Sunday, December 4, 2011

मचारेड्डी के जंगलों में माओवादियों द्वारा लगाया गया बैनर
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फिर सक्रीय होने लगे हैं तेलंगाना में माओवादी
निज़ामाबाद |अपने शीर्ष नेता किशन जी क़ी मौत के बाद माओवादियों ने एक बार फिर तेलंगाना में सर उठाना शुरू कर दिया है |जिसका सबसे ताज़ा उदारहण है शनिवारतीन दिसंबर क़ी रात निज़ामाबाद के कमारेड्डी तहसील एवम करीमनगर जिले के सिरसिला तहसील से लगे माचारेड्डी के घने जंगलों में हुई उनकी एक बैठक | पता हो कि मचारेड्डी का यह क्षेत्र लगभग बारह से पंद्रह वर्ग किलोमीटर का घना जंगल है |जहाँ पर आज से सात-आठ साल पहले नक्सली गतिविधियाँ चलती रहती थी|रविवार को जब यह जानकारी स्थानीय पत्रकारों को मिली तो उनके एक दल ने वहाँ का दौरा किया तो देखा कि जंगलों के बीच माववादियों ने एक बैनर लगा रखा था ,जिस पर लिखा था "किशनजी क़ी हत्या फर्जी मुठभेड़ में क़ी गयी है,,जिसका बदला हम लेकर रहेंगे , ",उसके नीचे लिखा है "पीपुल्स गोरिल्ला आर्मी " | इस खबर से निज़ामाबाद क्या आन्ध्र प्रदेश पुलिस क़ी नींद उड़ गयी है | पुँलिस ने तेलंगाना के सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी सतर्कता बड़ा दी है,विशेष कर निज़ामाबाद,आदिलाबाद एवम करीमनगर जिले क़ी |अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि माववादियों का यह कदम पृथक तेलंगाना के गठन को भी लेकर हो सकता है | जिसके कारण उन्हें पुन हथियार उठने पड़ रहे हैं| यह आशंका इस बात को लेकर है कि एक माह पहले स्टेट बैंक आफ हैदराबाद क़ी कमारेड्डी शाखा में एक डकैती पड़ी थी ,जिसमे डकैतों ने केवल वहाँ के हथियार ही ले गए थे| एक भी पैसे को हाथ नहीं लगाया था |इस प्रकरण में पुलिस ने जिस व्यक्ति को गिरिफ्तर किया था ,वह पूर्व नक्सली है,जिसने कुछ समय पहले ही आत्म समर्पण किया था,जिसका नाम लिंगम है| सूत्रों के मुताबिक लिंगम ने जो जानकारी दी है उससे यही कयास लगाये जा रहे हैं कि तेलंगाना के जनप्रतिनिधियों द्वारा तेलंगाना के गठन में विफल होने के कारण अ़ब यह कमान माओवादी अपने हाथों में लेने का मन बना चुके हैं | कभी निज़ामाबाद का यह क्षेत्र माओवादियों का गढ़ हुवा करता था ,जो विगत पॉँच- सात सालों से शांत था |लेकिन पिछले कुछ समय से एक बार फिर माओवादी इस क्षेत्र में सक्रीय होने लगे हैं |जिसे देखते हुए पुलिस भी अपनी सतर्कता बड़ा रही है,यहाँ तक क़ी इधर से गुजरने वाले वाहनों क़ी सघन जाँच पड़ताल क़ी जा रही है | प्रदीप श्रीवास्तव

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