शासन के आदेशो के बावजूद बंद मिल रही ग्राम पंचायतें
बैतूल। राजमालवीया। पंचायती राज व्यवस्था में जिस तरह से नियम, कानून और सरकारी आदेशों का हनन होता हैं उससे तो लगता हैं कि शासन ऐसे आदेश ही क्यों जारी करती हैं जिसका कि वह पालन नही करवा सकती? मप्र शासन शासन द्वारा कार्यालयीन समय पर पंचायत भवन खुला रखे जाने का आदेश की जमीनी हकीकत जानने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक टाईगर्स फोर्स के प्रदेश महासचिव नामदेव उबनारे द्वारा ग्रामपंचायतों का दौरा किया गया तो दूसरी ही हकीकत सामने आ रही हैं। पंचायते बंद मिल रही हैं और जो खुली मिल रही हैं वहां सूचना का अधिकार का आवेदन नही लिया जा रहा हैं। ग्राम पंचायतो के लोक सूचना अधिकारी याने की सचिव नदारद रहते हैं। पंचायतों में आरटीआई आवेदन पत्र लेने वाला कोई सदस्य मौजूद नही होता हैं। कलेक्टर बी चन्द्रशेखर को लिखित सूचना दिए जाने के बावजूद हालात जस की तस हैं।जनपदपंचायत बैतूल के दायरे में आने वाली पंचायतों से कलेक्टर बी चंद्रशेखर कार्यालयीन समय पर पंचायत भवन खुला रखने के शासन के आदेश का पालन करवा सकने में अब तक नाकामयाब रहें है। ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों के रवैये से तो यही लगता है कि सरपंच और सचिवों ने कलेक्टर के आदेश को गंभीरता से लेने के बजायें उस आदेश की हवा निकाल कर रख दी है। ग्राम पंचायत भवन बंद रखे जा रहे है तो पंचायत सचिव फोन बंद रखकर या फिर जनपद या जिला पंचायत में शासकीय कार्य से उपस्थित होने का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से अपना पड़ला झाड़ लेते है। आरटीआई कार्यकर्ता को ग्राम पंचायत तक पहुचने के बावजूद आवेदन पत्र लेकर पावती देने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति नही मिलता है। इससे पंचायती राज व्यवस्था, आरटीआई कानून और शासन के आदेश मजाक बनकर रह जाते हैजिला मुख्यालय की नाक के नीचे जनपद पंचायत बैतूल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों की यही कहानी है। ग्राम पंचायत मलकापुर,बडोरा,भोगीतेड़ा,भरकावा
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