Saturday, November 5, 2011

भूपेन हजारिका नहीं रहे

मुंबई। मशहूर गायक भूपेन हजारिका का शनिवार को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। 85 वर्षीय हजारिका कई दिनों से गंभीर बीमार थे। दादा साहब फालके पुरस्कार से सम्मानित हजारिका का इलाज 29 जून से चल रहा था और वह तभी से अस्पताल में भर्ती थे। भूपेन हज़ारिका गायक और संगीतकार होने के साथ ही एक कवि, फि़ल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे।
उन्हे दक्षिण एशिया के सबसे नामचीन सांस्कृतिक संचारकों में से एक माना जाता था। अपनी मूल भाषा आसामी के अलावा भूपेन हज़ारिका हिंदी, बंगाली समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाना गाते रहे थे। उनहोने फि़ल्म "गांधी टू हिटलर" में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन "वैश्नव जन" गाया था। भूपेन हज़ारिका को पदम् भूषण सम्मान से भी नवाज़ा जा चुका है।

संक्षिप्त जीवन परिचय

जाने माने गायक और संगीतकार भूपेन हजारिका का जन्म आठ सितंबर 1926 में भारत के पूर्वोत्तर असम राज्य के सादिया में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपना पहला गीत लिखा और उसे गाया भी, तब उनकी उम्र महज दस साल थी। असमिया फिल्मों से उनका नाता बचपन में ही जु़ड गया था। उन्होंने असमिया भाषा में निर्मित दूसरी फिल्म इंद्रमालती के लिए 1939 में काम किया। भूपेन हजारिका एक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कलाकार थे। भूपेन दा को दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम जीवित सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता था। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायकी, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया है। भूपेन ने हिन्दी सिनेमा में कई फिल्मों में गीत गाए। आज भूपेन हजारिका के गाए कई प्रसिद्ध गीत है।
दिल हूम-हूम करे..., गंगा... और बिहू के गीतों में भूपेन हजारिका ने अपनी चिरजीवी आवाज दी है। भूपेन हजारिका को सन 2001 में भारत सरकार ने कला क्षेत्र में पk भूषण से सम्मानित किया था। उन्हें 1992 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया था। इसके अलावा उन्हें "नेशनल अवॉर्ड एज द बेस्ट रीजनल फिल्म" 1975, असोम रत्न 2009 और संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड 2009 जैसे कई प्रतिष्ठि पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। भूपेन ने फिल्म "गांधी टू हिटलर" में महात्मा गांधी के प्रसिद्ध भजन "वैष्णव जन" को अपनी आवाज दी थी।
भूपेन 1942 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट किया और फिर बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने 1946 में राजनीति विज्ञान में एमए किया। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।
1993 में असोम साहित्य सभा के अध्यक्ष भी रहे। भूपेन की गायकी से जुडा एक मजेदार वाक्या है। एक बार उन्हें कॉलेज में आए नए विद्यार्थियों के लिए रखे गए स्वागत समारोह में एक भाषण पढ़ना था। भूपेन के पिता ने उन्हें वो भाषण लिख कर भी दिया था। लेकिन स्टेज पर आते ही भूपेन वह भाषण भूल गए और वहां उन्होंने एक गाना सुनाया। उपस्थित सभी लोगों को भूपेन ने अपने गाने से मंत्रमुग्ध कर दिया और इसके बाद वो अपने कॉलेज में लोकप्रिय हो गए। इसके बाद भूपेन ने संगीत से जु़डी कई पुस्तकों का अध्ययन किया। और धीरे-धीरे संगीत के क्षेत्र में खुद को स्थापित किया।
हजारिका के संगीत में लोकरंग व संस्कृति खनकती थी। उनके गीत व संगीत मानो नदी, वन, पहाडों से उपजे हो। हजारिका ने न केवल असम व बंगाल के लोक संगीत को फिल्मों में इस्तेमाल किया बल्कि राजस्थान, गुजरात, एमपी सहित कई राज्यों की लोकधुनों को भी अपनाया। हजारिका के दिल में असम के वनवासियों के लिए काम करने की सदैव उत्कट इच्छा रहती थी। भूपेन हजारिका का शनिवार को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया। 86 वर्षीय हजारिका कई दिनों से गंभीर बीमार थे। पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और निमोनिया होने के बाद 23 अक्टूबर को उनकी हालत और बिगड गई। उनकी एक मामूली सर्जनी करनी पडी जिसमें डॉक्टरों ने उनके शरीर में एक खाद्य नलिका डाली। हजारिका का 29 जून से अस्पताल में उपचार चल रहा था। पिछले कुछ दिनों से उनकी दोनों किडनी ठीक से काम नहीं कर पा रही थी। उन्होंने आठ अक्टूबर को अस्पताल के आईसीयू में ही अपना जन्मदिन मनाया था।

साभार


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