Tuesday, October 11, 2011

केंद्र के गले की हड्डी बना तेलंगाना मसला
नई दिल्ली तेलंगाना के जाल में केंद्र सरकार और कांग्रेस बुरी तरह उलझ गई है। आंध्र प्रदेश में लगातार बिगड़ रहे हालात और केंद्र सरकार में लगातार तीन-चार दिनों से चल रही बैठकों के बावजूद कोई ठोस रास्ता नहीं निकल पाया है।सर्वदलीय बैठक से पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री के आवास पर हुई कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक में पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के प्रस्ताव फिर से विचार हुआ। प्रधानमंत्री को हर पहलू से अवगत कराया गया। बताते हैं कि पार्टी और सरकार इस आशंका में उलझी है कि कहीं यह विभिन्न राज्यों में बंटवारे की मांगों को तूल दे दे।संप्रग सरकार और कांग्रेस को फिलहाल तेलंगाना हर हाल में हारी हुई बाजी दिख रहा है। पृथक राज्य बन भी जाए तो राजनीतिक रूप से कांग्रेस इसका श्रेय नहीं ले सकती है। जबकि प्रशासनिक रूप से राज्य की कांग्रेस सरकार के लिए यह गले का कांटा बन गया है।तेलंगाना में हड़ताल एक महीने से ऊपर जा चुकी है। वहीं पार्टी अंदरूनी और बाहरी दबाव से जूझ रही है। पार्टी के कई सांसद इस्तीफा देने पर अड़े हैं। मंगलवार को इस पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री आवास पर कांग्रेस कोर कमेटी की बैठक हुई जिसमें उच्च नेतृत्व के सामने प्रणब मुखर्जी ने अपनी एक रिपोर्ट रखी। उस पर करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा हुई। बताते हैं कि नेता यह महसूस कर रहे हैं अब इसे रोकना मुश्किल है।उन्हें यह आशंका सता रही है से मंजूरी दी तो पृथक विदर्भ, पृथक हरित राज्य, पृथक बुंदेलखंड, पृथक पूर्वाचल के लिए मांगें तूल पकड़ लेंगी।सूत्रों का कहना है कि पैर यहीं ठिठक रहे हैं। यह भली भांति महसूस हो चुका है कि कोई कोई फैसला लेना ही पड़ेगा। बताते हैं कि अभी और एक-दो दौर की बैठकें संभव है। उसके बाद ही कोई निर्णय लेकर दूसरे दलों के साथ बातचीत की जाएगी।

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