Wednesday, April 11, 2012


इंडोनेशिया में भूकंप,
भारत में सुनामी की चेतावनी

सुमात्रा/बेंगलूरु। इंडोनेशिया में 8.7 तीव्रता का भूकंप आने के बाद सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया है। इंडोनेशिया के साथ ही साथ भारत के कई हिस्सों में भी भूकंप के झटकों को महसूस किये गये। भारत में तमिलनाडु, बैंगलोर, असम, कोलकाता और मुंबई में भी झटकों को महसूस किया है।

प्राप् जानकारी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 8.7 रेक्टर स्केल थी और इसका केंद्र सुमात्रा बताया जा रहा है। फिलहाल किसी भी हानि की सूचना अभी तक नहीं मिली है। बात अगर भारत की करें तो जिन राज्यों में भूकंप के झटके महसूस किये गये है वहां भी किसी प्रकार के नुकसान होने की सूचना नहीं है। जानकारी के अनुसार भूकंप के बाद इंडोनेशिया में सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई है।
जानकारी की मानें तो भारत में सबसे ज्यादा झटका कोलकाता में महसूस किया गया है। इस कंपन के बाद दीवारों में दरार गये हैं। लोग अपने घरो से बाहर निकलकर खुले आसमान के नीचे गये। इस भूकंप के झटके भुवनेश्वर-कटक में भी महसूस किये गये। भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया और म्यांमार सहित 28 देशों में सुनामी की चेतावनी दे दी गई है। सीधे शब्दों में कहें तो इस झटके से पूरी दुनिया हिल गई है।
33 किलोमीटर नीचे भूकंप का केंद्र
इस भूकंप का केंद्र सुमात्रा में जमीन के अंदर 33 किलोमीटर नीचे है। एशिया पैसिफिक के भूगर्भ केंद्र ने भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों में सुनामी आने की आशंका व्यक् की है। इसमें भारत का अंडमान निकोबार द्वीप समूह संवेदनशील माना जा रहा है। चेतावनी के बाद भारत सरकार ने एक चेतावनी जारी करते तटों को खाली कराने के आदेश दे दिये हैं। साथ ही मछुआरों से अपील की है कि समुद्र के बीच नहीं जायें।

थाईलैंड में एयरपोर्ट खाली करा लिया गया है। यहां पर समुद्र से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित एयरपोर्ट से लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की जा रही है। यहां का ट्रैफिक रोक दिया गया है। सुनामी की चेतावनी के बाद तटों को खाली कराया जा रहा है।
सुनामी सेंटर के मुताबिक भारतीय महासागर में इस भूकंप के कारण भी सुनामी उत्पन् होने का खतरा बढ़ गया है। लिहाजा एशिया केंद्र ने फिर से सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है। भारतीय प्रशासन लगातार नजरें बनाये हुए है, क्योंकि माना जा रहा है कि अगर सुनामी आयी तो तमिलनाडु के पूर्वी तट पर भारी क्षति पहुंचा सकता है। अनुमान है कि यदि सुनामी आया तो ऊंची लहरें भी उठ सकती हैं।
उधर केंद्र सरकार पोर्ट ब्लेयर से भी पल-पल की जानकारियां ले रही है। केंद्रीय आपदा प्रबंधन विभाग ने ऐतयात के तौर पर पोर्ट ब्लेयर और चेन्नई के लिए दो अलग-अलग टीमें रवाना कर दी हैं।
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Saturday, March 17, 2012


