भारतीय सविंधान ऐसा कोई प्रावधान नही है |श्री अडवाणी ने यह भी कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद भी गत दो सालों से इस मुद्दे पर अनिर्णय की स्थिति में है|यही कारण है की उनकी इस अनिर्णय की स्थिति से यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है |श्री अडवाणी ने यह भी कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री ने पृथक राज्य की घोषणा भी कर दी थी ,लेकिन पंद्रह दिनों के बाद ही अपने वयादिओं से पीछे भी हट गयी|यही कारण है कि आन्ध्र के इस हिस्से की स्थिति ऐसी है ,जिस तरह का गत साठ साल में देखने को नहीं मिला है| एक प्रसन के उत्तर में अडवाणी ने कहा कि कितने दुःख की बात है कि सरकार की ओर से निर्णय न लिए जाने के कारण युवक आत्म हत्या कर रहे हैं |

उनहोने आगे कहा कि झारखण्ड ,उत्तराखंड एवम छत्तीसगढ़ के गठन के समय तो दो अविभाजित राज्यों के मुख्य मंत्रियों ने सार्वजनिक स्तर उनका विरोध किया था | उनहोने आगे कहा कि तब हम ने निर्णय लिया कि केंद्र की राजग सरकार इन राज्यों का निर्माण करेगी |क्यों कि अनुछेद तीन के तहत पृथक राज्यों का निर्माण केंद्र सरकार संसद की जिम्मेदारी है | इस लिए में कहता हूं कि अलग राज्य के निर्माण के लिए विधान सभा में कोई प्रस्ताव पास करना जरुरी नहीं है | सरकार अपनी इच्छा शक्ति से संसद में मुख्य विपक्षी दलों विशेष कर भारतीय जनता पार्टी की मदद से शीतकालीन सत्र में पृथक तेलंगाना राज्य के निर्माण का विधेयक पारित करवा सकती है |

इस प्रश्न पर कि "बीजेपी गैर तेलंगाना क्षेत्रों की जनता की भावनाओं की अनदेखी क्यों कर रही है ,इस पर अडवाणी का कहना था कि वे सयुंक्त आन्ध्र प्रदेश के पक्षधर लोगों की भावनाओं का भी सम्मान करते है |लेकी भारतीय जनता पार्टी प्रशासनिक सुविधा दृष्टि से छोटे राज्यों की समर्थक है |उनहोने यह भी कहा कि जहाँ तक मेरे दल का सवाल है तो हम मानते हैं कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग उचित है |लेकिन उनहोने जोर देते हुए यह भी कहा कि दोनों क्षेत्रों के बीच बैर नहीं होना चाहिए |में गृहमंत्री था तब मुझे तीनो राज्यों के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ करनी पड़ी थी ,तब तीनो राज्यों का निर्माण बीना किसी शोर-शराबे के ही हो गया था |

श्री अडवाणी ने कल लखनऊ में अरविन्द केजरीवाल पर चप्पल फेंकने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि लोक तंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है | जब श्री अडवाणी से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछा गया तो उनहोने कहा कि यह यात्रा अडवाणी या भाजपा से जुडी नहीं है यह देश की स्थिति को लेकर है |इस लिए में कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता |