Saturday, December 10, 2011


शासन के आदेशो के बावजूद बंद मिल रही ग्राम पंचायतें
बैतूल राजमालवीया। पंचायती राज व्यवस्था में जिस तरह से नियम, कानून और सरकारी आदेशों का हनन होता हैं उससे तो लगता हैं कि शासन ऐसे आदेश ही क्यों जारी करती हैं जिसका कि वह पालन नही करवा सकती? मप्र शासन शासन द्वारा कार्यालयीन समय पर पंचायत भवन खुला रखे जाने का आदेश की जमीनी हकीकत जानने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक टाईगर्स फोर्स के प्रदेश महासचिव नामदेव उबनारे द्वारा ग्रामपंचायतों का दौरा किया गया तो दूसरी ही हकीकत सामने रही हैं। पंचायते बंद मिल रही हैं और जो खुली मिल रही हैं वहां सूचना का अधिकार का आवेदन नही लिया जा रहा हैं। ग्राम पंचायतो के लोक सूचना अधिकारी याने की सचिव नदारद रहते हैं। पंचायतों में आरटीआई आवेदन पत्र लेने वाला कोई सदस्य मौजूद नही होता हैं। कलेक्टर बी चन्द्रशेखर को लिखित सूचना दिए जाने के बावजूद हालात जस की तस हैं।जनपदपंचायत बैतूल के दायरे में आने वाली पंचायतों से कलेक्टर बी चंद्रशेखर कार्यालयीन समय पर पंचायत भवन खुला रखने के शासन के आदेश का पालन करवा सकने में अब तक नाकामयाब रहें है। ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों के रवैये से तो यही लगता है कि सरपंच और सचिवों ने कलेक्टर के आदेश को गंभीरता से लेने के बजायें उस आदेश की हवा निकाल कर रख दी है। ग्राम पंचायत भवन बंद रखे जा रहे है तो पंचायत सचिव फोन बंद रखकर या फिर जनपद या जिला पंचायत में शासकीय कार्य से उपस्थित होने का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से अपना पड़ला झाड़ लेते है। आरटीआई कार्यकर्ता को ग्राम पंचायत तक पहुचने के बावजूद आवेदन पत्र लेकर पावती देने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति नही मिलता है। इससे पंचायती राज व्यवस्था, आरटीआई कानून और शासन के आदेश मजाक बनकर रह जाते है
जिला मुख्यालय की नाक के नीचे जनपद पंचायत बैतूल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों की यही कहानी है। ग्राम पंचायत मलकापुर,बडोरा,भोगीतेड़ा,भरकावाड़ी कार्यालयीन समय पर बंद पाई जाती है तो वही सूरगंाव, जैतापुर पंचायत समयानुसार ख्ुाली पाई जाती है। ग्राम पंचायत बडोरा की आदिवासी महिला सरपंच आरटीआई का आवेदन पत्र सचिव की गैरहाजिरी में लेने से ही इंकार कर देती है तो वही पर ग्राम पंचायत जैतापुर का आदिवासी सरपंच आरटीआई आवेदन पत्र सचिव की गैरमौजूदगी में स्वीकार नियमनुसार पावती प्रदान करता है। ग्राम स्वच्छता अभियान में सभी ग्राम पंचायतें पिछड़ी हुई है तो वही पर जमीनी हकीकत यह है कि शासन द्वारा निर्धारित माप दंडो पर गांव में शौचालय नही बनायें जा सकते है। इसका परिणाम यह है कि गंाव की मुख्य सड़को के दोनेा ओर एवं पंचायत भवन के आस-पास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ग्राम पंचायत भरकावाड़ी में ग्रामीण पानी और सड़क की समस्या से जूझ रहें है तो वही पर कपिलधारा योजना में बने कूप से मलबा निकालने का काम पूरा नही किया जा सका है और अभी हाल में ही बना सीसी रोड सड़क से लुप्त हो चुका है जो मनरेगा के भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है। भ्रष्टाचार निरोधक टाईगर्स फोर्स के प्रदेश महासचिव नामदेव उबनारे द्वारा ग्राम पंचायत भरकावाड़ी का पंचायत भवन कार्यालयीन समय पर बंद मिला। सरपंच पति को जानकारी देने के बावजूद आदटीआई आवेदन लेने के लिए सचिव और सरपंच दोनो ही कार्यालय पर उपस्थित नही हुये। सच तो यही है कि भ्रष्टाचार में डूबी ग्राम पंचायतें आरटीआई आवेदन का नाम सुनकर बंद रहने में ही अपना भलाई समझ रही है। इन मामले में कलेक्टर बी चंद्रशेखर अखबारों को सिर्फ वर्सन देते है किंतू इन भ्रष्ट पंचायतो के सरपंच सचिवों के सबक सिखा पाने में नाकाम साबित हो रहें है। इससे आरटीआई कार्यकर्ताओं को कोई उचित उपचार अब तक नही मिल सका है। जिला प्रशासन का संदेश साफ है भ्रष्टाचार के विरूध्द लड़ाई का उसका अपना कोई इरादा नही है। जिला सीधी से भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा में आये कलेक्टर बी चंद्रशेखर का तो बिलकुल भी नही है।

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