बैतूलवी पत्रकारिता के सूरज
का आकाश गंगा में विलय
बैतूल जिले के सबसे पहले दर्जे के वरिष्ठ पत्रकार एवं जिला कांग्रेस कमेटी बैतूल के महामंत्री पंडित सुरेश बाजपेयी का दुखद निधन हो गया। बाजपेयी जी ने दैनिक नवभारत से 1948 के दौर में पत्रकारिता से जुडे थे। बैतूल जिले के पहले पत्रकार थे जिन्होने नवभारत के लिए पत्रकारिता की शुरूआत एक पोस्टकार्ड से शुरू की थी। उनके अनुसार पोस्टकार्ड पर भेजी गई खबर पूरे एक सप्ताह में छपती थी लेकिन उस दौर में बैतूल की एक भी खबर पूरे समाचार पत्र से पूरे महिने और साल लोगो को जोड कर रख्ती थी। कांग्रेस विचार धारा से जुडे स्वतंत्र भारत में सच की लडाई लडने वाले सुरेश बाजपेयी को हाल ही में ब्राहमण समाज के सम्मेलन में सम्मानित किया गया। कुछ दिन पहले उनका एक्सीडेंट भी हुआ था जिसके चलते उन्हे ममता श्रीवास्तव के हास्पीटल मे भर्ती करवाया गया। अपनी लम्बे कद और सफेद पैजामा - कुर्ते के चलते बाजपेयी चाचा दूर से ही पहचाने जाते थे। अपनी पैदल चाल एवं बेबाक लेखनी के लिए वे अकसर जाने - जाते थे। कांग्रेस के जिला महामंत्री वे उस दौर वे रहे जब कांग्रेस संगठन को बडे - बडे नेताओं का आर्शिवाद प्राप्त था। वे एक सफल नीडर एवं निर्भिक पत्रकार रहे। उनकी पत्रकारिता की लोग आज भले ही मिसाल बन पाए लेकिन वे स्वंय आज की भावी पीढी मंे स्वंय को देखते थे। पंडित द्धारका पस्राद मिश्रा के खास समर्थक रहे पंडित बाजपेयी को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल के दोनो बेटे विद्याचरण शुक्ल एवं श्यामाचरण शुक्ल काफी मान सम्मान देते थे। उन्होने इन सभी कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ काम किया था। अपने जीवन के 84 बसंत में प्रवेश कर चुके पंडित सुरेश बाजपेयी अपने पीछे एक पुत्र एवं एक पुत्री को छोड कर चले गए। कोठी बाजार स्थित मोक्षधाम पर उनके पुत्र पप्पु बाजपेयी ने उन्हे मुखाग्नि दी। श्री बाजपेयी के दुखद निधन से पत्रकारिता जगत का एक सूरज आकाश गंगा में विलुप्त हो गया।

Thursday, March 8, 2012

आन्ध्र प्रदेश
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कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है
सोलह विधायको क़ी बर्खास्तगी

