Tuesday, October 4, 2011

भारत में मात्र 1750 में

मिलेगा टैबलेट "आकाश"

नई दिल्ली। दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट कंप्यूटर बुधवार को लॉच होगा। इसे बनाने वाली कंपनी डाटाविंड ने कहा कि भारत में यह दिसंबर से बिकेगा। इसे खासतौर पर छात्रों के लिए बनाया गया है। इसलिए इसे सबसे पहले कॉलेजों को बेचा जाएगा। वैसे तो टैबलेट की लागत 3,000 रूपए है, लेकिन कॉलेजों को यह सिर्फ 1,750 रूपए (35 डॉलर) में बेचा जाएगा। वास्तविक और रियायती कीमत के बीच जो अंतर होगा, उसकी भरपाई सरकार करेगी।
दरअसल, कॉलेजों को लैपटॉप मुहैया कराना सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजना का एक हिस्सा है, जिसके तहत वह सूचना और संचार तकनीक को शिक्षा का अहम पहलू बनाना चाहती है। इस टैबलेट को आकाश नाम दिया गया है। यह गूगल के एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर काम करेगा। इसमें इंटरनेट के लिए वाईफाई कनेक्टिविटी और क्लाउड स्टोरेज भी होगा। इसमें 256 एमबी रैम, एक 2जीबी एसडी मेमोरी कार्ड, एक 32 जीबी एक्सपेंडेबल मेमोरी स्लॉट के साथ दो यूएसबी पोर्ट्स होंगे। डाटाविंड के चीफ एग्जिक्यूटिव सुनीत सिंह तुली ने इस टैबलेट की रीटेल कीमत बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने यह जरूर कहा कि इसकी कीमत दिल्ली के किसी पांच सितारा होटल में दो लोगों के वेजिटेरियन खाने पर होने वाले खर्च के बराबर होगी।
भारतीय मूल के कनाडाई तुली ब्रिटेन स्थित डाटाविंड के संस्थापक हैं। यह कंपनी पॉकेटसर्फर भी बनाती है, जो वेब सफिंग डिवाइस है। तुली ने कहा कि हम दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि जब चीन कीमतों का बंधन तो़ड सकता है तो भारत इसे और बेहतर ढंग से कर सकता है। दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट अभी एचपी का टचपैड और एमेजॉन का किंडल फायर है। टचपैड की कीमत जहां 99 डॉलर है, वहीं किंडल फायर का दाम 199 डॉलर। भारत में अभी सबसे सस्ता टैबलेट 99 डॉलर का पेपर है। यह टैबलेट देवराज समूह ने पिछले महीने लॉन्च किया था। वेस्प्रो ईपैड 7,000 रूपए में उपलब्ध है। वहीं एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले एचसीएल पैड की कीमत 10,000 रूपए है। भारती एयरटेल और रिलायंस ने भी अपने टैबलेट बाजार में उतारे हैं, जिनकी कीमत Rमश: 10,000 रूपए और 13,000 रूपए है। 35 डॉलर का टैबलेट मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल और आईआईटी राजस्थान की एक टीम की दिमाग की उपज है।
दो साल पहले 10 डॉलर के कंप्यूटर के बाद अब यह डिवाइस लॉन्च किया जा रहा है। यह स्टोरेज डिवाइस से कुछ बेहतर है। 35 डॉलर के इस डिवाइस को पहले लैपटॉप की तरह बनाया जा रहा था। हालांकि, पिछले तीन साल में इसके बनने के दौरान इसे टैबलेट में बदल दिया गया। इस टैबलेट को भारत में असेंबल किया जाएगा। सरकार इस पर कोई शुल्क नहीं लेगी, ताकि इसकी उत्पादन की लागत कम रखी जा सके। शुरूआत में 1 लाख टैबलेट का ऑर्डर दिया गया है। अगर पायलट योजना कामयाब होती है तो अगले चरण में 10 लाख टैबलेट बनाए जाएंगे।

साभार

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