साल २०१२,मार्च माह क़ी दो तारीख ,दिन शुक्रवार,समय शाम का ,आंध्र प्रदेश क़ी राजनीति में अचानक भूचाल |एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना क्रम में आंध्र प्रदेश विधान सभा स्पीकर नंदेंडला मनोहर ने उन 16 बागी कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है जो वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष वाईएस जगन्मोहन रेड्डी का समर्थन कर रहे थे.साथ ही उन्होंने प्रजा राज्यम पार्टी की एक विधायिका शोभा नागी रेड्डी का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया , क्यों कि वह जगन्मोहन रेड्डी की पार्टी में शामिल हो गई थीं| आंध्र प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि इतने सारे विधायकों को एक साथ अयोग्य घोषित कर दिया गया | वैसे तो इन विधायकों के विरुद्ध कारवाई पिछले तीन महीनों से चल रही थी लकिन उनको अयोग्य घोषित करने की घोषणा शुक्रवार देर रात की गई.पिछले पांच दिसंबर को इन बागी कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए अपनी सरकार के खिलाफ तेलुगु देसम पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया था.उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने स्पीकर से अनुरोध किया था कि वो इन विधायकों की सदस्यता को बर्खास्त कर दें| इस पर स्पीकर ने उन विधायकों को कई बार नोटिस जारी किया और उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा था |लेकिन सभी विधायकों ने अलग अलग आकर कोई स्पष्टिकरण देने से इनकार कर दिया और कहा कि स्पीकर को सब कुछ मालूम है और वो जो चाहे करवाई कर सकते हैं| जिन विधायकों को अयोग्य घोषित किय गया है उनमें दो पूर्व मंत्री पिल्ली सुभाष चन्द्र बोसे, बी श्रीनिवास रेड्डी के साथ अमरनाथ रेड्डी, श्रीकांत रेड्डी, धर्मना कृष्ण दास, जी बाबु राव, बी गुरुनाथ रेड्डी, चेन्ना केशव रेड्डी, एम प्रसाद बाबु, एम सुनीता, के श्रीनिवासुलु, पी रामकृष्ण रेड्डी, टी बलारजू, के रामचंद्र रेड्डी और कोंडा सुरेख शामिल हैं. कोंडा सुरेखा को छोड़ कर सब का संबंध आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र से है| जबकि कोंडा सुरेखा तेलंगाना क्षेत्र से आती हैं |वे वारंगल क़ी रहने वाली हैं | स्पीकर क़ी घोषणा से अ़ब अब राज्य में एक साथ 17 विधान सभा सीटों और एक लोक सभा सीट के लिए उप चुनाव का रास्ता साफ़ हो गया है| पता हो कि इससे पहले लोक सभा स्पीकर ने जगन्मोहन रेड्डी का समर्थन करने वाले कूर्नूल के सांसद राजमोहन रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था.
उल्लेखनीय है कि इसी माह क़ी 18 तारीख को आंध्र प्रदेश में सात विधान सभा सीटों के लिए उप-चुनाव रहे है और इनमें से अधिकतर सीटें तेलंगाना प्रान्त में हैं, जिसे प्रथक राज्य तेलंगाना के विषय परलड़ा जा रहा हैं | स्पीकर कांग्रेस चाहती तो इन विधायकों कि बर्खास्तगी क़ी घोषणा पहले ही कर सकती थी ,जिससे सभी 24 सीटों पर एक साथ उपचुनाव कराये जा सकते थे | लेकिन अपनी एक रणनीति के तहत कांग्रेस ऐसा नहीं करना चाहती थी| इसी लिये उसने बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कराने में देरी क़ी |
पता हो की जिन सोलह विधायकों को बर्खास्त किया गया है उनमे से तेरह को सविंधान के अनुछेद 10 क़ी धारा -() के तहत अयोग्य करार दिया गया है | जबकि तीन विधायकों श्रीमती कोंडा सुरेखा,श्रीकांत रेड्डी एवम अमरनाथ रेड्डी को - (बी) के तहत अयोग्य घोषित किया गया है| यहाँ यह बताना समायोचित होगा कि इन तीनो विधायकों का अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में वोट देने से पहले ही अयोग्य करार देने का आग्रह करते हुए कांग्रेस विधायक दल ने स्पीकर के समक्ष याचिका दायर क़ी थी | स्पीकर ने इस पर संज्ञान लेते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि "राजनितिक नेताओं को नैतिक मूल्यों की आवश्यकता है, लेकिन यहाँ नैतिक मूल्यों का उल्लंघन किये जाने से यह निर्णय लिया गया है | इस बिच अयोग्य घोषित किये गए जगन समर्थक विधायक मेकपाटी चन्द्र शेखर रेड्डी का कहना था कि "हम लोग स्पीकर के निर्णय का स्वागत करते हैं, अगर यही निर्णय वे पहले दे देते तो आज सात विधान सभा के लिए हो रहे उपचुनाव के साथ ही सभी 23 विधान सभा सीटों पर एक साथ चुनाव हो जाते |ऐसा करना कांग्रेस की दीन_हीन स्थित का पता चलता है |" जबकि श्रीमती शोभा नागी रेड्डी का कहना था कि "में ने अपनी याचिका में मैं ने जिन अंशों का उल्लेख किया था ,स्पीकर ने उन्हें मन लिया है |" उनहोने आगे कहा कि "अपना अस्तित्व खो चुकी प्रजा राज्यम पार्टी (संस्थापक टालीवुड अभिनेता चिरंजीवी)को मेरे खिलाफ करवाई करने का कोई अधिकार ही नहीं है | मेरे इस बात को स्पीकर ने भी मान लिया है |
इस बीच इस बात के भी कयास लगाये जा रहे हैं कि कांग्रेस चाहती है कि इन सभी सोलह विधान सभा एवम एक लोकसभा क्षेत्र के लिए मई या जून मैं उप चुनाव कराएँ जाये , इस तरह के संकेत चुनाव आयोग ने भी दे दिए हैं | उधर राज्यों मैं हुए चुनाव मैं अपनी करारी शिकस्त को देखते हुए कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम उठाना चाह रही है | क्यों कि आन्ध्र प्रदेश के जिन सात सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं उनमे से विधान सभा तो तेलंगाना के हैं जबकि एक विधान सभा क्षेत्र आंध्र क्षेत्र का है | तेलंगाना क्षेत्र में सभी विधान सभा क्षेत्रों मैं तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रत्याशियों के जितने की उम्मीद लगी जा रही है,कयोंकि इनके साथ तेलंगाना सेंटीमेंट जुड़ा हुआ है | मजे की बात यह है कि हर से बचने के लिए इन सभी सीटों पर कांग्रेस एवम तेलगू देशम पार्टी ने ऐसे उम्मीदवारों को मैदान मैं उतरा है जिनको लोग जानते तक नहीं हैं उधर अगले उप-चुनाव जब भी होंगे ऐसा माना जा रहा है कि उसमें असल मुकाबला कांग्रेस पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बीच होगा और इसके परिणाम यह साबित कर देंगे कि जगन्मोहन रेड्डी की शक्ति कितनी है और वो कांग्रेस को कहां तक नुकसान पहुंचा सकते हैं.
प्रदीप श्रीवास्तव